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                <title>Supreme court - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Supreme court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक हटाई, बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर की सजा पर लगी रोक रद्द कर दी। पूर्व विधायक को बड़ा कानूनी झटका।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49872/unnao-rape-case-supreme-court-kuldeep-sengar-sentence"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/69522bfbda793-supreme-court-stays-bail-of-kuldeep-sengar-in-unnao-rape-case--accused-to-remain-in-jail-292126230-16x9.jpeg" alt=""></a><br /><p>देश को झकझोर देने वाले Unnao rape case मामले में Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक Kuldeep Singh Sengar की सजा पर लगाई गई रोक को रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले को सेंगर के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।</p>
<p><br />रिपोर्ट के मुताबिक, कुलदीप सेंगर ने स्वास्थ्य और अन्य आधारों का हवाला देते हुए सजा निलंबित करने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया और पहले दिए गए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया।<br />उन्नाव रेप केस देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है। आरोप था कि 2017 में उन्नाव की एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया गया था। पीड़िता और उसके परिवार ने आरोप लगाया था कि आरोपी कुलदीप सेंगर ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबाने की कोशिश की।</p>
<p><br />मामले ने तब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं जब पीड़िता के परिवार के साथ सड़क हादसा हुआ था और उसके पिता की हिरासत में मौत का आरोप भी सामने आया था। इसके बाद जांच Central Bureau of Investigation को सौंपी गई थी। 2019 में दिल्ली की विशेष अदालत ने कुलदीप सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने पीड़िता को मुआवजा देने का भी आदेश दिया था।</p>
<p><br />सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब सेंगर को फिर से जेल में सजा काटनी होगी। अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में न्याय प्रक्रिया और पीड़िता के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला गंभीर अपराधों में सजा निलंबन के मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। वहीं महिला अधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 20:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title> नई दिल्ली : 'मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र को खतरे में डाला', मतदान से ठीक पहले ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर के बीच सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी और झकझोर देने वाली खबर आई है. अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद सख्त और तीखी टिप्पणी की है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के बीच में हस्तक्षेप करना गंभीर मामला है. यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49396/new-delhi-chief-minister-endangered-democracy-supreme-court-reprimands-mamata"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t184419.024.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर के बीच सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी और झकझोर देने वाली खबर आई है. अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद सख्त और तीखी टिप्पणी की है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के बीच में हस्तक्षेप करना गंभीर मामला है. यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री जांच की प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता. इस मामले ने अब कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां ममता सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती हैं.</p>
<p> </p>
<p><strong>‘मुख्यमंत्री ने जांच के बीच दखल देकर सिस्टम को खतरे में डाला’</strong><br />सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद हैरान करने वाली बात कही है. बेंच ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि देश में ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री खुद जांच के बीच में दखल देगा. कोर्ट के मुताबिक यह राज्य बनाम केंद्र का विवाद बिल्कुल नहीं है. यह एक ऐसा मामला है जहां एक व्यक्ति, जो मुख्यमंत्री के पद पर है, वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है.</p>
<p>अदालत ने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कृत्य ने पूरे सिस्टम को जोखिम में डाल दिया है.<br />सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से दलील दी गई कि यह मामला संघीय विवाद से जुड़ा है. हालांकि कोर्ट इस तर्क से बिल्कुल सहमत नजर नहीं आया. कोर्ट ने </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:45:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका : टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के ट्रंप...  लीक हुई बैठक की बातें, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- ‘कुछ करना होगा’</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47902/trump-angry-over-supreme-courts-decision-on-us-tariffs-talks"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/6999176a9783d-donald-trump-tariff-212437107-16x9.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका : </strong>अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी घमासान अब कानूनी मोर्चे पर खुलकर सामने आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए उनके टैरिफ को अवैध ठहरा दिया. 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने न सिर्फ ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चुनावी साल में व्यापार नीति को भी नई बहस के केंद्र में ला दिया है.<br /><br />अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.<br /><br />राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी कानून का सहारा लेते हुए पहले मेक्सिको, कनाडा और चीन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए थे. इसके बाद उन्होंने 'लिबरेशन डे' के नाम पर भारत समेत कई देशों पर व्यापक टैरिफ लागू कर दिए थे. ट्रंप का तर्क था कि ये कदम अमेरिकी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं. उनका कहना रहा है कि टैरिफ से विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश करने को मजबूर होंगी और फैक्ट्रियां वापस लौटेंगी.<br /><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवर्नर्स के साथ एक निजी बैठक में उन्होंने फैसले को 'शर्मनाक' बताया और कहा कि 'इन अदालतों के बारे में कुछ करना होगा.' एक बयान में उन्होंने कहा कि वे व्यापार को पूरी तरह रोक सकते हैं या प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन एक डॉलर का टैरिफ नहीं लगा सकते - इसे उन्होंने 'अजीब स्थिति' बताया. उनके इन बयानों से यह संकेत मिला है कि वे न्यायपालिका के फैसले को चुनौती देने या अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की तैयारी में हैं.<br /><br />कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने नया कदम उठाते हुए वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी. इसे पहले वाले टैरिफ की जगह लेने वाला कदम बताया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करेगा और व्यापार नीति पर पीछे नहीं हटेगा. उनके मुताबिक, टैरिफ से अमेरिकी निवेश और रोजगार को मजबूती मिलती है.<br /><br />अदालत के फैसले को उन अमेरिकी राज्यों और कारोबारियों की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने तर्क दिया था कि अचानक बढ़े आयात शुल्क से उत्पादन लागत बढ़ी और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ पड़ा. अब इस निर्णय के बाद अरबों डॉलर के संभावित रिफंड का रास्ता खुल सकता है. हालांकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि मामला आगे भी कानूनी प्रक्रिया में उलझा रह सकता है.<br /><br />टैरिफ को ट्रंप अपनी आर्थिक नीति की आधारशिला बताते रहे हैं. चुनावी रैलियों में वे दावा करते रहे कि इन कदमों से नौकरियां बढ़ेंगी और अमेरिकी उद्योग को मजबूती मिलेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने चुनावी साल में उनकी व्यापार रणनीति पर अनिश्चितता पैदा कर दी है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन कौन-से वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाता है और क्या यह टकराव कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बड़े संवैधानिक संघर्ष का रूप लेता है. फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी और कानूनी जंग अभी थमी नहीं है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 12:39:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने कोस्टल रोड पर फायर स्टेशन बनाने की दी मंजूरी...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कोस्टल रोड बनाने के लिए समुद्र में भराव डालकर भूमि तैयार की गई है। भराव से तैयार हुई कुल भूमि का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा कोस्टल रोड निर्माण के लिए उपयोग किया गया है जबकि शेष 70 से 75 प्रतिशत यानी करीब 53 हेक्टेयर क्षेत्र पर हरित पट्टी और नागरिक सुविधाएं विकसित की गई है। जिसमे प्रसाधनगृह, जॉगिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक, गार्डन, सागरी पदपथ, खुले नाट्यगृह, बच्चों के लिए उद्यान और खेल मैदान, पुलिस चौकी, बस स्टॉप, भूमिगत पदपथ और जेट्टी जैसी सुविधाएं शामिल होगी। वरळी और हाजी अली में भूमिगत वाहनतल भी बनाया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43322/mumbai-supreme-court-approves-the-fire-station-on-coastal-road"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download-(1)3.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>मनपा के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर फायर स्टेशन बनाने की सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। फायर स्टेशन वर्ली स्थित प्रसिद्ध पूनम चैंबर बिल्डिंग के पीछे बनाया जाएगा। कोस्टल रोड पर किसी तरह का विकास या निर्माण कार्य के लिए सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी जरूरी है। इसी के तहत मनपा प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मनपा प्रशासन ने प्रिंसेस स्ट्रीट फ्लाईओवर से वर्ली सीलिंक तक लगभग 10.58 किलोमीटर लंबा कोस्टल रोड तैयार किया गया है। कोस्टल रोड का नाम धर्मवीर स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज रस्ता रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोस्टल रोड बनाने के लिए समुद्र में भराव डालकर भूमि तैयार की गई है। भराव से तैयार हुई कुल भूमि का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा कोस्टल रोड निर्माण के लिए उपयोग किया गया है जबकि शेष 70 से 75 प्रतिशत यानी करीब 53 हेक्टेयर क्षेत्र पर हरित पट्टी और नागरिक सुविधाएं विकसित की गई है। जिसमे प्रसाधनगृह, जॉगिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक, गार्डन, सागरी पदपथ, खुले नाट्यगृह, बच्चों के लिए उद्यान और खेल मैदान, पुलिस चौकी, बस स्टॉप, भूमिगत पदपथ और जेट्टी जैसी सुविधाएं शामिल होगी। वरळी और हाजी अली में भूमिगत वाहनतल भी बनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा मार्ग के किनारे दो स्थानों पर अग्निशमन केंद्र बनाए जाएंगे। आपातकालीन परिस्थिति में तत्काल सेवा उपलब्ध कराने के लिए वर्ली और प्रियदर्शिनी उद्यान के पास फ्रायर स्टेशन केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। वर्ली स्थित केंद्र के लिए सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति मांगी गई थी जो अब मिल चुकी है। मनपा का कहना है कि इस केंद्र की वजह से दुर्घटना की स्थिति में 20 से 25 मिनट में मदद पहुंचाना संभव होगा। करीब 700 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस केंद्र में तीन दमकल गाड़ियां खड़ी हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और ट्रैफिक जाम के कारण कई बार दमकल गाड़ियां घटनास्थल तक देर से पहुंचती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Aug 2025 08:19:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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