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                <title>Supreme Court of India - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Supreme Court of India RSS Feed</description>
                
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                <title>AI से बने फ़र्ज़ी फ़ैसलों पर विवाद; सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट ने वकीलों को चेतावनी दी।</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में बिना जांचे-परखे एआई-जनरेटेड फर्जी फैसलों और कानूनी मिसालों (AI-Generated Fake Citations) के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाते हुए 'जीरो-टॉलरेंस' रुख अपनाया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने NCLT के एक आदेश को सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि वह एआई द्वारा बनाए गए 6 गैर-मौजूद फर्जी फैसलों पर आधारित था। कोर्ट ने इसे वकीलों का 'पेशेवर कदाचार' और जजों की 'गंभीर चूक' बताया है। साथ ही, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को इस संबंध में सख्त नियम और गाइडलाइंस बनाने के निर्देश दिए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50534/controversy-over-fake-decisions-made-by-ai-supreme-court-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/fotojet-81.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>नई दिल्ली/मुंबई:</strong> आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग और कोर्ट रूम में इसके जरिए पेश किए जा रहे फर्जी फैसलों (AI-Generated Fake Judgments) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना जांचे-परखे एआई द्वारा तैयार किए गए काल्पनिक या मनगढ़ंत फैसलों (AI Hallucination) का हवाला देना वकीलों की तरफ से 'पेशेवर कदाचार' (Professional Misconduct) माना जाएगा।</p>
<p dir="ltr">​जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले में <strong>'जीरो-टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता)</strong> की नीति अपनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा:</p>
<blockquote>
<p dir="ltr">​"कानून और न्याय के क्षेत्र में फर्जी, गैर-मौजूद और एआई-जनरेटेड काल्पनिक सामग्रियों को मिसाल (Precedents) के तौर पर इस्तेमाल करना ठीक वैसा ही है जैसे न्याय प्रणाली में 'मिथाइल आइसोसाइनेट' (भोपाल गैस त्रासदी वाली जहरीली गैस) को छोड़ देना। यह अदृश्य है, कपटी है और जब तक कोई इसे नोटिस करता है, तब तक यह सब कुछ तबाह कर चुका होता है।"</p>
</blockquote>
<p> </p>
<h2 dir="ltr">​सुप्रीम कोर्ट ने पलटा ट्रिब्यूनल का फैसला</h2>
<p dir="ltr">​यह ऐतिहासिक फैसला तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने 'एसेल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स' (Essel Infraprojects) से जुड़े एक दिवाला मामले (Insolvency Case) में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और NCLAT के आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया।</p>
<p dir="ltr">​जांच में यह सामने आया कि ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश का आधार बनाने के लिए एआई (AI) द्वारा गढ़े गए <strong>6 ऐसे फैसलों का हवाला दिया था, जो असल में दुनिया में वजूद ही नहीं रखते।</strong> जब कानूनी डेटाबेस में इसकी पड़ताल की गई, तो पता चला कि एआई 'हैलुसिनेशन' के कारण ये फर्जी केस कानून की किताबों में कभी दर्ज ही नहीं हुए थे।</p>
<p dir="ltr">​सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर किसी अदालती फैसले में रत्ती भर भी फर्जी या काल्पनिक सामग्री शामिल हो जाती है, तो कानून की नजर में उस फैसले का कोई अस्तित्व (Void) नहीं रह जाता।</p>
<h2 dir="ltr">​जजों और वकीलों की जवाबदेही तय</h2>
<p dir="ltr">​अदालत ने कहा कि यह सिर्फ वकीलों की ही नहीं, बल्कि जजों की भी गंभीर चूक है अगर वे बिना वेरिफिकेशन के ऐसे एआई-जनरेटेड मटेरियल पर भरोसा करते हैं।</p>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>वकीलों के लिए निर्देश:</strong> बिना प्रामाणिकता की जांच किए किसी भी एआई टूल्स के ड्राफ्ट या केस लॉ को कोर्ट में पेश न करें।</li>
<li dir="ltr">​<strong>बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को आदेश:</strong> सुप्रीम कोर्ट ने देश की सर्वोच्च बार संस्था को एक विशेष कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, जो अदालतों में वकीलों द्वारा फर्जी कानूनी मिसालें पेश करने की समस्या पर विचार करेगी और दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कड़े नियम व गाइडलाइंस तैयार करेगी।</li>
</ul>
<p dir="ltr">​इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट और अन्य अदालतों में भी ऐसे मामले आ चुके हैं जहां एआई टूल्स ने पूरी तरह से फर्जी केस लॉ और धाराओं का निर्माण कर दिया था, जिसे वकीलों ने अनजाने में या लापरवाही में कोर्ट के सामने रख दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 06:35:36 +0530</pubDate>
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                <title>बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जस्टिस रविंद्र घुगे बने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनके पदोन्नत होने के बाद जस्टिस रविंद्र घुगे को बॉम्बे हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। जानिए इस बड़े न्यायिक बदलाव की पूरी जानकारी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50064/bombay-high-court-chief-justice-chandrashekhar-reaches-supreme-court-justice"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-queen-of-all-mayhem-76.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई के न्यायिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है।</p>
<p>जस्टिस चंद्रशेखर के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस रविंद्र वी. घुगे को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की आधिकारिक सूची में भी उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में दर्शाया गया है।</p>
<p>जस्टिस चंद्रशेखर ने सितंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और कई चर्चित फैसले दिए। कानूनी क्षेत्र में उनके अनुभव और न्यायिक योगदान को देखते हुए उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत में नियुक्त किया गया है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने जस्टिस चंद्रशेखर के अलावा चार अन्य न्यायिक हस्तियों की भी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को मंजूरी दी है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक क्षमता को मजबूत करना और लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति देना बताया जा रहा है।</p>
<p>कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस चंद्रशेखर का सुप्रीम कोर्ट में जाना भारतीय न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, जस्टिस रविंद्र घुगे के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनने से बॉम्बे हाईकोर्ट का प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज सुचारू रूप से जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:58:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल में अब रिलीज होगी 'द केरला स्टोरी', SC ने  फिल्म पर लगे बैन को हटाया</title>
                                    <description><![CDATA[द केरला स्टोरी के मेकर्स को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा  बैन के आदेश पर स्टे लगा दिया है. इसी के साथ राज्य में फिल्म के रिलीज होने का रास्ता भी साफ हो गया है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/20953/the-kerala-story-will-now-release-in-west-bengal"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-05/the-kerala-story-1683007345.jpg" alt=""></a><br /><p>विवादों से घिरी 'द केरला स्टोरी' का पश्चिम बंगाल में रिलीज होने का रास्ता साफ हो गया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म पर राज्य सरकार द्वारा लगाए गए बैन को आज हटा दिया. यानी अब ये फिल्म पश्चिम बंगाल में भी रिलीज होगी. </p>
<p><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/2023-05/the-kerala-story-1683007345.jpg" alt="the-kerala-story-1683007345"></img></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में आज पश्चिम बंगाल में 'द केरला स्टोरी'पर लगाए गए बैन के खिलाफ दायर मेकर्स की याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान सीजेआई ने कहा, "हम पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से फिल्म पर 8 मई को लगाई गई रोक को हटा रहे हैं.  इस रोक का कोई पुख्ता आधार नज़र नहीं आ रहा है." इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को फिल्म की स्क्रीनिंग और फिल्म देखने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स सुनिश्चित करने का भी निर्देश भी दिया...SC lifts the ban from The Kerala Story from West Bengal...</p>
<p>वहीं इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से  'द केरला स्टोरी' फिल्म पर बैन लगाने के अपने फैसले को सही ठहराया गया था. . सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा था कि फिल्म 'द केरला स्टोरी' फर्जी फैक्ट्स पर बेस्ड है और इसमें हेट स्पीच है जो सांप्रदायिक भावनाओं को आहत कर सकती है. ये फिल्म समुदायों के बीच नफरत पैदा कर सकती है जिससे राज्य में कानून व्यवस्था खराब हो सकती है. हलफनामे में पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रतिबंध के पीछे खुफिया सूचनाओं को आधार बनाया था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आज फिल्म पर से बैन हटा दिया है.....SC lifts the ban from The Kerala Story from West Bengal...</p>
<p>बता दें कि 'द केरला स्टोरी' को रिलीज के पहले दिन से ही ऑडियंस का भरपूर प्यार मिल रहा है और ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर शानदार परफॉर्म कर रही है.  'द केरला स्टोरी' ने रणबीर कपूर स्टारर तू झूठी मैं मक्कार का लाइफ टाइम कलेक्शन 149.05 करोड़ रुपये  को भी पार कर लिया है. रिलीज के 13 दिन बाद फिल्म की कुल कमाई 165.94 करोड़ रुपये हो चुकी है. जल्द ही इसके 200 करोड़ क्लब में शामिल होने की उम्मीद है. 'द केरला स्टोरी' का डायरेक्शन सुदीप्तो सेन ने किया है और इसमें अदा शर्मा योगिता बिहानी, सिद्धि इदनानी और सोनिया बलानी ने अहम रोल प्ले किया है.....SC lifts the ban from The Kerala Story from West Bengal....</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 18 May 2023 15:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल स्टोरी के आदेश को 15 मई को SC के समक्ष चुनौती दी जाएगी।</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट विवादास्पद फिल्म "द केरला स्टोरी" की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करने के केरल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मंगलवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से याचिका की तत्काल सुनवाई की।</p>
<p>सिब्बल ने जवाब दिया कि उच्च न्यायालय ने फिल्म की रिलीज को रोकने से इनकार कर दिया था जब पीठ ने पूछा कि क्या उसने इस मामले में कोई आदेश जारी किया है। पीठ ने तब घोषणा की कि इस पर सोमवार, 15</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/20696/the-kerala-story-order-will-be-challenged-before-the-sc-on-may-15"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-05/20230509_150439.webp" alt=""></a><br /><p>दिल्ली। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट विवादास्पद फिल्म "द केरला स्टोरी" की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करने के केरल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मंगलवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से याचिका की तत्काल सुनवाई की।</p>
<p>सिब्बल ने जवाब दिया कि उच्च न्यायालय ने फिल्म की रिलीज को रोकने से इनकार कर दिया था जब पीठ ने पूछा कि क्या उसने इस मामले में कोई आदेश जारी किया है। पीठ ने तब घोषणा की कि इस पर सोमवार, 15 मई को चर्चा की जाएगी।</p>
<p>5 मई को, केरल उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए फिल्म की रिलीज को रोकने से इनकार कर दिया कि ट्रेलर में लोगों के एक विशिष्ट समूह पर निर्देशित कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं है। बयान के अनुसार, सेंट्रल बोर्ड ऑफ पिक्चर सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) द्वारा आकलन किए जाने के बाद तस्वीर को सार्वजनिक देखने के लिए उपयुक्त माना गया। पिछले शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म द केरला स्टोरी में अदा शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 10 May 2023 05:45:28 +0530</pubDate>
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