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                <title>Shiv sena - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Shiv sena RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पालघर अस्पताल विवाद में 17 लोगों पर मामला दर्ज, घायल गोविंदाओं के इलाज और डिस्चार्ज को लेकर हुआ विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पालघर में दही हांडी समारोह के दौरान घायल हुए गोविंदाओं के इलाज और अस्पताल से डिस्चार्ज को लेकर हुए विवाद के बाद शिवसेना के 17 पदाधिकारियों और समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले में पालघर जिला प्रमुख कुंदन सांखे सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टर और कर्मचारियों के साथ कथित बदसलूकी, धमकी और मारपीट के आरोप लगाए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51719/palghar-hospital-row-17-booked-dispute-treatment-injured-govindas"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/40c4e4a0-301f-4cf1-9d2e-da9bfd59a9c8.jpeg" alt=""></a><br /><p>पालघर में दही हांडी समारोह के दौरान घायल हुए गोविंदाओं के इलाज और अस्पताल से डिस्चार्ज को लेकर हुए विवाद के बाद शिवसेना के 17 पदाधिकारियों और समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले में पालघर जिला प्रमुख कुंदन सांखे सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टर और कर्मचारियों के साथ कथित बदसलूकी, धमकी और मारपीट के आरोप लगाए हैं।</p>
<p>यह मामला 5 सितंबर की देर रात पालघर के शिवाजी चौक के पास स्थित रिलीफ अस्पताल में सामने आया। दही हांडी समारोह के दौरान मानव पिरामिड बनाने के दौरान कई गोविंदा घायल हुए थे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के अनुसार, रात के दौरान सात घायल लोगों का उपचार किया गया, जिनमें कुछ को सिर, रीढ़ और कंधे में चोटें आई थीं।</p>
<p>अस्पताल के अनुसार, कुछ मरीजों के सीटी स्कैन और एक्स-रे किए गए थे। सिर और रीढ़ की चोट वाले मरीजों को डॉक्टरों ने 24 घंटे निगरानी में रखने की सलाह दी थी। इसी दौरान इलाज और जांच के खर्च को लेकर विवाद शुरू हुआ। अस्पताल ने कुछ मरीजों के इलाज और जांच के लिए कुल ₹19,866 का भुगतान मांगा था। आयोजकों की ओर से अस्पताल में ₹10,000 जमा किए जाने की बात भी सामने आई है।</p>
<p>अस्पताल के अनुसार, कुछ मरीजों के सीटी स्कैन और एक्स-रे किए गए थे। सिर और रीढ़ की चोट वाले मरीजों को डॉक्टरों ने 24 घंटे निगरानी में रखने की सलाह दी थी। इसी दौरान इलाज और जांच के खर्च को लेकर विवाद शुरू हुआ। अस्पताल ने कुछ मरीजों के इलाज और जांच के लिए कुल ₹19,866 का भुगतान मांगा था। आयोजकों की ओर से अस्पताल में ₹10,000 जमा किए जाने की बात भी सामने आई है।</p>
<p>अस्पताल की शिकायत के मुताबिक, पालघर जिला प्रमुख कुंदन सांखे, शिवसेना शहर प्रमुख राहुल घरात और अन्य कार्यकर्ता रात करीब 1:15 बजे अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने घायल मरीजों के सीटी स्कैन को लेकर मेडिकल स्टाफ से सवाल किए। अस्पताल का कहना है कि महिला डॉक्टर ने सिर और रीढ़ की चोट के मामलों में जांच को चिकित्सकीय रूप से जरूरी बताया, जिसके बाद कथित तौर पर बहस शुरू हो गई</p>
<p>अस्पताल ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान महिला डॉक्टर के साथ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और अस्पताल में तोड़फोड़ करने की धमकी दी गई। शिकायत में यह भी आरोप है कि शिवसेना शहर प्रमुख ने अस्पताल के एक कर्मचारी को थप्पड़ मारा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कथित मारपीट की घटना रिसेप्शन पर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई है।</p>
<p>दूसरी ओर, शिवसेना पदाधिकारियों ने अस्पताल के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि विवाद इसलिए हुआ क्योंकि कथित तौर पर मामूली चोट वाले कुछ मरीजों को डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा था। नेताओं के अनुसार, एक घायल गोविंदा को डिस्चार्ज कराने के लिए ₹10,000 पहले ही जमा किए गए थे और बाद में अन्य गोविंदा मंडलों ने भी ऐसी ही शिकायतें की थीं।</p>
<p>अस्पताल की शिकायत के बाद पालघर पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों में कुंदन सांखे, राहुल घरात, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और अन्य पार्टी कार्यकर्ता एवं समर्थक शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।</p>
<p>पुलिस अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी भी आरोपी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51719/palghar-hospital-row-17-booked-dispute-treatment-injured-govindas</link>
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                <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 15:33:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: भरत गोगावले रायगढ़ के नए पालकमंत्री, गिरीश महाजन को नाशिक की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने रायगढ़ और नाशिक के पालकमंत्री पदों को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करते हुए भरत गोगावले को रायगढ़ और गिरीश महाजन को नाशिक का पालकमंत्री नियुक्त किया है। दोनों जिलों के पदों को लेकर महायुति में लंबे समय से खींचतान चल रही थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51420/big-decision-of-maharashtra-government-bharat-gogavale-new-guardian-minister"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/untitled-design-2026-08-17t153147.787.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने लंबे समय से लंबित रायगढ़ और नाशिक के पालकमंत्री पदों को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान को आखिरकार खत्म कर दिया है। राज्य सरकार ने शिवसेना नेता और मंत्री भरत गोगावले को रायगढ़ का पालकमंत्री नियुक्त किया है, जबकि BJP के वरिष्ठ नेता और मंत्री गिरीश महाजन को नाशिक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। <br /><br />इन दोनों जिलों के पालकमंत्री पद को लेकर महायुति सरकार के भीतर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। रायगढ़ को लेकर शिवसेना और NCP के बीच दावेदारी सामने आई थी, जबकि नाशिक को लेकर भी BJP और NCP के बीच राजनीतिक खींचतान की चर्चा थी। सरकार के ताजा फैसले के बाद दोनों महत्वपूर्ण जिलों के पालकमंत्री पद को लेकर बना सस्पेंस समाप्त हो गया है। <br /><br />भरत गोगावले को रायगढ़ की कमान<br />भरत गोगावले लंबे समय से रायगढ़ के पालकमंत्री पद की मांग कर रहे थे। वह महाड विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और रायगढ़ जिले की राजनीति में उनका मजबूत प्रभाव माना जाता है। अब सरकार ने उन्हें आधिकारिक तौर पर जिले की जिम्मेदारी सौंप दी है।  </p>
<p><br />स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रायगढ़ में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी भी गोगावले को दी गई थी। इसके बाद से ही उनके रायगढ़ के पालकमंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। अब सरकार के फैसले के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया है। <br /><br />गिरीश महाजन को नाशिक की जिम्मेदारी<br />BJP के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री गिरीश महाजन को नाशिक जिले का पालकमंत्री बनाया गया है। महाजन जलगांव जिले के जामनेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं।</p>
<p><br />नाशिक के पालकमंत्री पद को लेकर भी महायुति के भीतर लंबे समय से चर्चा और दावेदारी चल रही थी। सरकार के ताजा निर्णय के बाद अब गिरीश महाजन नाशिक जिले के प्रशासनिक और विकास संबंधी मामलों में समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। <br /><br />महायुति के भीतर लंबे विवाद का हुआ अंत<br />रायगढ़ और नाशिक के पालकमंत्री पदों को लेकर विवाद महाराष्ट्र की महायुति सरकार के भीतर राजनीतिक समीकरणों का अहम मुद्दा रहा है। पहले की नियुक्तियों के बाद गठबंधन के सहयोगी दलों की आपत्तियों के चलते दोनों पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी। <br /><br />अब रायगढ़ की जिम्मेदारी शिवसेना के भरत गोगावले और नाशिक की जिम्मेदारी BJP के गिरीश महाजन को देकर सरकार ने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। इससे महायुति के भीतर लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद के खत्म होने की उम्मीद है। <br /><br />रायगढ़ में अब गोगावले की बड़ी जिम्मेदारी<br />पालकमंत्री के तौर पर भरत गोगावले के सामने रायगढ़ में विकास योजनाओं की निगरानी, जिला प्रशासन के साथ समन्वय और सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू कराने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।</p>
<p><br />वहीं, नाशिक जैसे महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी मिलने के बाद गिरीश महाजन के सामने भी प्रशासनिक समन्वय और विकास परियोजनाओं को गति देने की चुनौती होगी।<br />सरकार के इस फैसले से दोनों जिलों में लंबे समय से खाली पड़े पालकमंत्री पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है और अब प्रशासनिक कामकाज में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 18:02:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मीरा-भाईंदर में BJP का बड़ा कदम! शिंदे और सरनाईक की तस्वीरें हटाने की तैयारी, महायुति में बढ़ी खींचतान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मीरा-भाईंदर में BJP की ओर से एकनाथ शिंदे और प्रताप सरनाईक की तस्वीरें हटाने की पहल को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस कदम को शिंदे गुट के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है और इससे BJP-शिवसेना के बीच स्थानीय स्तर पर चल रही खींचतान फिर सामने आ गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51345/bjps-big-step-in-mira-bhayander-preparation-to-remove-pictures-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/screenshot_2026-08-13-20-06-40-594_com.android.chrome-edit.jpg" alt=""></a><br /><p>मीरा-भाईंदर: मीरा-भाईंदर की राजनीति में BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद एक बार फिर चर्चा में हैं। महानगरपालिका से जुड़े एक प्रस्ताव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। BJP की ओर से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मंत्री प्रताप सरनाईक की तस्वीरें हटाने की पहल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।<br />इस कदम को शिवसेना खेमे के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, दोनों दलों के बीच स्थानीय स्तर पर पहले से चले आ रहे मतभेदों के बीच यह नया विवाद महायुति के भीतर बढ़ती खींचतान की ओर इशारा कर रहा है।</p>
<p><br />तस्वीरें हटाने के प्रस्ताव से गरमाई राजनीति<br />मीरा-भाईंदर महानगरपालिका से जुड़े प्रस्ताव में एकनाथ शिंदे और प्रताप सरनाईक की तस्वीरों को हटाने की बात सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। BJP और शिवसेना के स्थानीय नेताओं के बीच पहले से कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं और अब तस्वीरों को लेकर सामने आया विवाद दोनों दलों के संबंधों को लेकर नई चर्चा पैदा कर रहा है।<br />यह मामला केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक वर्चस्व, प्रशासनिक फैसलों और महानगरपालिका में प्रभाव को लेकर चल रही खींचतान भी देखी जा रही है।</p>
<p><br />महायुति के भीतर मतभेद फिर सामने<br />महाराष्ट्र में BJP, शिवसेना और NCP महायुति सरकार का हिस्सा हैं। हालांकि, मीरा-भाईंदर की स्थानीय राजनीति में BJP और शिंदे गुट के बीच कई बार मतभेद सामने आए हैं।<br />महानगरपालिका के फैसलों और प्रस्तावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति पहले भी बन चुकी है। ऐसे में तस्वीरों को हटाने की पहल ने एक बार फिर सहयोगी दलों के बीच स्थानीय समीकरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं </p>
<p><br />शिवसेना के लिए राजनीतिक झटका?<br />एकनाथ शिंदे और प्रताप सरनाईक की तस्वीरें हटाने की पहल को शिवसेना के लिए प्रतीकात्मक राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब दोनों दल मीरा-भाईंदर क्षेत्र में अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।<br />अब नजर इस बात पर है कि शिवसेना इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है और क्या पार्टी की ओर से इसका औपचारिक विरोध किया जाता है।</p>
<p><br />स्थानीय राजनीति में बढ़ रहा टकराव<br />मीरा-भाईंदर में BJP और शिवसेना के बीच मतभेद सिर्फ महानगरपालिका के प्रस्तावों तक सीमित नहीं हैं। स्थानीय राजनीतिक मुद्दों पर दोनों पक्षों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आते रहे हैं।</p>
<p><br />सीटों के बंटवारे, संगठनात्मक प्रभाव और स्थानीय प्रशासन में वर्चस्व जैसे मुद्दे भी दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में तस्वीरों जैसे प्रतीकात्मक मुद्दे भी राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बन सकते हैं।</p>
<p><br />BJP और शिवसेना के अगले कदम पर नजर<br />मीरा-भाईंदर में BJP की मजबूत राजनीतिक स्थिति के बीच पार्टी के स्थानीय फैसलों का व्यापक राजनीतिक असर हो सकता है। दूसरी ओर, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भी क्षेत्र में अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।</p>
<p><br />अब देखना होगा कि तस्वीरों को लेकर विवाद आगे किस दिशा में जाता है। यदि शिवसेना की ओर से इसका कड़ा विरोध किया जाता है, तो महायुति के स्थानीय स्तर पर रिश्तों में और तनाव पैदा हो सकता है।</p>
<p><br />फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने मीरा-भाईंदर की राजनीति को गर्म कर दिया है और आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 20:07:17 +0530</pubDate>
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