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                <title>Supreme court - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Supreme court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई की होगी जांच! सुप्रीम कोर्ट ने बनाया 5 सदस्यीय हाई-पावर्ड पैनल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी गठित की है। कमेटी पुलिस कार्रवाई के साथ प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित हिंसा और अन्य आरोपों की भी जांच करेगी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51470/police-action-on-student-protest-will-be-investigated-supreme-court"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/untitled_design___2023_04_24t152817_142.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली: छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों पर लगाए गए कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने 5 सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) गठित की है, जो छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और बल प्रयोग से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच करेगी। </p>
<p><br />सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठाया, जिनमें 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। प्रदर्शन का संबंध कथित परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी मांगों से था। <br /><br />पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज करेंगे कमेटी की अध्यक्षता<br />5 सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों को शामिल किया है, ताकि पूरे मामले की स्वतंत्र और व्यापक जांच हो सके। <br /><br />कमेटी में जस्टिस रवि शंकर झा, जो पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे हैं, जस्टिस शालिंदर कौर, जो दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश हैं, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त DGP डॉ. एलआर बिश्नोई शामिल हैं। <br /><br />पुलिस पर लगाए गए आरोपों की होगी जांच<br />कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किया गया बल कानून, नियमों और निर्धारित मानकों के अनुरूप था या नहीं। कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में रहेंगे। <br /><br />इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, हिंसा और ऑनलाइन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही प्रदर्शनकारियों की निगरानी और तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े कुछ मुद्दे भी अदालत के सामने उठाए गए हैं। <br /><br />प्रदर्शनकारियों की हिंसा के आरोप भी जांच के दायरे में<br />सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी केवल पुलिस कार्रवाई की शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ कथित हिंसा से जुड़े आरोपों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। इससे पूरे घटनाक्रम की दोनों पक्षों से निष्पक्ष समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। <br /><br />सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच को क्यों माना जरूरी?<br />अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और विभिन्न पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद स्वतंत्र जांच की जरूरत महसूस की। कमेटी में न्यायपालिका, पुलिस और जांच एजेंसी से जुड़े अनुभवी लोगों को शामिल करने का उद्देश्य घटनाओं की व्यापक और निष्पक्ष समीक्षा करना है। <br /><br />सुप्रीम कोर्ट को उम्मीद है कि हाई-पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट और सिफारिशें मामले की आगे की सुनवाई में अदालत की मदद करेंगी और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। <br /><br />अब कमेटी की रिपोर्ट पर नजर<br />5 सदस्यीय पैनल के गठन के बाद अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण कमेटी की जांच और उसकी रिपोर्ट होगी। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग और प्रदर्शन से जुड़े आरोपों पर आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।</p>
<p><br />सुप्रीम कोर्ट का यह कदम छात्र प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 19:09:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एथेनॉल आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, यथास्थिति बनाए रखने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है और कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें तेल कंपनियों को एक निजी फर्म का कोटा बढ़ाने पर विचार करने को कहा गया था। BPCL की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना कि चालू आपूर्ति अनुबंधों में बदलाव करने से केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) नीति और देश की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50485/supreme-courts-big-decision-on-ethanol-allocation-ban-on-karnataka"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/q0s38il8_supreme-court-of-india_625x300_26_august_25.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>नई दिल्ली / मुंबई: </strong>सुप्रीम कोर्ट ने देश के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम) को बड़ी राहत देते हुए एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 के लिए आवंटन पर 'यथास्थिति' (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस निर्देश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को एक निजी फर्म के आवंटन पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया था।</p>
<p dir="ltr">​जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा कर्नाटक हाईकोर्ट के 16 जून के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।</p>
<h3 dir="ltr">​देश की ऊर्जा नीति पर पड़ सकता था असर: अटॉर्नी जनरल</h3>
<p dir="ltr">​सुनवाई के दौरान BPCL की ओर से पेश देश के अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणी ने दलील दी कि कर्नाटक उच्च न्यायालय का निर्देश केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी को अस्थिर कर सकता है। उन्होंने कहा कि 'वीआईएनपी डिस्टिलरीज एंड शुगर्स प्राइवेट लिमिटेड' (VINP Distilleries) को एथेनॉल कोटा बढ़ाने के आदेश से जारी खरीद प्रक्रिया बाधित हो जाएगी।</p>
<p dir="ltr">​अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आपूर्ति अनुबंध पहले ही अक्टूबर 2025 में फाइनल हो चुके थे और वर्तमान में इसकी आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। ऐसी स्थिति में अदालती हस्तक्षेप से पूरी आवंटन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।</p>
<h3 dir="ltr">​क्या था कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश?</h3>
<p dir="ltr">​दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 16 जून को अपने फैसले में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (BPCL, IOCL और HPCL) को निर्देश दिया था कि वे वीआईएनपी डिस्टिलरीज द्वारा एथेनॉल आवंटन बढ़ाने की मांग वाले आवेदन पर पुनर्विचार करें। कंपनी ने लॉन्ग-टर्म ऑफटेक एग्रीमेंट का हवाला देते हुए अधिक कोटा मांगा था। लेकिन तेल कंपनियों का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और आपूर्ति शुरू होने के बाद आवंटन को फिर से खोलने से देशव्यापी स्तर पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।</p>
<h3 dir="ltr">​क्यों जरूरी है ए20 (E20) प्रोग्राम?</h3>
<p dir="ltr">​केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि भारत का 'E20 ईंधन कार्यक्रम'—जिसके तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य है—एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, कच्चे तेल के आयात को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।</p>
<p dir="ltr">​सुप्रीम कोर्ट ने अब सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक वर्तमान आवंटन प्रक्रिया में किसी भी बदलाव पर रोक लगा दी है।</p>
<h3 dir="ltr">​📌 मुख्य बातें (Quick Highlights):</h3>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>सुप्रीम कोर्ट का आदेश:</strong> एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के आवंटन पर यथास्थिति (Status Quo) लागू।</li>
<li dir="ltr">​<strong>हाईकोर्ट के फैसले पर रोक:</strong> कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई गई जिसमें निजी डिस्टिलरी का कोटा बढ़ाने पर विचार करने को कहा गया था।</li>
<li dir="ltr">​<strong>BPCL की दलील:</strong> बीच में आवंटन प्रक्रिया बदलने से सरकार के पूरे एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर असर पड़ता।</li>
<li dir="ltr">​<strong>E20 लक्ष्य सुरक्षित:</strong> कोर्ट के फैसले से पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 21:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक हटाई, बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर की सजा पर लगी रोक रद्द कर दी। पूर्व विधायक को बड़ा कानूनी झटका।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49872/unnao-rape-case-supreme-court-kuldeep-sengar-sentence"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/69522bfbda793-supreme-court-stays-bail-of-kuldeep-sengar-in-unnao-rape-case--accused-to-remain-in-jail-292126230-16x9.jpeg" alt=""></a><br /><p>देश को झकझोर देने वाले Unnao rape case मामले में Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक Kuldeep Singh Sengar की सजा पर लगाई गई रोक को रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले को सेंगर के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।</p>
<p><br />रिपोर्ट के मुताबिक, कुलदीप सेंगर ने स्वास्थ्य और अन्य आधारों का हवाला देते हुए सजा निलंबित करने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया और पहले दिए गए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया।<br />उन्नाव रेप केस देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है। आरोप था कि 2017 में उन्नाव की एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया गया था। पीड़िता और उसके परिवार ने आरोप लगाया था कि आरोपी कुलदीप सेंगर ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबाने की कोशिश की।</p>
<p><br />मामले ने तब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं जब पीड़िता के परिवार के साथ सड़क हादसा हुआ था और उसके पिता की हिरासत में मौत का आरोप भी सामने आया था। इसके बाद जांच Central Bureau of Investigation को सौंपी गई थी। 2019 में दिल्ली की विशेष अदालत ने कुलदीप सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने पीड़िता को मुआवजा देने का भी आदेश दिया था।</p>
<p><br />सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब सेंगर को फिर से जेल में सजा काटनी होगी। अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में न्याय प्रक्रिया और पीड़िता के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला गंभीर अपराधों में सजा निलंबन के मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। वहीं महिला अधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 20:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> नई दिल्ली : 'मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र को खतरे में डाला', मतदान से ठीक पहले ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर के बीच सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी और झकझोर देने वाली खबर आई है. अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद सख्त और तीखी टिप्पणी की है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के बीच में हस्तक्षेप करना गंभीर मामला है. यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49396/new-delhi-chief-minister-endangered-democracy-supreme-court-reprimands-mamata"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t184419.024.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर के बीच सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी और झकझोर देने वाली खबर आई है. अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद सख्त और तीखी टिप्पणी की है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के बीच में हस्तक्षेप करना गंभीर मामला है. यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री जांच की प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता. इस मामले ने अब कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां ममता सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती हैं.</p>
<p> </p>
<p><strong>‘मुख्यमंत्री ने जांच के बीच दखल देकर सिस्टम को खतरे में डाला’</strong><br />सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद हैरान करने वाली बात कही है. बेंच ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि देश में ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री खुद जांच के बीच में दखल देगा. कोर्ट के मुताबिक यह राज्य बनाम केंद्र का विवाद बिल्कुल नहीं है. यह एक ऐसा मामला है जहां एक व्यक्ति, जो मुख्यमंत्री के पद पर है, वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है.</p>
<p>अदालत ने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कृत्य ने पूरे सिस्टम को जोखिम में डाल दिया है.<br />सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से दलील दी गई कि यह मामला संघीय विवाद से जुड़ा है. हालांकि कोर्ट इस तर्क से बिल्कुल सहमत नजर नहीं आया. कोर्ट ने </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:45:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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