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                <title>mining - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>महाराष्ट्र: अवैध रेत खनन पर अंकुश लगाने के लिए फ्लाइंग स्कॉयड की होगी तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में रेत खनन और बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को अवैध रेत खनन पर नियंत्रण के लिए कई सख्त उपायों की घोषणा की है। कैबिनेट के फैसले के बाद 8 अप्रैल 2025 की रेत नीति में कई महत्वपूर्ण संशोधन शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य 'सैंड माफिया' पर लगाम कसने के लिए विशेष 'फ्लाइंग स्क्वॉड' की तैनाती करना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49559/flying-squad-will-be-deployed-to-curb-illegal-sand-mining"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/images-(53).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में रेत खनन और बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को अवैध रेत खनन पर नियंत्रण के लिए कई सख्त उपायों की घोषणा की है। कैबिनेट के फैसले के बाद 8 अप्रैल 2025 की रेत नीति में कई महत्वपूर्ण संशोधन शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य 'सैंड माफिया' पर लगाम कसने के लिए विशेष 'फ्लाइंग स्क्वॉड' की तैनाती करना है। नई सरकारी व्यवस्था के तहत तालुका और उप-मंडल स्तर पर विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए जाएंगे, जो अवैध परिवहन पर निगरानी रखेंगे। इन टीमों में राजस्व विभाग और अन्य प्रशासनिक विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।</p>
<p> </p>
<p>मंत्री ने बताया कि कोकण क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वहां अधिकारियों को अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं। अब उप-मंडल अधिकारी और तहसीलदार अपने अधिकार क्षेत्र से लगे अन्य तालुका या जिलों में भी कार्रवाई कर सकेंगे। महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड को तटीय और खाड़ी क्षेत्रों में रेत खनन की निगरानी के लिए बढ़ी हुई शक्तियां दी गई हैं। बोर्ड अब खाड़ियों में रेत परिवहन के लिए उपयोग होने वाली सभी नावों का पंजीकरण करेगा, और बिना पंजीकरण या अवैध नावों को जब्त कर तहसीलदारों को कानूनी कार्रवाई के लिए सौंपा जाएगा।</p>
<p>बावनकुले ने बताया कि क्षेत्रीय बंदरगाह अधिकारियों को भी कोकण के जिला और तालुका स्तर की रेत निगरानी समितियों में शामिल किया गया है। सरकार ने रेत नीलामी में भाग लेने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए नए वार्षिक टर्नओवर मानदंड भी तय किए हैं, जो रेत भंडार (ब्रास में) के अनुसार होंगे। इसमें 1000 ब्रास तक के लिए 10 लाख रुपए, 1001 से 2000 ब्रास के लिए 20 लाख रुपए, 5001 से 10,000 ब्रास के लिए 1 करोड़ रुपए, 10,001 से 15,000 ब्रास के लिए 1.5 करोड़ रुपए, 15,001 से 20,000 ब्रास के लिए 2 करोड़ रुपए, 20,001 से 25,000 ब्रास के लिए 3 करोड़ रुपए और 25,000 ब्रास से अधिक के लिए 3.5 करोड़ रुपए का टर्नओवर आवश्यक होगा।</p>
<p>मंत्री के अनुसार, नदियों और खाड़ियों में रेत ब्लॉकों की नीलामी अब ई-ऑक्शन प्रणाली के माध्यम से की जाएगी, जिसे भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जाएगा। नीलामी की अवधि एक वर्ष या रेत भंडार समाप्त होने तक, जो भी पहले हो, निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि सभी समझौतों में एक अनिवार्य प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत यदि किसी अप्रत्याशित स्थिति के कारण खनन नहीं हो पाता है, तो नीलामी धारक को दिया जाने वाला रिफंड बिना ब्याज के होगा। जिला कलेक्टरों को अपने जिलों में क्रियान्वयन समय-सारणी में बदलाव का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसके लिए विभागीय आयुक्त की मंजूरी आवश्यक होगी। यह संशोधित ढांचा पूरे राज्य में लागू होगा, जिसका उद्देश्य रेत खनन उद्योग में अनियमितताओं को समाप्त करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:14:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>नई दिल्ली : बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुख्यालय कार्यालय ने पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति, अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल का 'लाला', जो अवैध माइनिंग के धंधे में लिप्त था, उसके नकली 'पैड' की खूब तूती बोलती थी। पुलिस व आरटीओ, 'लाला' के पैड को देखकर अवैध माइनिंग के ट्रकों को ग्रीन सिग्नल दे देते थे। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 'लाला' का गिरोह, पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति करता था। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49237/new-delhi-assets-worth-rs-15951-crore-seized-in-connection"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-15t170759.147.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुख्यालय कार्यालय ने पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति, अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल का 'लाला', जो अवैध माइनिंग के धंधे में लिप्त था, उसके नकली 'पैड' की खूब तूती बोलती थी। पुलिस व आरटीओ, 'लाला' के पैड को देखकर अवैध माइनिंग के ट्रकों को ग्रीन सिग्नल दे देते थे। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 'लाला' का गिरोह, पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति करता था। </p>
<p> </p>
<p><strong>जब्त संपत्ति में कॉर्पोरेट बॉन्ड व निवेश फंड ... </strong><br />ईडी की जांच में पता चला है कि अवैध खनन कार्य अनुप मजी उर्फ 'लाला' के नेतृत्व वाले एक गिरोह द्वारा किया जा रहा था। उसे पश्चिम बंगाल की कुछ लाभार्थी कंपनियों के लिए अवैध रूप से निकाले गए कोयले को नकद में खरीदने का दोषी पाया गया। इससे 'अपराध की आय' को वैध दिखाने और उसे छिपाने में मदद मिली। जब्त की गई संपत्तियों में चल वित्तीय साधनों में निवेश शामिल है, जैसे कि कॉर्पोरेट बॉन्ड और वैकल्पिक निवेश फंड, जो लाभार्थी संस्थाओं के नाम पर हैं। इनमें श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड और श्याम फेरो अलॉयज लिमिटेड शामिल हैं, जो संजय अग्रवाल और बृज भूषण अग्रवाल द्वारा प्रबंधित और नियंत्रित श्याम समूह का हिस्सा हैं।</p>
<p><strong>यूं चलती थी 'लाला पैड' अवैध चालान प्रणाली ...  </strong><br />जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अवैध रूप से कोयले की खुदाई और बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी में लिप्त था। स्थानीय प्रशासनिक तत्वों की सक्रिय मिलीभगत से पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति होती थी। वह 'लाला पैड' नामक एक अवैध परिवहन चालान प्रणाली का उपयोग करता था। ये काल्पनिक संस्थाओं के नाम पर जारी किए गए फर्जी कर चालान होते थे। </p>
<p><strong>ट्रांसपोर्टर को थमाते थे 10-20 रुपये का नोट ...  </strong><br />फर्जी परिवहन चालान के साथ, ट्रांसपोर्टर को 10 या 20 रुपये का एक नोट दिया जाता था। ट्रांसपोर्टर अवैध कोयले से भरे ट्रक, डम्पर या टिपर की नंबर प्लेट के पास नोट को पकड़कर उसकी तस्वीर लेता था। उसके बाद वह तस्वीर कोयला गिरोह के संचालक को भेजी जाती थी। संचालक फिर उस तस्वीर को व्हाट्सएप के माध्यम से वाहन के मार्ग में स्थित संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों को भेजता था। यह इसलिए किया जाता ताकि ट्रक को रोका न जाए। यदि रोका भी जाए तो उसे तुरंत छोड़ दिया जाए।</p>
<p><strong>भूमिगत हवाला नेटवर्क का उपयोग ... </strong><br />जांच में यह भी पता चला है कि अपराध से प्राप्त धन को नकद में स्थानांतरित करने के लिए एक भूमिगत हवाला नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा था। इसके जरिए औपचारिक बैंकिंग चैनलों को दरकिनार किया जाता था। लेन-देन को विशिष्ट पहचानकर्ताओं, आमतौर पर प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच साझा किए गए करेंसी नोट के सीरियल नंबर, के माध्यम से प्रमाणित किया जाता था। नोट के मिलान के सत्यापन के बाद, बिना किसी औपचारिक दस्तावेजीकरण के नकद राशि सौंप दी जाती थी। इससे धन का निर्बाध और पता न चलने योग्य हस्तांतरण संभव हो जाता था।</p>
<p><strong>अभी तक 482.22 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच ... </strong><br />इस मामले में अभी तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 482.22 करोड़ रुपये हो गया है। इस अपराध में अवैध धन के स्रोत और स्वामित्व को छिपाने के लिए डिज़ाइन किए गए जटिल वित्तीय लेन-देन की कई परतें शामिल हैं। ईडी, अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने, अपराध से प्राप्त अतिरिक्त धन का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया में शामिल सभी व्यक्तियों का पता लगाने के लिए इन परतों को व्यवस्थित रूप से उजागर करना जारी रखे हुए है। ईडी, आर्थिक अपराधों, विशेष रूप से अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है, जो सार्वजनिक संसाधनों और आर्थिक अखंडता को कमजोर करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49237/new-delhi-assets-worth-rs-15951-crore-seized-in-connection</link>
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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 17:08:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : अरावली खनन मामले में पिछले फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अरावली खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने पुराने फैसले पर रोक लगा दी है। इसके बाद देशभर में सियासत तेज हो गई है। एक ओर जहां पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस फैसले को 'उम्मीद की किरण' बताते हुए पर्यावरण मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। आइए जानते है किसने क्या कहा? अरावली खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी सोमवार को अपने पुराने फैसले पर रोक लगा दी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46565/new-delhi-supreme-court-stays-previous-decision-in-aravalli-mining"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-29t164458.906.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>अरावली खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने पुराने फैसले पर रोक लगा दी है। इसके बाद देशभर में सियासत तेज हो गई है। एक ओर जहां पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस फैसले को 'उम्मीद की किरण' बताते हुए पर्यावरण मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। आइए जानते है किसने क्या कहा? अरावली खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी सोमवार को अपने पुराने फैसले पर रोक लगा दी। ऐसे में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले और मुद्दों का अध्ययन करने के लिए एक नई कमेटी बनाने के निर्देशों का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट के इस नई समिति को हर जरूरी सहयोग देगा।</p>
<p> </p>
<p>अपने पोस्ट में मंत्री ने साफ किया कि अभी भी अरावली क्षेत्र में नई खनन लीज देने या पुरानी लीज को नवीनीकरण करने पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा और दोबारा सुधार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। </p>
<p><strong>कांग्रेस ने भी किया फैसले का स्वागत</strong><br />उधर, कांग्रेस ने भी सोमवार को अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। पार्टी ने केंद्र सरकार और खास तौर पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पर हमला बोलते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस पहले से ही इस नई परिभाषा का विरोध कर रही थी। ऐसे में पार्टी का कहना है कि अगर यह परिभाषा लागू होती, तो अरावली पहाड़ियों को खनन, रियल एस्टेट और अन्य परियोजनाओं के लिए खोल दिया जाता, जिससे पहाड़ों को भारी नुकसान होता।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 'उम्मीद की एक किरण है। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे पर और विस्तार से अध्ययन होगा। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस नई परिभाषा का विरोध पहले ही फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी भी कर चुकी है।</p>
<p><strong>कांग्रेस ने मांगा भूपेंद्र यादव का इस्तीफा</strong><br />जयराम रमेश ने आगे कहा कि फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन अरावली को बचाने की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अरावली को खनन और रियल एस्टेट के लिए खोलना चाहती है। इतना ही नहीं मामले में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि अदालत का फैसला मंत्री के उन सभी तर्कों को खारिज करता है, जिनके जरिए वे नई परिभाषा का समर्थन कर रहे थे।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला</strong><br />अरावली खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने पुराने फैसले पर रोक लगा दी है। सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा, इस मामले में स्पष्टीकरण जरूरी है। बता दें कि कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की परिभाषा नए सिरे से तय किए जाने के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 20 नवंबर के फैसले में दिए गए निर्देशों को स्थगित रखा जाएगा। अपने आदेश में अदालत ने कहा, इसमें कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर स्पष्टीकरण आवश्यक हैं। </p>
<p><strong>24 दिसंबर के निर्देश क्या कहते हैं?</strong><br />बता दें कि इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर विगत 24 दिसंबर को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नए निर्देश जारी किए थे। इनमें केंद्र सरकार ने कहा है कि नए खनन के लिए मंजूरी देने पर रोक संपूर्ण अरावली क्षेत्र पर लागू रहेगी। इसका उद्देश्य अरावली रेंज की अखंडता को बचाए रखना है। इन निर्देशों का लक्ष्य गुजरात से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक फैली एक सतत भूवैज्ञानिक शृंखला के रूप में अरावली का संरक्षण करना और सभी अनियमित खनन गतिविधियों को रोकना है। </p>
<p><strong>आईसीएफआरई क्या करेगा?</strong><br />पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, आईसीएफआरई से कहा गया है कि पूरे अरावली क्षेत्र में ऐसे अतिरिक्त क्षेत्रों की पहचान की जाए, जहां पर खनन पर रोक लगनी चाहिए। यह उन क्षेत्रों के अतिरिक्त रहे, जहां पर केंद्र ने पहले से खनन पर प्रतिबंध लगा रखा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 16:46:16 +0530</pubDate>
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                <title>नवी मुंबई: हवा में धूल; टाटा कैंसर अस्पताल में पास &quot;चिंताजनक स्थिति&quot; , खनन गतिविधि तुरंत रोकने की माँग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नवी मुंबई के खारघर स्थित टाटा कैंसर अस्पताल में पास की एक पत्थर की खदान से पत्थर का चूरा, धूल हवा में घुल रहा है, इस बात से चिंतित पर्यावरण समूहों ने सोशल मीडिया पर एक अभियान के ज़रिए इस "चिंताजनक स्थिति" को प्रधानमंत्री तक पहुँचाया है और खनन गतिविधि को तुरंत रोकने की माँग की है। चूँकि रायगढ़ ज़िला प्रशासन पहले ही स्वीकार कर चुका है कि खदान को अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए नेटकनेक्ट फ़ाउंडेशन ने कलेक्टर से की गई कार्रवाई की जानकारी माँगी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43538/navi-mumbai-dust-in-the-air-dust-tata-cancer-hospital"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-01t120318.187.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नवी मुंबई: </strong>नवी मुंबई के खारघर स्थित टाटा कैंसर अस्पताल में पास की एक पत्थर की खदान से पत्थर का चूरा, धूल हवा में घुल रहा है, इस बात से चिंतित पर्यावरण समूहों ने सोशल मीडिया पर एक अभियान के ज़रिए इस "चिंताजनक स्थिति" को प्रधानमंत्री तक पहुँचाया है और खनन गतिविधि को तुरंत रोकने की माँग की है। चूँकि रायगढ़ ज़िला प्रशासन पहले ही स्वीकार कर चुका है कि खदान को अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए नेटकनेक्ट फ़ाउंडेशन ने कलेक्टर से की गई कार्रवाई की जानकारी माँगी है। यह अस्पताल, एडवांस्ड सेंटर फ़ॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर, भारत भर से जीवन रक्षक उपचार की तलाश में आने वाले अनगिनत मरीज़ों के लिए आशा की किरण है। प्रधानमंत्री को संबोधित ऑनलाइन याचिकाओं में कहा गया है कि पास की खदानों से पत्थर का चूरा इन मरीज़ों की साँस लेने वाली हवा में घुलने लगा है, जिससे उनके पहले से ही कमज़ोर स्वास्थ्य के लिए और भी ख़तरा पैदा हो गया है। </p>
<p> </p>
<p>नैटकनेक्ट फ़ाउंडेशन और प्रोटेक्ट नवी मुंबई एनवायरनमेंट प्लेटफ़ॉर्म ने दो अलग-अलग याचिकाओं में बताया है कि पत्थर के धूल के लगातार संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी समस्याएँ बढ़ सकती हैं, मौजूदा स्वास्थ्य स्थितियाँ और जटिल हो सकती हैं, और सबसे बुरी स्थिति में, गंभीर फेफड़ों की बीमारियाँ हो सकती हैं। कैंसर के मरीज़, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली पहले से ही कमज़ोर है, उन्हें इन स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करने का ज़्यादा ख़तरा होता है, जिससे उनके ठीक होने की प्रक्रिया पर गहरा असर पड़ सकता है।</p>
<p>प्रोटेक्ट नवी मुंबई एनवायरनमेंट समूह के सूर्य जयंत हुदर ने कहा कि टाटा कैंसर अस्पताल के पीछे चल रही खदान गतिविधि एक असुरक्षित वातावरण पैदा करती है जिसका सीधा असर उन लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण पर पड़ता है जो पहले से ही कमज़ोर हैं और अपनी जान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नैटकनेक्ट फ़ाउंडेशन के निदेशक कुमार ने कहा कि प्रदूषण-मुक्त वातावरण में काम करने के लिए डिज़ाइन किए गए उपकरण भी हवा में मौजूद कणों के प्रवेश के कारण लगातार जोखिम में रहते हैं। <br />वास्तव में, एडवांस्ड सेंटर फ़ॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर के निदेशक डॉ. पंकज चतुर्वेदी पहले ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष यह मुद्दा उठा चुके हैं और बताया है कि धूल के कणों के संपर्क में आने से उन कैंसर मरीज़ों में फेफड़ों के संक्रमण का ख़तरा बढ़ सकता है जिनकी प्रतिरक्षा क्षमता बहुत कम होती है।</p>
<p>कुमार ने कहा कि कैंसर रोगियों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जो उनके स्वास्थ्य को और अधिक खतरे में डाले, न कि ऐसा वातावरण जो उनके स्वास्थ्य को और अधिक नुकसान पहुँचाए। एक कुशल जीवन-धमकाने वाले कैंसर विशेषज्ञ, डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि हमारे कैंसर रोगियों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा, जैव विविधता का संरक्षण और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों की अखंडता को बनाए रखना सामूहिक प्राथमिकता होनी चाहिए। डॉ. चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री को बताया कि अस्पताल परिसर में लगभग 25 साल पहले बनी इमारतों में अब संरचनात्मक क्षति दिखाई दे रही है, जैसे कि बीम और स्लैब में दरारें, जिसके परिणामस्वरूप एडवांस्ड सेंटर फ़ॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर परिसर में निर्मित इमारतें कमज़ोर हो रही हैं। उन्होंने कहा, "इससे वर्षा जल का रिसाव हो रहा है, जिससे क्लीनरूम सुविधाओं में फफूंद की वृद्धि हो रही है और रोगियों के लिए और भी खतरे पैदा हो रहे हैं।" उन्होंने एडवांस्ड सेंटर फ़ॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर के निकट अनियमित पत्थर उत्खनन के कारण बढ़ते ध्वनि और धूल प्रदूषण पर भी "गहरी चिंता" व्यक्त की।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:03:46 +0530</pubDate>
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