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                <title>directs - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : महाराष्ट्र में रिजल्ट के तुरंत बाद डिजीलॉकर पर मिलेगी डिग्री, मंत्री का निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने निर्देश दिया कि परीक्षा परिणाम घोषित होने और जरूरी सत्यापन पूरा होने के तुरंत बाद छात्रों की डिग्री प्रमाणपत्र डिजीलॉकर पर अपलोड किए जाएं। इसके लिए छात्रों को दीक्षांत समारोह तक इंतजार नहीं कराना पड़ेगा। मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि परीक्षा परिणाम आने के तुरंत बाद कई छात्र विदेशों की यूनिवर्सिटी, उच्च शिक्षा संस्थानों, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन परिणाम घोषित होने और दीक्षांत समारोह के बीच लंबे अंतर के कारण छात्रों को तय समय सीमा में डिग्री प्रमाणपत्र जमा करने में दिक्कत होती है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49585/degree-ministers-instructions-will-be-available-on-digilocker-immediately-after"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-30t120141.584.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने निर्देश दिया कि परीक्षा परिणाम घोषित होने और जरूरी सत्यापन पूरा होने के तुरंत बाद छात्रों की डिग्री प्रमाणपत्र डिजीलॉकर पर अपलोड किए जाएं। इसके लिए छात्रों को दीक्षांत समारोह तक इंतजार नहीं कराना पड़ेगा। मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि परीक्षा परिणाम आने के तुरंत बाद कई छात्र विदेशों की यूनिवर्सिटी, उच्च शिक्षा संस्थानों, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन परिणाम घोषित होने और दीक्षांत समारोह के बीच लंबे अंतर के कारण छात्रों को तय समय सीमा में डिग्री प्रमाणपत्र जमा करने में दिक्कत होती है।</p>
<p> </p>
<p>मंत्री ने कहा कि डिग्री प्रमाणपत्र मिलने में देरी के कारण छात्रों को पढ़ाई या करियर के मौके नहीं गंवाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई छात्र सफलतापूर्वक कोर्स पूरा कर ले और उसका परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित हो जाए, सत्यापित डिग्री प्रमाणपत्र जल्द से जल्द डिजिटल रूप में उपलब्ध करा दिया जाना चाहिए। चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि उन्होंने उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि राज्य की सभी यूनिवर्सिटी डिजीलॉकर पर डिग्री प्रमाणपत्र अपलोड करने की एक समान प्रक्रिया अपनाएं। उन्होंने इस संबंध में जल्द से जल्द सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी करने के भी निर्देश दिए हैं।</p>
<p>मंत्री ने कहा, ''इस फैसले से भारत और विदेश में उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी अवसरों, इंटर्नशिप और रोजगार के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही परिणाम के तुरंत बाद फिजिकल डिग्री के लिए बार-बार यूनिवर्सिटी के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम होगी।'' उन्होंने कहा कि डिजीलॉकर छात्रों को सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज देगा, जिसका इस्तेमाल वे शैक्षणिक और पेशेवर जरूरतों के लिए कभी भी कर सकेंगे। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि डिग्री प्रमाणपत्र मिलने में प्रक्रियागत देरी के कारण कोई छात्र किसी अवसर से वंचित न रह जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:03:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए कड़ा वेरिफिकेशन और रेगुलेशन लागू करने का निर्देश दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के लेबर मिनिस्टर आकाश फुंडकर ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, गिग इकॉनमी और डिलीवरी सर्विस में काम करने वाले वर्कर्स के लिए कड़े वेरिफिकेशन प्रोसेस लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने इस दौरान कस्टमर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सर्विस सुरक्षित, भरोसेमंद और कानूनी दायरे में होनी चाहिए। यह निर्देश लेबर और होम डिपार्टमेंट की जॉइंट मीटिंग में जारी किया गया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49040/mumbai-government-directs-to-implement-strict-verification-and-regulation-for"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(80).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के लेबर मिनिस्टर आकाश फुंडकर ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, गिग इकॉनमी और डिलीवरी सर्विस में काम करने वाले वर्कर्स के लिए कड़े वेरिफिकेशन प्रोसेस लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने इस दौरान कस्टमर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सर्विस सुरक्षित, भरोसेमंद और कानूनी दायरे में होनी चाहिए। यह निर्देश लेबर और होम डिपार्टमेंट की जॉइंट मीटिंग में जारी किया गया। मिनिस्टर ने कहा कि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक बड़ा और यूनिफॉर्म रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की आवश्यकता है, ताकि वर्कर्स के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और उनके काम की कानूनी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट हों।</p>
<p> </p>
<p>अधिकारियों ने मीटिंग में ज़ोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों के ऑनलाइन और “फेसलेस” रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पर चर्चा की। वर्तमान में ये कंपनियाँ अक्सर थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन एजेंसियों पर निर्भर रहती हैं, जिससे उनकी कानूनी स्टैंडर्ड, अकाउंटेबिलिटी और एम्प्लॉयर-एम्प्लॉई संबंधों में अस्पष्टता पैदा होती है। मिनिस्टर फुंडकर ने स्पष्ट किया कि कंपनियों को अपने गिग वर्कर्स के वेरिफिकेशन की पूरी ज़िम्मेदारी लेनी होगी।</p>
<p>मीटिंग में यह भी तय किया गया कि सभी डिपार्टमेंट मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि डिलीवरी वाहनों का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन सही हो, ड्राइवरों के पास वैध लाइसेंस हों और पेमेंट सिस्टम ट्रांसपेरेंट और नियमों के अनुसार संचालित हो। अधिकारियों ने कहा कि ऐप-बेस्ड ऑनबोर्डिंग सिस्टम में वर्कर्स से आधार, पैन, बैंक डिटेल्स, ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी के डॉक्यूमेंट्स, इंश्योरेंस और ई-श्रम रजिस्ट्रेशन जैसे डॉक्यूमेंट्स लेने चाहिए।</p>
<p>इसके अलावा, सभी गिग वर्कर्स का स्टेट साइबर डिपार्टमेंट में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने और उन्हें क्यूआर कोड-बेस्ड आइडेंटिफिकेशन देने के प्रपोज़ल पर चर्चा हुई। यह क्यूआर कोड वर्कर्स के प्रोफाइल और पहचान की जानकारी कस्टमर को रिक्वेस्ट पर दिखाने में मदद करेगा, जिससे कस्टमर और प्लेटफॉर्म दोनों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित होगी। मिनिस्टर ने जोर दिया कि गिग और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को केवल थर्ड-पार्टी एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद ही वर्कर्स की पहचान, लाइसेंस और अनुभव की जांच करें। उन्होंने कहा कि यह कदम गिग वर्कर्स और कस्टमर दोनों के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाएगा।</p>
<p>सरकारी अधिकारियों ने मीटिंग में यह भी स्पष्ट किया कि ऑनलाइन एग्रीगेटर्स और प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त रेगुलेशन लागू करने की तत्काल जरूरत है। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि एम्प्लॉयर-एम्प्लॉई संबंध और कानूनी जिम्मेदारियाँ भी स्पष्ट होंगी। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार का उद्देश्य गिग इकॉनमी और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म को सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनी दायरे में लाना है। मिनिस्टर फुंडकर ने सभी विभागों और कंपनियों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और कड़े वेरिफिकेशन प्रोसेस को लागू करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:18:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : जांच करें कि क्या मुंबई की सड़कों पर बांग्लादेशी प्रवासी फेरी लगा रहे हैं, कानून के अनुसार कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने BMC और पुलिस को निर्देश दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम और मुंबई पुलिस को आदेश दिया कि वे शहर की सड़कों पर फेरी लगाने वाले सभी लोगों की पहचान का 'पूरी तरह' से सत्यापन करें। साथ ही यह भी जांच करें कि क्या इनमें कोई 'बांग्लादेशी' या अन्य 'प्रवासी' शामिल हैं जो फेरी लगाने के काम में लगे हैं। यदि ऐसे लोग मिलते हैं, तो अधिकारियों को उनके खिलाफ 'उचित' कार्रवाई करने का आदेश दिया गया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48664/mumbai-should-investigate-whether-bangladeshi-migrants-are-hawking-on-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-24t120540.836.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम और मुंबई पुलिस को आदेश दिया कि वे शहर की सड़कों पर फेरी लगाने वाले सभी लोगों की पहचान का 'पूरी तरह' से सत्यापन करें। साथ ही यह भी जांच करें कि क्या इनमें कोई 'बांग्लादेशी' या अन्य 'प्रवासी' शामिल हैं जो फेरी लगाने के काम में लगे हैं। यदि ऐसे लोग मिलते हैं, तो अधिकारियों को उनके खिलाफ 'उचित' कार्रवाई करने का आदेश दिया गया। जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की खंडपीठ ने महाराष्ट्र हॉकर संघ (फेरीवालों का एक संगठन) द्वारा उनके समक्ष रखी गई दलील पर विचार किया। संघ ने तर्क दिया कि राज्य वर्तमान में बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है, जिनमें से कई कथित तौर पर फेरी लगाने के काम में लिप्त हैं। संघ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे प्रवासियों की मौजूदगी न केवल स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह स्थानीय विक्रेताओं और फेरीवालों के साथ भी रोज़ाना के झगड़ों का कारण बन रही है।</p>
<p> </p>
<p>खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में आदेश दिया, "बीएमसी और पुलिस तत्काल उन सभी व्यक्तियों की पहचान का पूरी तरह से सत्यापन करें, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन पर बांग्लादेशी या अन्य गैर-भारतीय नागरिक होने का आरोप है। ये वे लोग हैं, जो स्टॉल लगाते हैं, सामान बेचते हैं या फेरी लगाते हैं, अथवा ऐसे स्टॉल मालिकों, विक्रेताओं या फेरीवालों के सहायक या मददगार के तौर पर काम करते हैं। यदि कोई व्यक्ति अवैध प्रवासी पाया जाता है तो कानून के अनुसार उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सक्षम अधिकारियों द्वारा उसे वापस उसके देश भेजने  के कदम भी शामिल हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने में किसी भी प्रकार की विफलता के लिए संबंधित सभी अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा।"</p>
<p>बॉम्बे हाईकोर्ट जजों ने आगे कहा कि अदालत के लिए यह पूरी तरह से अविवेकपूर्ण और असंवेदनशील होगा कि वह मौजूदा खतरों और निष्क्रियता के परिणामों को नज़रअंदाज़ कर दे। इस मुद्दे को तब तक बढ़ने दे जब तक कि यह अंततः राज्य के सामने कहीं अधिक गंभीर परिणाम उत्पन्न न कर दे। जजों ने ज़ोर देकर कहा, "जो मौजूदा हालात हमारे संज्ञान में लाए गए, वे बेहद चिंताजनक हैं।</p>
<p>नागरिकों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लगातार गंभीर और बार-बार आने वाली रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें ये शामिल हैं: पैदल चलने वाले लोग फुटपाथ का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उन पर कब्ज़ा हो चुका है; इस वजह से उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता है। महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग नागरिक इन हालात का सबसे ज़्यादा खामियाज़ा भुगतते हैं और लगातार खतरे में रहते हैं; बुज़ुर्ग नागरिकों और दिव्यांग लोगों के लिए अपने घरों से सुरक्षित और सम्मान के साथ बाहर निकलना लगभग नामुमकिन हो गया। बहुत ज़्यादा भीड़भाड़ वाले इलाकों में, जहां लोगों की आवाजाही बहुत ज़्यादा होती है, ऐसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं, जहां अनुचित शारीरिक संपर्क की घटनाएं सामने आती हैं—खासकर महिलाओं के साथ—और ऐसे हालात में उनके पास शिकायत करने या मदद पाने का कोई खास ज़रिया नहीं होता।" <br /> इसके अलावा, जजों ने यह भी बताया कि फेरीवालों की समस्या की वजह से रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को उन इमारतों तक पहुंचने में दिक्कत होती है, जो सार्वजनिक सड़कों से लगी हुई हैं; और जब वे शिकायत करते हैं तो कथित तौर पर उन्हें धमकियों और डराने-धमकाने का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन सेवाएं—जैसे कि फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस—भी रिहायशी सोसाइटियों तक नहीं पहुंच पातीं, क्योंकि फेरीवालों ने संकरी गलियों पर कब्ज़ा कर रखा होता है। दुकानदारों ने अपनी दुकानों में भारी-भरकम निवेश किया होता है, लेकिन उनके दुकानों के दरवाज़े और डिस्प्ले विंडो (दिखाने वाली खिड़कियाँ) अक्सर बंद हो जाते हैं; इससे उनकी दुकानें राहगीरों को लगभग दिखाई ही नहीं देतीं, जिसका उनकी रोज़ी-रोटी पर बुरा असर पड़ता है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:06:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने केरल HC के आदेश पर लगाई रोक, मुनंबम जमीन विवाद में यथास्थिति बरकरार रखने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें मुनंबम की 404 एकड़ जमीन को वक्फ के रूप में अधिसूचित करने को केरल वक्फ बोर्ड की लैंड-ग्रैबिंग रणनीति बताया गया था। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि विवादित जमीन पर यथास्थिति बनी रहे। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को जमीन के स्वामित्व की जांच के लिए आयोग नियुक्त करने की अनुमति देने वाले आदेश पर रोक नहीं लगाई गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46147/supreme-court-stays-kerala-hc-order-and-directs-to-maintain"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download-(87).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें मुनंबम की 404 एकड़ जमीन को वक्फ के रूप में अधिसूचित करने को केरल वक्फ बोर्ड की लैंड-ग्रैबिंग रणनीति बताया गया था। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि विवादित जमीन पर यथास्थिति बनी रहे। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को जमीन के स्वामित्व की जांच के लिए आयोग नियुक्त करने की अनुमति देने वाले आदेश पर रोक नहीं लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।</p>
<p> </p>
<p><strong>हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर फैसला दिया- SC </strong><br />जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट को इस जमीन के स्वरूप पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं था, क्योंकि यह मामला पहले से ही वक्फ ट्रिब्यूनल के पास लंबित है। बेंच ने कहा हाईकोर्ट अपने अधिकार क्षेत्र से काफी आगे चला गया। मामले की गहराई जांचने का अधिकार ट्रिब्यूनल का है।</p>
<p><strong>क्या कहा याचिकाकर्ता और राज्य सरकार ने?</strong><br />याचिकाकर्ता केरल वक्फ संरक्षक वेदी की ओर से अदालत में कहा गया कि हाईकोर्ट ने वक्फ डीड की वैधता पर टिप्पणी करके गलती की है, क्योंकि यह मुद्दा हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उनके अनुसार, वक्फ डीड से जुड़ी जांच और निर्णय का अधिकार केवल वक्फ ट्रिब्यूनल के पास है, इसलिए हाईकोर्ट द्वारा किए गए अवलोकन उचित नहीं थे। वहीं, केरल सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विवादित भूमि की जांच के लिए आयोग की नियुक्ति बिल्कुल सही थी और आयोग अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप चुका है। सरकार का तर्क था कि याचिकाकर्ता का इस मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, इसलिए उनकी चुनौती टिकाऊ नहीं मानी जा सकती।</p>
<p><strong>जानिए क्या है पूरा मामला?</strong><br />मामला एर्नाकुलम जिले के चेरई और मुनंबम गांवों का है, जहां स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वक्फ बोर्ड उनकी निजी जमीन को अवैध रूप से वक्फ घोषित कर रहा है जबकि उनके पास रजिस्टर्ड डीड, लैंड टैक्स रसीदें और पुराने न्यायालय के फैसले मौजूद हैं। इसी विवाद को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे गरीब मछुआरे हैं और अचानक उनके घर व जमीन को वक्फ घोषित कर दिया गया। 2019 में बिना सुने जमीन का नोटिफिकेशन जारी किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/46147/supreme-court-stays-kerala-hc-order-and-directs-to-maintain</link>
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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 18:39:10 +0530</pubDate>
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