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                <title>Monorail - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Monorail RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : मोनोरेल यात्रियों को बचाने वाले 13 दमकलकर्मियों को राष्ट्रपति पदक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में अगस्त 2025 में मोनोरेल में फंसे 582 यात्रियों को बचाने वाले 13 दमकलकर्मियों को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा। 10 अगस्त 2025 को मोनोरेल मायसोर कॉलोनी स्टेशन के पास करीब 40 से 50 फीट की ऊंचाई पर रुक गई थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51368/presidents-medal-to-13-firefighters-who-saved-mumbai-monorail-passengers"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/1000871556_1755697622.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में अगस्त 2025 में मोनोरेल में फंसे 582 यात्रियों को बचाने वाले 13 दमकलकर्मियों को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा। 10 अगस्त 2025 को मोनोरेल मायसोर कॉलोनी स्टेशन के पास करीब 40 से 50 फीट की ऊंचाई पर रुक गई थी।</p>
<p> </p>
<p>दमकलकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचाव अभियान चलाया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। </p>
<p>स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनकी बहादुरी और कर्तव्य के प्रति समर्पण को देखते हुए पदक की घोषणा की गई। सम्मान पाने वालों में अधिकारी, स्टेशन ऑफिसर, मशीन ऑपरेटर और फायरमैन शामिल हैं। ये कर्मचारी विक्रोली, दादर, फोर्ट, चेंबूर और वडाला दमकल केंद्रों से हैं।<br /> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 10:21:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : टेस्ट रन के दौरान एक मोनोरेल ट्रेन झुक गई; मोनोरेल को हुआ नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वडाला डिपो स्टेशन के पास टेस्ट रन के दौरान एक मोनोरेल ट्रेन झुक गई। ट्रेन में एक ट्रेन कैप्टन और एक और रेल स्टाफ था, लेकिन कोई पैसेंजर नहीं था। मोनोरेल को नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि यह हादसा सिग्नलिंग इक्विपमेंट की कमी के कारण हुआ। मॉनसून के दौरान हुई पिछली घटना के कुछ महीने बाद  हादसा हुआ, जिसके कारण ट्रांसपोर्ट सर्विस रोक दी गई थी। हालांकि, मौके पर मौजूद यूनियन लीडर ने आरोप लगाया कि मोनोरेल सर्विस से जुड़े बार-बार होने वाले हादसे स्टाफ में बदलाव या पुराने ट्रेंड कर्मचारियों को हटाकर नए लोगों को रखने की वजह से हो सकते हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45242/a-monorail-train-tilted-during-a-mumbai-test-run-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-05t174536.508.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>वडाला डिपो स्टेशन के पास टेस्ट रन के दौरान एक मोनोरेल ट्रेन झुक गई। ट्रेन में एक ट्रेन कैप्टन और एक और रेल स्टाफ था, लेकिन कोई पैसेंजर नहीं था। मोनोरेल को नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि यह हादसा सिग्नलिंग इक्विपमेंट की कमी के कारण हुआ। मॉनसून के दौरान हुई पिछली घटना के कुछ महीने बाद  हादसा हुआ, जिसके कारण ट्रांसपोर्ट सर्विस रोक दी गई थी। हालांकि, मौके पर मौजूद यूनियन लीडर ने आरोप लगाया कि मोनोरेल सर्विस से जुड़े बार-बार होने वाले हादसे स्टाफ में बदलाव या पुराने ट्रेंड कर्मचारियों को हटाकर नए लोगों को रखने की वजह से हो सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p>वडाला स्थित अपने डिपो के बाहर मुंबई मोनोरेल का एक रेक पटरी से उतर गया, लेकिन मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने इसे "मॉक ड्रिल" बताकर इस घटना को कमतर आंकने की कोशिश की।मुंबई मोनोरेल के एक डिब्बे को एक दुर्घटना में काफी नुकसान हुआ।मोनोरेल का संचालन और रखरखाव एमएमआरडीए की सहायक कंपनी, महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमएमओसीएल) द्वारा किया जाता है।</p>
<p>शहर की एकमात्र मोनोरेल प्रणाली इस साल मानसून के दौरान बार-बार व्यवधान और तकनीकी खराबी के कारण 20 सितंबर से सेवा से बाहर है।सूत्रों के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 9.30 बजे हुई जब मेधा सर्वो ड्राइव्स द्वारा निर्मित एक नई मोनोरेल रेक डिपो के पास ट्रायल रन के लिए जा रही थी। ट्रेन को एक गाइडवे बीम से दूसरे पर ले जाया जा रहा था, तभी कथित तौर पर बदलाव के दौरान यह फिसल गई। मोनोरेल प्रणाली में, गाइडवे बीम रेलवे ट्रैक की तरह ही काम करता है।पटरी से उतरना इतना भयानक था कि एक डिब्बा बीम से उतर गया, जिससे रेक के अंडरकैरिज को नुकसान पहुँचा।79 की उम्र में भी आप असली मर्द जैसा महसूस कर सकते हैं - जानिए कैसे करें।कुछ ही मिनटों में, मुंबई फायर ब्रिगेड और मुंबई पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुँच गईं, लेकिन उन्हें वापस लौटने को कहा गया। एमएमआरडीए के एक अधिकारी ने कहा, "यह घटना आपातकालीन तैयारियों का परीक्षण करने के लिए एक मॉक ड्रिल का हिस्सा थी।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 17:46:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : मोनो रेल में आ रही तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए सिग्नल सिस्टम में बदलाव शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण ने देश की पहली मोनो रेल में आ रही तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए सिग्नल सिस्टम में बदलाव शुरू कर दिया है। मोनो रेल का सफर अधिक सुरक्षित बनाने के लिए एमएमआरडीए ने मेट्रो का सिग्नल सिस्टम मोनो रूट पर अपनाने का फैसला लिया है। एमएमआरडीए द्वारा संचालित मेट्रो-7 और मेट्रो-2 ए कॉरिडोर पर सीबीटीसी सिग्नल सिस्टम का इस्तेमाल होता है। सीबीटीसी तकनीक के तहत ट्रेन की हर वक्त रियल टाइम मॉनिटरिंग होती है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44058/mumbai--changes-in-signalling-system-underway-to-address-technical-glitches-in-the-monorail"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-21t174846.555.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण ने देश की पहली मोनो रेल में आ रही तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए सिग्नल सिस्टम में बदलाव शुरू कर दिया है। मोनो रेल का सफर अधिक सुरक्षित बनाने के लिए एमएमआरडीए ने मेट्रो का सिग्नल सिस्टम मोनो रूट पर अपनाने का फैसला लिया है। एमएमआरडीए द्वारा संचालित मेट्रो-7 और मेट्रो-2 ए कॉरिडोर पर सीबीटीसी सिग्नल सिस्टम का इस्तेमाल होता है। सीबीटीसी तकनीक के तहत ट्रेन की हर वक्त रियल टाइम मॉनिटरिंग होती है।</p>
<p> </p>
<p><strong>मोनो के ट्रैक को कई ब्लॉक्स में बांटा गया</strong><br />इसमें ट्रेन और कंट्रोल सेंटर के बीच लगातार डेटा संचार होता है, जिससे ट्रेन की लोकेशन और स्पीड का पता चलता है। जबकि मोनो के पुराने सिग्नल सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमैटिक नहीं हैं। इसमें मोनो के ट्रैक को कई ब्लॉक्स में बांटा गया है। एक समय में एक ब्लॉक से केवल एक ही ट्रेन गुजरती है। ट्रेन को शुरू करना, बंद करना, ब्रेक लगाना समेत कई अन्य कार्य मैनुअल तरीके से होते हैं। पुराने सिग्नल सिस्टम ने कई काम मैनुअल होने के कारण मेंटेनेंस में भी काफी समय लगता है।</p>
<p><strong>...तो भी ट्रेन अपने आप रुक जाएगी</strong><br />मोनो ट्रेन पर लग रहा सीबीटीसी सिग्नल सिस्टम ट्रेन की स्पीड नियंत्रित करने के साथ ही चालक को आगे के मार्ग की स्थिति से भी अगवत कराता रहेगा। इसकी सबसे बड़ी खूबी कि अगर चालक ट्रेन का ब्रेक लगाना भूल गया, तो भी ट्रेन अपने आप रुक जाएगी। नए सिस्टम में चालक को सिर्फ निगरानी करनी है, बाकी काम सिग्नल सिस्टम करेगा। इसके लिए ट्रैक पर सेंसर सिग्नल कंट्रोल यूनिट लगाई जाती है। मोनो के पूरे माग्र पर 32 जगहों पर इलेक्ट्रॉनिग इंटरलॉकिंग लगने हैं। 32 जगहों में से 5 जगह पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगाने का काम पूरा हो गया है। 260 वाईफाई एक्सेस पॉइंटस, 500 आरएफआईडी और 90 ट्रेन डिटेक्शन सिस्टम लगाने का काम कर लिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Sep 2025 17:49:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई मोनोरेल : सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों की सुरक्षा खतरे में; अधिकांश स्टेशनों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति नहीं की गई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अधिक यात्रियों की भीड़ से मोनोरेल का एक रेक झुकने की घटना सामने आने के बाद भी मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मोनोरेल की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया है। भीड़ नियंत्रण के लिए स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त सुरक्षा रक्षक अब तक नियुक्त नहीं किए गए हैं। कम फेरे और यात्रियों की सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43734/mumbai-monorail--passenger-safety-at-risk-due-to-lack-of-facilities--additional-security-personnel-not-deployed-at-most-stations"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-08t120737.479.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>अधिक यात्रियों की भीड़ से मोनोरेल का एक रेक झुकने की घटना सामने आने के बाद भी मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मोनोरेल की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया है। भीड़ नियंत्रण के लिए स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त सुरक्षा रक्षक अब तक नियुक्त नहीं किए गए हैं। कम फेरे और यात्रियों की सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है। १९ अगस्त को मैसूर कॉलोनी स्टेशन के पास अधिक यात्रियों की वजह से मोनोरेल का एक रेक झुक गया था। इसमें ५०० से ज्यादा यात्री फंस गए थे। उस घटना के बाद एमएमआरडीए से मोनोरेल सेवा को सुरक्षित बनाने के लिए तुरंत कदम उठाने की उम्मीद थी। लेकिन घटना को दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी एमएमआरडीए प्रशासन सुरक्षा के मामले में लापरवाह ही बना हुआ है। अधिकांश स्टेशनों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति नहीं की गई है।</p>
<p> </p>
<p>पिछले दस दिनों में बड़ी संख्या में गणेशभक्तों ने चेंबूर से दक्षिण मुंबई तक मोनोरेल से यात्रा की। संभावित भीड़ को देखते हुए भी एमएमआरडीए ने सुरक्षा पर गंभीरता नहीं दिखाई। इस पर नियमित यात्रियों ने नाराजगी जताई। ‘मैसूर कॉलोनी की घटना के बावजूद प्रशासन सुरक्षा को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इस कारण हमें हमेशा यात्रा के दौरान डर लगा रहता है,’ ऐसा एक यात्री ने कहा।</p>
<p><strong>टिकट खिड़कियों के पास अंधेरा</strong><br />दक्षिण मुंबई का मोनोरेल का लोअर परेल स्टेशन सबसे भीड़ वाले स्टेशनों में से एक है। यहां से पश्चिम और मध्य रेलवे तक जाने वाले यात्रियों की आवाजाही रहती है। लोअर परेल सहित कई स्टेशनों पर टिकट खिड़कियों के आस-पास पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए अंधेरे से होकर गुजरना पड़ता है। इससे महिला यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं।</p>
<p><strong>ग्राहक सेवा केंद्र में कर्मचारी ही नहीं</strong><br />एमएमआरडीए ने यात्रियों की सुविधा के लिए मोनोरेल स्टेशनों पर ग्राहक सेवा केंद्र शुरू किए हैं। लेकिन लोअर परेल स्टेशन पर देखा गया कि इन केंद्रों पर कर्मचारी ही मौजूद नहीं रहते। इंडिकेटर्स पर भी ट्रेनों की अग्रिम सूचना नहीं दी जाती। इसके कारण यात्रियों को असमंजस की स्थिति में रहना पड़ता है। खास बात यह है कि प्लेटफॉर्म के किनारे लगी जालियों के कुछ हिस्से खुले रहते हैं। वहां सुरक्षा रक्षक तैनात न होने से बच्चों के ट्रैक के पास जाने का खतरा बढ़ जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 12:11:28 +0530</pubDate>
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