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                <title>Bombay High Court - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Bombay High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई में BMC चुनावों से पहले एक नया विवाद...  बॉम्बे हाई कोर्ट ने कबूतरों को दाना खिलाने को लेकर दिखाई सख्ती </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए मंगलवार को एक मीटिंग बुलाई। सीएम ने कहा कि BMC कबूतरों को सीमित दाना खिलाएगी। बुधवार को कबूतरखाने पर तिरपाल ढका था। आरोप है कि नाराज जैन समुदाय ने तिरपाल की शीट फाड़ दी और कबूतरों को दाना खिलाया। BMC ने उन लोगों को दाना खिलाने से रोकने के लिए फिर से तिरपाल की शीट लगाई।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42823/a-new-controversy-before-the-bmc-elections-in-mumbai-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download-(4)1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। इधर मुंबई में BMC चुनावों से पहले एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद है कबूतरों को दाना खिलाने को लेकर। मुद्दा सियासी हो गया है और अब इसे स्थानीय बनाम बाहरी बना दिया गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कबूतरों को दाना खिलाने को लेकर सख्ती दिखाई है। चौराहों पर ऐसी जगहों पर बंद करने का आदेश दिया, जहां लोग कबूतरों को दाना डालते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच जैन और गुजराती समुदाय के लोगों पर आरोप है कि उन्होंने दादर कबूतरखाना में कबूतरों को दाना खिलाने के लिए ढके गए तिरपाल की शीट को फाड़ दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगाई है। हाई कोर्ट ने यह रोक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण लगाई है। हाई कोर्ट ने यहां तक आदेश दिया कि अगर कोई कबूतरों को दाना डाले तो उसे पकड़कर जेल भेज दें। बीएमसी ने हाई कोर्ट के आदेश पर कबूतरखाने के ऊपर एक तिरपाल की शीट लगाई है।<br /><br />कबूतरों को दाना खिलाने की पाबंदी का विरोध जैन समुदाय और पशु अधिकार कार्यकर्ता कर रहे हैं। उनका कहना है कि कबूतरों को दाना खिलाने का कोई दूसरा तरीका निकालें नहीं तो पक्षी भूखे मर जाएंगे।<br /><br />महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए मंगलवार को एक मीटिंग बुलाई। सीएम ने कहा कि BMC कबूतरों को सीमित दाना खिलाएगी। बुधवार को कबूतरखाने पर तिरपाल ढका था। आरोप है कि नाराज जैन समुदाय ने तिरपाल की शीट फाड़ दी और कबूतरों को दाना खिलाया। BMC ने उन लोगों को दाना खिलाने से रोकने के लिए फिर से तिरपाल की शीट लगाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Aug 2025 08:42:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पत्नी आत्महत्या करके जेल भेजने की धमकी देती थी... बंबई हाई कोर्ट ने तलाक संबंधी आदेश को रखा बरकरार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बंबई उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जीवनसाथी द्वारा आत्महत्या की धमकी देना या प्रयास करना ‘क्रूरता’ के समान है और यह तलाक का वैध आधार है। पति ने पारिवारिक अदालत में तलाक की अर्जी देते हुए आरोप लगाया था कि पत्नी ने उसे और उसके परिवार को आत्महत्या करके जेल भेजने की धमकी दी थी। उसने पारिवारिक न्यायालय में तलाक देने का अनुरोध करते हुए कहा कि यह हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत क्रूरता है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39342/the-wife-used-to-threaten-to-commit-suicide-and-send-him-to-jail-bombay-high-court-upheld-the-divorce-order"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/download-(7)1.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बंबई हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने पिछले महीने अपने आदेश में एक दंपति के तलाक संबंधी पारिवारिक अदालत के आदेश को बरकरार रखा। इस दौरान हाई कोर्ट ने तलाक को वैध आधार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ के न्यायमूर्ति आर एम जोशी ने पिछले महीने अपने आदेश में एक दंपति के विवाह को भंग करने संबंधी पारिवारिक अदालत के आदेश को बरकरार रखा। महिला ने पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। </p>
<p>बंबई उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जीवनसाथी द्वारा आत्महत्या की धमकी देना या प्रयास करना ‘क्रूरता’ के समान है और यह तलाक का वैध आधार है। पति ने पारिवारिक अदालत में तलाक की अर्जी देते हुए आरोप लगाया था कि पत्नी ने उसे और उसके परिवार को आत्महत्या करके जेल भेजने की धमकी दी थी। उसने पारिवारिक न्यायालय में तलाक देने का अनुरोध करते हुए कहा कि यह हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत क्रूरता है। </p>
<p>हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने अपने आदेश में कहा कि पति और अन्य गवाहों द्वारा पारिवारिक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य पर्याप्त रूप से यह प्रदर्शित करते हैं कि पति द्वारा क्रूरता का किया गया दावा सही है।अदालत ने कहा कि व्यक्ति ने न केवल यह आरोप लगाया है कि पत्नी उसे और उसके परिवार को आत्महत्या करके जेल भेजने की धमकी देती थी, बल्कि वास्तव में एक बार उसने अपनी जान लेने का प्रयास भी किया था। </p>
<p>बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि पति या पत्नी की ओर से ऐसा कृत्य क्रूरता होगा और यह तलाक के लिये पर्याप्त होगा। पीठ ने तलाक देने के पारिवारिक न्यायालय के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया और कहा कि इसमें कोई त्रृटि नहीं है, इसलिए फैसले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। </p>
<p>मामले के अनुसार, दंपति की शादी अप्रैल 2009 में हुई थी और उनकी एक बेटी भी है। पति ने दावा किया कि उसके ससुराल वाले यानी पत्नी के परिजन अक्सर उसके घर आते थे और उसके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करते थे। पति के मुताबिक 2010 में पत्नी उसका घर छोड़कर अपने मायके चली गई और वापस आने से इनकार कर दिया। </p>
<p>पति ने यह भी दावा किया कि उसकी पत्नी ने आत्महत्या की धमकी दी थी तथा एक बार तो उसने अपनी जान लेने का प्रयास भी किया था। उसने आरोप लगाया कि पत्नी ने ससुराल पक्ष के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराकर उन्हें जेल भिजवाने की भी धमकी दी थी।  <br />महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि पति और ससुर उससे दुर्व्यवहार करते थे जिसकी वजह से वह ससुराल छोड़कर मायके चली गई। उसने पति के साथ क्रूरता से इनकार किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/39342/the-wife-used-to-threaten-to-commit-suicide-and-send-him-to-jail-bombay-high-court-upheld-the-divorce-order</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 11:54:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>  बॉम्बे हाई कोर्ट ने बदलापुर फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले में अब तक दोषी पुलिस वालों पर मामला दर्ज न किए जाने पर नाराजगी जाहिर की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बदलापुर फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले में अब तक दोषी पुलिस वालों पर मामला दर्ज न किए जाने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। इस मामले में सरकारी अधिवक्ता अमित देसाई की जिरह के बाद हाई कोर्ट ने आज अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। बदलापुर यौन उत्पीडन मामले के आरोपित अक्षय शिंदे की पुलिस के फर्जी एनकाउंटर में मौत मामले की सुनवाई आज हाई कोर्ट की जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोखले की पीठ के समक्ष हो रही थी। कोर्ट ने सरकारी वकील से सवाल किया कि बदलापुर यौन उत्पीडऩ मामले के आरोपित की फर्जी मुठभेड़ में मौत के मामले में अभी तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38896/bombay-high-court-expressed-displeasure-over-not-registering-any-case-against-the-guilty-policemen-in-badlapur-fake-police-encounter-case-till-now"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/images---2025-02-27t130735.898.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मुंबई : </strong>बदलापुर फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले में अब तक दोषी पुलिस वालों पर मामला दर्ज न किए जाने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। इस मामले में सरकारी अधिवक्ता अमित देसाई की जिरह के बाद हाई कोर्ट ने आज अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। बदलापुर यौन उत्पीडन मामले के आरोपित अक्षय शिंदे की पुलिस के फर्जी एनकाउंटर में मौत मामले की सुनवाई आज हाई कोर्ट की जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोखले की पीठ के समक्ष हो रही थी। कोर्ट ने सरकारी वकील से सवाल किया कि बदलापुर यौन उत्पीडऩ मामले के आरोपित की फर्जी मुठभेड़ में मौत के मामले में अभी तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई है। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने कहा कि सरकार मामले की जांच कर रही है। इसके लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया है। </div>
<div> </div>
<div>इस मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज कर ली गई है और सीआईडी इसकी जांच कर रही है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या सिर्फ एडीआर के आधार पर जांच हो सकती है, एफआईआर कहां है? क्या एडीआर स्वयं एक एफआईआर है? प्रारंभ में तो एडीआर दर्ज की जाती है, लेकिन जब यह स्पष्ट हो जाता है कि यह आकस्मिक या प्राकृतिक मृत्यु नहीं बल्कि हत्या थी, तो क्या एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने पूछा कि जांच पूरी होने के बाद सीआईडी क्या करेगी। इस पर देसाई ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद सीआईडी निर्धारित नियमों के अनुसार अंतिम रिपोर्ट दाखिल करेगी। यह समापन रिपोर्ट या अभियोजन रिपोर्ट (आरोप पत्र) भी हो सकती है। इसके बाद हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। </div>
<div> </div>
<div>उल्लेखनीय है कि 12 अगस्त 2024 को मुंबई से सटे बदलापुर में दो लड़कियों के साथ यौन उत्पीडऩ मामले में मुख्य आरोपित अक्षय शिंदे को 17 अगस्त को गिरफ्तार किया गया, लेकिन 23 सितंबर को पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद अक्षय शिंदे के पिता अन्ना शिंदे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अक्षय शिंदे के पुलिस एनकाउंटर की जांच करवाने की मांग की थी। पिछले सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तथ्यों को देखते हुए एनकाउंटर में शामिल पुलिस वालों पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन पुलिस ने अभी तक एनकाउंटर करने वाले पुलिस वालों पर मामला दर्ज नहीं किया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Mar 2025 12:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला को 20 वर्षों से मुआवजा नहीं मिला...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">1957 से 1972 के बीच बुजुर्ग महिला की जमीन तीन चरणों में अधिग्रहीत की गई थी। यह जमीन मुलुंड में गोपाल कृष्ण गोखले रोड के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत हुई थी। 1988 में अधिग्रहण के एवज में मुआवजे की मांग से जुड़ी महिला की याचिका पहले पंजीकृत हुई थी। लक्ष्मी अडवल नाम की बुजुर्ग महिला ने अथॉरिटी से एफएसआई और टीडीआर के रूप में कई बार मुआवजा देने का आग्रह किया था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38557/despite-the-order-of-bombay-high-court--a-96-year-old-woman-has-not-received-compensation-for-20-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/download-(4).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> बॉम्बे हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश के बावजूद 96 वर्षीय बुजुर्ग महिला को मुआवजा न मिलने के मामले को लेकर राज्य सरकार और बीएमसी से जवाब मांगा है। 20 साल पहले कोर्ट ने बीएमसी को मुलुंड में जमीन अधिग्रहण के एवज में महिला के मुआवजे के संबंध में निर्णय लेने आदेश दिया था। सितंबर 2005 के इस आदेश का आज तक पालन नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे परेशान बुजुर्ग महिला ने 21 फरवरी 2025 को हाई कोर्ट को पत्र लिखा था। जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने पत्र को पढ़ने के बाद पाया कि दो दशक पहले दिए गए कोर्ट के आदेश को बीएमसी ने नहीं माना है। इसे देखते हुए बेंच ने कोर्ट के प्रोथोनोटरी ऐंड सीनियर मास्टर को बुजुर्ग महिला के लेटर को याचिका के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया है। आगामी 3 मार्च को बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई रखी है।<br /><br />1957 से 1972 के बीच बुजुर्ग महिला की जमीन तीन चरणों में अधिग्रहीत की गई थी। यह जमीन मुलुंड में गोपाल कृष्ण गोखले रोड के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत हुई थी। 1988 में अधिग्रहण के एवज में मुआवजे की मांग से जुड़ी महिला की याचिका पहले पंजीकृत हुई थी। लक्ष्मी अडवल नाम की बुजुर्ग महिला ने अथॉरिटी से एफएसआई और टीडीआर के रूप में कई बार मुआवजा देने का आग्रह किया था।<br /><br />गौरतलब है कि 60 फुट रोड चौड़ीकरण के दौरान महिला की जमीन ली गई थी। 2005 में कोर्ट ने बीएमसी को पहले 28.43 वर्ग मीटर के मुआवजा आठ हफ्ते में देने का निर्देश दिया था। शेष जमीन को लेकर कलेक्टर को याचिकाकर्ता और बीएमसी का पक्ष सुनकर इस मामले में निर्णय लेने को कहा था। महिला ने पत्र में शिकायत की है कि अब तक दो दशक पुराने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/38557/despite-the-order-of-bombay-high-court--a-96-year-old-woman-has-not-received-compensation-for-20-years</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 13:08:02 +0530</pubDate>
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