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                <title>खसरे के टीके से ११ लाख बच्चों का वंचित</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, </strong>पिछले साल खसरे के पहले और महत्वपूर्ण टीके से ११ लाख बच्चों का वंचित रहना है। इसका खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एक रिपोर्ट में हुआ है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/26226/11-lakh-children-deprived-of-measles-vaccine"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-11/khasrassqw.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली, </strong>पिछले साल खसरे के पहले और महत्वपूर्ण टीके से ११ लाख बच्चों का वंचित रहना है। इसका खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एक रिपोर्ट में हुआ है। उल्लेखनीय है कि खसरे के टीके की दो खुराक जीवनभर के लिए ९७ फीसदी सुरक्षा प्रदान करती हैं। एक खुराक से सुरक्षा कमजोर होने की संभावना है। इस बीमारी में अमूमन तेज बुखार, खांसी, नाक बहना और लाल चकत्ते होते हैं। हालांकि, गंभीर लक्षण जैसे दिमाग पर सूजन, निमोनिया और सांस लेने में समस्या और गंभीर दस्त जैसी जटिलताएं जानलेवा साबित हो सकती हैं। जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट में हिंदुस्थान को उन १० देशों में शामिल किया गया है, जहां ऐसे बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, जिन्हें पहला टीका नहीं मिला है। इतना ही नहीं भारत उन ३७ देशों में भी शामिल है, जहां इस बीमारी का बड़ा प्रकोप देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, साल २०२२ में देशभर में खसरे के ४०,९६७ मामले दर्ज हुए थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर कोविड महामारी के दौरान खसरा टीकाकरण २००८ के बाद से सबसे निचले स्तर पर गिर गया, जिससे २०२२ में मामलों में १८ फीसदी और मौतों में ४३ फीसदी की वृद्धि हुई।<br />रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर ३३ मिलियन बच्चे या तो दोनों खुराक या दूसरी खुराक लेने से चूक गए। मुख्य रूप से पांच राज्यों बिहार, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में खसरे के मामलों में वृद्धि हुई। साल २०२२ में महाराष्ट्र में खसरे से १३ मौतें हुई थीं।<br />केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए अनुमानित ११ लाख बच्चों के खसरे का पहला टीका लेने से चूकने की रिपोर्ट को गलत करार दिया है। ये रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और सच्ची तस्वीर नहीं दर्शाती। </p>]]>
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                <pubDate>Fri, 24 Nov 2023 10:43:07 +0530</pubDate>
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