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                <title>Bombay High Court - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Bombay High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सलमान खान को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत, पड़ोसी से सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर विचार करने को कहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सलमान खान और उनके पनवेल फार्महाउस के पड़ोसी के बीच चल रहे विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल मानहानि के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने पड़ोसी से विवादित पोस्ट हटाने पर विचार करने को कहा है। #SalmanKhan #BombayHighCourt #PanvelFarmhouse #BollywoodNews #MumbaiNews #DefamationCase #BreakingNews #LegalNews</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50217/salman-khan-gets-relief-from-bombay-high-court-asks-him"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/1667470508796_bombay_high_court_salman_khan.webp" alt=""></a><br /><p>बॉलीवुड अभिनेता Salman Khan और उनके पनवेल फार्महाउस के पड़ोसी के बीच चल रहे विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की छवि खराब करने या मानहानि करने के लिए नहीं किया जा सकता। <br /><br />न्यायमूर्ति Sharmila Deshmukh की एकल पीठ अभिनेता द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला पनवेल स्थित फार्महाउस से जुड़े संपत्ति विवाद और सोशल मीडिया पर किए गए कथित मानहानिकारक पोस्टों से संबंधित है। <br /><br />सुनवाई के दौरान अदालत ने सलमान खान के पड़ोसी Ketan Kakkad से उनके द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट और वीडियो हटाने पर विचार करने को कहा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विवादों का समाधान कानूनी मंचों पर होना चाहिए, न कि सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से। <br /><br />सलमान खान का आरोप है कि उनके पड़ोसी ने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर ऐसे वीडियो और पोस्ट साझा किए जो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले थे। अभिनेता ने अदालत से इन पोस्टों को हटाने और भविष्य में ऐसे आरोपों पर रोक लगाने की मांग की थी। <br /><br />यह विवाद कई वर्षों से अदालत में लंबित है और इससे पहले भी विभिन्न अदालतों में सुनवाई हो चुकी है। हाईकोर्ट ने अब दोनों पक्षों को कानूनी प्रक्रिया के तहत विवाद सुलझाने की सलाह दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:12:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई के लाइसेंसधारी फेरीवालों को मिलेंगे QR कोड आईडी कार्ड, निगरानी व्यवस्था होगी मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में लाइसेंसधारी फेरीवालों को जल्द QR कोड आधारित पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। BMC का कहना है कि इससे वैध फेरीवालों की पहचान आसान होगी और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती मिलेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50076/licensed-hawkers-of-mumbai-will-get-qr-code-id-card"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/screenshot_2026-06-03-15-26-51-640_com.android.chrome-edit.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>मुंबई में फेरीवालों के नियमन और निगरानी को मजबूत करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने लाइसेंसधारी फेरीवालों को QR कोड आधारित पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस पहल का उद्देश्य पंजीकृत और अपंजीकृत फेरीवालों के बीच स्पष्ट अंतर करना तथा शहर में अवैध अतिक्रमण पर नियंत्रण रखना है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, QR कोड युक्त पहचान पत्रों में फेरीवाले का पंजीकरण विवरण, लाइसेंस संबंधी जानकारी और निर्धारित व्यापार क्षेत्र का रिकॉर्ड मौजूद रहेगा। इससे निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को तुरंत सत्यापन करने में सुविधा होगी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर भी रोक लग सकेगी।</p>
<p>नगर प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद वैध फेरीवालों को अनावश्यक कार्रवाई से राहत मिलेगी, जबकि बिना अनुमति कारोबार करने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाना आसान होगा। इसके साथ ही शहर के फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>फेरीवाला संगठनों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि वर्षों से वैध रूप से व्यवसाय कर रहे लोगों की पहचान सुनिश्चित होना जरूरी है। उनका कहना है कि पंजीकृत फेरीवालों को बार-बार जांच और कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, जिसे नई प्रणाली कम कर सकती है।</p>
<p>हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी पात्र फेरीवालों को समयबद्ध तरीके से पहचान पत्र जारी करने और फेरीवाला नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया था। इसके बाद BMC ने प्रक्रिया में तेजी लाई है।</p>
<p>प्रशासन का कहना है कि QR कोड आधारित पहचान प्रणाली लागू होने के बाद शहर में फेरीवाला प्रबंधन अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित होगा, जिससे नागरिकों, व्यापारियों और वैध फेरीवालों सभी को लाभ मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 15:41:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जस्टिस रविंद्र घुगे बने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनके पदोन्नत होने के बाद जस्टिस रविंद्र घुगे को बॉम्बे हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। जानिए इस बड़े न्यायिक बदलाव की पूरी जानकारी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50064/bombay-high-court-chief-justice-chandrashekhar-reaches-supreme-court-justice"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-copy-of-queen-of-all-mayhem-76.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई के न्यायिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है।</p>
<p>जस्टिस चंद्रशेखर के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस रविंद्र वी. घुगे को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की आधिकारिक सूची में भी उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में दर्शाया गया है।</p>
<p>जस्टिस चंद्रशेखर ने सितंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और कई चर्चित फैसले दिए। कानूनी क्षेत्र में उनके अनुभव और न्यायिक योगदान को देखते हुए उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत में नियुक्त किया गया है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने जस्टिस चंद्रशेखर के अलावा चार अन्य न्यायिक हस्तियों की भी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को मंजूरी दी है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक क्षमता को मजबूत करना और लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति देना बताया जा रहा है।</p>
<p>कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस चंद्रशेखर का सुप्रीम कोर्ट में जाना भारतीय न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, जस्टिस रविंद्र घुगे के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनने से बॉम्बे हाईकोर्ट का प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज सुचारू रूप से जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:58:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>‘गोकुल’ मिल्क यूनियन एडमिनिस्ट्रेटर अपॉइंटमेंट केस पर कल सुनवाई, कोल्हापुर कोर्ट के फैसले पर फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गोकुळ दूध संघ में प्रशासक नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच में सुनवाई होगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49896/gokul-milk-union-administrator-hearing-kolhapur"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/state-govt-appoints-a-five-member-administrative-board-for-gokul.jpg" alt=""></a><br /><p>कोल्हापुर के चर्चित Gokul Milk Union में प्रशासक नियुक्ति मामले पर मंगलवार को मुंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई पर पूरे कोल्हापुर जिले की नजरें टिकी हुई हैं। <br /><br />मामला उस प्रशासनिक मंडल की नियुक्ति से जुड़ा है जिसे राज्य सरकार ने ‘गोकुळ’ दूध संघ के निदेशक मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियुक्त किया था। पूर्व निदेशकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना उचित सूचना दिए कानून का सहारा लेकर प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने अदालत में याचिका दायर की है। <br /><br />रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘गोकुळ’ दूध संघ के निदेशकों का कार्यकाल 3 मई 2026 को समाप्त हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रशासकीय मंडल नियुक्त किया। इस फैसले को राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिंदे गुट और अन्य समूहों से जुड़े पूर्व निदेशकों ने पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें हाईकोर्ट में जाने की सलाह दी। <br /><br />इसके बाद पूर्व निदेशकों और पुगांव स्थित स्वामी समर्थ सहकारी दूध संस्था की ओर से कोल्हापुर सर्किट बेंच में याचिका दाखिल की गई। पिछली सुनवाई में अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को सोमवार तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। अब मंगलवार को होने वाली सुनवाई में अदालत का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। <br />L<br />यह विवाद केवल प्रशासनिक नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘गोकुळ’ दूध संघ की आगामी चुनाव प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सहकारी चुनाव प्रक्रिया और सदस्य संस्थाओं की सूची को लेकर भी विवाद बना हुआ है। इसी कारण चुनाव प्रक्रिया में देरी होने की संभावना जताई जा रही है। <br /><br />राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा काफी गर्म है। राज्य के मंत्री Hasan Mushrif ने हाल ही में दावा किया था कि प्रशासक मंडल आने के बाद दूध संकलन में करीब 60 हजार लीटर की कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी और चारे की कमी भी इसका कारण हो सकती है। </p>
<p><br />‘गोकुळ’ दूध संघ के 63 साल के इतिहास में पहली बार प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस वजह से मामला सहकार और राजनीति दोनों दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत प्रशासक नियुक्ति को वैध मानती है या उस पर रोक लगाती है। अदालत का फैसला आने वाले दिनों में ‘गोकुळ’ दूध संघ की राजनीति और चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:34:35 +0530</pubDate>
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