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                <title>abroad - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title> मुंबई : मुंबई ड्रग्स ओवरडोज केस: विदेश से लौटते ही मुख्य आरोपी गिरफ्तार, अब तक 12 लोग पकड़े गए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गोरेगांव में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान ड्रग ओवरडोज़ से दो युवाओं की मौत के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। घटना के बाद से विदेश भागे मुख्य आरोपी महेश खेमलानी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब तक इस मामले में कुल 12 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें इवेंट ऑर्गनाइजर से लेकर ड्रग सप्लायर तक शामिल हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49662/mumbai-mumbai-drugs-overdose-case-main-accused-arrested-as-soon"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-03t141128.206.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>गोरेगांव में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान ड्रग ओवरडोज़ से दो युवाओं की मौत के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। घटना के बाद से विदेश भागे मुख्य आरोपी महेश खेमलानी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब तक इस मामले में कुल 12 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें इवेंट ऑर्गनाइजर से लेकर ड्रग सप्लायर तक शामिल हैं। पुलिस को संदेह है कि खेमलानी इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है। दरअसल, 11 अप्रैल को गोरेगांव में एक म्यूजिक कॉन्सर्ट में शामिल हुए 25 MBA छात्रों के एक ग्रुप में शामिल 28 साल के एक युवक और 24 साल की एक युवती ने 'एक्स्टसी' गोलियां खाईं और एक दिन बाद उनकी मौत हो गई।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस का कहना है कि खेमलानी ने कथित तौर पर मामले के अन्य आरोपियों को ड्रग्स सप्लाई की थी और उन्हें ड्रग्स बेचने से मिली रकम अपनी लिव-इन पार्टनर जिया जैकब के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवाया था।</p>
<p><strong>कौन-कौन हो चुका है गिरफ्तार?</strong><br />इससे पहले, पुलिस ने MBA छात्रों रौनक खंडेलवाल और प्रतीक पांडे, इवेंट ऑर्गनाइजर विहान सामल, कॉन्सर्ट वेन्यू के कर्मचारियों सनी जैन और बालकृष्णन कुरुप, कथित ड्रग सप्लायर आनंद पटेल, विनीत गेरलानी और आयुष साहित्य, शुभ अग्रवाल और जैकब को गिरफ्तार किया था। जिसने कथित तौर पर ड्रग्स पहुंचाई थी।</p>
<p><strong>6 मई तक पुलिस हिरासत में</strong><br />वनराई पुलिस ने बताया कि उन्होंने खेमलानी के लिए 'लुकआउट नोटिस' जारी किया था और उसे गिरफ्तार करने के लिए इमिग्रेशन अधिकारियों की मदद ली थी। खेमलानी को बाद में बोरीवली मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उसे 6 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।</p>
<p><strong>40-50 लाख के लेनदेन का मामला आया सामने</strong><br />पुलिस ने आरोप लगाया कि जैकब के बैंक अकाउंट में 40-50 लाख रुपये के लेन-देन हुए हैं, जिसे खेमलानी भी ऑपरेट करता था। कोर्ट में अपनी दलील में, पुलिस ने कहा कि वे उससे इस पैसे के स्रोत और उन ड्रग्स के स्रोत के बारे में पूछताछ करना चाहते हैं, जिनकी उसने कथित तौर पर सप्लाई की थी। </p>
<p><strong>हांगकांग में रहता था खेमलानी</strong><br />पुलिस के अनुसार, खेमलानी ज्यादातर समय हांगकांग में रहता है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या उसने दूसरे देशों से भारत में ड्रग्स लाया था और क्या कोई अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट काम कर रहा था।</p>
<p>हालांकि, खेमलानी के वकील पंकज जाधव ने कोर्ट को बताया कि उनके क्लाइंट ने मामले के किसी भी अन्य आरोपी के साथ न तो कोई पैसे का लेन-देन किया है और न ही कोई फोन कॉल किया है। बल्कि, वह तो जांच में सहयोग करने के लिए अपनी मर्जी से वनराई पुलिस के सामने पेश हुआ था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 14:13:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : 3000 रुपये में पासपोर्ट, विदेश भेजने का खेल, मुंबई में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>फर्जी पासपोर्ट और संदिग्ध हवाला नेटवर्क को लेकर क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है. स्पेशल ब्रांच–1 की एंटी टेररिस्ट यूनिट ने कुरार के पठानवाड़ी इलाके में छापेमारी कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान मोहम्मद इस्लाम इस्माइल खान उर्फ सलीम रहमतुल्लाह शेख के तौर पर हुई है. जांच में सामने आया है कि आरोपी के लिए “सलीम रहमतुल्लाह शेख” नाम से फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाया गया था. यह पासपोर्ट महज ₹3000 में बनवाया गया और इसे तैयार कराने में बुट्टन शेख नाम का शख्स अहम कड़ी बताया जा रहा है, जो अब क्राइम ब्रांच के रडार पर है. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49361/mumbai-game-of-sending-passport-abroad-for-rs-3000-big"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-21t140628.818.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>फर्जी पासपोर्ट और संदिग्ध हवाला नेटवर्क को लेकर क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है. स्पेशल ब्रांच–1 की एंटी टेररिस्ट यूनिट ने कुरार के पठानवाड़ी इलाके में छापेमारी कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान मोहम्मद इस्लाम इस्माइल खान उर्फ सलीम रहमतुल्लाह शेख के तौर पर हुई है. जांच में सामने आया है कि आरोपी के लिए “सलीम रहमतुल्लाह शेख” नाम से फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाया गया था. यह पासपोर्ट महज ₹3000 में बनवाया गया और इसे तैयार कराने में बुट्टन शेख नाम का शख्स अहम कड़ी बताया जा रहा है, जो अब क्राइम ब्रांच के रडार पर है. </p>
<p> </p>
<p><strong>आंध्र से कुवैत तक आरोपी की टाइमलाइन</strong><br />पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी मूल रूप से आंध्र प्रदेश का रहने वाला है और 1976 में उसका जन्म हुआ था. उसने मुंबई में 12वीं तक पढ़ाई की और फिर 1998 में काम के सिलसिले में कुवैत चला गया, जहां वह ड्राइवर के तौर पर काम करता था. बाद में उसने दावा किया कि एक अरब नागरिक ने उसे लॉन्ड्री का बिजनेस गिफ्ट किया, जिसे बढ़ाकर उसने तीन दुकानों तक पहुंचा दिया. साल 2004 में उसने कुवैत में ही अपना पासपोर्ट रिन्यू भी कराया था. बताया जा रहा है कि पारिवारिक विवादों के चलते वह वापस मुंबई लौटा, जहां उसके खिलाफ कुरार पुलिस स्टेशन में घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज हुआ.</p>
<p><strong>फर्जी पहचान पर पासपोर्ट, एजेंसी के जरिए विदेश भेजने का खेल</strong><br />इसी दौरान दोबारा कुवैत जाने में दिक्कतें आने लगीं, जिसके बाद उसने 2007 में आंध्र प्रदेश जाकर फर्जी पहचान के साथ नया पासपोर्ट बनवा लिया. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने मलाड ईस्ट के पठानवाड़ी इलाके में एक एजेंसी शुरू की थी. इस एजेंसी के जरिए कुवैत जाने वालों के इमिग्रेशन से जुड़े काम किए जाते थे. इस काम में उसका बेटा अबू बकर और उसका साथी इरफान भी शामिल थे. पुलिस को शक है कि आरोपी और बुट्टन शेख मिलकर लोगों को फर्जी पासपोर्ट पर विदेश भेजने का नेटवर्क चला रहे थे. </p>
<p><strong>हवाला और आतंकी फंडिंग एंगल की जांच</strong><br />जो लोग कुवैत जाना चाहते थे, उन्हें इसी एजेंसी के जरिए प्रोसेस कराया जाता था, भले ही उनके दस्तावेज फर्जी क्यों न हों. अब क्राइम ब्रांच इस बात की जांच कर रही है कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने लोगों के फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए और कितनों को अवैध तरीके से विदेश भेजा गया. साथ ही, इस पूरे मामले में हवाला ट्रांजैक्शन और संभावित आतंकी फंडिंग के एंगल की भी गहराई से जांच की जा रही है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:07:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को बना रहे ‘साइबर गुलाम’</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेश में नौकरी का लालच देकर युवाओं को साइबर अपराध में धकेलने वाले मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और एस. सी. चंदक की खंडपीठ ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है और समाज के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48416/mumbai-youth-are-being-made-cyber-slaves-in-the-name"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-14t113229.605.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेश में नौकरी का लालच देकर युवाओं को साइबर अपराध में धकेलने वाले मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और एस. सी. चंदक की खंडपीठ ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है और समाज के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। </p>
<p> </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />मामले में आरोपी जेरी फिलिप्स जैकब पर आरोप है कि उसने कई शिक्षित युवाओं को विदेशी कंपनियों में आकर्षक और वैध नौकरी का झांसा दिया। जब ये युवक विदेश पहुंचे तो उन्हें बंधक बनाकर अन्य देशों के लोगों के साथ साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया गया। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मानव तस्करी का मामला बनता है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़ितों को नौकरी की वास्तविक प्रकृति के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था। न्यायालय के अनुसार यह अत्यंत गंभीर अपराध है, जिसमें पीड़ितों को अवैध तरीके से दूसरों को ठगने के लिए मजबूर किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो उसके फरार होने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की आशंका है। </p>
<p><strong>आरोपी की दलीलें खारिज</strong><br />मार्च 2024 से जेल में बंद आरोपी ने अदालत में दावा किया कि पीड़ितों को नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए थे और वे अपनी इच्छा से विदेश गए थे। उसने खुद पर लगे गुलामी और मानव तस्करी के आरोपों को गलत बताया। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि युवाओं को वैध रोजगार का झूठा आश्वासन देकर विदेश भेजना स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी और मानव तस्करी की श्रेणी में आता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 11:33:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मुंबई : इंश्योरेंस कंपनी ने विदेश में कैंसर के इलाज के क्लेम को खारिज कर दिया था; 66.50 लाख देने का आदेश </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने एक इंश्योरेंस कंपनी को शहर के एक रहने वाले को ₹66.50 लाख देने का आदेश दिया है। कमीशन ने कहा कि कंपनी ने गलत तरीके से उसके विदेश में कैंसर के इलाज के क्लेम को खारिज कर दिया था। कमीशन ने माना कि इंश्योरेंस कंपनी गलत ट्रेड प्रैक्टिस अपनाने की दोषी है और दो महीने के अंदर पैसे देने का आदेश दिया, साथ ही मुआवजा और मुकदमे का खर्च भी देना होगा।यह फैसला कमीशन के प्रेसिडेंट समिंदरा आर सुर्वे और मेंबर समीर एस कांबले ने अक्टूबर के आखिर में सुनाया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45857/mumbai-insurance-company-had-rejected-the-claim-for-cancer-treatment"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-29t132348.197.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने एक इंश्योरेंस कंपनी को शहर के एक रहने वाले को ₹66.50 लाख देने का आदेश दिया है। कमीशन ने कहा कि कंपनी ने गलत तरीके से उसके विदेश में कैंसर के इलाज के क्लेम को खारिज कर दिया था। कमीशन ने माना कि इंश्योरेंस कंपनी गलत ट्रेड प्रैक्टिस अपनाने की दोषी है और दो महीने के अंदर पैसे देने का आदेश दिया, साथ ही मुआवजा और मुकदमे का खर्च भी देना होगा।यह फैसला कमीशन के प्रेसिडेंट समिंदरा आर सुर्वे और मेंबर समीर एस कांबले ने अक्टूबर के आखिर में सुनाया। शिकायत करने वाले आलोक राजेंद्र बेक्टर ने 2017 में अपने और अपने बेटे के लिए एक वर्ल्डवाइड मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी थी, जिसमें उन्हें ₹65 लाख का इंश्योरेंस क्लेम मिला था। उन्हें 1 अगस्त, 2018 को कैंसर का पता चला था, और शहर में शुरुआती इलाज के बाद, वे स्पेशल मेडिकल केयर के लिए US गए थे। उन्होंने पॉलिसी के तहत ज़रूरी बीमारी और विदेश में इलाज के बारे में इंश्योरेंस कंपनी को पहले से बता दिया था।उनका पहला क्लेम इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि उन्होंने अस्थमा की अपनी पहले से मौजूद हिस्ट्री नहीं बताई थी। </p>
<p> </p>
<p>इसके बाद, इंश्योरेंस कंपनी ने दिसंबर 2019 में पॉलिसी कैंसल कर दी, लेकिन बेक्टर ने इस फैसले को इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के सामने चुनौती दी। यह बॉडी सरकार ने पॉलिसी होल्डर्स के हितों की रक्षा के लिए बनाई थी। ओम्बड्समैन ने माना कि अस्थमा का कोलोरेक्टल कैंसर से कोई लेना-देना नहीं है, जो कोलन या रेक्टम को प्रभावित करता है, और इंश्योरेंस कंपनी को पहले के क्लेम का एक हिस्सा वापस करने का निर्देश दिया। इससे यह साबित हुआ कि इंश्योरेंस कंपनी का पहले का कैंसलेशन गलत था, और शिकायत करने वाले को आखिरकार वापस कर दिया गया।इसके बाद बेक्टर ने एडवोकेट रोहित लालवानी के ज़रिए कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया, जब इंश्योरेंस कंपनी ने मार्च 2019 और मार्च 2020 के बीच मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर रिसर्च सेंटर में अपने इलाज पर खर्च किए गए ₹88,34,560 के लिए उनका अगला क्लेम खारिज कर दिया।इंश्योरेंस कंपनी ने उनका क्लेम यह कहकर खारिज कर दिया कि पॉलिसी कुछ खास बीमारियों के लिए विदेश में इलाज की इजाज़त सिर्फ़ कैशलेस तरीकों से देती है, जहाँ पॉलिसी होल्डर बिना पहले पेमेंट किए इलाज करवा सकता है, क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी सीधे बिल का पेमेंट करती है।</p>
<p>कंपनी ने दावा किया कि शिकायत करने वाली पॉलिसी विदेश में इलाज के मामले में रीइंबर्समेंट की इजाज़त नहीं देती, जिससे बेक्टर को कंज्यूमर कंप्लेंट फाइल करनी पड़ी।कमीशन ने इस बचाव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चूंकि इंश्योरेंस कंपनी ने खुद पॉलिसी कैंसिल कर दी थी, इसलिए शिकायत करने वाला कैशलेस इलाज की मंज़ूरी नहीं मांग सकता था। कमीशन को यह भी कोई सबूत नहीं मिला कि बेक्टर का अस्थमा उनके कैंसर से जुड़ा था, और यह उनके मेडिकल कवरेज पर कैसे असर डालता।कमीशन ने यह नतीजा निकाला कि बेक्टर को उस ज़रूरी समय पर पॉलिसी के फ़ायदों से गलत तरीके से वंचित रखा गया था जब उन्हें जान बचाने वाली मेडिकल केयर की ज़रूरत थी, जिससे उन्हें कैंसर के इलाज के दौरान पैसे का बोझ और मानसिक परेशानी हुई।इंश्योरर को 60 दिनों के अंदर ₹66.50 लाख देने का निर्देश दिया गया है, ऐसा न करने पर पेमेंट तक इस रकम पर 6% सालाना ब्याज लगेगा। इंश्योरेंस कंपनी को बेक्टर को मुआवज़े के तौर पर ₹30,000 और मुकदमे के खर्च के तौर पर ₹10,000 भी देने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/45857/mumbai-insurance-company-had-rejected-the-claim-for-cancer-treatment</link>
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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 18:22:42 +0530</pubDate>
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