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                <title>Supreme court - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Supreme court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका : टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के ट्रंप...  लीक हुई बैठक की बातें, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- ‘कुछ करना होगा’</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47902/trump-angry-over-supreme-courts-decision-on-us-tariffs-talks"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/6999176a9783d-donald-trump-tariff-212437107-16x9.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका : </strong>अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी घमासान अब कानूनी मोर्चे पर खुलकर सामने आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए उनके टैरिफ को अवैध ठहरा दिया. 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने न सिर्फ ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चुनावी साल में व्यापार नीति को भी नई बहस के केंद्र में ला दिया है.<br /><br />अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.<br /><br />राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी कानून का सहारा लेते हुए पहले मेक्सिको, कनाडा और चीन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए थे. इसके बाद उन्होंने 'लिबरेशन डे' के नाम पर भारत समेत कई देशों पर व्यापक टैरिफ लागू कर दिए थे. ट्रंप का तर्क था कि ये कदम अमेरिकी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं. उनका कहना रहा है कि टैरिफ से विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश करने को मजबूर होंगी और फैक्ट्रियां वापस लौटेंगी.<br /><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवर्नर्स के साथ एक निजी बैठक में उन्होंने फैसले को 'शर्मनाक' बताया और कहा कि 'इन अदालतों के बारे में कुछ करना होगा.' एक बयान में उन्होंने कहा कि वे व्यापार को पूरी तरह रोक सकते हैं या प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन एक डॉलर का टैरिफ नहीं लगा सकते - इसे उन्होंने 'अजीब स्थिति' बताया. उनके इन बयानों से यह संकेत मिला है कि वे न्यायपालिका के फैसले को चुनौती देने या अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की तैयारी में हैं.<br /><br />कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने नया कदम उठाते हुए वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी. इसे पहले वाले टैरिफ की जगह लेने वाला कदम बताया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करेगा और व्यापार नीति पर पीछे नहीं हटेगा. उनके मुताबिक, टैरिफ से अमेरिकी निवेश और रोजगार को मजबूती मिलती है.<br /><br />अदालत के फैसले को उन अमेरिकी राज्यों और कारोबारियों की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने तर्क दिया था कि अचानक बढ़े आयात शुल्क से उत्पादन लागत बढ़ी और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ पड़ा. अब इस निर्णय के बाद अरबों डॉलर के संभावित रिफंड का रास्ता खुल सकता है. हालांकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि मामला आगे भी कानूनी प्रक्रिया में उलझा रह सकता है.<br /><br />टैरिफ को ट्रंप अपनी आर्थिक नीति की आधारशिला बताते रहे हैं. चुनावी रैलियों में वे दावा करते रहे कि इन कदमों से नौकरियां बढ़ेंगी और अमेरिकी उद्योग को मजबूती मिलेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने चुनावी साल में उनकी व्यापार रणनीति पर अनिश्चितता पैदा कर दी है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन कौन-से वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाता है और क्या यह टकराव कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बड़े संवैधानिक संघर्ष का रूप लेता है. फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी और कानूनी जंग अभी थमी नहीं है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 12:39:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने कोस्टल रोड पर फायर स्टेशन बनाने की दी मंजूरी...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कोस्टल रोड बनाने के लिए समुद्र में भराव डालकर भूमि तैयार की गई है। भराव से तैयार हुई कुल भूमि का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा कोस्टल रोड निर्माण के लिए उपयोग किया गया है जबकि शेष 70 से 75 प्रतिशत यानी करीब 53 हेक्टेयर क्षेत्र पर हरित पट्टी और नागरिक सुविधाएं विकसित की गई है। जिसमे प्रसाधनगृह, जॉगिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक, गार्डन, सागरी पदपथ, खुले नाट्यगृह, बच्चों के लिए उद्यान और खेल मैदान, पुलिस चौकी, बस स्टॉप, भूमिगत पदपथ और जेट्टी जैसी सुविधाएं शामिल होगी। वरळी और हाजी अली में भूमिगत वाहनतल भी बनाया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43322/mumbai-supreme-court-approves-the-fire-station-on-coastal-road"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download-(1)3.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>मनपा के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर फायर स्टेशन बनाने की सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। फायर स्टेशन वर्ली स्थित प्रसिद्ध पूनम चैंबर बिल्डिंग के पीछे बनाया जाएगा। कोस्टल रोड पर किसी तरह का विकास या निर्माण कार्य के लिए सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी जरूरी है। इसी के तहत मनपा प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मनपा प्रशासन ने प्रिंसेस स्ट्रीट फ्लाईओवर से वर्ली सीलिंक तक लगभग 10.58 किलोमीटर लंबा कोस्टल रोड तैयार किया गया है। कोस्टल रोड का नाम धर्मवीर स्वराज्य रक्षक छत्रपति संभाजी महाराज रस्ता रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोस्टल रोड बनाने के लिए समुद्र में भराव डालकर भूमि तैयार की गई है। भराव से तैयार हुई कुल भूमि का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा कोस्टल रोड निर्माण के लिए उपयोग किया गया है जबकि शेष 70 से 75 प्रतिशत यानी करीब 53 हेक्टेयर क्षेत्र पर हरित पट्टी और नागरिक सुविधाएं विकसित की गई है। जिसमे प्रसाधनगृह, जॉगिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक, गार्डन, सागरी पदपथ, खुले नाट्यगृह, बच्चों के लिए उद्यान और खेल मैदान, पुलिस चौकी, बस स्टॉप, भूमिगत पदपथ और जेट्टी जैसी सुविधाएं शामिल होगी। वरळी और हाजी अली में भूमिगत वाहनतल भी बनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा मार्ग के किनारे दो स्थानों पर अग्निशमन केंद्र बनाए जाएंगे। आपातकालीन परिस्थिति में तत्काल सेवा उपलब्ध कराने के लिए वर्ली और प्रियदर्शिनी उद्यान के पास फ्रायर स्टेशन केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। वर्ली स्थित केंद्र के लिए सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति मांगी गई थी जो अब मिल चुकी है। मनपा का कहना है कि इस केंद्र की वजह से दुर्घटना की स्थिति में 20 से 25 मिनट में मदद पहुंचाना संभव होगा। करीब 700 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले इस केंद्र में तीन दमकल गाड़ियां खड़ी हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और ट्रैफिक जाम के कारण कई बार दमकल गाड़ियां घटनास्थल तक देर से पहुंचती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Aug 2025 08:19:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। 'जॉब के बदले जमीन' (लैंड फॉर जॉब) घोटाले में फंसे आरजेडी प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बुधवार, 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में उन्हें एक और बड़ा झटका दिया। अदालत ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिससे अब ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने लालू यादव की याचिका को यह कहते हुए खारिज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42593/lalu-prasad-yadav-shocked-the-supreme-court"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-07/4785243-untitled-19-copy.webp" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 'जॉब के बदले जमीन' (लैंड फॉर जॉब) घोटाले में फंसे आरजेडी प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बुधवार, 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में उन्हें एक और बड़ा झटका दिया। अदालत ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिससे अब ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने लालू यादव की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पहले से ही दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने कहा कि “ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया, दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित मामले के फैसले के अनुसार होगी,” लेकिन तब तक निचली अदालत की कार्यवाही पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।</p>
<p>क्या है मामला? यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआई (CBI) का आरोप है कि इस अवधि में रेलवे में ग्रुप 'डी' के पदों पर भर्ती प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर, कई आवेदकों को नौकरी दी गई। इसके बदले में इन आवेदकों से दिल्ली और बिहार में स्थित जमीनें, लालू यादव के परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के नाम पर ट्रांसफर करवाई गईं। सीबीआई ने इस कथित घोटाले को गंभीर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला मानते हुए जांच शुरू की थी। जांच के दौरान सामने आया कि आवेदकों से ट्रांसफर करवाई गई जमीनें बाजार मूल्य से बहुत कम दर पर ली गईं, और कहीं-कहीं तो सिर्फ नाम मात्र के भुगतान पर रजिस्ट्री हुई।</p>
<p>किस स्थिति में है मामला अब? सीबीआई इस मामले में कई चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, और अन्य 15 से ज्यादा व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल हुई है, जहां ट्रायल कोर्ट की सुनवाई चल रही है। लालू यादव की ओर से वकील मुदित गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि जब तक दिल्ली हाई कोर्ट लंबित याचिका पर फैसला नहीं सुनाता। तब तक 12 अगस्त तक निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। लेकिन शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। यह भी उल्लेखनीय है कि 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की एक अन्य याचिका पहले ही खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें आरोप तय करने की प्रक्रिया को सही ठहराया गया था।</p>
<p>क्या हो सकते हैं अगले कदम? सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी और आदेश के बाद सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगर ट्रायल कोर्ट आरोप तय कर देता है, तो लालू यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ विचारण (trial) औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित याचिका पर आने वाले निर्णय का इस मामले पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। यदि हाई कोर्ट लालू यादव के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो यह ट्रायल प्रक्रिया को रोक भी सकता है। लेकिन तब तक, लालू यादव को निचली अदालत का सामना करना ही होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 17:41:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कन्हैया लाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म 'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट को सौंपते हुए निर्देश दिया कि सभी पक्ष वहां अपनी दलील पेश करें। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने फिल्म पर रोक की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।</p>
<p>इसका मतलब है कि फिल्म के निर्माता केंद्र सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय की समिति द्वारा सुझाए गए छह बदलावों के साथ फिल्म को रिलीज कर सकते हैं। 'उदयपुर फाइल्स' कन्हैया लाल हत्याकांड पर आधारित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42450/supreme-court-refuses-to-stop-the-release-of-udaipur-files"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-07/4773719-untitled-111-copy.webp" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कन्हैया लाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म 'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट को सौंपते हुए निर्देश दिया कि सभी पक्ष वहां अपनी दलील पेश करें। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने फिल्म पर रोक की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।</p>
<p>इसका मतलब है कि फिल्म के निर्माता केंद्र सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय की समिति द्वारा सुझाए गए छह बदलावों के साथ फिल्म को रिलीज कर सकते हैं। 'उदयपुर फाइल्स' कन्हैया लाल हत्याकांड पर आधारित है, जो साल 2022 में उदयपुर में ‘सर तन से जुदा’ नारे के साथ हुआ था। इस घटना ने देशभर में सनसनी फैला दी थी। फिल्म के ट्रेलर और डायलॉग को लेकर विवाद उठा था, जिसके बाद जमीयत ने इसे सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाते हुए रिलीज पर रोक की मांग की थी।</p>
<p>हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सुझाए गए संशोधनों का पालन करने की बात निर्माताओं से कही।</p>
<p>दिल्ली हाईकोर्ट यह तय करेगी कि केंद्र सरकार के 21 जुलाई 2025 के आदेश से कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं। हाईकोर्ट को यह अधिकार है कि वह फिल्म पर कोई आदेश दे या न दे। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज पर रोक नहीं लगाई, इसलिए निर्माता कभी भी फिल्म रिलीज कर सकते हैं। शनिवार और रविवार को छुट्टी होने के कारण हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले रिलीज होने की संभावना ज्यादा है। यह फिल्म निर्माताओं और उन दर्शकों के लिए बड़ी राहत है, जो इस फिल्म को देखना चाहते हैं।</p>
<p>, कन्हैया लाल हत्याकांड में आरोपी मोहम्मद जावेद की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। कोर्ट ने जावेद को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। कन्हैया लाल के बेटे और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने राजस्थान हाईकोर्ट के जावेद को जमानत देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि जावेद का अपराध गंभीर है, क्योंकि उसने हत्यारों को कन्हैया लाल के ठिकाने और दुकान में उनकी मौजूदगी की जानकारी दी थी, जिससे हत्या को अंजाम देना आसान हुआ। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर जावेद को नोटिस जारी किया था।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Jul 2025 17:13:51 +0530</pubDate>
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