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                <title>water shortage - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>water shortage RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई में पानी टैंकर सेवा ठप, भूजल कार्रवाई के विरोध में ऑपरेटरों की हड़ताल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में पानी टैंकर ऑपरेटरों ने भूजल दोहन पर कार्रवाई के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है। इससे शहर की कई हाउसिंग सोसायटियों, निर्माण परियोजनाओं और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में जल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। #MumbaiNews #WaterTankerStrike #MumbaiWaterCrisis #BMC #MaharashtraNews #BreakingNews</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50125/water-tanker-service-halted-in-mumbai-operators-strike-in-protest"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/deccanherald_2025-04-03_562sn4r6_file7zxn4bot2gg1kk5zs3qh.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>मुंबई में जल संकट की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि पानी टैंकर ऑपरेटरों ने भूजल दोहन पर प्रशासन की सख्ती के विरोध में अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं। टैंकर संचालकों के इस फैसले से शहर के कई इलाकों, हाउसिंग सोसायटियों, निर्माण परियोजनाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर असर पड़ने की संभावना है।</p>
<p>टैंकर ऑपरेटरों का आरोप है कि हाल ही में भूजल निकासी और बोरवेल संचालन को लेकर की गई कार्रवाई से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि कई टैंकर जल स्रोतों को सील किए जाने और नियामकीय प्रतिबंधों के कारण पानी की आपूर्ति करना मुश्किल हो गया है।</p>
<p>दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि भूजल संसाधनों के संरक्षण और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बिना अनुमति भूजल दोहन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।</p>
<p>हड़ताल के चलते मुंबई के कई हिस्सों में पानी की वैकल्पिक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से वे क्षेत्र जहां टैंकरों पर निर्भरता अधिक है, वहां लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई आवासीय सोसायटियों ने भी स्थिति को लेकर चिंता जताई है।</p>
<p>टैंकर संघों ने सरकार से तत्काल बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक सेवाएं बंद रखने का निर्णय जारी रह सकता है।</p>
<p>इस बीच, प्रशासन और टैंकर संचालकों के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पानी का उपयोग सावधानी से करें और उपलब्ध संसाधनों का संरक्षण करें, ताकि संभावित संकट की स्थिति से निपटा जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:55:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खारघर/ सिडको बस्तियों में पानी की कमी...  20 फीसदी पानी कटौती से नागरिक परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">सिडको बोर्ड द्वारा निर्मित खारघर और अन्य बड़ी आवासीय परियोजनाओं के सपने को पूरा करते हुए, निम्न और निम्न आय वर्ग के निवासियों को बहुमंजिला इमारतों में घर दिए गए, लेकिन सिडको बोर्ड द्वारा ऐसा भी नहीं किए जाने से निवासी अपना गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं। पानी की कमी के दौरान इन आवास इकाइयों में पानी के टैंकर भेजें।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/32616/water-shortage-in-kharghar--cidco-colonies-citizens-troubled-by-20-percent-water-cut"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-07/drrr.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पनवेल :</strong> सिडको बोर्ड के अधिकारियों को उम्मीद है कि जून के मध्य के बाद मानसून शुरू होने पर पानी की स्थिति बदल जाएगी; लेकिन बांध में पानी का भंडारण अभी आधा भी नहीं भरा है. सिडको हेटवाने बांध से पानी पंप करता है और खारघर, उल्वे, द्रोणागिरी इलाकों में पानी की आपूर्ति करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जुलाई महीने में भी बांध में पानी का भंडारण कम होने के कारण सिडको ने 20 प्रतिशत पानी की कटौती लागू की। इसलिए, द्रोणागिरी और उल्वे बस्तियों के साथ-साथ खारघर के नागरिकों को पानी के अकाल का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल रायगढ़ जिले में भारी बारिश के कारण हालांकि मौसम विभाग ने नागरिकों को काम होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी है, लेकिन घरों में लगे नलों में पीने का पानी नहीं आने से यहां के निवासियों को खारघर की दुकान से ऊंचे दाम पर पीने के पानी की बोतल खरीदनी पड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">हेटवाने बांध की क्षमता 144 मिलियन क्यूबिक मीटर है और वर्तमान में बांध में 50 प्रतिशत पानी का भंडारण है। यदि जुलाई के अंत या अगस्त के मध्य तक बारिश जारी रही तो बांध 70 प्रतिशत से अधिक भर जाने की उम्मीद है। ऐसे में सिडकोवासियों को अभी एक माह तक पानी की समस्या से जूझना पड़ेगा. खारघर कॉलोनी को 85 मिलियन लीटर पानी की जरूरत है। लेकिन इस कॉलोनी में 75 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई की जाती है. फिलहाल सप्ताह में दो दिन पानी नहीं आने से शहरवासियों के सामने सवाल है कि जलापूर्ति की योजना कैसे बनायी जाये.</p>
<p style="text-align:justify;">जैसा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रत्येक बेघर व्यक्ति को एक उचित घर प्रदान करने का लक्ष्य रखा है, राज्य सरकार ने सिडको निगम के माध्यम से सिडको कॉलोनियों में अधिकांश घर बनाने की योजना बनाई है। इस योजना से, पिछले आठ वर्षों में, प्रधान मंत्री आवास योजना खारघर, उल्वे, द्रोणागिरी, तलोजा, कलंबोली, कामोठे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आवास परियोजनाएं चला रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि सिडको का लक्ष्य दो लाख घर बनाने और बेचने का है, इसलिए अब तक 40 हजार से ज्यादा घर बिकने बाकी हैं. लेकिन यहां 250,000 नए घर और 1000,000 पुराने घर हैं और इन घरों में रहने वाले नागरिकों के पीने के पानी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और सिडको ने दस वर्षों में कोई नया बांध बनाने की कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। जैसे-जैसे हर साल वर्षा की मात्रा कम होती जा रही है, पानी की समस्या और भी गंभीर होती जा रही है।<br /><br />सिडको हेटवाने बांध से जल सुरंग के काम पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इस जल सुरंग से जल भण्डारण को सीधे नये जल उपचार केन्द्र वियाल तक लाया जायेगा। लेकिन इस परियोजना का पानी वास्तव में सिडको कॉलोनियों तक पहुंचने में 2028 लगेंगे।<br /><br />सिडको बोर्ड द्वारा निर्मित खारघर और अन्य बड़ी आवासीय परियोजनाओं के सपने को पूरा करते हुए, निम्न और निम्न आय वर्ग के निवासियों को बहुमंजिला इमारतों में घर दिए गए, लेकिन सिडको बोर्ड द्वारा ऐसा भी नहीं किए जाने से निवासी अपना गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं। पानी की कमी के दौरान इन आवास इकाइयों में पानी के टैंकर भेजें।<br /><br />सोमवार को उरण को पानी सप्लाई करने वाला एमआईडीसी का रनसाई बांध लबालब हो गया है. इसलिए एमआईडीसी के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि मंगलवार और शुक्रवार को उरानकरों की दो दिवसीय पानी कटौती रद्द कर मंगलवार को पानी शुरू किया जाएगा. जिससे यहां के नागरिकों को राहत मिली है. रनसाई बांध में जल भंडारण की आपूर्ति के लिए नवंबर माह से पानी की कटौती शुरू कर दी गयी थी. जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में रणसाई बांध लबालब होने लगा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 18:20:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र : मुंबई से महज 100 KM दूर पहाड़ पार कर पानी लाने को मजबूर लोग, लड़कों की नहीं हो पा रही शादी</title>
                                    <description><![CDATA[शहापुर के अजनुप गांव में हर रोज महिलाएं सुबह 6 बजे से ही पानी भरने का काम करती हैं. इनके गांव में मौजूद कुआं पूरी तरह सूख चुका है. तीन गांव के बीच मात्र एक कुआं मौजूद है जिससे लगभग 1 हजार लोग प्यास बुझाते हैं.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/21923/100-km-away-from-mumbai-people-are-forced-to-cross-the-mountain-to-get-water-boys-are-unable-to-get-married-"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-06/images---2023-06-08t231408.667.jpeg" alt=""></a><br /><p>तपती गर्मी और मॉनसून में हुई देरी का असर महाराष्ट्र (Maharashtra) के ग्रामीण इलाकों में पड़ा है. जहां पर लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. मुंबई से महज़ 100 किलोमीटर दूर शहापुर में हजारों गांव वाले टैंकर से पानी भरने को मजबूर हैं. जिस दिन टैंकर नहीं आता है, उस दिन लोगों को एक पूरा पहाड़ पार कर पानी भरने जाना पड़ता है. यह परेशानी सालों से मौजूद है और इसका सबसे बुरा हाल गांव की महिलाओं पर पड़ा है. </p>
<p><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/2023-06/images---2023-06-08t231408.667.jpeg" alt="images - 2023-06-08T231408.667"></img></p>
<p>शहापुर के अजनुप गांव में हर रोज महिलाएं सुबह 6 बजे से ही पानी भरने का काम करती हैं. इनके गांव में मौजूद कुआं पूरी तरह सूख चुका है. तीन गांव के बीच मौजूद एक कुएं से करीब 1000 लोगों की प्यास बुझाई जाती है. लेकिन इस साल फरवरी महीने में ही पानी खत्म होने के बाद टैंकर के जरिए कुएं में पानी भरा जाता है. जिसका इस्तेमाल गांव वाले करते हैं. </p>
<p>55 वर्षीय सोमी एक हाथ में लाठी और दूसरे हाथ से पानी का मटका उठाती हैं. उम्र हो चुकी है लेकिन मजबूरी के चलते उन्हें हर रोज ऐसा करना पड़ रहा है. वो बताती हैं की कई सालों से इस जगह पर यह समस्या मौजूद है. इसी गांव में रहने वालीं संगीता वारे बताती हैं कि सुबह से छठी बार पानी भरने के लिए इस कुएं पर पहुंचीं हैं. इनके घर और इस कुएं के बीच की दूरी लगभग डेढ़ किलोमीटर है. </p>
<p>जब कुएं का पानी खत्म हो जाता है या किसी दिन टैंकर इनके गांव नहीं पहुंचता. तब इन महिलाओं को पानी भरने के लिए एक पूरा पहाड़ पार करना पड़ता है. पहाड़ के दूसरी तरफ वैतरणा नदी है जहां से यह पानी लाती हैं. क्योंकि पूरा पहाड़ उतरना और दोबारा चढ़ना पड़ता है इसलिए एक बार में कोई दो से ज्यादा मटके अपने साथ नहीं लाता. और कभी-कभी इन लोगों को कई बार पहाड़ चढ़ना और उतरना पड़ता है</p>
<p>शहापुर के ओठावा गांव में भी पानी की यही समस्या मौजूद है. गांव पहाड़ की चोटी पर बसा हुआ और लोग टैंकर के भरोसे जी रहे हैं. इसी गांव में रहने वालीं गंगुबाई हुडा बताती हैं की सालों से पानी नहीं मौजूद होने के कारण गांव में लड़कों की शादी नहीं हो रही है, कोई अपनी बेटी को यहां नहीं भेजना चाहता है.</p>
<p>पीढ़ियों से यहां पानी की परेशानी मौजूद है, जब इस गांव के लड़के शादी करने के लिए किसी से बात करते हैं तो उन्हें 4 से 8 साल तक इंतजार करना पड़ता है, कोई अपनी लड़की को इस गांव में नहीं भेजना चाहता क्योंकि यहां पानी नहीं है.. पानी भरने के लिए पहाड़ चढ़ना पड़ता है, 6 बजे पानी भरने जाने पर लोग 9 बजे वापस आते हैं.</p>
<p>गौरतलब है कि शहापुर तालुका में मौजूद तानसा, भात्सा, वैतरणा और मध्य वैतरणा जैसे बांध से मुंबई और उसके आसपास के इलाके में पानी पहुंचाई जाती है, लेकिन जिस शहापुर इलाके से यह पानी आता है, वहीं पर रहने वाले लोग परेशान हैं. क्योंकि यह लोग पहाड़ की चोटी पर रहते हैं, वहां पानी पहुंचाना एक बड़ी समस्या है. इलाके में मौजूद करीब 198 गांवों में 38 टैंकर से पानी पहुंचाया जाता है. पूर्व विधायक पांडुरंग बरोरा ने बताया की इन इलाकों में पानी पहुंचाने के लिए भावली डैम के पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है और इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल खर्च 316 करोड़ रुपए की है, लेकिन योजना पूरा होने में करीब 2 साल का वक्त लगेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 23:23:29 +0530</pubDate>
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