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                <title>cameras - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>cameras RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: पश्चिम रेलवे के 80 फीसदी कोच में नहीं हैं सीसीटीवी, लोकल के डिब्बों में टॉकबैक तो लगे, ज्यादातर हैं खराब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकल ट्रेन में हुए मर्डर के बाद यात्री सुरक्षा का विषय एक बार फिर से गरमा गया है। करीब 30 लाख यात्री प्रतिदिन लोकल से यात्रा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी कड़ी में महिलाओं की सुरक्षा को समझने के लिए एनबीटी की प्रतिनिधि ने स्वयं महिलाओं के डिब्बे में यात्रा कर टॉक बैक सिस्टम का जायजा लिया। यह चेकिंग 5 ट्रेनों में की गई, जिनमे से 3 ट्रेनों में कोई रिप्लाई नहीं आया, 1 ट्रेन में रिप्लाई आया पर कुछ मदद नहीं मिली। वही 1 लोकल में रिप्लाई के साथ -साथ मदद भी मिली। इसी के साथ ही करीब 80% लोकल के डिब्बों में (जनरल और महिला) में सीसीटीवी भी नहीं लगे है। </p><p><br /></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50400/80-percent-coaches-of-western-railways-do-not-have-cctv"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/cameras-to-keep-eye-on_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:  </strong>लोकल ट्रेन में हुए मर्डर के बाद यात्री सुरक्षा का विषय एक बार फिर से गरमा गया है। करीब 30 लाख यात्री प्रतिदिन लोकल से यात्रा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी कड़ी में महिलाओं की सुरक्षा को समझने के लिए एनबीटी की प्रतिनिधि ने स्वयं महिलाओं के डिब्बे में यात्रा कर टॉक बैक सिस्टम का जायजा लिया। यह चेकिंग 5 ट्रेनों में की गई, जिनमे से 3 ट्रेनों में कोई रिप्लाई नहीं आया, 1 ट्रेन में रिप्लाई आया पर कुछ मदद नहीं मिली। वही 1 लोकल में रिप्लाई के साथ -साथ मदद भी मिली। इसी के साथ ही करीब 80% लोकल के डिब्बों में (जनरल और महिला) में सीसीटीवी भी नहीं लगे है। <br /><strong></strong></p><p><strong><br /></strong></p><p><strong>1. 60 % टॉकबैक नहीं किया काम </strong><br />चर्चगेट से विरार जाने वाली ट्रेन शामिल: शाम के समय चर्चगेट से रवाना होने वाली 5: 12 की विरार फ़ास्ट में चढ़ने के बाद जांच के लिए टॉक बैक पर लगातार क्लिक करके मदद मांगी गई। लेकिन गॉर्ड की तरफ से मुंबई सेंट्रल आने तक कोई रिप्लाई नहीं किया गया - ऐसा ही 2 और लोकल में देखा गया। जहां मदद के तौर कोई हेल्प नहीं मिली। यहां तक की 'टॉक' का लाइट भी नहीं जल रहा था।<br /><strong></strong></p><p><strong>2. टॉकबैक पर गार्ड ने किया कनेक्ट</strong><br />रात 9 बजे का समय था। एसी लोकल चर्चगेट से रवाना हुई। इसी दौरान करीब चरनी रोड के एक मेंटली इल औरत ने ट्रेन में दस्तक दी। सभी महिलाओं को परेशान करने लगी। इस दौरान मुंबई सेंट्रल में टॉक बेक सिस्टम पर क्लिक कर जानकारी दी गई। तुरंत किसी का रिप्लाई नहीं आया, लेकिन दादर स्टेशन पर एक गार्ड की आवाज आई, क्या हुआ - उत्तर में सभी जवाब दिए गए। हालांकि मदद के रूप में कोई नहीं आया। यानी 20 फीसदी ऐसे मामले मिले।<br /><strong></strong></p><p><strong>3. 20% टॉक बैक ने किया काम, मिली मदद</strong><br />शाम की मलाड से चर्चगेट आ रही फास्ट लोकल में टॉक बैक ने किया काम साथ ही जरूरी मदद भी मिली। पड़ताल के दौरान प्रतिनिधि ने मुंबई सेंट्रल से यह ट्रेन 5 :22 बजे पकड़ी। टॉक बैक पर मदद के लिए जानकारी दी। वहां से रिप्लाई भी आया। गॉर्ड ने जानकारी ली और उसे कंट्रोल रूम तक पहुंचाया। अगले स्टेशन तक मदद मिल गई।<br /><strong></strong></p><p><strong>कैसे करता है टॉक बैक काम </strong><br />पश्चिम रेलवे के गार्ड (ट्रेन मैनेजर)अशोक अवघाड़े ने बताया कि, जब कोई टॉक बैक सिस्टम पर दिए गए बटन पर क्लिक करता है, तब गौरब केबिन में एक अलार्म बजता है और लाइट दिखती है। गॉर्ड भी अपने सिस्टम से यात्री से कनेक्ट करता है। समस्या जानने के बाद सीधे कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया जाता है और जीआरपी और आरपीएफ अगले स्टेशन पर मदद के लिए पहुंचती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:04:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिवंडी के 51 स्कूलों में सीसीटीवी लगाने की तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भिवंडी-निज़ामपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के बिजली विभाग ने शहर के 51 स्कूल भवनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए लगभग 75 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी और फंडिंग के लिए जिला योजना समिति को भेजा गया है। हालांकि, स्कूलों में सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49343/preparation-to-install-cctv-in-51-schools-of-bhiwandi-questions"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-20t134455.239.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भिवंडी : </strong>भिवंडी-निज़ामपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के बिजली विभाग ने शहर के 51 स्कूल भवनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए लगभग 75 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी और फंडिंग के लिए जिला योजना समिति को भेजा गया है। हालांकि, स्कूलों में सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।</p>
<p> </p>
<p>राज्य सरकार के निर्देशों के बावजूद, जिनमें स्कूलों में सीसीटीवी सर्विलांस अनिवार्य करने की बात कही गई है, भिवंडी के कई सिविक स्कूल अभी भी बुनियादी सुरक्षा ढांचे के बिना संचालित हो रहे हैं। कैमरे और सुरक्षा कर्मियों की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि इससे हजारों छात्रों और स्कूल संपत्तियों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। फिलहाल, बीएनएमसी कुल 97 स्कूलों का संचालन कर रही है, जिनमें 46 भवनों में 86 प्राथमिक और 11 माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इन स्कूलों में कुल 24,563 छात्र पढ़ते हैं। लेकिन कई स्कूलों में चोरी, तोड़फोड़ और अनधिकृत प्रवेश की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।</p>
<p>स्कूल अधिकारियों के अनुसार स्थिति गंभीर होती जा रही है। एक शिक्षक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के कारण जरूरी सामान अक्सर सुरक्षा के लिए स्कूल परिसर के बाहर रखा जाता है। वहीं एक सेंटर हेड ने बताया कि आसपास के बच्चे बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश कर खेलते हैं, जिससे भवन और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है। कई मामलों में सेंधमारी के बाद कंप्यूटर और अन्य कीमती सामान भी चोरी हो चुके हैं।</p>
<p>हालांकि स्थानीय पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में स्कूल स्टाफ और स्थानीय लोगों को खुद आगे आकर स्थिति संभालनी पड़ रही है। कुछ जगहों पर लोगों ने अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था शुरू की है। नारली तालाब भवन में, जहां छह सिविक स्कूल संचालित होते हैं, शिक्षकों ने मिलकर अपने खर्च पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं।</p>
<p>इसी तरह एक पूर्व छात्र ने स्कूल नंबर 45 में कैमरे लगाने के लिए आर्थिक मदद दी, जो यह दिखाता है कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की कमी के कारण स्थानीय स्तर पर पहल करनी पड़ रही है। इस पूरे मामले ने भिवंडी के सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद फंडिंग और गार्ड्स की नियुक्ति पर निर्णय न होने से स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:45:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : रेलवे स्टेशनों पर अत्याधुनिक फेशियल रिकग्निशन की नजर! 463 कैमरों से अपराधियों पर ऐसे कस रहा शिकंजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रेलवे स्टेशनों पर अब अपराधियों के लिए बच निकलना आसान नहीं रहा. अत्याधुनिक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद से पुलिस और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स  तेजी से अपराध सुलझा रही है और संदिग्धों की पहचान कर रही है. मुंबई डिवीजन में आरपीएफ के कुल 3,675 सीसीटीवी कैमरों में से 463 कैमरे इस सिस्टम से जुड़े हुए हैं, जो चर्चगेट से लेकर सूरत और जलगांव तक फैले 114 स्टेशनों को कवर करते हैं. </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48695/463-cameras-keeping-an-eye-on-modern-facial-recognition-at"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-25t112354.515.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>रेलवे स्टेशनों पर अब अपराधियों के लिए बच निकलना आसान नहीं रहा. अत्याधुनिक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद से पुलिस और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स  तेजी से अपराध सुलझा रही है और संदिग्धों की पहचान कर रही है. मुंबई डिवीजन में आरपीएफ के कुल 3,675 सीसीटीवी कैमरों में से 463 कैमरे इस सिस्टम से जुड़े हुए हैं, जो चर्चगेट से लेकर सूरत और जलगांव तक फैले 114 स्टेशनों को कवर करते हैं. </p>
<p> </p>
<p><strong>पुलिस को मिली बड़ी मदद</strong><br />इस तकनीक ने हाल के कई मामलों में अहम भूमिका निभाई है. पुर्तगाली महिला से छेड़छाड़ करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी, गुमशुदा 14 वर्षीय बच्चे का पता लगाना और हत्या जैसे मामलों को सुलझाने में एफआरएस ने पुलिस को बड़ी मदद दी है. </p>
<p>यह सिस्टम चेहरे की बनावट जैसे आंखों के बीच की दूरी, नाक, कान और चेहरे की संरचना का विश्लेषण कर एक यूनिक फेसप्रिंट तैयार करता है. जैसे ही कोई संदिग्ध व्यक्ति कैमरे के सामने आता है, सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है.</p>
<p><strong>मुंबई पुलिस के कैमरों से जोड़ने की तैयारी</strong><br />एफआरएस नेटवर्क को मुंबई पुलिस के हजारों कैमरों से भी जोड़ने की तैयारी चल रही है, जिससे शहरभर में निगरानी और मजबूत होगी. साथ ही, 2024 में ही एनआईए और सीबीआई जैसी एजेंसियों द्वारा ट्रैक किए जा रहे 10,000 से ज्यादा लोगों की तस्वीरें इस सिस्टम में अपलोड की गई हैं.</p>
<p>पश्चिम रेलवे में सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने बताया कि मुंबई वेस्टर्न रेलवे देश का पहला ऐसा डिवीजन है जहां इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू किया गया. अब इसे देशभर के अन्य रेलवे नेटवर्क में भी विस्तार देने की योजना है. खास बात यह है कि यह सिस्टम सिर्फ अपराधियों को पकड़ने में ही नहीं, बल्कि भीड़भाड़ वाले स्टेशनों से गुम हुए बच्चों को ढूंढने में भी बेहद कारगर साबित हो रहा है. </p>
<p><strong>अब तक लगे 4500 सीसीटीवी</strong><br />उन्होंने आगे बताया की यात्रियों की सुरक्षा और उनके प्रति सावधानी बरतना पश्चिमी रेलवे के लिए सर्वोपरि है, सुरक्षा के लिए रेलवे के सभी स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों के ज़रिये कड़ी निगरानी की जाती है. अभी तक लगभग 4500 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं और आने वाले एक-दो सालों में यह संख्या बढ़कर 7000 से भी ऊपर हो जाएगी. </p>
<p><strong>आधुनिक तकनीकों का किया जा रहा इस्तेमाल</strong><br />विनीत अभिषेक ने ये भी बताया कि ये कैमरे सिर्फ वीडियो ही नहीं रिकॉर्ड करते, बल्कि इनमें फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक), क्राउड मैनेजमेंट (भीड़ नियंत्रण) के लिए डिसीजन-मेकिंग सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है.</p>
<p><strong>इन मामलों में मिली मदद</strong><br />इस तकनीक की मदद से रेलवे को अपराधियों को पकड़ने, खोए हुए बच्चों को खोजने और रेलवे परिसर के अंदर या बाहर होने वाले अपराधों को सुलझाने में काफी मदद मिली है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:24:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : ट्रैफिक पुलिस पुराने कैमरों को जगह होगी हाई-टेक बॉडीकैम से लाइव निगरानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की सड़कों पर नियम तोड़ने वाले अब ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे। मुंबई की ट्रैफिक पुलिस अपने पुराने और खराब बैटरी बैकअप वाले बॉडी-वर्न कैमरों को बदलकर लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाले एडवांस्ड कैमरों से लैस होने जा रही है। दरअसल, मुंबई की सड़ों पर लगे उन कैमरों को अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो महज 15-20 मिनट में बंद हो जाते थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47597/mumbai-traffic-police-will-replace-old-cameras-with-live-surveillance"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-09t120841.424.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई की सड़कों पर नियम तोड़ने वाले अब ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे। मुंबई की ट्रैफिक पुलिस अपने पुराने और खराब बैटरी बैकअप वाले बॉडी-वर्न कैमरों को बदलकर लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाले एडवांस्ड कैमरों से लैस होने जा रही है। दरअसल, मुंबई की सड़ों पर लगे उन कैमरों को अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो महज 15-20 मिनट में बंद हो जाते थे। नए कैमरे न केवल लंबी बैटरी लाइफ देंगे, बल्कि सीधे कंट्रोल रूम से जुड़कर ऑडियो-वीडियो की लाइव स्ट्रीमिंग भी करेंगे। इससे ट्रैफिक पुलिस के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और विवाद की स्थिति में सटीक सबूत मिल सकेंगे। </p>
<p> </p>
<p><strong>सीएम फडणवीस ने की घोषणा</strong><br />महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि मुंबई ट्रैफिक पुलिस को जल्द ही एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वाले बॉडी-वर्न कैमरे दिए जाएंगे। फिलहाल, ट्रैफिक पुलिसकर्मी लगभग 1,800 बॉडी-वर्न कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन बैटरी से जुड़ी लगातार समस्याओं के कारण इन डिवाइस से दिक्कतें आ रही हैं। पुराने कैमरों के बारे में दावा किया गया था कि वे 14 घंटे का स्टैंडबाय टाइम और 10 घंटे की रिकॉर्डिंग देते हैं, लेकिन असल में, बैटरी खराब होने के कारण उनमें से कई सिर्फ 15 से 20 मिनट ही काम करते हैं।</p>
<p><strong>3,000 ट्रैफिक पुलिस</strong><br />मुंबई भर में लगभग 3,000 ट्रैफिक पुलिसकर्मी दो शिफ्ट में काम करते हैं। उनमें से ज्यादातर शहर की सड़कों पर ट्रैफिक को कंट्रोल करने और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैनात हैं। नए कैमरे लग जाने से मुंबई की सड़कों पर ट्रैफिक नियम तोड़कर छिपना मुश्किल हो जाएगा। हाल ही में सीनियर पुलिस अधिकारियों की एक मीटिंग में, नए बॉडी-वर्न कैमरे खरीदने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई और उसे मंजूरी दी गई। पुलिस विभाग के प्रमुख ने पुष्टि की है कि ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को जल्द ही नए और अपग्रेडेड कैमरे दिए जाएंगे।<br />इस्तेमाल में आने वाले कैमरे कौन से हैं-</p>
<p><strong>ब्रांड- संचार</strong><br />फीचर्स- ये डिवाइस वाटर-रेसिस्टेंट हैं और 36-मेगापिक्सल फोटोग्राफी, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग, नाइट विजन, GPS पोजिशनिंग और वाई-फाई कनेक्टिविटी को सपोर्ट करते हैं। इनमें एक डिजिटल डिस्प्ले, एक पुश-बटन रिकॉर्डिंग सिस्टम और ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम के साथ डायरेक्ट कनेक्शन की सुविधा भी है।</p>
<p>हर कैमरे में 128 GB इंटरनल स्टोरेज है, साथ ही 5 GB अतिरिक्त मेमोरी भी है, और यह 4,000 mAh की बैटरी से चलता है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह 14 घंटे का स्टैंडबाय टाइम और 10 घंटे तक का इस्तेमाल देता है। कंट्रोल रूम से जुड़ी लाइव रिकॉर्डिंग: बॉडी-वर्न कैमरे सीधे ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़े होते हैं। यूनिफॉर्म पर लगे कैमरे ऑडियो, वीडियो और फ़ोटो रिकॉर्ड करते हैं, जिससे कंट्रोल रूम रियल टाइम में लाइव फ़ुटेज मॉनिटर कर पाता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 12:09:41 +0530</pubDate>
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