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                <title>remains - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई - पुणे एक्सप्रेसवे का ‘मिसिंग लिंक’ आंशिक रूप से खुला, पुणे से मुंबई रूट अब भी बंद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई -पुणे एक्सप्रेसवे पर लंबे समय से प्रतीक्षित ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का एक हिस्सा ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है, लेकिन इसे केवल एक दिशा में शुरू किए जाने से यात्रियों में असंतोष देखने को मिल रहा है। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, खोपोली एग्जिट और कुसगांव के बीच बने इस नए हिस्से को मुंबई से पुणे जाने वाले वाहनों के लिए चालू कर दिया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49648/missing-link-of-mumbai-pune-expressway-partially-opened-pune-to-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t192202.560.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई -पुणे एक्सप्रेसवे पर लंबे समय से प्रतीक्षित ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का एक हिस्सा ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है, लेकिन इसे केवल एक दिशा में शुरू किए जाने से यात्रियों में असंतोष देखने को मिल रहा है। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, खोपोली एग्जिट और कुसगांव के बीच बने इस नए हिस्से को मुंबई से पुणे जाने वाले वाहनों के लिए चालू कर दिया गया है। यह स्ट्रेच लोनावला-खंडाला घाट सेक्शन में लगने वाले लंबे जाम और दुर्घटनाओं की आशंका वाले हिस्से को बायपास करने के लिए तैयार किया गया है। इससे इस दिशा में यात्रा करने वालों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, दूसरी ओर पुणे से मुंबई जाने वाली लेन अभी ट्रैफिक के लिए बंद है। बताया जा रहा है कि इस हिस्से में अभी कुछ निर्माण कार्य और सुरक्षा जांचें पूरी नहीं हुई हैं, जिसके कारण इसे फिलहाल शुरू नहीं किया गया है। इससे पुणे से मुंबई की ओर जाने वाले यात्रियों को पुरानी सड़क पर ही सफर करना पड़ रहा है, जहां जाम और समय की अधिक खपत की समस्या बनी हुई है। यात्रियों ने इस आंशिक उद्घाटन को लेकर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि परियोजना का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब दोनों दिशाओं में ट्रैफिक शुरू हो सकेगा। कई लोगों ने उम्मीद जताई है कि पूरा स्ट्रेच जल्द पूरी तरह चालू हो जाएगा ताकि यात्रा समय में वास्तविक कमी महसूस की जा सके।</p>
<p>अधिकारियों ने जानकारी दी है कि पुणे से मुंबई वाली लेन को अगले दो से तीन दिनों के भीतर खोलने की संभावना है। इसके लिए अंतिम चरण की सुरक्षा जांच और तकनीकी परीक्षण जारी हैं। यह ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना मुंबई-पुणे यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसके पूरी तरह चालू होने के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने और पुराने घाट सेक्शन पर दबाव घटने की उम्मीद जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 19:23:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला; डॉक्टर बनने के बाद भी भटक रहा युवक </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>मनपा के अधीन संचालित कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस अस्पताल में एक पूर्व सैनिक के बेटे और एमबीबीएस पास युवा डॉक्टर को स्कॉलरशिप के बावजूद ७.९३ लाख रुपए की भारी भरकम राशि जमा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डॉक्टर बनने के बाद भी अपना इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट पाने के लिए दर-दर भटक रहे युवक ने इस अन्याय के खिलाफ सीधे डीन को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। आरोप है कि डीएचई योजना के तहत शत-प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी के बावजूद कॉलेज प्रशासन न केवल इसका लाभ देने से इनकार कर रहा है, बल्कि सर्टिफिकेट रोककर उनके करियर पर ही ताला लगाने जैसा क्रूर कार्य कर रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49075/a-shocking-case-in-mumbai-cooper-hospital-a-young-man"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मनपा के अधीन संचालित कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस अस्पताल में एक पूर्व सैनिक के बेटे और एमबीबीएस पास युवा डॉक्टर को स्कॉलरशिप के बावजूद ७.९३ लाख रुपए की भारी भरकम राशि जमा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डॉक्टर बनने के बाद भी अपना इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट पाने के लिए दर-दर भटक रहे युवक ने इस अन्याय के खिलाफ सीधे डीन को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। आरोप है कि डीएचई योजना के तहत शत-प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी के बावजूद कॉलेज प्रशासन न केवल इसका लाभ देने से इनकार कर रहा है, बल्कि सर्टिफिकेट रोककर उनके करियर पर ही ताला लगाने जैसा क्रूर कार्य कर रहा है।</p>
<p> </p>
<p>मुंबई मनपा द्वारा संचालित कूपर अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में बैच २०२० के डॉ. अंकुश कुमार ने यहीं से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और हाल ही में अपनी इंटर्नशिप भी समाप्त की है। उनके पिता भारतीय नौसेना से वर्ष २००६ में सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके आधार पर वे ‘एजुकेशन कंसेशन टू चिल्ड्रन ऑफ एक्स सर्विस मैन’ योजना के लिए पात्र हैं। कॉलेज के वर्ष २०२३ के ब्रोशर में भी इस योजना के लागू होने का स्पष्ट उल्लेख है। इसके बावजूद जब वे नो-ड्यूज लेने प्रशासनिक कार्यालय पहुंचे तो उन्हें चौंकाते हुए ७,९३,४०० रुपए की बकाया राशि थमा दी गई। डॉ. अंकुश का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि यह संस्थान मुंबई मनपा के अधीन है और राज्य सरकार के नियम उस पर लागू नहीं होते। अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या मुंबई मनपा खुद को सरकार से ऊपर समझ रही है? जब योजना स्पष्ट रूप से सरकारी व अनुदानित संस्थानों पर लागू है और कॉलेज स्वयं को उस श्रेणी में दर्शाता है तो फिर लाभार्थी छात्र से किस आधार पर फीस मांगी जा रही है?</p>
<p>डॉ. अंकुश ने इस अन्याय के खिलाफ कॉलेज के डीन को लिखित शिकायत दी है, जिसमें उन्होंने अधिसूचना की प्रति और अन्य कॉलेजों में इस योजना के पालन से जुड़े दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। उनका कहना है कि अन्य संस्थान इस नियम का पालन कर रहे हैं और छात्रों से फीस नहीं वसूल रहे, जबकि यहां उल्टा दबाव बनाकर वसूली की जा रही है। सर्टिफिकेट रोके जाने के कारण डॉ. अंकुश का पूरा करियर दांव पर लग गया है।<br />कम समय में राशि जमा करना संभव नहीं</p>
<p>आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. अंकुश का कहना है कि इतनी बड़ी राशि कम समय में जमा करना उनके लिए संभव नहीं है। ऐसे में एक तरफ सरकार पूर्व सैनिकों के परिवारों के लिए योजनाएं घोषित कर रही है, दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उन्हें लागू करने में इस तरह की बाधाएं गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 12:58:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई में कागजों पर सिमटा प्लास्टिक बैन, धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल; सर्वे में हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगे तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, शहर के 85% हिस्सों में अब भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल या बिक्री जारी है। इससे साफ है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48713/plastic-ban-restricted-to-paper-in-mumbai-is-being-used"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-26t122343.037.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगे तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, शहर के 85% हिस्सों में अब भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल या बिक्री जारी है। इससे साफ है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा।</p>
<p> </p>
<p><strong>सर्वे में क्या सामने आया</strong><br />एनजीओ टॉक्सिक्स लिंक द्वारा अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच मुंबई, दिल्ली, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों पर यह सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि कुल 84% जगहों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा था। </p>
<p><strong>कहां सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है प्लास्टिक</strong><br />सर्वे में पाया कि मुंबई में जूस की दुकानों, थोक बाजारों और सड़क किनारे विक्रेताओं के बीच प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है। इतना ही नहीं, रेलवे स्टेशन, मॉल, पर्यटन स्थल और मेट्रो स्टेशनों पर भी करीब आधे दुकानदार प्लास्टिक बैग ग्राहकों को दे रहे हैं। धार्मिक स्थलों पर स्थिति और भी गंभीर है, जहां 90% स्थानों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग जारी है।</p>
<p><strong>प्लास्टिक क्यों बना हुआ है लोगों की पहली पसंद</strong><br />टॉक्सिक्स लिंक के निदेशक रवि अग्रवाल के अनुसार, ज्यादातर जगहों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक की मौजूदगी यह दिखाती है कि नियमों का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा। जब तक इन उत्पादों की सप्लाई को नियंत्रित नहीं किया जाएगा, तब तक प्लास्टिक कचरे को कम करना मुश्किल होगा। पर्यावरणविद ऋषि अग्रवाल का कहना है कि प्लास्टिक आज की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह हल्का, सस्ता और सुविधाजनक है, इसलिए लोग इसे आसानी से छोड़ नहीं पा रहे। क्विक-डिलीवरी और सुविधा की संस्कृति में पर्यावरण अक्सर पीछे छूट जाता है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है असर</strong><br />सिंगल-यूज प्लास्टिक सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि इंसानी स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। यह धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक में बदलकर पानी, मिट्टी और हवा को प्रदूषित करता है, जो अंततः हमारे शरीर में पहुंचता है। प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल्स जैसे फ्थेलेट्स और बिस्फेनॉल-ए हार्मोनल गड़बड़ी और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल्स जैसे फ्थेलेट्स और बिस्फेनॉल-ए हार्मोनल गड़बड़ी और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।</p>
<p><strong>जुर्माना भी नहीं बन पा रहा डर</strong><br />मुंबई में सिंगल-यूज के इस्तेमाल पर 5000 रुपये तक का जुर्माना है, लेकिन इसके बावजूद लोग इससे बच नहीं रहे। बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, शहर के 24 वार्डों में रोजाना औसतन एक केस दर्ज किया जाता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। बीएमसी की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनका असर सीमित नजर आ रहा है। खासकर अनौपचारिक क्षेत्र जैसे रेहड़ी-पटरी वालों के बीच नियमों का पालन कराना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 12:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : रेनोवेशन के बावजूद वीएन देसाई हॉस्पिटल ब्लड बैंक बंद, मरीज़ों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के सांताक्रूज़ (ईस्ट) में वी. एन. देसाई म्युनिसिपल जनरल हॉस्पिटल का ब्लड बैंक, रेनोवेशन का काम पूरा होने के बावजूद अभी तक बंद है। हॉस्पिटल बिल्डिंग की दूसरी मंज़िल पर स्ट्रक्चरल रिपेयर और रेनोवेशन के काम के लिए जून 2025 की शुरुआत में इस जगह को बंद कर दिया गया था। तब से, इसने खून इकट्ठा करना बंद कर दिया है, और अभी भी यह साफ़ नहीं है कि यह कब फिर से काम करना शुरू करेगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48046/mumbai-vn-desai-hospital-blood-bank-closed-despite-renovation-concern"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-27t125230.340.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के सांताक्रूज़ (ईस्ट) में वी. एन. देसाई म्युनिसिपल जनरल हॉस्पिटल का ब्लड बैंक, रेनोवेशन का काम पूरा होने के बावजूद अभी तक बंद है। हॉस्पिटल बिल्डिंग की दूसरी मंज़िल पर स्ट्रक्चरल रिपेयर और रेनोवेशन के काम के लिए जून 2025 की शुरुआत में इस जगह को बंद कर दिया गया था। तब से, इसने खून इकट्ठा करना बंद कर दिया है, और अभी भी यह साफ़ नहीं है कि यह कब फिर से काम करना शुरू करेगा।</p>
<p> </p>
<p>हॉस्पिटल के सूत्रों के मुताबिक, ब्लड बैंक का रेनोवेशन पहले ही पूरा हो चुका है। हालांकि, इसे अभी तक चालू नहीं किया गया है, जिससे मरीज़ और मेडिकल स्टाफ़ मुश्किल में हैं। वी. एन. देसाई हॉस्पिटल, मुंबई के पश्चिमी इलाकों में हज़ारों कम आय वाले लोगों की सेवा करने वाली एक ज़रूरी सरकारी हेल्थकेयर सुविधा है। इसके ब्लड बैंक के लगातार बंद रहने से मरीज़ों की देखभाल पर गंभीर संकट पैदा हो गया है, खासकर इमरजेंसी और सर्जिकल मामलों में।</p>
<p>बड़ी सर्जरी में अक्सर 3-4 यूनिट खून की ज़रूरत होती है। ऑपरेशन के दौरान, बाहर से खून का इंतज़ाम करने का समय नहीं होता है। बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होने पर, इन-हाउस ब्लड बैंक न होने से मरीज़ों की जान को सीधा खतरा होता है। हॉस्पिटल एक DNB प्रोग्राम चलाता है और उम्मीद है कि यह मुश्किल और हाई-रिस्क सर्जरी को संभालेगा, जो तुरंत खून न मिलने पर बहुत मुश्किल हो जाती हैं। डिलीवरी के दौरान बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग के मामले भी सामने आए हैं, जहाँ लगातार 5-6 यूनिट खून चढ़ाकर मरीज़ों की जान बचाई गई। ऐसे मुश्किल समय में, खून का तुरंत मिलना बहुत ज़रूरी होता है।</p>
<p>1993 से एक ज़रूरी सुविधा यह ब्लड बैंक 1993 से काम कर रहा था, जहाँ हर साल लगभग 2,000 यूनिट खून जमा होता था और उतना ही इस्तेमाल होता था। खून की बहुत ज़्यादा कमी के समय, खासकर मई-जून और अक्टूबर-नवंबर में, इसने बहुत ज़रूरी भूमिका निभाई। कभी-कभी, इसने किंग एडवर्ड मेमोरियल हॉस्पिटल, नायर हॉस्पिटल, लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल हॉस्पिटल, सर जे. जे. हॉस्पिटल, कामा और एल्ब्लेस हॉस्पिटल, और जी. टी. हॉस्पिटल जैसे दूसरे बड़े सिविक हॉस्पिटल की भी मदद की। </p>
<p>बांद्रा में पास का भाभा हॉस्पिटल ब्लड बैंक कथित तौर पर रात में काम नहीं करता है, और कमी के कारण वहाँ खून का कलेक्शन कम हो गया है। ऐसे हालात में, वी. एन. देसाई ब्लड बैंक ने बांद्रा के मरीज़ों के लिए भी लाइफ़लाइन का काम किया। आस-पास के कई BMC मैटरनिटी होम भी इस पर निर्भर थे। रेनोवेशन का काम पूरा होने के बावजूद, ब्लड बैंक बंद है, जिससे इमरजेंसी केयर और सर्जिकल सर्विस पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इसके लंबे समय तक काम न करने से मरीज़ की सुरक्षा और हॉस्पिटल की समय पर जान बचाने वाला इलाज देने की क्षमता को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 12:53:12 +0530</pubDate>
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