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                <title>neighboring - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>neighboring RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बांग्लादेश : महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल... भारत के पड़ोसी मु्ल्क में 7 महीने में 3 बार बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग ने भी ईंधन की कीमत बढ़ने के लंबे समय तक रहने वाले असर को लेकर चिंता जताई है. थिंक टैंक के अनुसार इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और निम्न-मध्यम आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है. ईंधन महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता. परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने पर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51944/petrol-and-diesel-became-expensive-in-bangladesh-prices-increased-3"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/sdfdsf.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बांग्लादेश : </strong>बांग्लादेश में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी की गई है. सरकार ने डीजल, पेट्रोल, ऑक्टेन और केरोसिन के दाम में 20 टका प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें सोमवार से लागू हो गई हैं. यह पिछले सात महीनों में ईंधन की कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी है. सरकार के इस फैसले के बाद फरवरी के मुकाबले बांग्लादेश में ईंधन की खुदरा कीमतों में करीब 38.4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है. ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने और क्षेत्र में अस्थिरता के कारण माल ढुलाई का खर्च बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा.<br /><br />नई दर लागू होने के बाद बांग्लादेश में डीजल की कीमत 115 टका से बढ़कर 135 टका प्रति लीटर हो गई है. यानी इसमें करीब 17.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. पेट्रोल का भाव 140 टका से बढ़कर 160 टका प्रति लीटर हो गया है. ऑक्टेन की कीमत 145 टका से बढ़कर 165 टका और केरोसिन का दाम 135 टका से बढ़कर 155 टका प्रति लीटर हो गया है. सरकार ने इससे पहले अप्रैल और जून में भी ईंधन के दाम बढ़ाए थे. इस तरह फरवरी में हुए चुनाव के बाद यह तीसरी बढ़ोतरी है.<br />सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों का दिया हवाला<br />बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार मार्च के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में फ्यूल की कीमतें दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गई हैं. इसके अलावा क्षेत्रीय तनाव और अस्थिरता के कारण ईंधन को दूसरे देशों से लाने का खर्च भी बढ़ा है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के नेताओं ने भी सरकार के फैसले का बचाव किया है. पार्टी के कार्यवाहक महासचिव और प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार रूहूल कबीर रिजवी ने कहा कि बढ़ी कीमतों के बाद भी सरकार को डीजल पर प्रति लीटर करीब 70 टका का नुकसान उठाना पड़ेगा.<br /><br />ईंधन महंगा होने के बाद बांग्लादेश में ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ाने की मांग भी शुरू हो गई है. लंबी दूरी के कुछ रूट पर ट्रांसपोर्ट मालिकों ने किराया 100 टका तक बढ़ाने की बात कही है. ढाका के भीतर भी कुछ रूट पर यात्रियों से ज्यादा किराया लिए जाने की शिकायतें सामने आने लगी हैं. ईंधन की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई और कंटेनर परिवहन का खर्च भी बढ़ने की आशंका है. चट्टोग्राम बंदरगाह के आसपास काम करने वाले लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों ने भी अपनी सेवाओं की कीमतों में बदलाव की मांग शुरू कर दी है. इससे आयात और निर्यात से जुड़ी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है.<br /><br />बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में गारमेंट उद्योग की बड़ी भूमिका है. कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से पहले से दबाव झेल रहे उद्योगों की लागत और बढ़ सकती है. बांग्लादेश में उद्योगों को पहले से गैस और बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में डीजल और दूसरे ईंधन महंगे होने से उत्पादन, परिवहन और सामान की सप्लाई का खर्च बढ़ सकता है. बांग्लादेश चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अनवर-उल आलम चौधरी परवेज ने कहा कि सरकार ने ऐसे समय में ईंधन की कीमत बढ़ाई है जब देश में महंगाई पहले से ऊंचे स्तर पर है. उनके अनुसार इससे कारोबार और रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है.<br /><br />बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग ने भी ईंधन की कीमत बढ़ने के लंबे समय तक रहने वाले असर को लेकर चिंता जताई है. थिंक टैंक के अनुसार इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और निम्न-मध्यम आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है. ईंधन महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता. परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने पर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है.<br /><br />डीजल की बढ़ी कीमत का असर बांग्लादेश के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका है. कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार देश के करीब 70 प्रतिशत सिंचाई पंप डीजल से चलते हैं. ऐसे में डीजल महंगा होने पर किसानों की सिंचाई लागत बढ़ सकती है. इसका असर खेती की कुल लागत और आगे चलकर कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 13:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>कुछ परियोजनाओं का दूसरे राज्यों में जाना स्वाभाविक...  पड़ोसी राज्य पाकिस्तान नहीं - देवेंद्र फडणवीस </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हम प्रतिस्पर्धी संघवाद के युग में हैं और निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले राज्यों की संख्या पहले के 2-3 से बढ़कर अब 10 हो गई है, जो एक स्वागतयोग्य कदम है। कोई कंपनी गुजरात, कर्नाटक या दिल्ली जा रही है, यह पाकिस्तान नहीं है, यह हमारा देश है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29240/it-is-natural-for-some-projects-to-go-to-other-states----not-the-neighboring-state-pakistan---devendra-fadnavis"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> गुजरात के हाथों परियोजनाएं गंवाने को लेकर हो रही आलोचना के बीच इंडिया ग्लोबल फोरम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि पड़ोसी राज्य पाकिस्तान नहीं है। कुछ परियोजनाओं का दूसरे राज्यों में जाना स्वाभाविक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हम प्रतिस्पर्धी संघवाद के युग में हैं और निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले राज्यों की संख्या पहले के 2-3 से बढ़कर अब 10 हो गई है, जो एक स्वागतयोग्य कदम है। कोई कंपनी गुजरात, कर्नाटक या दिल्ली जा रही है, यह पाकिस्तान नहीं है, यह हमारा देश है। </p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अपने संबोधन में देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हम वास्तव में चाहता है कि हर कोई राज्य में आए और व्यापार करने में आसानी और व्यापार करने की लागत दोनों पर काम कर रहा है। विपक्ष ने सेमीकंडक्टर जैसी मेगा निवेश परियोजनाओं को पड़ोसी राज्य गुजरात के हाथों चलते जाने पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की है।</p>
<p style="text-align:justify;">फडणवीस ने कहा कि राज्य ने आर्थिक सफलता हासिल करने के लिए टाटा संस के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में एक पैनल का गठन किया है और 2030 तक जीएसडीपी को एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का विश्वास जताया। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र स्टार्ट अप राजधानी है क्योंकि यह ऐसे उद्यमों की कुल संख्या का पांचवां हिस्सा है और यह भी कहा कि एक बिलियन अमरीकी डालर से अधिक मूल्य के 25 यूनिकॉर्न का मुख्यालय राज्य में है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अकेले 2014-19 के दौरान जब वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, मुंबई महानगरीय क्षेत्र में बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की परियोजनाएं शुरू की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Mar 2024 10:38:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की पैसेंजर ट्रेन में लगी आग... चार बच्चों समेत 7 लोगों की गई जान</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान में गरीब यात्री अक्सर खाना पकाने के लिए ट्रेनों में अपना छोटा गैस चूल्हा लाते हैं. अक्सर खचाखच भरी ट्रेनों में सुरक्षा नियमों की इसी तरह अनदेखी की जाती है. रेलवे के रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं कि मुल्क में ट्रेन दुर्घटनाएं अक्सर रेलवे  के बुनियादी ढांचे के सही न होने और प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा होती हैं.  पूर्वी पंजाब प्रांत में साल 2019 में रसोई गैस चूल्हा फटने से ट्रेन में आग लग गई थी. इसमें से कम से कम 74 यात्रियों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/20305/passenger-train-of-neighboring-country-pakistan-caught-fire%E2%80%A6-7-people-including-four-children-died"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-04/download-(16)4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पाकिस्तान : </strong>पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में एक पैसेंजर ट्रेन में आग लग गई. इससे उसमें सवार कई लोग झुलस गए और कई की मौत हो गई. सूचना के मुताबिक, इस हादसे में चार बच्चों सहित कम से कम सात लोगों की मौत हो गई. ये जानकारी पाकिस्तानी रेलवे ने गुरुवार (27 अप्रैल) को दी. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह हादसा दक्षिणी पाकिस्तान में कराची से करीब 500 किलोमीटर उत्तर में खैरपुर जिले में हुआ. यात्रियों से भरी ये पैसेंजर ट्रेन पूर्वी शहर लाहौर की तरफ जा रही थी.<br /><br />पैसेंजर ट्रेन में लगी आग ने देखते ही देखते ट्रेन के कई अन्य कोच को भी अपनी चपेट में ले लिया. एक टीवी चैनल के फुटेज में ट्रेन के कई जले हुए हिस्से दिखाई दे रहे हैं. इससे जानमाल का कितना नुकसान हुआ ये अभी तक पता नहीं चल सका है. स्थानीय मीडिया ने बताया कि बुधवार (26 अप्रैल) रात ट्रेन में आग की लपटें उठीं और कई लोग इसकी जद में आ गए.<br />आशंका जताई जा रही है​ कि इस हादसे की वजह गैस चूल्हा हो सकता है.</p>
<p>मीडिया में आई खबरों के अनुसार, पाकिस्तान में गरीब यात्री अक्सर खाना पकाने के लिए ट्रेनों में अपना छोटा गैस चूल्हा लाते हैं. अक्सर खचाखच भरी ट्रेनों में सुरक्षा नियमों की इसी तरह अनदेखी की जाती है. रेलवे के रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं कि मुल्क में ट्रेन दुर्घटनाएं अक्सर रेलवे  के बुनियादी ढांचे के सही न होने और प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा होती हैं.  पूर्वी पंजाब प्रांत में साल 2019 में रसोई गैस चूल्हा फटने से ट्रेन में आग लग गई थी. इसमें से कम से कम 74 यात्रियों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे.</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/20305/passenger-train-of-neighboring-country-pakistan-caught-fire%E2%80%A6-7-people-including-four-children-died</link>
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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 18:09:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन की बड़ी साजिश का पर्दाफाश... भारत के पड़ोसी देश में बनाएगा रडार बेस</title>
                                    <description><![CDATA[चीन दक्षिण में भी मॉरीशस में नेवल बेस बनाने के लिए लोकेशन ढूंढ़ रहा है. ब्रिटिश बेवसाइट के मुताबिक, श्रीलंका के जंगल में चीन के रडार सिस्टम बनाने का खुलासा श्रीलंका की इंटेलिजेंस एजेंसी के सूत्रों के हवाले से किया गया है. बताया गया है कि चाइनीज रडार सिस्टम के प्रोजेक्ट का नेतृत्व चीन की साइंस एकेडमी करेगी. डोंडरा बे का इलाका श्रीलंका के दक्षिणी छोर पर स्थित है. अगर, वहां रडार बेस बनता है तो उसके जरिए चीन पूरे दक्षिण भारत पर नजर रख सकेगा. वो भारत के कुडनकुलम और कलपक्कम न्यूक्लियर पावर प्लांट की निगरानी भी कर सकेगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/19697/china-s-big-conspiracy-exposed----radar-base-will-be-built-in-india-s-neighboring-country"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-04/images3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत को घेरने में लगे चीन की एक और साजिश का पर्दाफाश हुआ है. चीन अब कर्ज के जाल में डूबे श्रीलंका के जंगल में अपना एक रडार बेस बनाने की तैयारी कर रहा है. इस रडार बेस के जरिए वो भारत की जासूसी कर सकेगा. इसके साथ ही चीन के लिए हिंद महासागर में भारत, अमेरिका और ब्रिटेन की नेवल एक्टिवटीज पर नजर रखना आसान हो जाएगा. ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चाइनीज रडार बेस श्रीलंका के डोंडरा बे के जंगलों में बनाया जाएगा, जोकि हिंद महासागर से घिरे हुए हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">वहां यदि दूरगामी रडार और अन्‍य तकनीक संस्‍थान स्‍थापित कर दिए जाएं तो भारतीय परमाणु प्रतिष्‍ठान भी उनकी जद में होंगे. इसके अलावा भारतीय मिसाइल टेस्‍ट साइट भी चीन के रडार की रेंज में आ जाएंगी. ऐसे में चीन का ये कदम भारतीय सुरक्षा-तंत्र की चिंता बढ़ाने वाला है, इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ जाएगा. द संडे गार्डियन की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन केवल हिंद महासागर में ही जासूसी नहीं कर रहा, बल्कि वो अरब सागर की उत्तर दिशा में पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर भी एक नेवल बेस बना रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, चीन दक्षिण में भी मॉरीशस में नेवल बेस बनाने के लिए लोकेशन ढूंढ़ रहा है. ब्रिटिश बेवसाइट के मुताबिक, श्रीलंका के जंगल में चीन के रडार सिस्टम बनाने का खुलासा श्रीलंका की इंटेलिजेंस एजेंसी के सूत्रों के हवाले से किया गया है. बताया गया है कि चाइनीज रडार सिस्टम के प्रोजेक्ट का नेतृत्व चीन की साइंस एकेडमी करेगी. डोंडरा बे का इलाका श्रीलंका के दक्षिणी छोर पर स्थित है. अगर, वहां रडार बेस बनता है तो उसके जरिए चीन पूरे दक्षिण भारत पर नजर रख सकेगा. वो भारत के कुडनकुलम और कलपक्कम न्यूक्लियर पावर प्लांट की निगरानी भी कर सकेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/19697/china-s-big-conspiracy-exposed----radar-base-will-be-built-in-india-s-neighboring-country</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Apr 2023 16:35:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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