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                <title>arises - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई :  सियासत में फिर उठी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विलय की चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के ऐतिहासिक विभाजन के बाद अब एक बार फिर दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इस सवाल का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है कि क्या शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले दोनों धड़े दोबारा एक मंच पर आ पाएंगे या नहीं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेताओं और विश्लेषकों का मानना है कि सुलह का एक बड़ा मौका पहले ही निकल चुका है, जबकि कुछ लोग अब भी मानते हैं कि पवार परिवार की राजनीतिक विरासत दोनों गुटों को फिर से करीब ला सकती है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51086/discussion-of-merger-of-nationalist-congress-party-arises-again-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/deccanherald_2026-05-20_2al4uy99_collage-14-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के ऐतिहासिक विभाजन के बाद अब एक बार फिर दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इस सवाल का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है कि क्या शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले दोनों धड़े दोबारा एक मंच पर आ पाएंगे या नहीं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेताओं और विश्लेषकों का मानना है कि सुलह का एक बड़ा मौका पहले ही निकल चुका है, जबकि कुछ लोग अब भी मानते हैं कि पवार परिवार की राजनीतिक विरासत दोनों गुटों को फिर से करीब ला सकती है।</p>
<p> </p>
<p>महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी का विभाजन सबसे बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों में से एक रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार से अलग होकर उनके भतीजे अजित पवार ने अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग रास्ता अपनाया था। इसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और एनसीपी दो हिस्सों में बंट गई। दोनों गुटों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा किया, जिसके बाद राजनीतिक संघर्ष और तेज हो गया। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों ने दोनों गुटों के बीच संभावित समझौते या पुनर्गठन की चर्चाओं को हवा दी है। राजनीतिक पर्यवेक्षक अब एनसीपी और एनसीपी (एसपी) से जुड़े हर छोटे-बड़े कदम को भविष्य की संभावित रणनीति के रूप में देख रहे हैं। नेताओं के बयान, मुलाकातें और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।<br />इस पूरे घटनाक्रम में अजित पवार की असामयिक मौत का भी बड़ा प्रभाव माना जा रहा है। पुणे जिले के बारामती में हुए विमान हादसे में अजित पवार की मौत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा शून्य पैदा हुआ। अजित पवार लंबे समय तक राज्य की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे थे और एनसीपी के संगठनात्मक ढांचे में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजित पवार के निधन के बाद दोनों गुटों के बीच समीकरण बदल गए हैं। उनका तर्क है कि अजित पवार ही दोनों धड़ों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी थे और उनके नहीं रहने से किसी भी संभावित समझौते की राह और कठिन हो सकती है। वहीं, कुछ अन्य लोगों का मानना है कि पवार परिवार की राजनीतिक विरासत और वर्षों पुराना संगठनात्मक संबंध अभी भी दोनों पक्षों को करीब ला सकता है।</p>
<p>बारामती की राजनीति भी इस पूरे मामले में बेहद अहम मानी जा रही है। बारामती पवार परिवार का पारंपरिक राजनीतिक गढ़ रहा है और यहां होने वाली गतिविधियों पर पूरे महाराष्ट्र की नजर रहती है। इसलिए इस क्षेत्र से जुड़े किसी भी राजनीतिक संकेत को राज्य की व्यापक राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में महाराष्ट्र की राजनीति मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों में बंटी हुई है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन सत्ता में है, जबकि दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला आई.एन.डी.आई.ए. गठबंधन विपक्ष में है। ऐसे में एनसीपी के दोनों गुटों के बीच किसी भी तरह का राजनीतिक पुनर्गठन राज्य की सत्ता के समीकरणों पर असर डाल सकता है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी विलय या समझौते के लिए केवल भावनात्मक जुड़ाव काफी नहीं होगा, बल्कि सीटों का बंटवारा, नेतृत्व की भूमिका, संगठन पर नियंत्रण और भविष्य की चुनावी रणनीति जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे। दोनों गुटों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाना भी एक बड़ी चुनौती होगी। शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। दशकों के राजनीतिक अनुभव और मजबूत संगठनात्मक पकड़ के कारण उनकी भूमिका अब भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 13:06:21 +0530</pubDate>
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                <title>महाराष्ट्र  का नया डीजीपी कौन होगा? एक बार फिर से महाराष्ट्र की ब्यूरोक्रेसी में सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुंबई:</strong> महाराष्ट्र में जैसे-जैसे 31 दिसंबर की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राज्य के नए डीजीपी को लेकर दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। इसकी कारण है महाराष्ट्र कैडर की आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला की डीजीपी पद पर नियुक्ति रुकी पड़ी हुई है। महाराष्ट्र की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा है कि 31 दिसंबर तक शुक्ला की नियुक्ति डीजीपी के पद नहीं होती है तो उनके डीजीपी बनने की राह मुश्किल हो सकती है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/26975/who-will-be-the-new-dgp-of-maharashtra--once-again-this-question-arises-in-the-bureaucracy-of-maharashtra"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-12/images-(90).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:</strong> महाराष्ट्र में जैसे-जैसे 31 दिसंबर की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राज्य के नए डीजीपी को लेकर दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। इसकी कारण है महाराष्ट्र कैडर की आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला की डीजीपी पद पर नियुक्ति रुकी पड़ी हुई है। महाराष्ट्र की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा है कि 31 दिसंबर तक शुक्ला की नियुक्ति डीजीपी के पद नहीं होती है तो उनके डीजीपी बनने की राह मुश्किल हो सकती है। महाराष्ट्र सरकार ने डीजीपी रजनीश सेठ को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है, ढाई महीने बाद भी यह पद खाली है क्योंकि राज्य सरकार ने उन्हें पदमुक्त नहीं किया है। सेठ निर्धारित आयु सीमा के अनुसार 31 दिसंबर को महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। तो वहीं रश्मि शुक्ला केंद्र की प्रतिनियुक्ति पर हैं। उनकी वर्तमान रैंक डीजी की है।</p>
<p><br />अक्टूबर में 1988 बैच की आईपीएस अधिकारी रश्मी शुक्ला का नाम महाराष्‍ट्र की नई डीजीपी के तौर सामने आया था। इसके लिए सरकार ने सितंबर में ही रश्मि शुक्ला का नाम केंद्रीय लोक सेवा आयोग भेज दिया था। गृह विभाग की ओर से 30 साल की सेवा पूरी कर चुके पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के अधिकारियों की सूची और प्रत्येक की सेवा अवधि का पूरा विवरण आयोग को भेजा गया था। वरिष्ठता क्रम में शुक्ला पहले स्थान पर हैं और 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं के टेलीफोन टैप करने के आरोप में उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए थे। माना जा रहा था कि 12 सितंबर 23 को बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा आरोपों को खारिज करने के बाद शुक्ला की नियुक्ति को मंजूरी मिल गई थी। इस बीच, रजनीश सेठ ने गृह विभाग को पत्र भेजकर उन्हें पद से मुक्त करने का अनुरोध किया है, लेकिन राज्य सरकार ने महानिदेशक पद का प्रभार किसी अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंपने का आदेश जारी नहीं किया है।</p>
<p><br />मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है कि आयोग ने रश्मि शुक्ला से जुड़े मामलों और अदालती आदेशों की जानकारी मांगी थी। राज्य सरकार आयोग से नामों की अनुशंसा प्राप्त करने के बाद महानिदेशक की नियुक्ति करती है। शुक्ला 30 जून, 2024 को सेवानिवृत्त होंगी। ऐसे में अगर उनकी नियुक्ति और टलती है तो महानिदेशक पद के लिए चयन नियमों के अनुसार केवल उन्हीं अधिकारियों पर विचार किया जा सकता है जिनका कार्यकाल कम से कम छह महीने का हो। इसलिए 31 दिसंबर 2023 तक महानिदेशक पद के संबंध में निर्णय होने पर ही शुक्ला के नाम पर विचार किया जा सकता है। अगर उनकी नियुक्ति और लंबी खिंचती है तो कानूनी बाधा आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Dec 2023 10:46:20 +0530</pubDate>
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