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                <title>Secretary - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Secretary RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : आईएएस एम देवेंद्र सिंह सस्पेंड, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव पद थे तैनात, क्यों हुई कार्रवाई?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विधानसभा के तालिका अध्यक्ष दिलीप लांडे ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम.देवेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है। वे महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण महामंडल के सचिव पद तैनात थे। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। मंत्री के निर्देश के बाद भी आईएएस अधिकारी एम. देवेंद्र सिंह ब्रीफिंग के लिए नहीं आए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48064/mumbai-ias-m-devendra-singh-suspended-he-was-posted-as"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-28t111919.828.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> विधानसभा के तालिका अध्यक्ष दिलीप लांडे ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम.देवेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है। वे महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण महामंडल के सचिव पद तैनात थे। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। मंत्री के निर्देश के बाद भी आईएएस अधिकारी एम. देवेंद्र सिंह ब्रीफिंग के लिए नहीं आए। इसे लेकर विधानसभा के तालिका अध्यक्ष दिलीप लांडे ने निलंबन के आदेश जारी किए, जिसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने कार्रवाई की। </p>
<p> </p>
<p><strong>कौन हैं आईएएस देवेंद्र सिंह</strong><br />एम. देवेंद्र सिंह वर्ष 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित थी, जिसके तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई अतिरिक्त सचिव वी. राधा के हस्ताक्षर से जारी आदेश के माध्यम से की गई। यह कार्रवाई यूपीएससी ( अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम 3 के उपनियम (1) के खंड (क) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए महाराष्ट्र सरकार ने यह निलंबन आदेश जारी किया है। </p>
<p><strong>निलंबन के दौरान क्या होगा?</strong><br />निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मुंबई ही रहेगा और वे कोकण विभाग, मुंबई के विभागीय आयुक्त की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। साथ ही, निलंबन अवधि में वे कोई निजी नौकरी या व्यापार/व्यवसाय नहीं कर सकेंगे। एम देवेंद्र सिंह को निलंबन अवधि में उन्हें निर्वाह भत्ता, महंगाई भत्ता तथा अन्य अनुमन्य भत्ते दिए जाएंगे। इसके लिए उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी अन्य नौकरी, व्यवसाय या पेशे में संलग्न नहीं हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि उपरोक्त शर्तों का उल्लंघन किया जाता है तो इसे कदाचार माना जाएगा और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>ऐसे अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए- मुनगंटीवार</strong><br />इस मसले पर पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि एक आईएएस अधिकारी द्वारा मंत्री को ब्रीफिंग देने से इनकार करना संविधान का अपमान है। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष द्वारा निलंबन के आदेश दिए जाने के 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की गई। मुनगंटीवार ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कुछ अधिकारियों पर अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान किया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 11:20:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : बड़ा प्रशासनिक बदलाव: डॉ. इकबाल सिंह चहल की सेवानिवृत्ति, मनीषा नई अपर मुख्य सचिव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल का आदेश जारी किया है। शुक्रवार को जारी इस आदेश के अनुसार, डॉ. आई.एस. चहल (इकबाल सिंह चहल), जो वर्तमान में गृह विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं, लंबी और सम्मानजनक सरकारी सेवा के बाद 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि डॉ. चहल अपने वर्तमान पद का प्रभार मनीषा पाटणकर-म्हैसकर, आईएएस को सौंपेंगे। मनीषा पाटणकर-म्हैसकर, जो वर्तमान में लोक निर्माण विभाग (पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट) में अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं, अब गृह विभाग में उनकी जगह लेंगी। साथ ही, डॉ. चहल द्वारा अतिरिक्त रूप से धारित अतिरिक्त मुख्य सचिव (खनन) का पद अश्विनी भिडे, आईएएस को सौंपा जाएगा। अश्विनी भिडे वर्तमान में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47385/mumbai-major-administrative-change-retirement-of-dr-iqbal-singh-chahal"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-31t183319.862.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल का आदेश जारी किया है। शुक्रवार को जारी इस आदेश के अनुसार, डॉ. आई.एस. चहल (इकबाल सिंह चहल), जो वर्तमान में गृह विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं, लंबी और सम्मानजनक सरकारी सेवा के बाद 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि डॉ. चहल अपने वर्तमान पद का प्रभार मनीषा पाटणकर-म्हैसकर, आईएएस को सौंपेंगे। मनीषा पाटणकर-म्हैसकर, जो वर्तमान में लोक निर्माण विभाग (पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट) में अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं, अब गृह विभाग में उनकी जगह लेंगी। साथ ही, डॉ. चहल द्वारा अतिरिक्त रूप से धारित अतिरिक्त मुख्य सचिव (खनन) का पद अश्विनी भिडे, आईएएस को सौंपा जाएगा। अश्विनी भिडे वर्तमान में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर हैं।</p>
<p> </p>
<p>यह आदेश संयुक्त सचिव सुभाष उमरानीकर द्वारा जारी किया गया है और इसमें डॉ. चहल को उनकी सेवानिवृत्ति के लिए शुभकामनाएं भी दी गई हैं। आदेश की प्रतियां विभिन्न उच्च अधिकारियों और विभागों को सूचना के लिए भेजी गई हैं, जिनमें अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय), प्रधान सचिव/सचिव (उप मुख्यमंत्री), संबंधित विभागों के अधिकारी और अन्य शामिल हैं।</p>
<p>डॉ. इकबाल सिंह चहल 1989 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं। उन्होंने अपनी सेवा में कई महत्वपूर्ण पद संभाले, जिसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के कमिश्नर के रूप में कोविड-19 महामारी के दौरान 'मुंबई मॉडल' लागू करना प्रमुख रहा। वे मुख्य सचिव पद से चूक गए, लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें मुंबई पुलिस हाउसिंग टाउनशिप प्रोजेक्ट के चेयरमैन के रूप में राज्यमंत्री दर्जे के साथ 1 फरवरी 2026 से पांच वर्षीय कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है। यह फेरबदल महाराष्ट्र प्रशासन में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। मनीषा पाटणकर-म्हैसकर 1992 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और लोक निर्माण विभाग में अपनी भूमिका के लिए जानी जाती हैं। अश्विनी भिडे 1995 बैच की आईएएस हैं, जिन्होंने मुंबई मेट्रो लाइन 3 (एक्वा लाइन) के प्रबंध निदेशक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47385/mumbai-major-administrative-change-retirement-of-dr-iqbal-singh-chahal</link>
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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 18:33:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : आयुध कारखानों के 59000 रक्षा कर्मियों पर लटकी तलवार, कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आयुध कारखानों के सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच, यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑर्डनेंस एम्प्लॉइज (यूएफओई) ने कैबिनेट सचिव और प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों से औपचारिक रूप से संपर्क करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है। यूएफओई, जो नवगठित डीपीएसयू में अनिवार्य समायोजन का विरोध कर रहा है, ने मांग की है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की प्रस्तावित समिति एक सरकारी अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करे। इसमें कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति तक प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाए। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46442/the-sword-hanging-over-59000-defense-personnel-of-new-delhi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-24t183545.595.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>आयुध कारखानों के सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच, यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑर्डनेंस एम्प्लॉइज (यूएफओई) ने कैबिनेट सचिव और प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों से औपचारिक रूप से संपर्क करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है। यूएफओई, जो नवगठित डीपीएसयू में अनिवार्य समायोजन का विरोध कर रहा है, ने मांग की है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की प्रस्तावित समिति एक सरकारी अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करे। इसमें कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति तक प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाए। </p>
<p> </p>
<p>सात डीपीएसयू के सीएमडी द्वारा आयोजित अवशोषण पैकेज पर बैठकों का संयुक्त मंच द्वारा सामूहिक बहिष्कार करने के फैसले से हितधारक परामर्श प्रक्रिया कथित तौर पर बाधित हो गई। यूएफओई के अनुसार, आईओएफएस अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संघों सहित सभी संघों द्वारा पूर्ण बहिष्कार के कारण रक्षा मंत्रालय को शेष तीन परामर्श बैठकें रद्द करनी पड़ीं। यूएफओई का कहना है कि यह अस्वीकृति डीपीएसयू में अवशोषण के खिलाफ कर्मचारियों के स्पष्ट जनादेश को दर्शाती है। कैबिनेट सचिव और संबंधित सचिवों को लिखे अपने पत्र में यूएफओई ने चार प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला है। </p>
<p>रक्षा नागरिक कर्मचारियों से संबंधित सेवा मामलों पर कैबिनेट का निर्णय। उच्च न्यायालय के समक्ष रक्षा मंत्रालय द्वारा लिखित प्रतिबद्धता, जिसमें कहा गया है कि कर्मचारी चाहें तो सेवानिवृत्ति तक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में प्रतिनियुक्ति पर बने रह सकते हैं। यह प्रतिबद्धता न्यायालय के निर्णय में दर्ज है। सेवानिवृत्ति तक केंद्रीय सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों द्वारा अग्रिम विकल्पों का प्रयोग। सामूहिक रूप से विलय बैठकों का बहिष्कार, जो कर्मचारियों द्वारा डीपीएसयू विलय की अस्वीकृति को दर्शाता है। </p>
<p>क्या कैबिनेट सचिव से संपर्क करना जल्दबाजी थी, जबकि सचिवों की समिति का औपचारिक गठन अभी बाकी है। उसके कार्यक्षेत्र की अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है, एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस सवाल के जवाब में कहा, यह जल्दबाजी नहीं, बल्कि समय पर उठाया गया कदम है। हितधारकों से परामर्श विफल होने और कर्मचारियों द्वारा सरकारी सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने के बाद, यह मामला अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) के पास जाएगा। इससे पहले, यह आवश्यक है कि सभी संबंधित सचिवों को कर्मचारियों की स्थिति से पूरी तरह अवगत कराया जाए।</p>
<p>उन्होंने कहा, यूएफओई को आशंका है कि रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) सचिवों की समिति के समक्ष बहिष्कार का औचित्य या उच्च न्यायालय के समक्ष सरकार द्वारा किए गए वादे ठीक से प्रस्तुत नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि हमने 22 दिसंबर, 2025 को अपना पत्र अग्रिम रूप से प्रस्तुत किया था। उसमें संवैधानिक सुरक्षा उपायों का हवाला दिया गया। यूएफओई ने तर्क दिया है कि रक्षा क्षेत्र के नागरिक कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत संरक्षण प्राप्त है, जो उन्हें केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के रूप में सेवानिवृत्त होने का अधिकार देता है।</p>
<p>मंच ने सवाल उठाया है कि इन सुरक्षा उपायों से अवगत होने के बावजूद सरकार इस मामले को 'अनावश्यक रूप से लंबा और जटिल' क्यों बना रही है। श्रीकुमार ने कहा, 'हमें विश्वास है कि सचिवों की समिति, हमारी याचिका की जांच करने के बाद सकारात्मक रुख अपनाएगी। ईजीओएम को सभी 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के केंद्रीय सरकार के दर्जे को बरकरार रखने वाली अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करेगी। इससे पहले सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह प्रतिबद्धता जताई थी। अब यह मामला कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के औपचारिक गठन और उसकी विचार-विमर्श प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन सबसे बड़े संगठित नागरिक कार्यबलों में से एक के भविष्य की सेवा शर्तों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 18:36:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : लोक सेवा आयोग ने महेंद्र हरपालकर को अपना नया सचिव नियुक्त किया </title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने दो महीने से ज़्यादा समय तक खाली रहे पद पर महेंद्र हरपालकर को अपना नया सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को दो साल के डेपुटेशन के लिए की है।इस खाली पद की वजह से संवैधानिक संस्था के कामकाज पर बहुत बुरा असर पड़ा, जिससे परीक्षा के नतीजों, इंटरव्यू शेड्यूल और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी हुई। (प्रतिनिधि तस्वीर)यह पद पूर्व सचिव सुवर्णा खरात का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुआ था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46428/mumbai-public-service-commission-appoints-mahendra-harpalkar-as-its-new"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-24t114041.307.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने दो महीने से ज़्यादा समय तक खाली रहे पद पर महेंद्र हरपालकर को अपना नया सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को दो साल के डेपुटेशन के लिए की है।इस खाली पद की वजह से संवैधानिक संस्था के कामकाज पर बहुत बुरा असर पड़ा, जिससे परीक्षा के नतीजों, इंटरव्यू शेड्यूल और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी हुई। (प्रतिनिधि तस्वीर)यह पद पूर्व सचिव सुवर्णा खरात का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुआ था। इस खाली पद की वजह से संवैधानिक संस्था के कामकाज पर बहुत बुरा असर पड़ा, जिससे परीक्षा के नतीजों, इंटरव्यू शेड्यूल और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी हुई।कुछ मामलों में, प्रतियोगी परीक्षाओं के नतीजे पांच से छह महीने से पेंडिंग हैं, जबकि घोषित नतीजों के लिए इंटरव्यू अभी तक शेड्यूल नहीं किए गए हैं, जिससे उम्मीदवारों में निराशा है।</p>
<p> </p>
<p>पहले, अतिरिक्त जिला कलेक्टर जगन्नाथ वीरकर को इस पद पर डेप्यूट किया गया था, लेकिन उन्होंने पद संभालने से मना कर दिया, जिससे सचिव का पद खाली रह गया और आयोग के काम में और देरी हुई।उम्मीदवारों और सिविल सोसाइटी की तरफ से प्रशासनिक देरी को लेकर बढ़ती आलोचना के बीच, राज्य सरकार ने अब हरपालकर को यह ज़िम्मेदारी सौंपी है।</p>
<p>हरपालकर का डेपुटेशन पद संभालने के बाद शुरू होगा और जब तक वे अपनी मूल सरकारी पोस्ट पर वापस नहीं लौटते, तब तक जारी रहेगा।सचिव की गैरमौजूदगी से एमपीएससी का कामकाज बाधित हो गया था, जो परीक्षाओं, नतीजों, कानूनी मामलों और ऑफिस प्रशासन की देखरेख में अहम भूमिका निभाता है। अब हरपालकर के आने से, उम्मीदवारों को उम्मीद है कि विज्ञापन से लेकर नियुक्तियों तक की भर्ती गतिविधियां समय पर फिर से शुरू होंगी, जिससे इस प्रक्रिया को बहुत ज़रूरी गति मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 11:41:25 +0530</pubDate>
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