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                <title>ruling party - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले ने सत्ताधारियों को लिया आड़े हाथ, जनता का ध्यान हटाने पेन ड्राइव...  ऑडियो-वीडियो निकाल रहे </title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">पटोले ने कहा कि जब से मोदी सरकार आई, राजनीतिक स्थिति बदल गई है। जो सरकार के खिलाफ बोलता है उसे जेल में डालने का काम किया। ईडी, सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मविआ सरकार गिराने के लिए भाजपा की ओर से रोज प्रयास किया जा रहा था। यह राज्य की जनता ने देखा है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/32809/congress-state-president-nana-patole-slammed-the-ruling-party--saying-they-are-using-pen-drives-to-divert-public-attention-audio-video"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-07/dgg2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर : </strong>महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री देवेन्द्र फडणवीस और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोपों व चेतावनियों के मामले में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले ने भी सत्ताधारियों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि फडणवीस राज्य के गृह मंत्री हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर उनके पास अनिल देशमुख द्वारा शरद पवार व उद्धव ठाकरे के संदर्भ में बोले गए मामले का सबूत है तो उसे जनता के सामने सार्वजनिक करना चाहिए। वे तो मंत्री पद का उपयोग विपक्ष को धमकी देने के लिए कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं वित्त मंत्री अजीत पवार कहते हैं कि पैसा कहां से लाएंगे। इसका मतलब साफ है कि इन लोगों ने राज्य को गिरवी रखा है। वे पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि समृद्धि हाईवे से सत्ताधारी ही समृद्ध हुए हैं। यह मार्ग लोगों की जान लेने वाला साबित हुआ है। 2 वर्ष में ही इसमें गड्ढे पड़ गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महायुति के नेता इसी स्पर्धा में लगे हैं कि कौन अधिक पैसा खाता है। राज्य में नैसर्गिक आपदा शुरू है। कई भागों में बाढ़ की स्थिति है। शिक्षा व्यवस्था डगमगा गई है और इस ओर ध्यान देने को कोई तैयार नहीं है। इन सारी समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सत्ताधारी पेन ड्राइव, ऑडियो, वीडियो निकालने का काम कर रहे हैं।<br /><br />पटोले ने कहा कि जब से मोदी सरकार आई, राजनीतिक स्थिति बदल गई है। जो सरकार के खिलाफ बोलता है उसे जेल में डालने का काम किया। ईडी, सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मविआ सरकार गिराने के लिए भाजपा की ओर से रोज प्रयास किया जा रहा था। यह राज्य की जनता ने देखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी, सीबीआई से घबराकर जो महायुति में गए उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। इसमें सीएम एकनाथ शिंदे और डीसीएम अजीत पवार का भी समावेश है। सांसद रविन्द्र वायकर ने यह कहकर शिंदे सेना के साथ गए कि उनके पास कोई रास्ता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे भाजपा का कितना दबाव इन नेताओं पर था, यह स्पष्ट होता है। अनिल देशमुख ने इनकार किया तो उनके घर ईडी का छापा डाला गया। उन्हें जेल में डाल दिया गया। पटोले ने कहा कि यही कारण है कि देशमुख जो आरोप लगा रहे हैं वह सच हो सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jul 2024 15:42:16 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम फैसले से पहले सत्ता पक्ष की धड़कन हुई तेज... कल आ सकता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला</title>
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                        <![CDATA[एकनाथ शिंदे की बगावत के साथ शुरू हुआ सत्ता का संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचने वाला है। सुप्रीम कोर्ट कल इस पर फैसला सुना सकता है। सुनवाई पूरी हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट में फैसला रिजर्व है। खबर है कि 11 या 12 मई को कोर्ट फैसला सुना सकता है। क्योंकि जिन पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई है, उनमें एक जज 15 मई को रिटायर हो रहे हैं। इसलिए उनके रिटायरमेंट से पहले फैसला सुनाए जाने की चर्चा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/20722/before-the-supreme-decision--the-ruling-party-s-heart-beat-fast----supreme-court-s-decision-may-come-tomorrow"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-05/supreme-court-uddhav-thackeray-eknath-shinde.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की बगावत के साथ शुरू हुआ सत्ता का संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचने वाला है। सुप्रीम कोर्ट कल इस पर फैसला सुना सकता है। सुनवाई पूरी हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट में फैसला रिजर्व है। खबर है कि 11 या 12 मई को कोर्ट फैसला सुना सकता है। क्योंकि जिन पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई है, उनमें एक जज 15 मई को रिटायर हो रहे हैं। इसलिए उनके रिटायरमेंट से पहले फैसला सुनाए जाने की चर्चा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फैसले को लेकर सत्ता की धड़कनें तेज हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट से जो फैसला आना है, उसमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत सत्ता पक्ष के 16 विधायकों की विधानसभा की सदस्यता दांव पर लगी है। अब तक सुप्रीम कोर्ट में जो सुनवाई हुई है, उसमें दोनों ही तरफ से जोरदार बहस हुई है। बहस के दौरान जजों ने तत्कालीन राज्यपाल की भूमिका को लेकर जिस तरह की टिप्णियां की हैं और संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों पर जो बहस हुई है। उसे देखते हुए फिलहाल पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि फैसला किसके पक्ष में और किसके खिलाफ जाएगा! लेकिन, फैसला सरकार के खिलाफ आया, तो उसका सरकार पर क्या असर हो सकता है, इसे लेकर पांच प्रमुख सवाल उठाए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या सरकार गिर सकती है?<br />अगर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना छोड़ने वाले 16 विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दे दिया, तो शिंदे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। इस स्थिति में शिंदे सरकार का गिरना तय है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसकी होगी नई सरकार?<br />विधानसभा में सरकार के पास उपलब्ध बहुमत के अनुसार शिंदे सरकार के पतन के बाद बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) की सत्ता पर पकड़ बनी रह सकती है। लेकिन, दोनों को मिलकर फिर से सत्ता पक्ष का नेता चुनना पड़ेगा और विधानसभा में बहुमत साबित करना पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शिंदे फिर बन सकते हैं मुख्यमंत्री?<br />शिंदे के फिर से मुख्यमंत्री बनने को लेकर जानकारों की अलग-अलग राय है। कुछ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से अयोग्य करार दिए जाने वाले विधायक अगले 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, वहीं कुछ का कहना है कि यह फैसले पर निर्भर करेगा। अगर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ऐसा नहीं कहा, तो शिंदे फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हां, इसके लिए उन्हें फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी होगी और 6 महीने के भीतर विधानमंडल के किसी एक सदन का सदस्य चुनकर आना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या अध्यक्ष के पाले में होगी गेंद?<br />अगर सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों को सीधे पात्र या अपात्र घोषित नही किया और विधायकों को योग्य या अयोग्य ठहराने का फैसला विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ दिया, तो सत्ता पक्ष की कोशिश फैसले को टालने और यथास्थिति बनाए रखने की होगी। चूंकि, विधानसभा अध्यक्ष सत्ता पक्ष के हैं और उनके निर्णय लेने की कोई समयावधि निश्चित नहीं है, इसलिए ऐसा करना सत्ता पक्ष के लिए सहज है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या केस बड़ी पीठ को सौंपा जाएगा?<br />महाराष्ट्र के इस सत्ता संघर्ष की सुनवाई पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष हुई है। इस केस की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ के सदस्यों में फैसले को लेकर कोई गतिरोध या मतभेद होता है, तो पूरा मामला सात जजों की संविधान पीठ को भी सौंपे जा सकने की चर्चा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर फैसला सत्ता के पक्ष में गया तो?<br />चर्चा इस बात की भी है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला उद्धव ठाकरे को छोड़ने वाले 16 विधायकों के पक्ष में सुनाया, तो उद्धव ठाकरे फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकते हैं। लेकिन, इसका सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि तब तक 2024 के चुनाव आ जाएंगे।</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 May 2023 18:16:32 +0530</pubDate>
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