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                <title>survey - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>survey RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ठाणे नगर निगम 'स्वच्छ सर्वे 2025-26' की तैयारी में जुटा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आने वाले स्वच्छ सर्वे 2025-26 में टॉप रैंक पाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, ठाणे म्युनिसिपल कमिश्नर सौरभ राव ने शुक्रवार को पूरे शहर में बड़े पैमाने पर फील्ड इंस्पेक्शन किया। इस दौरे का मकसद शहर के सफाई इंफ्रास्ट्रक्चर का रिव्यू करना और यह पक्का करना था कि सभी म्युनिसिपल डिपार्टमेंट स्वच्छ भारत मिशन की सख्त गाइडलाइंस के हिसाब से हों। स्वच्छ सर्वे 2025-26 के लिए पूरे देश में इवैल्यूएशन आज, 25 अप्रैल को शुरू हुआ, जबकि महाराष्ट्र के लिए राज्य भर में कैंपेन 27 अप्रैल, 2026 को शुरू होने वाला है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49497/thane-municipal-corporation-is-busy-preparing-for-swachh-survey-2025-26"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-26t121325.360.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ठाणे : </strong>आने वाले स्वच्छ सर्वे 2025-26 में टॉप रैंक पाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, ठाणे म्युनिसिपल कमिश्नर सौरभ राव ने शुक्रवार को पूरे शहर में बड़े पैमाने पर फील्ड इंस्पेक्शन किया। इस दौरे का मकसद शहर के सफाई इंफ्रास्ट्रक्चर का रिव्यू करना और यह पक्का करना था कि सभी म्युनिसिपल डिपार्टमेंट स्वच्छ भारत मिशन की सख्त गाइडलाइंस के हिसाब से हों। स्वच्छ सर्वे 2025-26 के लिए पूरे देश में इवैल्यूएशन आज, 25 अप्रैल को शुरू हुआ, जबकि महाराष्ट्र के लिए राज्य भर में कैंपेन 27 अप्रैल, 2026 को शुरू होने वाला है।</p>
<p> </p>
<p>स्ट्रेटेजिक इवैल्यूएशन और स्कोरिंग इस साल के सर्वे का कुल वेटेज 12,500 पॉइंट्स है, जिन्हें इस तरह बांटा गया है: 10,500 पॉइंट्स: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, वेस्ट सेग्रीगेशन, ट्रांसपोर्ट, डायरेक्ट फील्ड ऑब्जर्वेशन, और सबसे ज़रूरी बात, सिटीजन फीडबैक के लिए दिए गए हैं। 2,000 पॉइंट्स: अलग-अलग सर्टिफिकेशन कैटेगरी के लिए रिज़र्व हैं। इंस्पेक्शन के दौरान, कमिश्नर राव ने ज़ोर दिया कि इस साल ठाणे की परफॉर्मेंस के लिए लोगों की भागीदारी और फीडबैक सबसे ज़रूरी होंगे।</p>
<p>इंस्पेक्शन के दौरान जारी किए गए खास निर्देश एडिशनल कमिश्नर संदीप मालवी और प्रशांत रोडे समेत एक हाई-लेवल डेलीगेशन के साथ, कमिश्नर ने सर्विस डिलीवरी में कमियों को पहचानने के लिए कई खास जगहों का दौरा किया: पब्लिक सैनिटेशन: उथलसर वार्ड में पब्लिक टॉयलेट का इंस्पेक्शन करते समय, कमिश्नर ने खराब पोस्टर तुरंत हटाने का आदेश दिया और अधिकारियों को 24/7 बिना रुकावट पानी की सप्लाई पक्का करने का निर्देश दिया।</p>
<p>सोर्स पर कचरा अलग करना: दुकानदारों को गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग बिन रखने का सख्त निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, प्लास्टिक को जाम होने से बचाने के लिए स्टॉर्म वॉटर ड्रेन इनलेट पर जाल लगाना ज़रूरी कर दिया गया। एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन: पचपाखड़ी के सरस्वती इंग्लिश हाई स्कूल में, टीम ने ई-वेस्ट, सूखे और गीले कचरे को अलग करने के काम का रिव्यू किया। वॉटर बॉडी कंज़र्वेशन: मसुंडा झील में, तैरते हुए मलबे को तुरंत हटाने और किनारों पर बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने के निर्देश दिए गए। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए, "फ्लोटिंग वेटलैंड" प्रोजेक्ट (सीएसआर के ज़रिए लागू) के बारे में इन्फॉर्मेशन बोर्ड लगाए जाएंगे।</p>
<p>नाला क्लीनअप: वंदना नाले के लिए, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को बहते हुए कचरे को आगे बढ़ने से पहले रोकने के लिए जाली लगाने का काम सौंपा गया था। लोगों से अपील कमिश्नर ने बताया कि "दिखने वाली सफाई" और "इंस्टीट्यूशनल मज़बूती" इस साल के सर्वे के मुख्य आधार हैं। कमिश्नर सौरभ राव ने कहा, "म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन यह पक्का करने के लिए बहुत मेहनत कर रहा है कि ठाणे स्वच्छ सर्वे में शानदार परफ़ॉर्मेंस दे। हालांकि, असली सफलता हमारे लोगों के सक्रिय सहयोग और सतर्कता से ही मुमकिन है।"<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49497/thane-municipal-corporation-is-busy-preparing-for-swachh-survey-2025-26</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 12:14:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : झीलों पर बड़ा संकट, 10 सालों से साफ नहीं हुआ पानी; अब उठी साइंटिफिक सर्वे की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय अधिक तेज धूप पड़ने से कई नदियों और जलाशयों का पानी सूखने लगता है. ऐसे में शहर के लोगों तक पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए प्रशासन कई तरह के कदम उठाती है. मुंबई में भी गर्मी बढ़ने के साथ प्रशासन ने हर घरों तक पानी पहुंचाने वाली 7 झीलों के पानी के स्तर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग की है. बता दें कि मुंबई एक प्रायद्वीपीय द्वीप शहर ( Peninsular Island City) होने के चलते 3 तरफ से अरब सागर और खाड़ियों से घिरा है. इसके पास साफ पानी का कोई नेचुरल सोर्स नहीं है. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49101/big-crisis-on-mumbai-lakes-water-has-not-been-cleaned"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-10t114750.359.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय अधिक तेज धूप पड़ने से कई नदियों और जलाशयों का पानी सूखने लगता है. ऐसे में शहर के लोगों तक पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए प्रशासन कई तरह के कदम उठाती है. मुंबई में भी गर्मी बढ़ने के साथ प्रशासन ने हर घरों तक पानी पहुंचाने वाली 7 झीलों के पानी के स्तर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग की है. बता दें कि मुंबई एक प्रायद्वीपीय द्वीप शहर ( Peninsular Island City) होने के चलते 3 तरफ से अरब सागर और खाड़ियों से घिरा है. इसके पास साफ पानी का कोई नेचुरल सोर्स नहीं है. </p>
<p> </p>
<p><strong>झीलों में जमी गाद  </strong><br />मुंबई शहर को विहार, तुलसी, भाटसा, मोदक सागर, मध्य वैतरणा, तानसा और ऊपरी वैतरणा इन 7 अलग-अलग झीलों से रोज पानी सप्लाई मिलती है. कांग्रेस पार्षद आयशा वानू ने BMC के नगर निगम में एक याचिका दायर कर कहा कि मुंबई के बॉर्डर में वॉटर सप्लाई करने वाली झीलों में भारी मात्रा में गाद जमा हुआ है, जिसके चलते उनकी स्टोरेज कैपिसिटी घट रही है. इसके चलते गर्मी में पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है. उन्होंने कहा कि इससे BMC की ओर से नागरिकों को पानी की सप्लाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.   </p>
<p><strong>झीलों का साइंटिफिक सर्वे किया जाए</strong><br />आयशा वानू ने अपने नोटिस में कहा,' बढ़ते शहरीकरण, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित गार्बेज डिस्पोजल झीलों में गाद जमा होने के कुछ प्रमुख कारण हैं. इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम का दृढ़ मत है कि मुंबई शहर को पानी सप्लाई करने वाली सभी झीलों का साइंटिफिक सर्वे किया जाए और इन झीलों में जमा गाद को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए. इसके साथ ही इसके लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम भी तैयार किया जाए.'  नोटिस में नगर प्रशासन से इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश करने के लिए भी कहा गया.  </p>
<p><strong>2015 से नहीं हुई सफाई </strong><br />नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2015 से ही इन 7 झीलों से गाद निकालने की प्रक्रिया नहीं हुई है. इस प्रक्रिया में नदियों, झीलों या तालाब के तल में जमी मिट्टी या गाद को निकाला जाता है. इसका मकसद जलभराव को रोकना, फ्लड मैनेजमेंट करना और पानी की गुणवत्ता सुधारना होता है. रिकॉर्ड से यह भी पता चला है कि मुंबई की 7 झीलों में कुल वॉटर स्टोरेज 14.47 लाख लीटर कुल क्षमता के मुकाबले केवल 35 प्रतिशत यानी 5.20 लाख लीटर है. अधिकारियों का कहना है कि तापमान में वृद्धि के चलते इवैपोरेशन की स्पीड तेज हो गई है. पिछले साल मई 2025 के पहले हफ्ते तक जलस्तर 20 प्रतिशत से नीचरे गिर गया था. हालांकि, मानसून जल्दी होने के चलते समय से पहले ही जलाशय भर गए थे. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:48:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने मुंबई में खो चुके कुदरती तालाबों की पहचान और पुनर्जीवन के लिए सर्वे का प्रस्ताव दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने शहर में तेजी से शहरीकरण के कारण खत्म हो चुके कुदरती तालाबों और झीलों को फिर से ज़िंदा करने के लिए सर्वे और पुनर्जीवन का प्रस्ताव पेश किया है। पिछले तीन दशकों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की वजह से कई तालाब और झीलें गायब हो गई हैं, जिससे शहर में बायोडायवर्सिटी प्रभावित हुई है और शहरी गर्मी बढ़ी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48977/mumbai-brihanmumbai-municipal-corporation-proposes-survey-to-identify-and-revive"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(11)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने शहर में तेजी से शहरीकरण के कारण खत्म हो चुके कुदरती तालाबों और झीलों को फिर से ज़िंदा करने के लिए सर्वे और पुनर्जीवन का प्रस्ताव पेश किया है। पिछले तीन दशकों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की वजह से कई तालाब और झीलें गायब हो गई हैं, जिससे शहर में बायोडायवर्सिटी प्रभावित हुई है और शहरी गर्मी बढ़ी है। इस प्रोजेक्ट को कई फेज़ में लागू किया जाएगा। पहले फेज़ में, शहर की प्लानिंग मैप में अंकित कुदरती जगहों की पहचान की जाएगी और उनका सर्वे किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे जगहें अभी भी मौजूद हैं या नहीं। जो तालाब और झीलें बची रहेंगी, उन्हें फिर से ज़िंदा किया जाएगा और 'ब्लू ज़ोन' के रूप में विकसित किया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p>एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर अविनाश ढकने ने मीडिया को बताया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य शहरी गर्मी को कम करना और मुंबई के इकोलॉजिकल बैलेंस को बहाल करना है। उन्होंने कहा, "तालाबों और झीलों का पुनर्जीवन केवल पर्यावरण संरक्षण का मामला नहीं है, बल्कि यह शहर में पानी की गुणवत्ता, स्थानीय जलस्तर और बायोडायवर्सिटी बनाए रखने में भी मदद करेगा।" प्रोजेक्ट अभी प्लानिंग स्टेज में है। डिटेल्ड एक्शन प्लान तैयार होने के बाद कंसल्टेंट हायर करने के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इस दौरान, विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों की टीम यह सुनिश्चित करेगी कि पुनर्जीवन कार्य वैज्ञानिक तरीके से और इको-फ्रेंडली तरीके से हो।</p>
<p>सैटेलाइट इमेज के माध्यम से मुंबई में 129 संभावित झील और तालाब वाले क्षेत्रों की पहचान की गई थी। लेकिन इन जगहों में से केवल 68 में अभी भी कुदरती तालाब मौजूद हैं। 17 स्थानों तक पहुंचना मुश्किल है। मौजूदा तालाबों में 23 छोटी, 36 मीडियम, 6 बड़ी और 3 बहुत बड़ी झीलें शामिल हैं। इस सर्वे के बाद तालाबों को न केवल साफ़ किया जाएगा, बल्कि उनके आस-पास के क्षेत्र को ग्रीन ज़ोन और पब्लिक स्पेस के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई जाएगी। इससे स्थानीय लोगों के लिए मनोरंजन और प्राकृतिक स्थल उपलब्ध होंगे, साथ ही पानी की आपूर्ति और जलस्तर को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट्स से शहरी गर्मी को कम किया जा सकता है, प्रदूषण कम होता है और पक्षियों और जलीय जीवन के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित होता है। साथ ही, ये तालाब बारिश के पानी को संग्रहीत करने और बाढ़ नियंत्रण में भी मददगार साबित होंगे। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का यह कदम शहर में कुदरती पर्यावरण को बचाने और नागरिकों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही एक डिटेल्ड रोडमैप तैयार कर इसे लागू किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से मुंबई में न केवल जल संसाधनों और बायोडायवर्सिटी को लाभ होगा, बल्कि शहर की शहरी गर्मी और प्रदूषण से निपटने में भी मदद मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 11:17:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई में कागजों पर सिमटा प्लास्टिक बैन, धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल; सर्वे में हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगे तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, शहर के 85% हिस्सों में अब भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल या बिक्री जारी है। इससे साफ है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48713/plastic-ban-restricted-to-paper-in-mumbai-is-being-used"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-26t122343.037.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगे तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, शहर के 85% हिस्सों में अब भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल या बिक्री जारी है। इससे साफ है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा।</p>
<p> </p>
<p><strong>सर्वे में क्या सामने आया</strong><br />एनजीओ टॉक्सिक्स लिंक द्वारा अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच मुंबई, दिल्ली, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों पर यह सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि कुल 84% जगहों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा था। </p>
<p><strong>कहां सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है प्लास्टिक</strong><br />सर्वे में पाया कि मुंबई में जूस की दुकानों, थोक बाजारों और सड़क किनारे विक्रेताओं के बीच प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है। इतना ही नहीं, रेलवे स्टेशन, मॉल, पर्यटन स्थल और मेट्रो स्टेशनों पर भी करीब आधे दुकानदार प्लास्टिक बैग ग्राहकों को दे रहे हैं। धार्मिक स्थलों पर स्थिति और भी गंभीर है, जहां 90% स्थानों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग जारी है।</p>
<p><strong>प्लास्टिक क्यों बना हुआ है लोगों की पहली पसंद</strong><br />टॉक्सिक्स लिंक के निदेशक रवि अग्रवाल के अनुसार, ज्यादातर जगहों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक की मौजूदगी यह दिखाती है कि नियमों का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा। जब तक इन उत्पादों की सप्लाई को नियंत्रित नहीं किया जाएगा, तब तक प्लास्टिक कचरे को कम करना मुश्किल होगा। पर्यावरणविद ऋषि अग्रवाल का कहना है कि प्लास्टिक आज की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह हल्का, सस्ता और सुविधाजनक है, इसलिए लोग इसे आसानी से छोड़ नहीं पा रहे। क्विक-डिलीवरी और सुविधा की संस्कृति में पर्यावरण अक्सर पीछे छूट जाता है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है असर</strong><br />सिंगल-यूज प्लास्टिक सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि इंसानी स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। यह धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक में बदलकर पानी, मिट्टी और हवा को प्रदूषित करता है, जो अंततः हमारे शरीर में पहुंचता है। प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल्स जैसे फ्थेलेट्स और बिस्फेनॉल-ए हार्मोनल गड़बड़ी और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल्स जैसे फ्थेलेट्स और बिस्फेनॉल-ए हार्मोनल गड़बड़ी और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।</p>
<p><strong>जुर्माना भी नहीं बन पा रहा डर</strong><br />मुंबई में सिंगल-यूज के इस्तेमाल पर 5000 रुपये तक का जुर्माना है, लेकिन इसके बावजूद लोग इससे बच नहीं रहे। बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, शहर के 24 वार्डों में रोजाना औसतन एक केस दर्ज किया जाता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। बीएमसी की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनका असर सीमित नजर आ रहा है। खासकर अनौपचारिक क्षेत्र जैसे रेहड़ी-पटरी वालों के बीच नियमों का पालन कराना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 12:25:46 +0530</pubDate>
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