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                <title>Court decision - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Court decision RSS Feed</description>
                
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                <title>चाहे पति के नाम हो या पत्नी के नाम, प्रॉपर्टी पर दोनों का बराबर का हक: हाईकोर्ट</title>
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                        <![CDATA[मद्रास हाई कोर्ट ने एक पत्नी-पत्नी के मामले में प्रॉपर्टी के हक पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से गाड़ी के पहिए चलते हैं, ठीक उसी तरह से घर चलाने के लिए पति और पत्नी दोनों ही बराबर के प्रयास करते हैं.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/22626/madras-hc-tamil-nadu-husband-wife-life-partner-have-equal-share-property"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-06/madras-hc.webp" alt=""></a><br /><p>मद्रास हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा है कि एक पत्नी गृहिणी के रूप में अपने पति की सभी संपत्ति के अधिग्रहण में बराबर योगदान देती है. कोर्ट ने कहा कि इस तथ्य के आधार पर किसी भी महिला को यह बोलकर कि गृहस्थी के सामान में उसकी सहायता वेल्यूलेस यानी मूल्यहीन है, सही नहीं है. कोर्ट ने कहा कि पत्नी अपने पति की संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी की हकदार होती है....Wife as homemaker entitled to equal right in family properties, says Madras HC...</p>
<p>जस्टिस कृष्णन रामासामी ने कहा कि एक पति बिना अपनी पत्नी के सपोर्ट के न तो पैसे कमा सकता है न ही जॉब कर सकता है. पत्नी उसके परिवार की केयर करती है. ऐसी स्थिति में जो भी प्रॉपर्टी चाहे पत्नी के नाम पर खरीदी गई हो चाहे पति के नाम पर उसमें दोनों का अधिकार बराबर होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोई भी संपत्ति दोनों के प्रयाशों और बचत के बिना खरीदना संभव नहीं है....Wife as homemaker entitled to equal right in family properties, says Madras HC....</p>
<p><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/2023-06/madras-hc.webp" alt="madras-hc"></img></p>
<p>जस्टिस रामासामी ने कहा कि अगर पति और पत्नी को एक गाड़ी के दो पहियों की तरह देखा जाए तो दोनों का ही बराबर महत्व है. पति अगर बाहर जाकर पैसे कमाता है तो पत्नी भी घर पर रहकर सबकी देखभाल करती है. दोनों का योगदान परिवार कल्याण के लिए होता है. उन्होंने कहा कि जो भी परिवार के पास होता है उसमें दोनों की बराबर की भागीदारी होती है. उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला पूरे परिवार के लिए समर्पित है और बाद में उसे खाली हाथ बस ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो यह गलत है.....Wife as homemaker entitled to equal right in family properties, says Madras HC....</p>
<p>सुनवाई के दौरान जस्टिस रामासामी ने कहा कि अभी तक कोई ऐसा कानून नहीं बना है जो कि गृहिणी महिलाओं के प्रयासों को प्रमाणिकता दे. उन्होंने कहा कि कोर्ट उन महिलाओं के कंट्रीब्यूशन को अच्छे से समझता है, जब उनके त्याग को रिवॉर्ड देने की बारी आती है.....Wife as homemaker entitled to equal right in family properties, says Madras HC...</p>
<p>मद्रास हाइकोर्ट ने यह टिप्पणी एक 2016 के केस की सुनवाई के दौरान किया है. दरअसल एक दंपत्ती ने 2965 में शादी की थी. इसके बाद दोनों के तीन बच्चे हुए जिसमें दो बेटे और एक लड़की हुई. इसके बाद उसका पति 1983 से 1994 तक जॉब के लिए मिडिल ईस्ट चला गया. जब वह भारत लौटा तो उसने पत्नी पर उसके पैसे से अनचाही प्रॉपर्टी खरीदने का आरोप लगाया. साथ ही पति ने पत्नी पर यह आरोप भी लगाया कि उसकी पत्नी का उसकी गैरमौजूदगी में एक एफेयर भी था....Wife as homemaker entitled to equal right in family properties, says Madras HC....</p>]]>
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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 20:43:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने दिया गैंगस्टर जीवा की पत्नी पायल माहेश्वरी को झटका, गिरफ्तारी से राहत नहीं, जुलाई में होगी सुनवाई</title>
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                        <![CDATA[ गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी ऊर्फ जीवा की पत्नी पायल महेश्वरी को सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है. इस मामले को जुलाई में सुना जाएगा.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/21945/supreme-court-gives-shock-to-gangster-jeeva-s-wife-payal-maheshwari"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-06/download-(3)2.jpg" alt=""></a><br /><p>गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी ऊर्फ जीवा (Sanjeev Maheshwari Jeeva) की पत्नी पायल महेश्वरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में आज सुनवाई हुई. लखनऊ के कोर्ट परिसर में जीवा की हत्या के बाद उसकी पत्नी ने अंतिम संस्कार में में हिस्सा लेने के लिए गिरफ्तारी से राहत दिए जाने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि कल ही संजीव माहेश्वरी का अंतिम संस्कार हुआ. मगर जीवा की पत्नी ने उसमे हिस्सा नही लिया. जीवा के बेटे ने उसका अंतिम संस्कार किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब अंतिम संस्कार हो चुका है, तो ऐसे में जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है. हम इस मामले को जुलाई में सुनेंगे.</p>
<div></div>
<p>जीवा की पत्नी पायल महेश्वरी के वकील ने 13 दिनों की अंतिम क्रिया में शामिल होने के लिए गिरफ्तारी से प्रोटेक्शन की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पायल माहेश्वरी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले की तत्काल सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है. इस मामले की नियमित बेंच के पास सुनवाई होगी. यूपी सरकार की ओर से पायल माहेश्वरी के बारे में सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि जब जीवा जेल में था, उस दौरान पायल ही पूरे गैंग को लीड कर रही थी.</p>
<p><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/2023-06/download-(3)2.jpg" alt="download (3)" width="600" height="336"></img></p>
<p><a href="https://hindi.news18.com/videos/gangster-sanjeev-jeeva-shot-dead-in-lucknow-court-live-murder-of-mukhtar-s-gangster-news18-india-6445717.html">संजीव जीवा</a> की पत्नी पायल माहेश्वरी ने अपने पति के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण की मांग करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जीवा की पत्नी ने अदालत से कहा कि उसे डर है कि उसकी भी हत्या हो सकती है. पायल पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी आरोप लगाए गए हैं. गौरतलब है कि संजीव माहेश्वरी जीवा बीजेपी विधायक ब्रम्हा दत्त द्विवेदी की हत्या के मामले में आरोपी था. उसका नाम बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में भी आया थी. संजीव जीवा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. वह मुख्तार अंसारी के संरक्षण में अपने गिरोह का संचालन करता था. जीवा पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होने वाली आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था.</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 09 Jun 2023 13:23:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>10 साल पुराने मर्डर के केस में कोर्ट ने तीन को सुनाई उम्रकैद की सज़ा</title>
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                        <![CDATA[मंडावली इलाके में 10 साल पहले हुए एक वारदात के मामले में कोर्ट ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और इन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला 2013 का है जिसमें ईस्ट दिल्ली के गणेश नगर में एक शख्स की पीटने की वजह से मौत हो गई थी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/21318/court-sentences-three-to-life-imprisonment-in-10-year-old-murder-case"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-05/court1-100523462.webp" alt=""></a><br /><p>अदालत ने हत्या से जुड़े 10 साल पुराने मामले में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अडिशनल सेशन जज दिपाली शर्मा की अदालत ने करण वर्मा (30), कमल कुमार (39) और परविंदर सिंह यादव (42) पर 5000-5000 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर इन्हें चार महीने की कैद अलग से काटनी होगी।</p>
<p>हत्या से जुड़ा मामला ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के मंडावली इलाके का है। पुलिस को 16 जून 2013 को पीसीआर कॉल मिली थी कि पप्पू हलवाई के पास एक शख्स जख्मी हालत में बेहोश पड़ा हुआ है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जख्मी शख्स को लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया। उसके सिर, चेहरे और बाकी हिस्से पर गंभीर चोट के निशान थे। पुलिस ने हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया था। घायल शख्स की पहचान योगेश (38) के रूप में हुई। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने एफआईआर में हत्या की धारा जोड़ी। पुलिस को पता चला कि पूरी वारदात को गणेश नगर स्थित एक घर की तीसरी मंजिल पर बने रूम में अंजाम दिया गया था। इसके बाद करण वर्मा, कमल कुमार और परविंदर सिंह यादव को अरेस्ट किया गया...Court sentences three to life imprisonment...</p>
<p><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/2023-05/court1-100523462.webp" alt="court1-100523462"></img></p>
<p>पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए कई गवाहों को अदालत में पेश किया। अदालत ने गवाहों के बयान के अलावा जिस कमरे में पूरी वारदात को अंजाम दिया गया, वहां से जुटाए गए सबूतों के आधार पर करण वर्मा, कमल कुमार और परविंदर सिंह को हत्या का दोषी माना। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अडिशनल सेशन जज दिपाली शर्मा की अदालत ने कहा कि यह केस रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए इस केस में दोषियों को मौत की सजा नहीं दी जा सकती..Court sentences to life imprisonment...</p>]]>
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                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/21318/court-sentences-three-to-life-imprisonment-in-10-year-old-murder-case</link>
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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 14:09:19 +0530</pubDate>
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