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                <title>मुंबई: 'अगर हम पढ़े-लिखे होते तो ऑफिस में बैठते', मराठी नियम पर मुंबई के ऑटो ड्राइवरों की 3 दिन की हड़ताल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्सा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले ने राज्यभर की सियासत में गर्माहट तेज कर दी है। इसी बीच मुंबई में राज्य सरकार के इस फैसले के विरोध में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का एक वर्ग सड़क पर उतर आया है। इन चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे यात्रियों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51539/mumbai-if-we-were-educated-we-would-have-sat-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/mumbai-autorickshaw-strike-244942980-3x4.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्सा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले ने राज्यभर की सियासत में गर्माहट तेज कर दी है। इसी बीच मुंबई में राज्य सरकार के इस फैसले के विरोध में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का एक वर्ग सड़क पर उतर आया है। इन चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे यात्रियों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि चालकों का विरोध ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा जानने के अनिवार्य नियम को लेकर है।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्या कहना है कि गौर-मराठी भाषी चालकों का?</strong><br />सरकार के फैसले के विरोध में सड़क पर उतरे गैर-मराठी भाषी चालकों का कहना है कि इस नियम से उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और भारी-भरकम जुर्माने का खतरा बढ़ गया है।</p>
<p><strong>मराठी सीखना मुश्किल- चालक</strong><br />हड़ताल में शामिल कई चालकों की उम्र 55 से 60 साल के बीच है। उनका कहना है कि वे कभी स्कूल नहीं गए, इसलिए उनके लिए अचानक मराठी बोलना और सीखना बहुत मुश्किल है।</p>
<p>मामले में मुंबई कंदिवली लिंक रोड पर सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे एक ऑटो चालक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि हम 55-60 साल के हैं। हम कभी स्कूल नहीं गए। हम मराठी कैसे बोल सकते हैं? अगर हम पढ़े-लिखे होते, तो किसी दफ्तर में बैठकर काम कर रहे होते।</p>
<p><strong>चालकों ने जुर्माना को लेकर उठाए सवाल</strong><br />इतना ही नहीं विरोध कर रहे चालकों का दावा है कि वे जैसे-तैसे टूटी-फूट मराठी सीखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सहूलियत या समय देने के बजाय अधिकारियों द्वारा दंडित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि वे 15000 से 20000 रुपये तक का जुर्माना कैसे भर सकते हैं? चालकों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक यह तीन दिन की हड़ताल जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 11:35:40 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली : छात्रों ने किया यूजीसी के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन का एलान, कहा- नियमों से परिसरों में होगी अराजकता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली में मंगलवार को कुछ छात्रों ने UGC के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। ये छात्र UGC के मुख्यालय के बाहर इकट्ठा होंगे। उनका कहना है कि नए नियमों से कॉलेज और विश्वविद्यालयों में अव्यवस्था फैल सकती है। विरोध कर रहे छात्रों ने सभी छात्रों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि UGC के नियम भेदभावपूर्ण हैं और इनके खिलाफ ज्यादा से ज्यादा छात्रों को आगे आकर आवाज उठानी चाहिए। छात्रों का कहना है कि तभी उनका विरोध मजबूती से सामने आ पाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47281/delhi-students-announced-protest-in-delhi-against-ugc-said"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-27t173851.219.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>दिल्ली : </strong>दिल्ली में मंगलवार को कुछ छात्रों ने UGC के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। ये छात्र UGC के मुख्यालय के बाहर इकट्ठा होंगे। उनका कहना है कि नए नियमों से कॉलेज और विश्वविद्यालयों में अव्यवस्था फैल सकती है। विरोध कर रहे छात्रों ने सभी छात्रों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि UGC के नियम भेदभावपूर्ण हैं और इनके खिलाफ ज्यादा से ज्यादा छात्रों को आगे आकर आवाज उठानी चाहिए। छात्रों का कहना है कि तभी उनका विरोध मजबूती से सामने आ पाएगा।</p>
<p> </p>
<p>विश्वविद्यालय परिषद (UGC) द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित नए नियम - उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 - ने सामान्य वर्ग के छात्रों की व्यापक आलोचना को जन्म दिया है, जो तर्क देते हैं कि यह ढांचा उनके खिलाफ भेदभाव का कारण बन सकता है।</p>
<p><strong>UGC के नए नियमों पर छात्रों की आपत्ति और अराजकता की आशंका</strong><br />कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों के तहत, यूजीसी ने संस्थानों को शिकायतों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों को संभालने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी दल गठित करने को कहा है।</p>
<p>दिल्ली विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र आलोकित त्रिपाठी ने कहा कि नए नियमों से कॉलेजों में पूरी तरह से अराजकता फैल जाएगी क्योंकि अब सबूत का बोझ पूरी तरह से आरोपी पर आ जाएगा, और गलत तरीके से आरोपी ठहराए गए छात्रों के लिए कोई सुरक्षा उपाय नहीं होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 17:39:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : उद्धव ठाकरे की वो गलती, जिसने छीन ली बीएमसी की गद्दी, वरना अभी कहानी कुछ और होती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. बीएमसी मेंं अब ठाकरे की बादशाहत खत्म हो गई. भाजपा ने अपने 25 साल का वनवास खत्म कर बीएमसी चुनाव में विजय पताका लहरा दिया. बीएमसी यानी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाली महायुति ने शानदार जीत दर्ज की है. देवेंद्र फडणवीस की रणनीति के आगे उद्धव ठाकरे पानी भरते नजर आए. महायुति ने बीएमसी की कुल 227 सीटों में से 118 सीटें जीतीं. यह बीएमसी में बहुमत के 114 के आंकड़े से ज्यादा है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47049/that-mistake-of-mumbai-uddhav-thackeray-which-took-away-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/images-(77).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. बीएमसी मेंं अब ठाकरे की बादशाहत खत्म हो गई. भाजपा ने अपने 25 साल का वनवास खत्म कर बीएमसी चुनाव में विजय पताका लहरा दिया. बीएमसी यानी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाली महायुति ने शानदार जीत दर्ज की है. देवेंद्र फडणवीस की रणनीति के आगे उद्धव ठाकरे पानी भरते नजर आए. महायुति ने बीएमसी की कुल 227 सीटों में से 118 सीटें जीतीं. यह बीएमसी में बहुमत के 114 के आंकड़े से ज्यादा है. भारतीय जनता पार्टी ने अकेले 89 सीटें हासिल कीं, जबकि शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. यह जीत भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ी कामयाबी है, क्योंकि उन्होंने मुंबई की सबसे अमीर निकाय पर कब्जा कर लिया, जहां सालाना बजट हजारों करोड़ का होता है. मगर उद्धव ठाकरे का प्रदर्शन भी उतना बुरा नहीं है, जितना शुरू में लगा था.</p>
<p> </p>
<p>यह सच है कि इस चुनाव की कहानी उद्धव ठाकरे के लिए दुखद है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बीएमसी में 65 सीटों से संतोष करना पड़ा. उद्धव की शिवसेना को 2017 में 84 सीटें मिली थीं. उद्धव ठाकरे ने इस चुनाव में अपने भाई राज ठाकरे के साथ हाथ मिलाया था. हालांकि, उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ गठबंधन का उतना फायदा नहीं मिला, क्योंकि मनसे ने महज 6 सीटें जीतीं. इस तरह उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन महज 71 सीटों पर समिट गया. हालांकि, उद्धव ठाकरे चाहते तो यह कहानी कुछ और हो सकती थी. अगर वह विधानसभा वाली रणनीति ही अपनाते तो शायद नतीजे कुछ और हो सकते थे.</p>
<p><strong>उद्धव से हो गई एक चूक</strong><br />अब सवाल है कि आखिर उद्धव ठाकरे से कौन सी चूक हो गई, जिसने बीएमसी की गद्दी छीन ली? अगर उद्धव ठाकरे वह चूक नहीं करते तो क्या उनकी बादशाहत कायम रहती? अगर मौजूदा रिजल्ट को देखेंगे तो यह लगेगा कि उद्धव ठाकरे ही नहीं, कांग्रेस से भी चूक हुई है. जी हां, अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ गठबंधन करते तो नतीजे अलग हो सकते थे. कांग्रेस ने इस चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला किया और 24 सीटें जीतीं. अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस को मनाने में कामयाब रहते और एमवीए यानी महा विकास अघाड़ी को फिर से एकजुट करते, तो शायद वोटों का बंटवारा कम होता और बीएमसी में सीटें ज्यादा मिल सकती थीं.</p>
<p><strong>डेटा से समझिए कैसे बदल सकता था खेल</strong><br />आइए बीएमसी चुनाव 2026 के फाइनल रिजल्ट्स के डेटा से इसे समझते हैं. बीएमसी कुल वोटों की बात करें तो भाजपा को 1,179,273 वोट मिले, जो 45.22% हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 717,736 वोट (27.52%) और कांग्रेस को 242,646 वोट (4.44 फीसदी) मिले. अगर उद्धव ठाकरे और कांग्रेस साथ होते तो उनके वोट कुल 960,382 हो जाते, जो भाजपा के करीब पहुंचते. नतीजों से पता चलता है कि कई वार्डों में जहां महायुति जीती, वहां उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के वोट अलग-अलग पड़ने से फायदा महायुति को हुआ. अगर उद्धव ठाकरे अपने भाई राज ठाकरे के साथ भी कांग्रेस को मिला लेते तो भी स्थिति मौजूदा से बेहतर हो सकती थी. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 10:31:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>...अगर मुस्लिम भारत में खुश नहीं तो पाकिस्तान से ज्यादा आबादी क्यों होती - सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री ने कहा कि अगर ऐसा होता तो भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी कैसे होती। पीआईआईई के अध्यक्ष एडम एस पोसेन ने जब पश्चिमी मीडिया में भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यकों से हिंसा के बारे में रिपोर्टिंग होने के बारे में पूछा, तो सीतारमण ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि 1947 में आजादी के बाद से पाक के विपरीत भारत में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। ऐसा केवल इसलिए है, क्योंकि भारत में हर तरह का मुसलमान अपना व्यवसाय कर रहा है, उनके बच्चों को शिक्षा दी जा रही है, फेलोशिप दी जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/19788/----if-muslims-are-not-happy-in-india-then-why-would-it-have-more-population-than-pakistan---sitharaman"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-04/images4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत के खिलाफ 'नकारात्मक पश्चिमी धारणा' पर आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जमकर वार किया। वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने भारत के मुसलमानों की स्थिति के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों का रोना रोने वाले पाक से भी बेहतर भारत में मुस्लिम खुश और सुरक्षित हैं। पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (PIIE) के कार्यक्रम में बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में हैं और यह आबादी तेजी से संख्या में बढ़ रही है। सीतारमण ने कहा कि पश्चिमी मीडिया में कहा जाता है कि भारत में शासन के समर्थन से मुस्लिमों का जीवन कठिन बनाया जाता है, लेकिन ये सब निराधार है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने कहा कि अगर ऐसा होता तो भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी कैसे होती। पीआईआईई के अध्यक्ष एडम एस पोसेन ने जब पश्चिमी मीडिया में भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यकों से हिंसा के बारे में रिपोर्टिंग होने के बारे में पूछा, तो सीतारमण ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि 1947 में आजादी के बाद से पाक के विपरीत भारत में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। ऐसा केवल इसलिए है, क्योंकि भारत में हर तरह का मुसलमान अपना व्यवसाय कर रहा है, उनके बच्चों को शिक्षा दी जा रही है, फेलोशिप दी जा रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने आगे कहा कि पाकिस्तान में हर अल्पसंख्यक अपनी संख्या में घट रहा है या कम हो रहा है। यहां तक कि कुछ खुद को एक इस्लामिक देश घोषित करने के बावजूद वहां के कुछ मुस्लिम संप्रदायों पर भी हमला कर सफाया किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्क में हर किसी के मन में असुरक्षा का भाव है। बता दें कि सीतारमण अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों में भाग लेने वाशिंगटन पहुंचीं हैं। वे दूसरी G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक की अध्यक्षता भी करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 11 Apr 2023 17:25:00 +0530</pubDate>
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