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                <title>and - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>and RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पुणे: खाद्य सुरक्षा उल्लंघन पर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन सख्त, लाइसेंस निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और खराब साफ-सफाई व्यवस्था के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए की पुणे डिवीजन टीम ने पुणे, सतारा और कोल्हापुर जिलों में जांच अभियान चलाकर 21 फूड एस्टेब्लिशमेंट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई 'सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि 23 जुलाई से 28 जुलाई के बीच चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान में कई खाने-पीने की जगहों पर खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51066/pune-food-and-drug-administration-suspends-strict-license-over-food"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/lc2rle3s_fda_625x300_24_july_26.webp" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे: </strong>महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और खराब साफ-सफाई व्यवस्था के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए की पुणे डिवीजन टीम ने पुणे, सतारा और कोल्हापुर जिलों में जांच अभियान चलाकर 21 फूड एस्टेब्लिशमेंट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई 'सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि 23 जुलाई से 28 जुलाई के बीच चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान में कई खाने-पीने की जगहों पर खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। </p>
<p> </p>
<p>एफडीए अधिकारियों के अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना था। इसके लिए होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी, फूड डिलीवरी और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई। जांच के दौरान साफ-सफाई की स्थिति, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्टोरेज व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन की जांच की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों में गंभीर कमियां पाई गईं, उनके लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित प्रतिष्ठान निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते, तब तक उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।</p>
<p>पुणे शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई प्रमुख खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। इनमें विमान नगर स्थित ब्लिंकइट कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड, प्रभात रोड स्थित होटल लक्ष्मण, मुंधवा स्थित पंजाबी शेफ, भवानी पेठ स्थित मदीना फैमिली रेस्टोरेंट, सिंहगढ़ रोड स्थित हिना बेकरी, मुंधवा स्थित माधव बिरयानी और नर्हे स्थित इंडियन बेकरी शामिल हैं। एफडीए की टीम ने इन प्रतिष्ठानों में निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के आधार पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की। अधिकारियों ने कहा कि खाद्य कारोबारियों को नियमों का पालन करना अनिवार्य है और किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शहरों में बाहर खाना खाने और ऑनलाइन फूड डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। थोड़ी सी लापरवाही भी लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। एफडीए ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे खाने-पीने की जगहों पर साफ-सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान दें। यदि किसी प्रतिष्ठान में खराब भोजन, गंदगी या खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या नजर आती है तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग से करें। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस तरह के निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे। केवल लाइसेंस निलंबन तक सीमित रहने के बजाय नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। एफडीए की यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य किसी व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन मिले। फिलहाल 21 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और संबंधित संचालकों को खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। एफडीए की जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:42:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 7 साल तक टीबी और अस्थमा का इलाज करते रहे मुंबई के डॉक्टर, 10 वर्षीय बच्ची के फेफड़े में फंसा मिला पेन का ढक्कन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक 10 साल की बच्ची के फेफड़े का कुछ हिस्सा निकालना पड़ा क्योंकि सात साल से ज्यादा समय तक उसके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की नली (ब्रोंकस) के पास पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। कई डॉक्टरों ने उसके असामान्य एक्स-रे को टीबी या अस्थमा समझकर गलत इलाज किया था।  बच्ची की मां और धारावी की रहने वाली मैमुना शेख ने बताया कि जब लगातार खांसी और अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखे, तो कई डॉक्टरों ने संक्रामक बीमारी का शक होने पर उसका इलाज किया और एंटीबायोटिक्स दीं। इसके बाद उसे बीएमसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने टीबी का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसका बलगम का सैंपल नेगेटिव आया था। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50971/mumbai-doctors-kept-treating-tb-and-asthma-for-7-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-27t122456.725.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>एक 10 साल की बच्ची के फेफड़े का कुछ हिस्सा निकालना पड़ा क्योंकि सात साल से ज्यादा समय तक उसके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की नली (ब्रोंकस) के पास पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। कई डॉक्टरों ने उसके असामान्य एक्स-रे को टीबी या अस्थमा समझकर गलत इलाज किया था।  बच्ची की मां और धारावी की रहने वाली मैमुना शेख ने बताया कि जब लगातार खांसी और अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखे, तो कई डॉक्टरों ने संक्रामक बीमारी का शक होने पर उसका इलाज किया और एंटीबायोटिक्स दीं। इसके बाद उसे बीएमसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने टीबी का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसका बलगम का सैंपल नेगेटिव आया था। </p>
<p> </p>
<p>उस समय अस्पताल में मौजूद और मायशा के केस में शामिल एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा कि यह शायद उन दुर्लभ मामलों में से एक था जहां चीज की जगह की वजह से सही बीमारी का पता लगाना बहुत मुश्किल था, और इलाज लक्षणों के आधार पर किया गया। डॉक्टर ने कहा कि हम तब तक एंटी-कोच थेरेपी का कोर्स शुरू नहीं कर सकते जब तक कि कोई पक्का संकेत न मिले। नेगेटिव रिज़ल्ट के बावजूद इलाज भविष्य के डॉक्टरों के लिए टीबी की संभावना को खत्म करने में मददगार होता है।</p>
<p><strong>टीबी का इलाज होने के बाद भी हालत नहीं हुई ठीक</strong><br />टीबी का इलाज होने के बाद भी जब मैमुना ने देखा कि उसकी बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है, तो वह उसे दूसरे प्राइवेट अस्पताल ले गईं। वहाँ डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि मायशा को अस्थमा है और राहत के लिए इनहेलर दिया। एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (नारायण हेल्थ) की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. इंदु खोसला, जो इस केस में शामिल थीं, ने कहा कि ज़्यादातर डॉक्टरों को निमोनिया दिखा जो ठीक नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने एंटी-टीबी दवाएं लिख दीं। उन्होंने कहा कि फेफड़े के अंदर किसी बाहरी चीज के होने का शक किया जाना चाहिए था, लेकिन यह राय का फर्क है और इसके लिए डॉक्टरों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p><strong>ब्रोंकोस्कोपी में दिखा पेन का ढक्कन</strong><br />डॉ. इंदु ने बताया कि सीटी स्कैन में फेफड़ा सिकुड़ा हुआ (कोलेप्स) दिखा, और क्योंकि बाकी अंग सामान्य लग रहे थे, इसलिए उन्हें बाहरी चीज के होने का शक हुआ। डॉ. खोसला ने कहा, ब्रोंकोस्कोपी के दौरान हमने देखा कि पेन का ढक्कन गहराई में फंसा हुआ था। उसे बाहर निकालने के लिए हमें अपनी ईएनटी टीम की मदद लेनी पड़ी और ज्यादा एनेस्थीसिया देना पड़ा। </p>
<p><strong>प्रोसीजर के बाद ठीक हुआ निमोनिया, पर...</strong><br />इसे निकालते ही मायशा को काफी बेहतर महसूस हुआ। डॉ. खोसला ने कहा कि प्रोसीजर के लगभग दो से तीन हफ्ते बाद, उसका निमोनिया- जो फेफड़े के निचले बाएं हिस्से और बीच वाले हिस्से में फैला था- कम हो गया और सिर्फ निचले हिस्से तक ही सीमित रह गया। फेफड़े का जो हिस्सा खराब नहीं हुआ था, वह खुल गया। </p>
<p>डॉक्टरों ने एक महीने तक इंतजार किया कि क्या फेफड़े का बाकी प्रभावित हिस्सा फिर से फैल पाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गंभीर इन्फेक्शन और टिश्यू को हुए ऐसे नुकसान की वजह से जिसे ठीक नहीं किया जा सकता था, उन्हें आख़िरकार उसके फेफड़े का लगभग एक-तिहाई हिस्सा निकालना पड़ा। उम्मीद है कि मायशा सामान्य जिंदगी जी पाएगी, लेकिन मैमूना ने कहा कि एक मेडिकल चूक की वजह से वह लगभग अपनी बेटी को खो ही बैठी थीं। उन्होंने कहा कि अब तक हुए खर्च का तो हमें हिसाब ही नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50971/mumbai-doctors-kept-treating-tb-and-asthma-for-7-years</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: ओला-उबर जैसे एग्रीगेटर ड्राइवरों के लिए 5 दिन की ट्रेनिंग अनिवार्य, सरकार ने तय किए नए नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य सरकार ने कैब एग्रीगेटर (जैसे ओला, उबर आदि) से जुड़े ड्राइवरों के लिए पांच दिन (30 घंटे) का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया है। यह ट्रेनिंग ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से करनी होगी। एग्रीगेटर को इस ट्रेनिंग का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा और उसकी जानकारी तय पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50965/mumbai-5-days-training-mandatory-for-aggregator-drivers-like-ola-uber"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/uber-ola-rapida-rides-cost-2x-during-peak-hours-with-new-govt-guidelines.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>राज्य सरकार ने कैब एग्रीगेटर (जैसे ओला, उबर आदि) से जुड़े ड्राइवरों के लिए पांच दिन (30 घंटे) का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया है। यह ट्रेनिंग ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से करनी होगी। एग्रीगेटर को इस ट्रेनिंग का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा और उसकी जानकारी तय पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी। </p>
<p> </p>
<p><strong>यह सब होगा ट्रेनिंग में शामिल</strong><br />इस ट्रेनिंग में ड्राइवरों को एग्रीगेटर के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल, संबंधित कानूनों और नियमों, मोटर व्हीकल (ड्राइविंग) रेगुलेशन-2017, सावधानीपूर्वक वाहन चलाने, ट्रैफिक नियमों, वाहन रखरखाव, ईंधन की बचत करने वाली ड्राइविंग, यात्रियों के साथ व्यवहार और विभिन्न चीजों की जानकारी दी जाएगी। </p>
<p><strong>फर्स्ट रिस्पांडर की भी दी जाएगी ट्रेनिंग</strong><br />इसके अलावा, ड्राइवरों को कम से कम छह घंटे की फर्स्ट रिस्पांडर ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि सड़क दुर्घटना होने पर वे तुरंत मदद कर सकें। प्रशिक्षण में महिला सुरक्षा, दिव्यांगजनों की जरूरतों और उनकी सुरक्षित आवाजाही के प्रति संवेदनशीलता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी के साथ-साथ राज्य सरकार समय-समय पर अन्य जरूरी ट्रेनिंग भी निर्धारित करेगी। </p>
<p><strong>लाइसेंस मिलने के छह महीने में सर्विस नहीं शुरू होने पर लाइसेंस होगा रद्द</strong><br />सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि लाइसेंस मिलने के छह महीने के भीतर एग्रीगेटर को अपना कारोबार शुरू करना होगा। ऐसा नहीं करने पर लाइसेंस स्वतः रद्द माना जाएगा। हालांकि, जमा की गई सुरक्षा राशि वापस कर दी जाएगी, लेकिन लाइसेंस शुल्क वापस नहीं मिलेगा। इसके अलावा, सभी एग्रीगेटर को स्वास्थ्य मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। </p>
<p><strong>कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों की भी ट्रेनिंग देना जरूरी</strong><br />नियमों के अनुसार, एग्रीगेटर को ड्राइवर और कंपनी के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों की भी जानकारी ट्रेनिंग के दौरान देनी होगी। इसके लिए एग्रीगेटर को परिवहन आयुक्त के आदेश के एक वर्ष के भीतर सभी पुराने ड्राइवरों को मान्यता प्राप्त संस्थानों, जैसे आईडीटीआर , आरडीटीसी और एडीटीसी में प्रशिक्षण दिलाने की योजना प्रस्तुत करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50965/mumbai-5-days-training-mandatory-for-aggregator-drivers-like-ola-uber</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:16:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागपुर : आत्महत्या करने वाले नीट एस्पिरेंट के माता-पिता ने मुआवज़े और न्याय की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नीट-यूजी पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी के माता-पिता ने अपनी बेटी के लिए न्याय और मुआवज़े की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मां नीलम चतुर्वेदी ने पेपर लीक करने वालों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी इस्तीफ़ा देने की मांग की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50959/parents-of-maharashtra-neet-aspirant-who-committed-suicide-demand-compensation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-26t111016.087.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नागपुर : </strong>नीट-यूजी पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी के माता-पिता ने अपनी बेटी के लिए न्याय और मुआवज़े की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मां नीलम चतुर्वेदी ने पेपर लीक करने वालों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी इस्तीफ़ा देने की मांग की।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कहा, "मेरी बेटी वापस नहीं आएगी। हम किसी भी चीज़ से संतुष्ट नहीं हैं। सरकार हमसे मिलने नहीं आई। इस्तीफ़े से क्या होगा? हमारी बेटी को मुआवज़ा मिलना चाहिए; हम इस्तीफ़े से संतुष्ट नहीं हैं। हमारी मांग है कि हमारी बेटी को न्याय और मुआवज़ा मिले और दोषियों को फांसी दी जाए। धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़ दिया; PM नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी पद छोड़ देना चाहिए। हमें अपनी ज़मीन बेचनी पड़ी; क्या वह वापस आएगी?" उनके पिता, कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने कहा, "मुझे अपनी बेटी के अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता। हमारी बेटी डॉक्टर बनना चाहती थी और देश की सेवा करना चाहती थी।" नीट-यूजी परीक्षा का पेपर मई में लीक हो गया था, जिसके बाद सरकार ने 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने घोषणा की कि सरकार आत्महत्या करने वाले नीट  उम्मीदवारों के परिवारों को उचित मुआवज़ा देने पर सहमत हो गई है। </p>
<p>कथित तौर पर कई नीट उम्मीदवारों ने आत्महत्या कर ली, जिससे पेपर लीक को लेकर बड़े पैमाने पर विवाद खड़ा हो गया। आज इससे पहले, धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफ़ा सौंपा और कहा कि वे छात्रों के व्यापक हित में पद छोड़ रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश के युवा "भ्रम के जाल में न फंसें।" 'कॉकरोच जनता पार्टी' सूर्यकांत की टिप्पणियों से प्रेरित होकर एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अकाउंट के तौर पर शुरू हुई 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50959/parents-of-maharashtra-neet-aspirant-who-committed-suicide-demand-compensation</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 11:11:59 +0530</pubDate>
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