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                <title>hindrance - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>hindrance RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नाशिक : भास्कर जाधव ने अशोक खरात मामले में एसआईटी पर हिंडन का आरोप लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नाशिक से अशोक खरात का मामला राज्य में हलचल मचा रहा है। यह बात सामने आई है कि खरात ने कई महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया है। यह भी पता चला है कि रूपाली चाकणकर उनके ट्रस्ट की सदस्य हैं, जिसके चलते चाकणकर ने अब राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच, अब ठाकरे गुट के विधायक भास्कर जाधव ने एक बड़ा दावा किया है। यह अच्छी बात है कि रूपाली चाकणकर ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन यह मामला सिर्फ़ उन तक ही सीमित नहीं है। जाधव ने एक सनसनीखेज दावा किया कि इस मामले में कई उच्च-अधिकारी भी शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48619/nashik-bhaskar-jadhav-accuses-sit-of-hindon-in-ashok-kharat"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-22t123457.291.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नाशिक : </strong>नाशिक से अशोक खरात का मामला राज्य में हलचल मचा रहा है। यह बात सामने आई है कि खरात ने कई महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया है। यह भी पता चला है कि रूपाली चाकणकर उनके ट्रस्ट की सदस्य हैं, जिसके चलते चाकणकर ने अब राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच, अब ठाकरे गुट के विधायक भास्कर जाधव ने एक बड़ा दावा किया है। यह अच्छी बात है कि रूपाली चाकणकर ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन यह मामला सिर्फ़ उन तक ही सीमित नहीं है। जाधव ने एक सनसनीखेज दावा किया कि इस मामले में कई उच्च-अधिकारी भी शामिल हैं।</p>
<p> </p>
<p>विधायी सत्र शुरू होने से पहले ही अशोक खरात मामले की जांच के लिए एक एसआईटी (विशेष जांच दल) नियुक्त कर दी गई थी। हालांकि, चूंकि आधे से ज़्यादा कैबिनेट इसमें शामिल है, इसलिए इस मामले को बाहर नहीं आने दिया जाना था। विधायक भास्कर जाधव ने कहा, "यह मामला पत्रकारों और पीड़ित महिला की वजह से ही सामने आया, वरना सरकार इसे दबा देती।" जाधव ने मांग की कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बारे में जानकारी दें कि इस मामले में एसआईटी का गठन कब किया गया था। </p>
<p>प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए भास्कर जाधव ने कहा कि सरकार को सत्र के दौरान इस मामले से जुड़े तथ्यों को सदन के सामने रखना चाहिए था। क्योंकि, इसमें सिर्फ़ रूपाली चाकणकर और राजनीतिक नेता ही शामिल नहीं हैं, बल्कि कई ऐसे उच्च-अधिकारी भी हैं जो अशोक खरात को बचाने में शामिल हैं। सरकार को सिर्फ़ चाकणकर का इस्तीफा लेकर इस मुद्दे से ध्यान नहीं भटकाना चाहिए; यह नहीं सोचना चाहिए कि उनके इस्तीफे के साथ ही यह मामला खत्म हो गया है। चूंकि सरकार के कई मंत्री और अधिकारी इसमें शामिल हैं, इसलिए इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 12:35:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरदासपुर : मां के प्रेम संबंधों में रोड़ा बना बेटा तो हत्या कर आंगन में दफनाया, 12 साल बाद सुलझा मामला; कंकाल भी बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बटाला पुलिस ने 12 साल बाद हत्या के एक मामले को सुलझाने में सफलता हासिल की है। मामला सुलझने के साथ ही हैरानीजनक पहलू सामने आया है कि मृतक की मां ने ही प्रेम संबंध में रोड़ा बन रहे अपने 14 वर्षीय बेटे की प्रेमी के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। 12 साल तक मृतक की मां अपने प्रेमी के साथ घर से फरार होकर अलग-अलग राज्यों में रह रही थी। कुछ दिन पहले उसका प्रेमी गांव आया और पकड़ा गया। जिसके बाद पुलिस की सख्ती के चलते उसने बताया कि आरोपित मृतक की मां इस समय जालंधर में है। जिसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। काबिलेजिक्र है कि इस मामले में पुलिस द्वारा दोनों आरोपितों को करीब 11 साल पहले भगौड़ा करार दिया था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42773/gurdaspur--son-became-a-hindrance-in-mother-s-love-affair--so-he-killed-her-and-buried-her-in-the-courtyard--case-solved-after-12-years--skeleton-also-recovered"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download---2025-08-05t191647.328.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>गुरदासपुर : </strong>बटाला पुलिस ने 12 साल बाद हत्या के एक मामले को सुलझाने में सफलता हासिल की है। मामला सुलझने के साथ ही हैरानीजनक पहलू सामने आया है कि मृतक की मां ने ही प्रेम संबंध में रोड़ा बन रहे अपने 14 वर्षीय बेटे की प्रेमी के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। 12 साल तक मृतक की मां अपने प्रेमी के साथ घर से फरार होकर अलग-अलग राज्यों में रह रही थी। कुछ दिन पहले उसका प्रेमी गांव आया और पकड़ा गया। जिसके बाद पुलिस की सख्ती के चलते उसने बताया कि आरोपित मृतक की मां इस समय जालंधर में है। जिसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। काबिलेजिक्र है कि इस मामले में पुलिस द्वारा दोनों आरोपितों को करीब 11 साल पहले भगौड़ा करार दिया था।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस जिला बटाला की ओर से एसएसपी सुहेल कासिम मीर के नेतृत्व में पीओ के खिलाफ चलाई गई मुहिम के तहत एसपी इंवेस्टीगेशन बटाला गुरप्रताप सिंह और डीएसपी श्री हरगोबिंदपुर हरीश बहल के निर्देशों के तहत थाना श्री हरगोबिंदपुर के इंचार्ज एसआई सुखविंदर सिंह, स्पेशल ब्रांच बटाला के इंचार्ज इंस्पेक्टर प्रताप सिंह, एसआई रवेल सिंह, एएसआई गुरदेव सिंह, एएसआई रविंदर सिंह, हेड कॉन्स्टेबल नवप्रीत सिंह ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक अनसुलझे कत्ल का मामला 12 साल बाद सुलझाने में सफलता हासिल की है।</p>
<p>साल 2014 में थाना श्री हरगोबिंदपुर के गांव खोजकीपुर में संदीप सिंह उर्फ जगदीप सिंह पुत्र गुरमुख सिंह के गुम होने व उसके ताया हरजीत सिंह पुत्र हरबंस सिंह निवासी गांव खोजकीपुर की ओर से 20 अप्रैल 2014 को थाना श्री हरगोबिंदपुर में रणजीत कौर पत्नी गुरमुख सिंह व सतनाम सिंह उर्फ सत्ता पुत्र अजीत सिंह निवासी खोजकीपुर के खिलाफ दर्ज करवाया था। शिकायकर्ता ने पुलिस को बताया कि मृतक की मां के गांव में रहने वाले सतनाम सिंह के साथ संबंध बन गए थे। जिसका उसका लड़का विरोध करता था। इसी के चलते उन्होंने उसके साथ गलत किया।</p>
<p><strong>खुदाई के दौरान बरामद किया गया कंकाल।</strong><br />उक्त मामले में 12 साल से अगवा लड़के संबंधी कोई सुराग नहीं मिला था और न ही आरोपितों की गिरफ्तारी हो पाई। जिसके चलते जज निधि सैनी की ओर से उक्त दोनों आरोपितों सतनाम सिंह व हरजीत कौर को दस दसंबर 2014 को पीओ करार दे दिया गया था। जिन्हें उक्त टीम द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। टीम द्वारा की गई पूछताछ के दौरान रणजीत कौर ने पहले पुलिस को गुमराह करने के लिए बोला कि उसका लड़का यूपी में है।</p>
<p><strong>पूछताछ में आरोपी मां ने किया खुलासा</strong><br />पुलिस द्वारा यूपी में टीम को रवाना करने से पहले जब सख्ती से रणजीत कौर से पूछताछ की गई, तो फिर उसने बताया कि उसके पति की साल 2010 में मौत होने के बाद उसके आरोपित सतनाम सिंह उर्फ सत्ता के संबंध थे और उसका लड़का संदीप उर्फ जगदीप सिंह जिसकी उम्र उस समय 14 साल थी, इसका विरोध करता था। उसे अपने रास्ते का रोड़ा समझते हुए रणजीत कौर ने अपनी प्रेमी सतनाम सिंह के साथ मिलकर 2014 में अपने लड़के संदीप सिंह की गला घोंटकर हत्या कर दी और उसके शव को अपने ही रिहायशी मकान खोजकीपुर में दबा दिया।</p>
<p>आरोपितों की निशानदेही पर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में मृतक संदीप सिंह के शव का पिंजर पुलिस द्वारा बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने नायब तहसीलदार विनोद मेहता, डीएसपी हरीश बहल, एसएचओ सुखविंदर सिंह की मौजूदगी में खुदाई के दौरान तीन फीट नीचे मृतक का कंकाल बरामद हुआ है। आरोपितों ने पुलिस को बताया कि इन 12 सालों में वह राजस्थान, यूपी आदि कई राज्यों में इकट्ठे रहे। इस दौरान सतनाम सिंह मजदूरी का काम करता था। जिसे उनका गुजर बसर हो रहा था। पुलिस टीम ने बताया कि उन्हें गुप्तचर से सूचना मिली थी कि आरोपित सतनाम सिंह सत्ता कभी कभार गांव आता है। कुछ दिन पहले जैसे ही वह गांव पहुंचा तो पुलिस ने उसे दबौच लिया। जिसके बाद रणजीत कौर की भी गिरफ्तारी कर ली गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 19:18:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोर्ट के आदेश को लागू करने में आचार संहिता बाधक नहीं - बॉम्बे हाई कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की बेंच ने कहा कि कोर्ट के आदेश को लागू करने के लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति की जरूरत नहीं है। यदि आचार संहिता के चलते कोई दिक्कत आती है, तो सरकार के लिए अदालत आने का रास्ता खुला है। बेंच ने राज्य सरकार के संबंधित विभाग को आरे में रोड के निर्माण के लिए जरूरी मंजूरी के लिए मॉनिटरिंग कमिटी को एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29251/code-of-conduct-is-not-a-hindrance-in-implementing-the-court-order---bombay-high-court"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download-(3)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई: </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि अदालत के आदेश को लागू करने में आचार संहिता बाधक नहीं हो सकती है। हाई कोर्ट ने बुधवार को आरे में आंतरिक रोड के निर्माण का रास्ता साफ करते हुए यह टिप्पणी की है। लंबे समय से 45 किमी. के इस आंतरिक रोड का निर्माण अटका पड़ा था।</p>
<p style="text-align:justify;">संबंधित प्राधिकारी को निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश देने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। इससे पहले, सरकारी वकील मिलिंद मोरे ने अदालत को बताया कि आगामी चुनाव के मद्देनजर जल्द ही आचार संहिता लागू हो सकती है, ऐसे में निधि और अन्य प्रस्तावों को मंजूरी मिलने में दिक्कत हो सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आचार संहिता कोर्ट के आदेश के अमल में बाधा नहीं हो सकती है। कोर्ट ने 26 अप्रैल को याचिका पर अगली सुनवाई रखी है।<br /><br />चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की बेंच ने कहा कि कोर्ट के आदेश को लागू करने के लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति की जरूरत नहीं है। यदि आचार संहिता के चलते कोई दिक्कत आती है, तो सरकार के लिए अदालत आने का रास्ता खुला है। बेंच ने राज्य सरकार के संबंधित विभाग को आरे में रोड के निर्माण के लिए जरूरी मंजूरी के लिए मॉनिटरिंग कमिटी को एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही कमिटी को 15 दिन के भीतर नियमों के तहत प्रस्ताव की स्क्रूटनी करने का भी निर्देश दिया है। प्रस्ताव में कोई सुधार की जरूरत हो, तो 3 दिन के भीतर सरकार के संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दी जाए और सुधारित प्रस्ताव 7 दिन के भीतर कमिटी के पास दोबारा भेजा जाए। यह प्रस्ताव मिलने के बाद कमिटी चार सप्ताह के भीतर निर्णय ले।</p>
<p style="text-align:justify;">कमिटी इस दौरान जनहित के मुद्दों और वन्य जीवों की भलाई को भी ध्यान में रखे। कमिटी से मंजूरी मिलने के बाद शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करें। सुनवाई के दौरान कहा गया कि अच्छी सड़क न होने के चलते आदिवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस दलील पर बेंच ने कहा कि आरे में इतना अतिक्रमण है कि मुश्किल से वहां आदिवासी मिलेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Mar 2024 10:51:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मणिपुर में कुछ माह पूर्व हुई हिंसा की जांच में राेड़ा बन रही अफसराें की कमी...  एक अधिकारी कर रहा 500 मामलों की निगरानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मणिपुर हिंसा की जांच CBI को सौंपे जाने पर केंद्र सरकार ने दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश से 14 IPS (डीसीपी व एसपी रैंक) व छह इंस्पेक्टरों को जांच में मदद के लिए भेजा है। ये अधिकारी SIT जांच की निगरानी करेंगे। दिल्ली से सबसे अधिक तीन IPS हरेंद्र कुमार सिंह, श्वेता चौहान और ईशा पांडे का जांच के लिए चयन किया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/25462/lack-of-officers-is-becoming-a-hindrance-in-the-investigation-of-the-violence-that-took-place-a-few-months-ago-in-manipur----one-officer-is-monitoring-500-cases"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-10/download-(24).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>मणिपुर में कुछ माह पूर्व हुई हिंसा की जांच के लिए दिल्ली समेत छह राज्यों से 14 IPS और छह इंस्पेक्टरों को भेजा गया है। वहां बनाई गईं 42 SIT 3 हजार मुकदमों की जांच कर रही हैं, लेकिन बेहतर ढंग से जांच करने में अधिकारियों की कमी आड़े आ रही है। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस संख्या बल के अनुसार, एक इंस्पेक्टर पर 7 SIT यानी करीब 500 केसों की निगरानी करने की जिम्मेदारी है, जो व्यावहारिक नहीं है। मणिपुर हिंसा की जांच CBI को सौंपे जाने पर केंद्र सरकार ने दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश से 14 IPS (डीसीपी व एसपी रैंक) व छह इंस्पेक्टरों को जांच में मदद के लिए भेजा है। ये अधिकारी SIT जांच की निगरानी करेंगे। दिल्ली से सबसे अधिक तीन IPS हरेंद्र कुमार सिंह, श्वेता चौहान और ईशा पांडे का जांच के लिए चयन किया गया है।</p>
<p>अधिकारियों का कहना है कि एक IPS तीन SIT की निगरानी तो कर सकते हैं, लेकिन एक इंस्पेक्टर को सात SIT की निगरानी करने में दिक्कत आ सकती है, क्योंकि एक इंस्पेक्टर के जिम्मे 500 मुकदमे होंगे। इससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। मणिपुर में हुई हिंसा में चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों, घरों, दुकानों और कार्यालयों में आग लगा दी गई थी। बड़ी संख्या में लोगों की हत्या कर दी गई, लोगों को जिंदा जला दिया गया, लूटपाट, दुष्कर्म और छेड़खानी की घटनाएं हुईं। लोगों को गंभीर चोट पहुंचाई गई। इससे संबंधित मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जांच के लिए चार श्रेणी बनाई गई है।</p>
<p>दिल्ली से गए एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि वहां भाषाई दिक्कत है। स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। दोनों समुदाय एक-दूसरे को दुश्मन की नजर से देख रहे हैं। लोगों में अब भी भय का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग राहत शिविर में रह रहे हैं। इलाका भी एक जैसा नहीं है, कहीं मैदानी तो कहीं पहाड़ी क्षेत्र है। इसके लिए इंस्पेक्टरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही मणिपुर हिंसा की जांच के लिए दूसरे राज्यों से अधिकारियों को भेजा गया है। 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में जांच संबंधी स्टेटस रिपोर्ट सौंपी जानी है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2023 12:37:29 +0530</pubDate>
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