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                <title>Sanjay - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Sanjay RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: संजय गांधी नेशनल पार्क के पास की कीमतों में बढ़ोतरी पर लगी रोक, वापस लिया गया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क  में टिकट की दरों में बढ़ोतरी के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. यह दरें 1 मई (शनिवार) से लागू होने वाली थीं, लेकिन नागरिकों के भारी विरोध के बाद इसपर रोक लगा दी गई है. इसको लेकर पार्क प्रबंधन ने एक ज्ञापन जारी किया है, जिसमें कहा है कि प्रशासनिक एवं तकनीकी कारणों से नई दरों पर रोक लगाई जा रही है. इसके  साथ ही, पर्यटक सेवाओं की संशोधित दरें जल्द ही निर्धारित करने की मांग की गई है. इसमें कहा गया है कि जब तक नई दरों तय नहीं होती तब तक पुरानी दरों के आधार पर ही  पर्यटक सेवाओं का शुल्क लिया जाएगा. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49652/mumbai-decision-to-ban-increase-in-prices-near-sanjay-gandhi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t192653.695.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :  </strong>बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क  में टिकट की दरों में बढ़ोतरी के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. यह दरें 1 मई (शनिवार) से लागू होने वाली थीं, लेकिन नागरिकों के भारी विरोध के बाद इसपर रोक लगा दी गई है. इसको लेकर पार्क प्रबंधन ने एक ज्ञापन जारी किया है, जिसमें कहा है कि प्रशासनिक एवं तकनीकी कारणों से नई दरों पर रोक लगाई जा रही है. इसके  साथ ही, पर्यटक सेवाओं की संशोधित दरें जल्द ही निर्धारित करने की मांग की गई है. इसमें कहा गया है कि जब तक नई दरों तय नहीं होती तब तक पुरानी दरों के आधार पर ही  पर्यटक सेवाओं का शुल्क लिया जाएगा. </p>
<p> </p>
<p>ज्ञापन में कहा गया है कि, 'प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से, उक्त दर वृद्धि को स्थगित किया जा रहा है. साथ ही, पर्यटक सेवाओं के लिए संशोधित दरें जल्द ही तय की जाएंगी। जब तक संशोधित दरें तय नहीं हो जातीं, तब तक पर्यटक सेवाओं के लिए पहले से स्वीकृत दरों पर ही शुल्क लिया जाना चाहिए." एक वन अधिकारी ने शुक्रवार (1 मई) को बताया कि मई के अंत तक इस मामले में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है.</p>
<p><strong>शुल्क बढ़ोतरी के फैसले पर क्यों लगी रोक?</strong><br />संजय गांधी नेशनल पार्क के उप निदेशक (दक्षिण) किरण पाटिल ने बताया कि कीमतों में संशोधन का फैसला फिलहाल रोक दिया गया है. जल्द ही डिजिटल टिकटिंग प्रणाली भी शुरू की जाएगी जिसके लिए एक व्हाट्सएप  चैटबॉट लॉन्च किया जाएगा. गौर हो कि अचानक संजय गांधी नेशनल पार्क पार्क के शुल्क वृद्धी के फैसले का लोगों ने काफी विरोध किया और इसे बेतुका बताया था. मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले लोगों ने इस के बदलाव को सुबह सैर करने वालों के साथ अन्याय करार दिया था. लोगों का तर्क था कि पार्क की कई बुनियादी सुविधाओं का खर्च सीएसआर फंड से उठाया आता है, ऐसे में इतनी कीमतें क्यों वसूली जा रही हैं. बढ़ते विरोध को देखते हुए शुल्क वृद्धी के फैसले को फिलहाल के लिए रोक लगा दी गई है. </p>
<p><strong>क्या है मामला?</strong><br />गौर हो कि इसी प्राधिकरण की ओर से 21 अप्रैल को एक ज्ञापन के जरिए 1 मई से पार्क के टिकट की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की गई थी. घोषणा में मॉर्निंग वॉकर्स के लिए वार्षिक शुल्क को  383 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया था.  वहीं, वरिष्ठ नागरिकों  को पास के लिए सालाना 5,000 रुपये का भुगतान करने की बात कही गई थी. मासिक पास के लिए नागरिकों के लिए 1,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 500 रुपये कर दिया गया था.</p>
<p>इसके अलावा सफारी, मिनी ट्रेन, नौका विहार और ई-बस जैसी सेवाओं के शुल्क भी बढ़ा दिए गए थे. बढ़़ाए गए शुल्क पर प्रशासन का तर्क था कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या, सुविधाओं के रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में सुधार के लिए इसे बढ़ाया गया था.  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 19:27:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : भाजपा में आम आदमी पार्टी नेताओं के शामिल होने पर संजय राउत का बयान, सियासी बयानबाजी तेज </title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शनिवार को राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के दो अन्य सांसदों पर तीखा हमला बोला, जो भाजपा में शामिल हो गए हैं। उन्होंने भगवा पार्टी को "बेशर्म" कहा और उसकी तुलना पौराणिक राक्षस बकासुर से की, जिसकी भूख कभी नहीं मिटती। राउत ने कहा कि दलबदलू लोग "गुंडों और भ्रष्ट लोगों की पार्टी" में शामिल हो गए हैं और उन्हें 'पेज 3' के नेता बताया, जिन्हें जल्द ही एहसास होगा कि वे "नरक" में आ गए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49482/sanjay-rauts-statement-on-joining-of-aam-aadmi-party-leaders"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-25t193709.411.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शनिवार को राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के दो अन्य सांसदों पर तीखा हमला बोला, जो भाजपा में शामिल हो गए हैं। उन्होंने भगवा पार्टी को "बेशर्म" कहा और उसकी तुलना पौराणिक राक्षस बकासुर से की, जिसकी भूख कभी नहीं मिटती। राउत ने कहा कि दलबदलू लोग "गुंडों और भ्रष्ट लोगों की पार्टी" में शामिल हो गए हैं और उन्हें 'पेज 3' के नेता बताया, जिन्हें जल्द ही एहसास होगा कि वे "नरक" में आ गए हैं।</p>
<p> </p>
<p>एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने कहा, "हर कोई जानता है कि भाजपा किस तरह की राजनीति कर रही है। उनकी राजनीति को एक ही शब्द में कहा जा सकता है - बेशर्मी। उन्हें कोई शर्म नहीं है। क्योंकि राघव चड्ढा जैसे लोग - जो कल तक हमारे दोस्त भी थे - खुलेआम कहते थे कि भाजपा गुंडों, ठगों और भ्रष्ट लोगों की पार्टी है। ये सभी लोग थोक के भाव गुंडों और भ्रष्ट लोगों की पार्टी में शामिल हो गए हैं... महाभारत में एक राक्षस था। उसका नाम बकासुर था।</p>
<p>उसकी भूख कभी नहीं मिटती, उसका पेट कभी नहीं भरता।" उन्होंने आगे कहा, "भाजपा बकासुरों की पार्टी बन गई है। वे कुछ भी खा जाते हैं... राघव चड्ढा जैसे सात लोग उस 'नरक' जैसी पार्टी में शामिल हो गए हैं। हमें इसका कोई अफसोस नहीं है। उन्हें जल्द ही एहसास होगा कि नरक कैसा होता है... विपक्ष कभी कमजोर नहीं होगा। ये छह या सात लोग, जो पार्टी छोड़कर गए हैं, कोई बड़े जननेता नहीं हैं। वे ज़्यादा से ज़्यादा सोशल मीडिया पर 'पेज 3' के नेता हैं।"</p>
<p>ये टिप्पणियाँ तब आईं जब आम आदमी पार्टी को एक बड़ा झटका लगा। पार्टी के राज्यसभा सांसद - जिनमें राघव चड्ढा भी शामिल हैं, जिन्हें पहले ही राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया था - शुक्रवार को प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी  में शामिल हो गए। शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, चड्ढा ने उस विभाजन को औपचारिक रूप दे दिया, जिसकी सुगबुगाहट हफ़्तों से चल रही थी। उन्होंने घोषणा की कि पार्टी के उच्च सदन (राज्यसभा) के दो-तिहाई सदस्य भाजपा में विलय कर लेंगे। तीनों सांसदों - राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल - ने पार्टी में विभाजन की घोषणा की और बाद में पार्टी प्रमुख नितिन नबीन की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। नितिन नबीन ने इस फैसले का स्वागत किया।</p>
<p>इस कदम पर आम आदमी पार्टी नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं, जबकि भाजपा ने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया। भाजपा ने इस फूट का खुले दिल से स्वागत किया और इसे केजरीवाल पर हमले का ज़रिया बना लिया; दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह कदम स्वाभाविक था। इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में इन राज्यसभा सांसदों का स्वागत किया। एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए, नवीन ने शुक्रवार को संसद के सभी सातों सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उन्हें "2047 तक विकसित भारत" के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 19:38:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मुंबई: संजय निरुपम की गाड़ी पर पथराव, MNS कार्यकर्ता बोले-'गो बैक'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में एक बार फिर 'मराठी बनाम हिंदी' भाषा का विवाद गहरा गया है. मुंबई के दहिसर इलाके में उस समय भारी बवाल हो गया जब शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ऑटो चालकों से संवाद करने पहुंचे थे. वहां पहले से मौजूद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने निरुपम का कड़ा विरोध करते हुए उनकी गाड़ी पर पथराव किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49468/mumbai-mns-workers-pelted-stones-at-sanjay-nirupams-car-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-25t132623.954.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:  </strong>मुंबई में एक बार फिर 'मराठी बनाम हिंदी' भाषा का विवाद गहरा गया है. मुंबई के दहिसर इलाके में उस समय भारी बवाल हो गया जब शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ऑटो चालकों से संवाद करने पहुंचे थे. वहां पहले से मौजूद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने निरुपम का कड़ा विरोध करते हुए उनकी गाड़ी पर पथराव किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की. </p>
<p> </p>
<p><strong>विवाद की जड़: ऑटो चालकों के लिए मराठी की अनिवार्यता</strong><br />इस पूरे विवाद की शुरुआत शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के एक आदेश से हुई है. सरनाईक ने निर्देश दिया है कि 1 मई से मुंबई से सटे मीरा-भायंदर क्षेत्र में सभी ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा बोलना, लिखना और पढ़ना अनिवार्य होगा. संजय निरुपम ने अपनी ही पार्टी के मंत्री के इस फैसले का विरोध करते हुए इसे 'परप्रांतीय' चालकों के साथ अन्याय बताया है.  </p>
<p>संजय निरुपम जब दहिसर में रिक्शा चालकों से मिलने पहुंचे, तो MNS कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया. नारेबाजी और हमला: "निरुपम गो बैक" और "एक ही भाषा, मराठी भाषा" के नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने निरुपम की कार के टायर की हवा निकाल दी और वाहन पर पथराव किया.<br />पुलिस की कार्रवाई: स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद संजय निरुपम को सुरक्षित मौके से बाहर निकाला.</p>
<p><strong>11 पदाधिकारियों पर FIR, MNS ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी</strong><br />पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए MNS के महासचिव नयन कदम और शहर उपाध्यक्ष कुणाल माईनकर को हिरासत में ले लिया है. कुल 11 पदाधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. </p>
<p>दूसरी ओर, MNS ने पुलिसिया कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि उनके कार्यकर्ताओं पर दबाव में आकर कार्रवाई की गई, तो पूरी मुंबई में तीव्र आंदोलन किया जाएगा. MNS की मांग है कि पुलिस पहले संजय निरुपम के खिलाफ मामला दर्ज करे, क्योंकि वे सरकारी नियमों का विरोध कर रहे हैं. </p>
<p><strong>शिवसेना (शिंदे गुट) के भीतर का अंतर्विरोध उजागर</strong><br />इस घटना ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी के भीतर चल रहे वैचारिक मतभेद को भी सतह पर ला दिया है. एक ओर मंत्री प्रताप सरनाईक 'मराठी कार्ड' के जरिए स्थानीय अस्मिता पर जोर दे रहे हैं, वहीं संजय निरुपम उत्तर भारतीय और अन्य राज्यों के प्रवासियों के हितों की वकालत कर रहे हैं. फिलहाल दहिसर और आसपास के इलाकों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है. पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके.</p>
<p><strong>संजय न‍िरुपम ने ल‍िखा पत्र </strong><br />न्‍यूज एजेंसी IANS से बातचीत में शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम कहते हैं, "सबसे पहले, मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं और मैंने अपने पत्र में भी यह लिखा है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए। राज्य सरकार का यह आग्रह है कि महाराष्ट्र में रहने वाला हर व्यक्ति मराठी भाषा का सम्मान करे, उसे बोलने में सक्षम हो और उसे समझे। यह बात बिल्कुल सही है; यह सरकार, पार्टी और मेरा अपना निजी मत भी है..."</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49468/mumbai-mns-workers-pelted-stones-at-sanjay-nirupams-car-and</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 13:29:20 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई : संजय निरुपम की परिवहन मंत्री को चिट्ठी, मराठी अनिवार्यता पर करें विचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार के ‘रिक्शा व टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य’ करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की अपील की है। संजय निरुपम ने अपने पत्र में कहा कि 1 मई से लागू होने वाला यह फैसला हजारों मेहनतकश रिक्शा चालकों के बीच भय, भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49445/mumbai-sanjay-nirupams-letter-to-transport-minister-consider-marathi-essentiality"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-24t103514.294.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार के ‘रिक्शा व टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य’ करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की अपील की है। संजय निरुपम ने अपने पत्र में कहा कि 1 मई से लागू होने वाला यह फैसला हजारों मेहनतकश रिक्शा चालकों के बीच भय, भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा का सम्मान सभी के दिलों में है, लेकिन इसे अनिवार्य करना और इसके लिए परीक्षा लागू करना चालकों के जीवन और रोजगार पर नकारात्मक असर डाल सकता है।</p>
<p> </p>
<p>निरुपम ने मुंबई की बहुसांस्कृतिक पहचान का जिक्र करते हुए लिखा कि शहर में करीब 70 प्रतिशत से अधिक रिक्शा और टैक्सी चालक गुजरात, उत्तर भारत, पंजाब और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से आते हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से यहां अपनी जगह बनाई है और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में यह फैसला उनके रोजगार पर संकट खड़ा कर सकता है और शहर की यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें कई चालकों के फोन आ रहे हैं, जिनमें वे अपनी परेशानियां और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। निरुपम के मुताबिक, चालकों के मन में बढ़ती असुरक्षा बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पत्र में सरकार से आग्रह किया कि मराठी भाषा के सम्मान को बनाए रखते हुए, टूटी-फूटी या कामचलाऊ मराठी बोलने और समझने वाले चालकों को छूट दी जाए। साथ ही भाषा को अनिवार्य बनाने और परीक्षा लागू करने के फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लिया जाए। निरुपम ने कहा कि प्रेम से सिखाई गई भाषा दिल में बसती है, जबकि जबरन थोपी गई भाषा भय पैदा करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ निर्णय लेगी।</p>
<p>वहीं, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री का कहना है कि परिवहन विभाग पर ‘मराठी राजभाषा अधिनियम’ लागू होता है और नागरिकों के साथ संवाद करते समय चालकों के पास मराठी का कम से कम ‘कार्यसाधक ज्ञान’ होना आवश्यक है। कानून के प्रावधानों के आधार पर, नियमों में संशोधन किए जाएंगे और लाइसेंस, बैज तथा परमिट जारी करते या उनका नवीनीकरण करते समय मराठी ज्ञान की शर्त लागू की जाएगी। साथ ही, चालकों पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले बिना उन वाक्यों और वाक्यांशों को सिखाने पर जोर दिया जाएगा जो उनके दैनिक कामकाज में उपयोगी होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:34:54 +0530</pubDate>
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