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                <title>deepfake - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>मुंबई में महिला डॉक्टर से 7 लाख की ठगी... ठगों ने दिखाया मुकेश अंबानी का डीपफेक वीडियो</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">शेयर ट्रेडिंग के नाम पर मुंबई की एक 54 साल की आयुर्वेदिक डॉक्टर ठगी का शिकार हो गई। अंधेरी की रहने वाली इस डॉक्टर को इंस्टाग्राम पर एक रील दिखाई गई थी। इस रील में मुकेश अंबानी एक कंपनी का प्रचार कर रहे थे। यह रील नकली थी और डॉक्टर को 7 लाख रुपये से ज़्यादा का चूना लगा दिया गया।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/31866/a-woman-doctor-was-duped-of-rs-7-lakhs-in-mumbai-fraudsters-showed-a-deepfake-video-of-mukesh-ambani"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-06/cfff.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई: </strong>शेयर ट्रेडिंग के नाम पर मुंबई की एक 54 साल की आयुर्वेदिक डॉक्टर ठगी का शिकार हो गई। अंधेरी की रहने वाली इस डॉक्टर को इंस्टाग्राम पर एक रील दिखाई गई थी। इस रील में मुकेश अंबानी एक कंपनी का प्रचार कर रहे थे। यह रील नकली थी और डॉक्टर को 7 लाख रुपये से ज़्यादा का चूना लगा दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टर केकेएच पाटिल ने बताया कि उन्हें इंस्टाग्राम पर एक वीडियो दिखा गया, जिसमें मुकेश अंबानी 'राजीव शर्मा ट्रेड ग्रुप' नाम की कंपनी और उसके 'बीसीएफ इन्वेस्टमेंट एकेडमी' का प्रचार कर रहे थे। वीडियो में अंबानी लोगों को इसमें निवेश करने के लिए कह रहे थे, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलेगा। डॉक्टर पाटिल को यकीन हो गया कि यह वीडियो असली है और उन्होंने 28 मई से 10 जून के बीच 16 अलग-अलग बैंक खातों में कुल 7.1 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टर पाटिल ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन रिसर्च भी की थी, जिसमें कंपनी के बीकेसी और लंदन में ऑफिस होने की जानकारी मिली थी। उन्हें लगा कि यह एक विश्वसनीय कंपनी है। लेकिन जब उन्होंने ट्रेडिंग वेबसाइट पर दिखाए गए 30 लाख रुपये के मुनाफे को निकालने की कोशिश की, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है।<br /><br />पुलिस ने बताया कि स्कैमर्स ने वीडियो बनाने के लिए डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल किया था। इस तकनीक से किसी भी व्यक्ति का नकली वीडियो बनाया जा सकता है। पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धाराओं के तहत पहचान छिपाने और धोखाधड़ी करने और आईटी अधिनियम की धारा के तहत पहचान की चोरी करने के आरोप में एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस बैंकों के नोडल अधिकारियों के संपर्क में है ताकि डॉक्टर पाटिल द्वारा ट्रांसफर किए गए पैसे को ब्लॉक किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी के लिए किया गयायह पहली बार नहीं है जब रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक के डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल शेयर ट्रेडिंग धोखाधड़ी के लिए किया गया है। इससे पहले मार्च में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें अंबानी दर्शकों से मुफ्त निवेश सलाह के लिए सोशल मीडिया पर उनके 'छात्र वीनीत' को फॉलो करने का आग्रह करते दिख रहे थे। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। निवेश करने से पहले कंपनी की अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लें।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Jun 2024 11:52:31 +0530</pubDate>
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                <title>डीपफेक के बाद अब ‘क्लियरफेक’ के खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली,</strong> डिजिटल और इंटरनेट के इस दौर में साइबर अपराधों की संख्या दिनों- दिन बढ़ती जा रही है। काफी लोग इस सायबर अपराध के शिकार बन रहे हैं। इनमें डीपफेक काफी खतरनाक बनकर उभरा है, जिसकी शिकार मशहूर हस्तियां हो रही हैं।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/26228/after-deepfake-now-serious-warning-about-the-danger-of-clearfake"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-11/images-(75).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली,</strong> डिजिटल और इंटरनेट के इस दौर में साइबर अपराधों की संख्या दिनों- दिन बढ़ती जा रही है। काफी लोग इस सायबर अपराध के शिकार बन रहे हैं। इनमें डीपफेक काफी खतरनाक बनकर उभरा है, जिसकी शिकार मशहूर हस्तियां हो रही हैं। अब केंद्र सरकार भी इसके खिलाफ कदम उठाने की तैयारी में है। इन सबके बीच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने ‘क्लियरफेक’ के खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।<br />विशेषज्ञों के अनुसार, स्वैâमर्स किसी व्यक्ति की तरह दिखने वाली तस्वीरें, वीडियो बनाने के लिए एआई के सहारे डीपफेक का उपयोग करते हैं। यह किसी व्यक्ति की तरह लगने वाला ऑडियो भी बना सकता है। इसी तरह, जब साइबर अपराधी किसी वेबसाइट की नकल करते हैं, तो इसे ‘क्लियरफेक’ कहा जाता है। हैकर्स किसी वेबसाइट की हू-बहू नकल करके वैसी ही दिखने वाली दूसरी वेबसाइट बना लेते हैं। इस वेबसाइट में प्रवेश करने के बाद, उपयोगकर्ताओं को अपना ब्राउजर अपडेट करने के लिए कहा जाता है। चूंकि यह असली वेबसाइट की तरह दिखती है, इसलिए यूजर को पता नहीं चलता कि इसमें कोई धोखाधड़ी हो सकती है। इसलिए यूजर्स अपने ब्राउजर को अपडेट करने के लिए दिए गए विकल्प पर क्लिक करें। इस पर क्लिक करने के बाद यूजर के पीसी में एक अलग ब्राउजर इंस्टॉल हो जाता है। इसके जरिए कंप्यूटर में एटॉमिक मैकओएस स्टीलर मैलवेयर इंस्टॉल किया जाता है। यह मैलवेयर वास्तव में मैक कंप्यूटरों को लक्षित करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस वजह से यह साधारण सुरक्षा दीवारों को भी आसानी से बायपास कर सकता है। यह मैलवेयर कंप्यूटर से सभी संवेदनशील जानकारी चुरा सकता है। इतना ही नहीं, क्लियरफेक का इस्तेमाल लोगों के कंप्यूटर पर अन्य मैलवेयर और वायरस इंस्टॉल करने के लिए भी किया जाता है। इसके साथ ही इसका इस्तेमाल लोगों से पैसे ऐंठने के लिए भी किया जाता है। विशेषज्ञों ने इससे सावधान रहने की चेतावनी दी है।<br />अपने कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करते रहें। नए ऐप्स या सॉफ्टवेयर डाउनलोड करते समय इसे आधिकारिक स्रोत से प्राप्त करें। कंप्यूटर में एंटी वायरस इंस्टॉल करें।</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 24 Nov 2023 10:46:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से ‘डीपफेक’ पोर्नोग्राफी वीडियो में ९४ फीसदी... </title>
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                        <![CDATA[<p>डीपफेक फोटो को लेकर रश्मिका मंदाना ने कहा कि वह बुरी तरह से आहत हुई हैं, वहीं अमिताभ बच्चन ने कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साइबर मामलों की जानकार एडवोकेट सुश्री रुचि बिष्ट के अनुसार फिलहाल हिंदुस्थान में डीपफेक कंटेंट के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। इस तरह के सारे मामलों की सुनवाई आईटी एक्ट के तहत ही होती है। ऐसे कंटेंट से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने पर आईटी एक्ट के तहत तीन से दस साल की सजा हो सकती है। डीपफेक पर अंकुश लगाने के लिए यूरोपीय यूनियन में ‘कोड ऑफ प्रैक्टिस ऑन डिसइन्फॉर्मेशन’ है तो अमेरिका में ‘डीपफेक टास्क फोर्स एक्ट’ है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/25773/94-percent-of--deepfake--pornography-videos-from-the-entertainment-industry----%E2%80%8B"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-11/download-(2)6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> रश्मिका मंदाना के ‘डीपफेक’ फोटो से एक बार फिर बहस शुरू हो गई है कि यह तकनीक किस हद तक हस्तियों की जिंदगी में उथल-पुथल मचा रही है और इसे रोकने के उपायों को लेकर सरकार कितनी गंभीर है। दरअसल, हिंदुस्थान ही नहीं, सारी दुनिया डीपफेक एडल्ट कंटेंट से परेशान है। एक रिपोर्ट कें अनुसार, ९४ फीसदी हस्तियां डीपफेक एडल्ट कंटेंट की जद में हैं। अमेरिका स्थित होम सिक्योरिटी हीरोज की २०२३ स्टेट ऑफ डीपफेक रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक हस्तियों, विशेष रूप से मनोरंजन उद्योग से जुड़े लोगों के लिए यह सबसे बड़ा रिस्क बन कर उभर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">डीपफेक तकनीक से चेहरों की अदला-बदली या आवाजें बदलकर फर्जी वीडियो बनाए जाते हैं। रिपोर्ट से पता चलता है कि डीपफेक पोर्नोग्राफी वीडियो में दिखाए गए ९४ फीसदी लोग एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े हैं, जिनमें गायक, अभिनेत्री, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर, मॉडल और एथलीट शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वे रिपोर्ट के अनुसार २०१९ की तुलना में इस साल ऑनलाइन डीपफेक वीडियो की संख्या में ५५० फीसदी का इजाफा हुआ है। सर्वे में कहा गया है कि ६० सेकंड का डीपफेक अश्लील वीडियो बनाना अब तेज और किफायती है। नवीनतम तकनीकियों के चलते इसे तैयार करने में २५ मिनट से भी कम का वक्त लगता है और खर्च लगभग शून्य होता है। जेनरेटिव एडवरसैरियल नेटवर्क (जीएएन) और यूजर प्रâेंडली सॉफ्टवेयर टूल्स की आसानी से उपलब्धता के चलते डीपफेक वीडियो और तस्वीरें बड़ी तेजी से बनाई जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार हर तीसरा डीपफेक टूल्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से एडल्ट कंटेंट तैयार करना आसान बना देता है। इनमें से ९२.३ फीसदी प्लेटफॉर्म कुछ लिमिटेशन के साथ मुफ्त सुविधा दे रहे हैं। इस सर्वे में भाग लेने वाले २० फीसदी लोग डिफेक्ट पोर्नोग्राफी बनाना सीखना चाहते थे, जो बताता है कि इस तकनीक के प्रति लोगों में कितनी रुचि बढ़ रही है और १० में से एक ने स्वीकार किया है कि उन्होंने मशहूर हस्तियों की डीपफेक पोर्नोग्राफी बनाने की कोशिश की। डीपफेक एडल्ट कंटेंट बनाने के मामले में दक्षिण कोरिया सबसे आगे है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहां पर ५३ फीसद एडल्ट कंटेंट बनाए जाते हैं। अन्य देशों में अमेरिका में २० प्रतिशत, जापान में १० प्रतिशत, इंग्लैंड में ६ प्रतिशत और हिंदुस्थान में २ प्रतिशत डीपफेक एडल्ट कंटेंट बनाए जाते हैं जबकि चीन, ताइवान और इजराइल जैसे देशों में यह ३ से १ प्रतिशत है। होम सिक्योरिटी हीरोज ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए ९५,८२० डीपफेक वीडियो, ८५ समर्पित ऑनलाइन चैनल और डीपफेक इकोसिस्टम से जुड़ी १०० से अधिक वेबसाइटों की स्टडी की है।</p>
<p style="text-align:justify;">डीपफेक फोटो को लेकर रश्मिका मंदाना ने कहा कि वह बुरी तरह से आहत हुई हैं, वहीं अमिताभ बच्चन ने कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साइबर मामलों की जानकार एडवोकेट सुश्री रुचि बिष्ट के अनुसार फिलहाल हिंदुस्थान में डीपफेक कंटेंट के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। इस तरह के सारे मामलों की सुनवाई आईटी एक्ट के तहत ही होती है। ऐसे कंटेंट से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने पर आईटी एक्ट के तहत तीन से दस साल की सजा हो सकती है। डीपफेक पर अंकुश लगाने के लिए यूरोपीय यूनियन में ‘कोड ऑफ प्रैक्टिस ऑन डिसइन्फॉर्मेशन’ है तो अमेरिका में ‘डीपफेक टास्क फोर्स एक्ट’ है।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Nov 2023 11:26:28 +0530</pubDate>
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