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                <title>​ - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title> मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के लिए ई-पेपर की अनिवार्यता हटाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को अपने उस फैसले में बदलाव कर दिया, जिसमें डिप्टी चीफ मिनिस्टर और मंत्रियों के लिए अखबारों और पत्रिकाओं का केवल ऑनलाइन ई-पेपर सब्सक्रिप्शन अनिवार्य किया गया था। सरकार ने अब यह व्यवस्था कर दी है कि मंत्री अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या फिजिकल यानी प्रिंट सब्सक्रिप्शन में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51078/mumbai-maharashtra-government-removed-the-requirement-of-e-paper-for-ministers"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/istock-1490992198.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को अपने उस फैसले में बदलाव कर दिया, जिसमें डिप्टी चीफ मिनिस्टर और मंत्रियों के लिए अखबारों और पत्रिकाओं का केवल ऑनलाइन ई-पेपर सब्सक्रिप्शन अनिवार्य किया गया था। सरकार ने अब यह व्यवस्था कर दी है कि मंत्री अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या फिजिकल यानी प्रिंट सब्सक्रिप्शन में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते हैं। जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने यह संशोधन उस आदेश के एक दिन बाद जारी किया, जिसमें कहा गया था कि 1 सितंबर से राज्य के मंत्रियों को अखबारों और पत्रिकाओं के लिए केवल डिजिटल माध्यम का उपयोग करना होगा। नए निर्देश के अनुसार, अब डिजिटल के साथ-साथ पारंपरिक प्रिंट संस्करण की सुविधा भी जारी रहेगी।</p>
<p> </p>
<p>एक दिन में बदला फैसला महाराष्ट्र सरकार का पहला आदेश सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। आदेश में कहा गया था कि मंत्रियों को अखबार और पत्रिकाओं के लिए ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन लेना होगा और इसका खर्च उन्हें खुद उठाना होगा। इस फैसले का उद्देश्य सरकारी खर्च को कम करना और डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देना बताया गया था। हालांकि, आदेश जारी होने के अगले ही दिन सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए मंत्रियों को विकल्प देने का फैसला किया।</p>
<p>अब मंत्री अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार यह तय कर सकेंगे कि वे अखबारों और पत्रिकाओं को ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं या फिर उनकी भौतिक प्रतियां मंगवाना चाहते हैं। डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश सरकार की ओर से पहले जारी किए गए निर्देश को डिजिटल गवर्नेंस और कागज की खपत कम करने की दिशा में एक कदम माना गया था। प्रशासन में डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं।</p>
<p>ई-पेपर के इस्तेमाल से कागज की बचत, रिकॉर्ड को आसानी से सुरक्षित रखने और कहीं से भी समाचार पढ़ने की सुविधा मिलती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने मंत्रियों के लिए ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई थी। हालांकि, नए संशोधन के बाद डिजिटल विकल्प जारी रहेगा, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं रखा गया है। मंत्रियों को खुद उठाना होगा खर्च सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, अखबार और पत्रिकाओं के सब्सक्रिप्शन का खर्च मंत्रियों को स्वयं वहन करना होगा। पहले सरकारी स्तर पर मंत्रियों के कार्यालयों में कई अखबार और पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाती थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:55:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : 200 एजेंट, 400 टिकट: मुंबई में चल रहा रहा था वीआईपी कोटे का काला कारोबार </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई का एक कपड़ा व्यापारी पिछले तीन-चार साल से पूरे देश में वीवीआईपी कोटे से रेल टिकट कन्फर्म कराने का बड़ा रैकेट चला रहा था। उसके अंडर करीब 200 एजेंट काम कर रहे थे, जो अलग-अलग राज्यों से यात्रियों के आवेदन जुटाकर भेजते थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51076/mumbai-200-agents-400-tickets-black-business-of-vip-quota"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/13bmracket.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई का एक कपड़ा व्यापारी पिछले तीन-चार साल से पूरे देश में वीवीआईपी कोटे से रेल टिकट कन्फर्म कराने का बड़ा रैकेट चला रहा था। उसके अंडर करीब 200 एजेंट काम कर रहे थे, जो अलग-अलग राज्यों से यात्रियों के आवेदन जुटाकर भेजते थे। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए राज्यपाल के एडीसी (एड-डी-कैंप), मंत्रियों, वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों और अन्य बड़े पदाधिकारियों के फर्जी लेटरहेड तैयार कर अब तक 400 से ज्यादा रेल टिकट वीवीआईपी कोटे से कन्फर्म कराए गए। मुंबई के मालाबार हिल पुलिस ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करते हुए कपड़ा व्यापारी समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का मास्टरमाइंड अमरीश ईश्वरलाल ठक्कर (41) है। वह दादर में थोक कपड़े का कारोबार करता था, लेकिन जल्दी और ज्यादा कमाई के लालच में उसने वीवीआईपी कोटे से टिकट कन्फर्म कराने का अवैध कारोबार शुरू कर दिया। जांच में पता चला कि उसका नेटवर्क केवल मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि गुजरात और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। उसके अधीन करीब 200 एजेंट और सब-एजेंट काम करते थे, जो जरूरतमंद यात्रियों से मोटी रकम लेकर टिकट कन्फर्म कराने का दावा करते थे।</p>
<p>इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब मुंबई में लोक भवन के अधिकारियों से भारतीय रेलवे ने संपर्क किया। रेलवे ने बताया कि वीवीआईपी कोटे से टिकट कन्फर्म कराने के लिए कुछ आवेदन आए हैं, जिन पर राज्यपाल के एडीसी (एड-डी-कैंप) के हस्ताक्षर और मुहर लगी हुई है। लोक भवन में जब इन दस्तावेजों की जांच की गई तो पता चला कि आधिकारिक लेटरहेड की हूबहू नकल कर फर्जी आवेदन तैयार किए गए हैं। इसके बाद लोक भवन प्रशासन ने मुंबई के मालाबार हिल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:52:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विरार : सात माह की गर्भवती मदद के लिए चीखती रही, स्ट्रेचर तक नहीं दिया; फर्श पर गिरने से मासूम की हालत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विरार-पश्चिम के एक निजी प्रसूति अस्पताल में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का भयावह मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को समय पर सहायता, स्ट्रेचर या व्हीलचेयर नहीं दी गई। उसे पैदल प्रसूति कक्ष तक ले जाने के दौरान ही बच्चे का जन्म हो गया और नवजात ढाई से तीन फीट की ऊंचाई से सीधे फर्श पर जा गिरा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51074/virar-seven-months-pregnant-kept-screaming-for-help-not-even"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/bacteria-and-premature-birth.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विरार :</strong> विरार-पश्चिम के एक निजी प्रसूति अस्पताल में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का भयावह मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को समय पर सहायता, स्ट्रेचर या व्हीलचेयर नहीं दी गई। उसे पैदल प्रसूति कक्ष तक ले जाने के दौरान ही बच्चे का जन्म हो गया और नवजात ढाई से तीन फीट की ऊंचाई से सीधे फर्श पर जा गिरा।</p>
<p> </p>
<p>घटना विरार-पश्चिम स्थित जोगलेकर मैटरनिटी होम की बताई गई है। महिला की गर्भावस्था का सातवां महीना शुरू हुए केवल दो दिन हुए थे, तभी गुरुवार को उसे तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। महिला और उसके रिश्तेदारों का दावा है कि उन्होंने डॉक्टरों तथा नर्सों से बार-बार कहा कि बच्चा बाहर आ रहा है और तत्काल सहायता की जरूरत है, लेकिन उनकी गुहार को गंभीरता से नहीं लिया गया। परिवार के अनुसार, अत्यधिक दर्द के कारण महिला ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी, फिर भी उसे स्ट्रेचर उपलब्ध कराने के बजाय चलने को कहा गया।</p>
<p>प्रसूति कक्ष के दरवाजे तक पहुंचते-पहुंचते अचानक प्रसव हो गया और नवजात कठोर फर्श पर गिर पड़ा। उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आने का दावा किया गया है। बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे ठाणे के एक बाल अस्पताल की एनआईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। परिवार ने संबंधित डॉक्टरों तथा नर्सों के खिलाफ मामला दर्ज करने और अस्पताल पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:49:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: बांद्रा-जुहू के अमीरों की साउथ मुंबई की तरफ दौड़; जानिए क्या है वजह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मायानगरी मुंबई में लग्जरी घरों की डिमांड रोजाना एक नया रिकॉर्ड बना रही है. लेकिन, इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमीरों के पारंपरिक गढ़ साउथ मुंबई में अब बाहरी इलाकों से अपनी लाइफस्टाइल अपग्रेड करने आ रहे हैं.  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51072/know-the-reason-behind-the-race-of-the-rich-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/marine-drive-1.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मायानगरी मुंबई में लग्जरी घरों की डिमांड रोजाना एक नया रिकॉर्ड बना रही है. लेकिन, इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमीरों के पारंपरिक गढ़ साउथ मुंबई में अब बाहरी इलाकों से अपनी लाइफस्टाइल अपग्रेड करने आ रहे हैं.  </p>
<p> </p>
<p>वर्ली के बाद तारदेव, लोअर परेल और बांद्रा वेस्ट जैसे स्थापित माइक्रो मार्केट्स अमीरों की पसंद बने हुए हैं. खरीदारों की उम्र की बात करें तो प्राइमरी लग्जरी मार्केट में 58% होमबायर्स 35 से 55 साल के आयु वर्ग में आते हैं. </p>
<p>65 वर्ष से ज्यादा उम्र के खरीदार भी एक मजबूत सेगमेंट के तौर पर उभरे हैं, जिनकी कुल बिक्री में हिस्सेदारी 12 फीसदी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:44:37 +0530</pubDate>
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