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                <title>language - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई: यूपी में नहीं दे पाए नौकरी इसलिए मुंबई आए...मराठी भाषा के मुद्दे पर मंत्री प्रताप सरनाईक का अखिलेश यादव पर पलटवार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने पर राजनीति गरमाई हुई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक्स पोस्ट पर अब महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि मैं अखिलेश यादव से बस इतना कहना चाहूंगा कि उन्हें महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स के बारे में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बारे में सोचना चाहिए। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जो हमेशा कल्चर और सम्मान का ध्यान रखता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51541/minister-pratap-sarnaik-hit-back-at-akhilesh-yadav-on-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/untitled-3fsdf.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने पर राजनीति गरमाई हुई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक्स पोस्ट पर अब महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि मैं अखिलेश यादव से बस इतना कहना चाहूंगा कि उन्हें महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स के बारे में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बारे में सोचना चाहिए। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जो हमेशा कल्चर और सम्मान का ध्यान रखता है। पिछले कई सालों से नॉर्थ इंडियन लोगों को नौकरी के मौके नहीं मिले, जिसकी वजह से महाराष्ट्र पिछले 40-50 सालों से नॉर्थ इंडियंस को रोजी-रोटी दे रहा है। महायुति सरकार ऐसी सरकार है जो नौकरी देती है, छीनती नहीं। महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के निर्देश और ऑटो ड्राइवरों के विरोध पर अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट करके मामले को उठाया था। प्रताप सरनाईक ने अखिलेश यादव को निशाने पर लिया है।</p>
<p> </p>
<p><strong>अखिलेश यादव ने उठाया था मुद्दा</strong><br />अखिलेश यादव ने लिखा था कि हर राज्य की मातृभाषा का सम्मान और उत्थान होना चाहिए लेकिन किसी भी भाषा का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। इससे देश की भाषिक-भाविक एकता में दूरी और दुराव पैदा होता है। मुंबई में भाजपा के उत्तर भारतीय नेता हैं या भ्रष्टाचार में लीन होकर ठंडे पड़े हैं। क्या इस तरह की भाषा-ज्ञान की शर्त रखकर किसीको संपूर्ण देश में व्यवसाय करने की स्वतंत्रता के सांविधानिक अधिकार का हनन नहीं होता है? अगर ऐसा ही है तो फिर जो विदेशी कंपनियां मुंबई में काम कर रही हैं, उन पर भी ये शर्त लागू हो लेकिन होगी नहीं क्योंकि धन लोलुप भाजपा धनवानों के आगे कालीन की तरह बिछने को तैयार रहती है। भाजपा का सारा ज़ोर गरीबों, शोषितों, वंचितों और उपेक्षितों पर ही चलता है।<br />अखिलेश ने बीजेपी पर बोला था हमला<br />अखिलेश यादव ने लिखा था कि अगर ऐसा ही है तो मुंबई-महाराष्ट्र की भाजपा घोषित कर दे कि वो किसी हिंदी, ब्रज, बुंदेली, रोहेली-कौरवी, अवधी, भोजपुरी, मैथिली; हरियाणवी, गढ़वाली- कुमायूँनी; मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाती, मालवी, हाड़ौती, बागड़ी, शेखावाटी, मेवाड़ी; गुजराती, काठियावाड़ी, सुरती, चरोतरी, महसाणी; तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयाली, तुलु, ओड़िया, गंजामी, संबलपुरी-कोसली, बालेश्वरी देसिया; सिंधी, पंजाबी; कश्मीरी-कॉशुर, डोगरी, गोजरी, पहाड़ी, शिना, बाल्टी, लद्दाखी; असमिया, मणिपुरी-मेइतेइलोन, मिजो, कोकबोरोक, खासी, गारो, नागामी, बोडो, भीली, गोंडी, कुड़ुख, मुंडारी, संथाली व अन्य भाषा भाषियों का एक भी वोट नहीं लेगी। आखिर में उन्होंने लिखा था कि सरकारों को दिल भी बड़ा रखना चाहिए और दिमाग भी।</p>
<p>आप उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम हैं। आप अपने समय में नौकरी नहीं दे पाए, इसलिए ये लोग महाराष्ट्र आए और हमने उन्हें स्वीकार कर लिया। इसे यूपी में चुनावी एजेंडा न बनाएं। राज्य में, हमने 1600-1800 टीचर (मराठी पढ़ाने के लिए) रखे हैं। हम बस इतना कह रहे हैं कि पैसेंजर से मराठी में बात करें, मराठी प्राइड बनाए रखें। आपको 1 महीने का समय दिया जाएगा और उसके बाद 3 महीने का समय दिया जाएगा। अगर आप अभी भी मराठी नहीं सीख पा रहे हैं, तो आपका बैज कैंसिल कर दिया जाएगा। क्योंकि यह महाराष्ट्र है। राज्य रोज़ी-रोटी देना जानता है, लेकिन महाराष्ट्र के गर्व और संस्कृति का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 12:13:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: ऑटो टैक्सी चालकों की अब होगी भाषा जांच महाराष्ट्र सरकार का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने के नियम को लेकर राज्य सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि जिन चालकों को मराठी भाषा का जरूरी ज्ञान नहीं है, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के तहत ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े चालकों को यात्रियों से संवाद करने के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना जरूरी होगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51456/mumbai-auto-taxi-drivers-will-now-have-language-test-maharashtra"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-20t113300.121.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने के नियम को लेकर राज्य सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि जिन चालकों को मराठी भाषा का जरूरी ज्ञान नहीं है, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के तहत ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े चालकों को यात्रियों से संवाद करने के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना जरूरी होगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों को पहले नोटिस दिया जाएगा और उन्हें मराठी सीखने का अवसर मिलेगा।</p>
<p> </p>
<p>नए प्रावधानों के अनुसार, अगर जांच के दौरान कोई चालक मराठी भाषा के आवश्यक ज्ञान के बिना पाया जाता है तो उसे सुधार के लिए समय दिया जाएगा। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर उसका लाइसेंस या ड्राइविंग ऑथराइजेशन निलंबित किया जा सकता है। लगातार उल्लंघन की स्थिति में परमिट रद्द करने तक की कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। परिवहन विभाग ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों को इस नियम को लागू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को चालकों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने को कहा गया है। नए बैज के लिए आवेदन करने वाले चालकों की मराठी भाषा क्षमता की जांच प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है। कई बार भाषा को लेकर यात्रियों और ड्राइवरों के बीच विवाद की स्थिति बनती है, जिसे कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।</p>
<p>हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ लोगों का मानना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान जरूरी है, जबकि कुछ संगठनों ने दूसरे राज्यों से आए चालकों को अतिरिक्त समय देने की मांग की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी की रोजी-रोटी प्रभावित करना उद्देश्य नहीं है, लेकिन नियमों का पालन करना जरूरी होगा। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के लोग ऑटो और टैक्सी सेवाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार के इस फैसले का असर हजारों चालकों पर पड़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आरटीओ जांच अभियान के दौरान कितनी सख्ती बरती जाती है और कितने चालकों पर कार्रवाई होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:51:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 1 लाख से अधिक टैक्सी ड्राइवरों ने सीखी कामकाजी मराठी, यात्रियों से अब स्थानीय भाषा में करेंगे संवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में यात्रियों और टैक्सी चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राज्य में 1 लाख से अधिक टैक्सी ड्राइवरों ने कामकाजी मराठी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय भाषा में संवाद को बढ़ावा देना, यात्रियों की सुविधा बढ़ाना और सेवा की गुणवत्ता में सुधार करना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद चालक अब मराठी में सामान्य बातचीत, दिशा-निर्देश समझने, यात्रियों की जरूरतों को बेहतर ढंग से जानने और स्थानीय प्रशासन से जुड़े आवश्यक संवाद करने में सक्षम होंगे। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51192/mumbai-more-than-1-lakh-taxi-drivers-have-learned-working"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/image_f982a1c81.png" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में यात्रियों और टैक्सी चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राज्य में 1 लाख से अधिक टैक्सी ड्राइवरों ने कामकाजी मराठी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय भाषा में संवाद को बढ़ावा देना, यात्रियों की सुविधा बढ़ाना और सेवा की गुणवत्ता में सुधार करना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद चालक अब मराठी में सामान्य बातचीत, दिशा-निर्देश समझने, यात्रियों की जरूरतों को बेहतर ढंग से जानने और स्थानीय प्रशासन से जुड़े आवश्यक संवाद करने में सक्षम होंगे। </p>
<p> </p>
<p>क्यों शुरू की गई यह पहल? महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों, विशेषकर मुंबई, पुणे, ठाणे और नवी मुंबई में बड़ी संख्या में विभिन्न राज्यों से आए टैक्सी चालक काम करते हैं। ऐसे में भाषा संबंधी दिक्कतें कई बार यात्रियों और चालकों के बीच संवाद में बाधा बनती थीं। इसी समस्या को दूर करने के लिए कामकाजी मराठी का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया, ताकि चालक रोजमर्रा के संवाद में मराठी का प्रभावी उपयोग कर सकें।</p>
<p><strong>प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?</strong><br />कार्यक्रम के तहत टैक्सी चालकों को मराठी भाषा की बुनियादी समझ और रोजमर्रा के उपयोग से जुड़े विषय सिखाए गए, जिनमें— यात्रियों का स्वागत करना। गंतव्य और मार्ग से जुड़ी बातचीत। किराया और भुगतान संबंधी संवाद। आपातकालीन परिस्थितियों में आवश्यक बातचीत। स्थानीय प्रशासन और यातायात से जुड़े सामान्य शब्द। यात्रियों को क्या होगा फायदा? इस पहल से यात्रियों को कई लाभ मिलने की उम्मीद है— स्थानीय भाषा में बेहतर संवाद। यात्रा के दौरान कम भ्रम।</p>
<p><strong>सेवा की गुणवत्ता में सुधार</strong><br /> पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक अनुभव। भाषा और रोजगार का संतुलन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान सेवा क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए अतिरिक्त कौशल के रूप में काम करता है। इससे न केवल ग्राहकों का अनुभव बेहतर होता है, बल्कि चालकों के लिए भी रोजगार के अवसर मजबूत हो सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 13:56:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागपुर : नाना पटोले ने ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा को ज़रूरी बनाने के महाराष्ट्र सरकार के कदम की आलोचना की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने शनिवार को महाराष्ट्र में ऑटो टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी ज़रूरी करने के राज्य सरकार के कदम की आलोचना की। उन्होंने इस कदम को "एक बेवकूफी भरा विचार" और महाराष्ट्र को तोड़ने और उसकी विरासत को खत्म करने की कोशिश बताया। नाना पटोले ने चेतावनी दी कि महाराष्ट्र सरकार लोगों पर मराठी थोपकर अपनी ही बर्बादी कर रही है। पटोले ने कहा, "लगता है सरकार अपनी ही बर्बादी पर तुली हुई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49135/nagpur-nana-patole-criticizes-maharashtra-governments-move-to-make-marathi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-11t193556.859.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नागपुर :</strong> कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने शनिवार को महाराष्ट्र में ऑटो टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी ज़रूरी करने के राज्य सरकार के कदम की आलोचना की। उन्होंने इस कदम को "एक बेवकूफी भरा विचार" और महाराष्ट्र को तोड़ने और उसकी विरासत को खत्म करने की कोशिश बताया। नाना पटोले ने चेतावनी दी कि महाराष्ट्र सरकार लोगों पर मराठी थोपकर अपनी ही बर्बादी कर रही है। पटोले ने कहा, "लगता है सरकार अपनी ही बर्बादी पर तुली हुई है। हम भारतीय हैं, और हमारे देश की पहचान इसकी भाषाओं, धर्मों और जातियों की विविधता में है... भाषा के आधार पर महाराष्ट्र को तोड़ने और उसकी विरासत को खत्म करने की कोशिश एक बेवकूफी भरा विचार है।"</p>
<p> </p>
<p>इससे पहले, समाजवादी पार्टी  के नेता अबू आसिम आज़मी ने भी इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि हर राज्य की अपनी भाषा होती है और स्टूडेंट्स पर दबाव डालना सही नहीं है। इस मुद्दे पर आज़मी ने कहा, "हर राज्य की अपनी भाषा होती है। अगर इसे ज़रूरी बनाना है, तो स्कूलों को पहले मराठी सिखानी चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जो अच्छे से नहीं जानते। हर देश की अपनी भाषा होती है, तो हिंदी, जो देश की भाषा है, कहाँ बोली जाएगी?"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "अगर आप चाहते हैं कि लोग मराठी सीखें, तो किताबें और क्लास दें, उन पर दबाव न डालें।"ये रिएक्शन राज्य के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाइक के इस ऐलान के बाद आए हैं कि राज्य में रिक्शा चलाने के लिए मराठी भाषा ज़रूरी कर दी जाएगी।एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, सरनाइक ने कहा कि यह फैसला राज्य के सभी रिक्शा ड्राइवरों पर लागू होता है, न कि सिर्फ़ मीरा भयंदर पर, जैसा कि पहले बताया गया था।ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर सरनाइक ने चेतावनी दी कि 1 मई तक चेकिंग के बाद नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। नई पहल के तहत ड्राइवरों को यह दिखाना होगा कि वे मराठी पढ़, लिख और बोल सकते हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद ट्रांसपोर्ट लाइसेंस जारी करने में होने वाली गड़बड़ियों से निपटना है और इसे समय के साथ पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 19:37:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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