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                <title>blasts - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>blasts RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: बिष्णुपुर में दोहरे धमाके, दो घायल; सुरक्षा चूक पर भड़के लोग, किया ये बड़ा एलान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मणिपुर में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा ने सिर उठाया है। बिष्णुपुर जिले में सोमवार सुबह हुए दो लगातार धमाकों ने इलाके में दहशत फैला दी। इन धमाकों में दो स्थानीय लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस के मुताबिक पहला धमाका सुबह करीब 5.45 बजे फौगाकचाओ थाना क्षेत्र के नगौकॉन इलाके में हुआ।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46743/violence-flares-up-again-in-manipur-double-blast-in-bishnupur"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-05t194704.580.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बिष्णुपुर : </strong>मणिपुर में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा ने सिर उठाया है। बिष्णुपुर जिले में सोमवार सुबह हुए दो लगातार धमाकों ने इलाके में दहशत फैला दी। इन धमाकों में दो स्थानीय लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस के मुताबिक पहला धमाका सुबह करीब 5.45 बजे फौगाकचाओ थाना क्षेत्र के नगौकॉन इलाके में हुआ। यह धमाका एक सुनसान पड़े मकान में हुआ, जहां कथित तौर पर आईईडी लगाया गया था। यह मकान मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद से खाली पड़ा है और उसका परिवार फिलहाल राहत शिविर में रह रहा है। दूसरा धमाका इसी जगह से करीब 200 मीटर दूर सुबह 8.45 बजे हुआ, जब पहले धमाके की सूचना मिलने पर स्थानीय लोग वहां जमा हो गए थे। </p>
<p> </p>
<p><strong>सरकारी अस्पताल में भर्ती</strong><br />धमाकों में सनातोम्बा सिंह और इंदुबाला देवी घायल हुए हैं। दोनों के दाहिने पैर में छर्रे लगे हैं। उन्हें तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है। पुलिस ने दोनों धमाका स्थलों का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल</strong><br />घटना के बाद स्थानीय लोग भड़क गए। उन्होंने मौके पर पहुंचे सुरक्षा बलों से तीखी बहस की और सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया। लोगों का कहना था कि इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात होने के बावजूद धमाके कैसे हो गए। गुस्साए लोगों ने पास में बने एक अस्थायी सुरक्षा बंकर को भी तोड़ दिया।</p>
<p><strong>गिरफ्तारी और बंद की मांग</strong><br />घटना की निंदा करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की और कहा कि वह पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। स्थानीय विधायक प्रेमचंद्र सिंह ने कहा कि मणिपुर के लोग शांति चाहते हैं और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस बीच इंडिजिनस पीपल ऑर्गनाइजेशन और ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन समेत कई संगठनों ने बुधवार रात 12 बजे से राज्यभर में 24 घंटे के बंद का ऐलान किया है।</p>
<p><strong>जवाबदेही तय करने की मांग</strong><br />मैतेई नागरिक संगठन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी ने धमाकों को आम नागरिकों पर आतंकवादी हमला बताया। संगठन ने कहा कि यह मानवाधिकारों और कानून के राज का गंभीर उल्लंघन है। सीओसीओ एमआई ने समयबद्ध और पारदर्शी जांच, दोषियों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 19:48:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई ट्रिपल ब्लास्ट केस में एक बड़ा फैसला; 65 वर्षीय कफील अहमद अयूब को जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>2011 के चर्चित मुंबई ट्रिपल ब्लास्ट केस में एक बड़ा फैसला आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 65 वर्षीय कफील अहमद अयूब को जमानत दे दी है। अयूब करीब 14 साल से जेल में बंद था और उस पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और महाराष्ट्र के मकोका कानून के तहत मुकदमा चल रहा है। जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस आर.आर. भोंसले की बेंच ने यह कहते हुए जमानत दी कि अयूब को ट्रायल से पहले ही एक दशक से ज्यादा वक्त जेल में रखा गया है, जबकि मुकदमे के जल्द पूरा होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45221/a-big-decision-in-the-mumbai-triple-blast-case-bail"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-05t105850.911.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>2011 के चर्चित मुंबई ट्रिपल ब्लास्ट केस में एक बड़ा फैसला आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 65 वर्षीय कफील अहमद अयूब को जमानत दे दी है। अयूब करीब 14 साल से जेल में बंद था और उस पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और महाराष्ट्र के मकोका कानून के तहत मुकदमा चल रहा है। जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस आर.आर. भोंसले की बेंच ने यह कहते हुए जमानत दी कि अयूब को ट्रायल से पहले ही एक दशक से ज्यादा वक्त जेल में रखा गया है, जबकि मुकदमे के जल्द पूरा होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। </p>
<p> </p>
<p>हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 2021 के मशहूर 'के.ए. नजीब केस' का जिक्र किया। उस केस में कहा गया था कि लंबे समय तक ट्रायल न होने की स्थिति में आरोपी को जमानत देना उसके संवैधानिक अधिकार राइट टू लाइफ और स्पीडी ट्रायल का हिस्सा है।</p>
<p><strong>सरकारी वकील की दलील</strong><br />अभियोजन पक्ष ने अयूब की ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह विस्फोट 13 जुलाई, 2011 को हुआ था, जिसमें शहर के वित्तीय केंद्र में 21 लोग मारे गए थे और 113 निर्दोष लोग घायल हुए थे। मुंबई पुलिस ने बताया कि शाम 6:55 बजे, ओपेरा हाउस के जेएसएस रोड पर आर्यन हाई स्कूल के पास गश्त कर रहे एक पुलिस इंस्पेक्टर ने एक ज़ोरदार धमाका सुना। पंचरत्न बिल्डिंग के पीछे घटनास्थल पर दौड़कर पहुंचने पर, उन्होंने लोगों को खून से लथपथ देखा। दो अन्य विस्फोट जावेरी बाज़ार और दादर में हुए। शाम का व्यस्त समय था, और तत्कालीन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने विस्फोटों को "आतंकवादियों द्वारा समन्वित हमला" कहा था, जो 26 नवंबर, 2008 को तीन दिवसीय आतंकी घेराबंदी के बाद से सबसे घातक था। </p>
<p><strong>बिहार से हुआ था गिरफ्तार</strong><br />मूल तीन एफआईआर 18 जुलाई, 2011 को मुंबई के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने अपने हाथ में ले लीं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बिहार निवासी अयूब को 22 फ़रवरी, 2012 को गिरफ़्तार किया और उसे 19 मई, 2012 को बम धमाकों के मामले में पांचवें आरोपी के रूप में गिरफ़्तार दिखाया गया और ट्रांसफर वारंट पर हिरासत में ले लिया गया। उसे आर्थर रोड जेल में रखा गया था। </p>
<p><strong>अहमद अयूब के वकील की दलील</strong><br />अयूब के वकील मुबीन सोलकर ने भी यही दलील दी थी कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना संविधान के खिलाफ है। बता दें कि 13 जुलाई 2011 की शाम मुंबई दहल उठी थी। मुंबई के जवेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर कबूतरखाना में कुछ ही मिनटों के अंतर पर धमाके हुए थे। भीड़भाड़ के वक्त हुए इन धमाकों में 21 लोगों की मौत हुई थी और 113 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इसे आतंकी साजिश बताया था। <br />बाद में मुंबई एटीएस ने जांच अपने हाथ में ली और फरवरी 2012 में दिल्ली पुलिस ने बिहार निवासी कफील अहमद अयूब को गिरफ्तार किया था। उस वक्त से वह मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद है। </p>
<p><strong>युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने का था आरोप</strong><br />प्रॉसिक्यूशन का आरोप था कि अयूब ने कथित रूप से कुछ युवाओं को 'जिहाद' के लिए उकसाया और मुख्य आरोपी यासीन के साथ मिलकर उसे मदद दी, जबकि अयूब का कहना था कि आरोप अस्पष्ट हैं और कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि उन्हें धमाकों की साजिश की जानकारी थी। अयूब ने अपनी जमानत अर्जी में कहा कि वह भारत का नागरिक है, फरार होने का कोई इरादा नहीं है और इतने साल जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत से वंचित रखना लोकतंत्र और कानून के राज के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने सभी पहलुओं को देखते हुए अयूब को जमानत दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 10:59:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : सीरियल ट्रेन धमाकों के मामले में 9 साल जेल में रहने वाले डॉ. वाहिद दीन मोहम्मद शेख ने 9 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>2006 में हुए सीरियल ट्रेन धमाकों के मामले में 9 साल जेल में रहने वाले डॉ. वाहिद दीन मोहम्मद शेख ने 9 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का दरवाजा खटखाया है. इंडिया टुडे से जुड़ीं विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक, वाहिद शेख ने बताया कि 2006 में हुए ट्रेन ब्लास्ट के मामले में उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया था</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43854/mumbai--dr--wahid-din-mohammad-shaikh--who-was-in-jail-for-9-years-in-the-serial-train-blasts-case--demanded-compensation-of-rs-9-crore"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-13t113817.726.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>2006 में हुए सीरियल ट्रेन धमाकों के मामले में 9 साल जेल में रहने वाले डॉ. वाहिद दीन मोहम्मद शेख ने 9 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का दरवाजा खटखाया है. इंडिया टुडे से जुड़ीं विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक, वाहिद शेख ने बताया कि 2006 में हुए ट्रेन ब्लास्ट के मामले में उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया था. उन्हें महाराष्ट्र पुलिस के एंटी टेररिज्म स्क्वाड ने गिरफ्तार किया था. इस घटना में 11 मिनट में सात अलग-अलग ट्रेनों में बम फटे थे. इस आतंकी हमले में 180 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 800 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बाद में जांच के दौरान 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. </p>
<p> </p>
<p>शेख के खिलाफ लंबी सुनवाई के बाद स्पेशल कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था. बाकी 12 आरोपियों को मौत या आजीवन कारावास की सजा दी गई थी. लेकिन इस साल जुलाई में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन सभी 12 आरोपियों को भी बरी कर दिया. वाहिद शेख अब 46 साल के हैं. उन्होंने बताया,</p>
<p>वाहिद ने जेल जाने की वजह से उनकी जिंदगी और परिवार पर पड़े असर पर भी बात की. कहा, “उन सालों के दौरान मैंने अपनी जवानी के सबसे अहम साल, आजादी और अपनी इज्जत खो दी. मुझे हिरासत में बेरहमी से टॉर्चर किया गया, जिससे मुझे ग्लूकोमा और लगातार शरीर में दर्द जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं हो गईं. जब मैं जेल में था, मेरे पिता का देहांत हो गया, मेरी मां का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया, और मेरी पत्नी को हमारे बच्चों को पालने के लिए अकेले संघर्ष करना पड़ा. मेरे बच्चे 'आतंकवादी के बच्चे' कहे जाने के कलंक के साथ बड़े हुए और अपने बचपन में अपने पिता की मौजूदगी से वंचित रहे. मेरे परिवार को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, और मैं आज भी लगभग 30 लाख रुपये के कर्ज में डूबा हुआ हूं.”</p>
<p>शेख अब एक स्कूल में टीचर के तौर पर काम कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि उनका करियर और शिक्षा जेल में सजा के दौरान पूरी तरह से बर्बाद हो गए. उन्होंने कहा कि पहले वे मुआवजा नहीं मांग रहे थे क्योंकि उनके साथी आरोपी अब तक सजा भुगत रहे थे, लेकिन अब जब सबको बरी कर दिया गया है, तो यह उनके लिए मुआवजे का हक बनता है.</p>
<p>वाहिद शेख मानते हैं कि कोई भी रकम उनकी खोई हुई जिंदगी और परिवार के दर्द को वापस नहीं ला सकती, लेकिन मुआवजा यह साबित करेगा कि उनके साथ गलत हुआ था और आगे से किसी निर्दोष को ऐसा दर्द ना झेलना पड़े. शेख की अपील पर अब आयोगों में विचार किया जाएगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 11:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मुंबई : सात जगहों पर बम धमाके;180 से ज्यादा लोगों की मौत : जांच की विश्वनीयता पर फिर से उठने लगे हैं सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाका मामले में 12 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद जांच की विश्वनीयता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) के उस सिद्धांत को खारिज कर दिया, जिसमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) और लश्कर-ए-तैयबा की संलिप्तता बताई गई थी।  गौरतलब है कि 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में सात जगहों पर बम धमाके हुए थे। ये धमाके पश्चिमी लाइन पर हुए थे, जिनमें 180 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42358/mumbai--bomb-blasts-at-seven-places--more-than-180-people-killed--questions-are-being-raised-again-on-the-credibility-of-the-investigation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-07/download---2025-07-22t115136.488.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाका मामले में 12 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद जांच की विश्वनीयता पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) के उस सिद्धांत को खारिज कर दिया, जिसमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) और लश्कर-ए-तैयबा की संलिप्तता बताई गई थी।  गौरतलब है कि 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में सात जगहों पर बम धमाके हुए थे। ये धमाके पश्चिमी लाइन पर हुए थे, जिनमें 180 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे।</p>
<p> </p>
<p><strong>2008 में पुलिस ने आईएम के नेटवर्क का किया था भंडाफोड़</strong><br />पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 2008 में अपराध शाखा ने इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। अपराध शाखा ने सादिक शेख को गिरफ्तार किया था, जो इस संगठन का थिंक टैंक बताया गया। सादिक ने शुरुआत में विस्फोट मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार की थी, जिसके बाद उसे एटीएस को सौंप दिया गया। </p>
<p><strong>बम विस्फोटों में शेख की भूमिका साबित नहीं कर सकी एटीएस</strong><br />एटीएस ने शेख से पूछताछ की, लेकिन बम विस्फोटों की साजिश में उसकी भूमिका साबित नहीं कर सका। बाद में, जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि शेख ने एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों से संदेह हटाने के लिए जानबूझकर विस्फोटों की जिम्मेदारी स्वीकार की होगी। </p>
<p><strong>मजिस्ट्रेट के सामने पुराने बयान से पलट गया शेख</strong><br />अधिकारी ने बताया कि शेख का बयान मकोका के तहत पुलिस आयुक्त के सामने दर्ज किया गया था। हालांकि, अपने साथियों के साथ विस्फोट में शामिल होने का उसका दावा साबित नहीं हुआ, जिसके बाद एटीएस ने उसे वापस मुंबई अपराध शाखा को सौंप दिया। 2013 में बचाव पक्ष के वकीलों ने शेख को गवाह बनाने की कोशिश की, लेकिन वह मजिस्ट्रेट के सामने अपने पुराने बयान से पलट गया। शेख, आरिफ बदरुद्दीन और अंसार अहमद को 2008 में भारत में उस वर्ष हुए विभिन्न विस्फोटों में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था।</p>
<p><strong>एटीएस ने मामले में 13 लोगों को किया था गिरफ्तार</strong><br />एटीएस ने मुंबई ट्रेन विस्फोटों के सिलसिले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया और आरोपपत्र दाखिल किया। इन 12 दोषियों में से पांच को 2015 में विशेष अदालत ने मृत्युदंड और सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मृत्युदंड की सजा पाए एक दोषी की 2021 में मृत्यु हो गई। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत द्वारा अभियुक्तों को दी गई सजा और उनकी दोषसिद्धी को चुनौती देने वाली उनकी अपीलों को स्वीकार कर लिया। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 11:52:59 +0530</pubDate>
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