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                <title>Delhi - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Delhi RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नई दिल्ली : गर्मी से मिलेगी राहत: मई में औसत से कम रहेगा तापमान, अगले दो दिनों में बारिश की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों को अप्रैल में अपनी चपेट में लेने वाली भीषण गर्मी से फिलहाल काफी राहत मिल रही है। शनिवार के लिए भी भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने दिन भर आंशिक रूप से बादल छाए रहने का पूर्वानुमान लगाया है, जिससे तापमान में वृद्धि नियंत्रण में रहने की उम्मीद है। वहीं, राजधानी में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49633/new-delhi-will-get-relief-from-heat-temperature-will-be"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t131727.652.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों को अप्रैल में अपनी चपेट में लेने वाली भीषण गर्मी से फिलहाल काफी राहत मिल रही है। शनिवार के लिए भी भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने दिन भर आंशिक रूप से बादल छाए रहने का पूर्वानुमान लगाया है, जिससे तापमान में वृद्धि नियंत्रण में रहने की उम्मीद है। वहीं, राजधानी में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।</p>
<p> </p>
<p><strong>मौसमी औसत से कम तापमान</strong><br />शहर के कुछ हिस्सों में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि के बाद, शुक्रवार को तापमान सामान्य स्तर से नीचे गिर गया, जिससे मौसम हाल की भीषण गर्मी की तुलना में काफी सुहावना हो गया। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो मौसमी औसत से 2.9 डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.9 डिग्री कम है।  </p>
<p>शनिवार को भी मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने आंशिक रूप से बादल छाए रहने का पूर्वानुमान लगाया है। अधिकतम तापमान 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। हालांकि लू की तीव्रता कम हो गई है, लेकिन उमस के कारण लोगों को कुछ असुविधा हो सकती है। हालांकि, शाम को हल्की हवा चलने से कुछ राहत मिलने की संभावना है। </p>
<p><strong>सामान्य से कम तापमान</strong><br />राजधानी के मौसम स्टेशनों ने सामान्य से कम तापमान दर्ज किया। शहर के बेस स्टेशन सफदरजंग में दिन का उच्चतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अन्य क्षेत्रों में भी तापमान में गिरावट देखी गई, जिनमें पालम में अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस, लोधी रोड में 34.6 डिग्री, रिज में 34.9 डिग्री और आयानगर में 35.4 डिग्री रहा, जो सामान्य से कई डिग्री कम था। शहर भर में न्यूनतम तापमान में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। तापमान में आई यह गिरावट उन निवासियों के लिए एक सुखद राहत बनकर आई है जो पिछले कुछ दिनों से बढ़ती गर्मी से जूझ रहे थे।<br />वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी<br />इस बीच, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार शहर में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी रही और सुबह 9 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 119 दर्ज किया गया। शुक्रवार शाम 4 बजे तक दर्ज किया गया 24 घंटे का औसत एक्यूआई 120 था।  </p>
<p><strong>सीपीसीबी के अनुसार  0-50 का एक्यूआई अच्छा</strong><br /> 51-100 संतोषजनक<br />101-200 मध्यम<br />201-300 खराब<br />301-400 बेहद खराब<br />और 401-500 गंभीर माना जाता है। </p>
<p>दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने पूर्वानुमान लगाया है कि अगले कुछ दिनों तक एक्यूआई मध्यम श्रेणी में रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:19:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : 'चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार, नए आदेश की जरूरत नहीं'; टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49631/new-delhi-election-commission-has-full-powers-of-appointment-no"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t131314.131.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की। विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी नया आदेश पारित करने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह अपने 13 अप्रैल के परिपत्र (सर्कुलर) का पूरी तरह से पालन करेगा।</p>
<p> </p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के मुताबिक, इस सर्कुलर में मतगणना प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती का भी प्रावधान है। चुनाव आयोग के वकील के इस बयान के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह दोहराया कि चुनौती दिए गए सर्कुलर को लागू किया जाएगा और मामले में आगे कोई अन्य आदेश देने से मना कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार हैं।</p>
<p><strong>फर्क नहीं पड़ता कि अधिकारी केंद्र का है- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी</strong><br />सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि मतगणना के दौरान वहां हर राजनीतिक दल के चुनाव एजेंट मौजूद रहेंगे। इसलिए, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि पर्यवेक्षक केंद्र सरकार का नामित अधिकारी है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की तैनाती पूरी तरह से चुनाव आयोग की अपनी संतुष्टि पर निर्भर करती है, क्योंकि वहां सभी पार्टियों के एजेंट मौजूद होंगे। <br />क्या है पूरा मामला?<br />यह पूरा मामला वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाएगा। टीएमसी इस फैसले का विरोध कर रही है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर शामिल किया जाना चाहिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए टीएमसी ने अर्जी दी थी, जिस पर जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नियमों को लेकर क्या स्पष्ट किया? </strong><br />मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों को लेकर स्थिति साफ की।<br />उन्होंने कहा कि नियमों में यह विकल्प पूरी तरह से खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र सरकार के भी हो सकते हैं और राज्य सरकार के भी।<br />कोर्ट ने कहा कि जब यह विकल्प खुला हुआ है, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग का यह नोटिफिकेशन नियमों के खिलाफ है।<br />जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह कह सकता है कि दोनों अधिकारी केंद्र सरकार के ही होंगे। <br /> कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या दलील दी? <br />टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर (परिपत्र) पर सवाल उठाए।<br />सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में खुद ऐसा स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी ही होंगे।<br />टीएमसी का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गिनती से दूर रखने के लिए उठाया गया है। <br />सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों पर क्या जवाब दिया?<br />वकील सिब्बल की दलीलों पर जस्टिस बागची ने तुरंत अपना पक्ष रखा। उन्होंने ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने ऐसा कहा भी होता, तब भी हम उन्हें इस बात के लिए गलत नहीं ठहरा सकते थे। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम साफ तौर पर कहते हैं कि मगणना के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:15:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : जीएसटी कलेक्शन का बना रिकॉर्ड, अप्रैल में बढ़कर 2.42 लाख करोड़ रुपये के हुआ पार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अप्रैल में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन बढ़कर लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को अप्रैल 2026 का मासिक जीएसटी कलेक्शन जारी कर दिया है। प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल सकल जीएसटी राजस्व अप्रैल 2026 में ₹2,42,702 करोड़ पहुंच गया। यह अप्रैल 2025 के ₹2,23,265 करोड़ की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है।  शुद्ध जीएसटी राजस्व (रिफंड घटाकर) ₹2,10,909 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹1,96,618 करोड़ से 7.3 फीसदी ज्यादा है।  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49623/draft-add-your-title"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-01t173254.754.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>अप्रैल में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन बढ़कर लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को अप्रैल 2026 का मासिक जीएसटी कलेक्शन जारी कर दिया है। प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल सकल जीएसटी राजस्व अप्रैल 2026 में ₹2,42,702 करोड़ पहुंच गया। यह अप्रैल 2025 के ₹2,23,265 करोड़ की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है।  शुद्ध जीएसटी राजस्व (रिफंड घटाकर) ₹2,10,909 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹1,96,618 करोड़ से 7.3 फीसदी ज्यादा है।  </p>
<p> </p>
<p>अप्रैल के आंकड़े मार्च महीने के दौरान एकत्र किए गए तेल के हैं, जब ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका दिया और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। क्षेत्र में फिर से तनाव की आशंकाओं के कारण 30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।</p>
<p><strong>आयात से जीएसटी राजस्व में कितनी हुई बढ़ोतरी</strong><br />आंकड़ों पर गौर करें तो सकल घरेलू राजस्व में साल-दर-साल 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 1.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि आयात से संबंधित जीएसटी राजस्व में 25.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 57,580 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा घरेलू मांग के बजाय बाहरी व्यापार से प्रभावित था।</p>
<p>इस महीने के दौरान रिफंड में भी वृद्धि हुई, कुल रिफंड में 19.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें घरेलू रिफंड में 54.6 प्रतिशत की वृद्धि मुख्य कारण रही, जबकि निर्यात से संबंधित रिफंड में 14 प्रतिशत की गिरावट ने इस वृद्धि को आंशिक रूप से संतुलित कर दिया।</p>
<p><strong>कैसे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा जीएसटी कलेक्शन</strong><br />मासिक रुझानों से पता चलता है कि जीएसटी संग्रह अप्रैल 2022 में लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अप्रैल 2024 में 2.10 लाख करोड़ रुपये हो गया, फिर अप्रैल 2025 में 2.23 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया और वर्तमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल 2026 में वार्षिक वृद्धि दर धीमी होकर 8.7 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 8.8 प्रतिशत थी।</p>
<p>हालांकि जीएसटी संग्रह निरपेक्ष रूप से नए उच्च स्तर पर पहुंच रहा है, लेकिन विकास की गति जारी रही है। अप्रैल 2026 में वार्षिक वृद्धि दर धीमी होकर 8.7 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 8.8 प्रतिशत थी। इससे पता चलता है कि हालांकि जीएसटी संग्रह निरपेक्ष रूप से नए उच्च स्तर पर पहुंच रहा है, लेकिन विस्तार की गति विशेष रूप से उपभोग से जुड़ी धीमी हो सकती है, जिसमें हाल के लाभों में आयात-आधारित राजस्व की बड़ी भूमिका रही है।</p>
<p>अप्रैल 2026 में भारत का जीएसटी संग्रह एक बार फिर ₹2 लाख करोड़ की सीमा पार कर गया। शुद्ध कमाई पिछले साल की तुलना में 7.3% बढ़कर ₹2.11 लाख करोड़ हो गई।  इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण आयात पर जीएसटी (कस्टम्स जीएसटी) में 42.9% की तेजी थी। यह बढ़ोतरी दुनिया भर की सप्लाई चेन में रुकावट और युद्ध के कारण बढ़ती आयात की कीमतों की वजह से हुई। घरेलू जीएसटी का कुल संग्रह ₹1.85 लाख करोड़ रहा, जो अप्रैल 2025 से 4.3% ज्यादा है। इससे पता चलता है कि ज्यादा लोग और कंपनियां अब नियमों का पालन कर रहे हैं। - विवेक जलन, पार्टनर, टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी</p>
<p>हालांकि शुद्ध घरेलू संग्रह बिल्कुल स्थिर रहा, क्योंकि मुख्य रूप से उल्टी ड्यूटी वाली चीजों पर रिफंड 54% बढ़ गए।  ये रिफंड इनपुट सेवाओं पर जमा हो रहे आईटीसी  (इनपुट टैक्स क्रेडिट) को शामिल नहीं करते। जीएसटी 2.0 के नए नियमों के तहत यह आईटीसी  लगातार बढ़ता जा रहा है। इस आईटीसी  जमा होने से सरकार का संग्रह तो बरकरार है, लेकिन कंपनियों का खर्च भी बढ़ गया है। इस समस्या को जीएसटी परिषद की आने वाली 57वीं बैठक में ठीक करने की बात कही गई है।घरेलू संग्रह को अतिरिक्त मदद मिली। 31 मार्च 2026 से पहले पुराने वित्तीय वर्ष 2019-20 के सेक्शन 74 आदेशों पर पहले जमा किए गए पैसे (प्री-डिपॉजिट) से।इसके अलावा, अप्रैल में एक बड़ा बदलाव भी हुआ। जीएसटी पोर्टल पर आईटीसी  एडजस्ट करने का तरीका बदल दिया गया। फरवरी 2026 की पुरानी सलाह वापस लेने के बाद यह बदलाव किया गया था, जिसमें अस्थायी रूप से आईजीएसटी को एसजीएसटी क्रेडिट से पहले एडजस्ट करने की छूट दी गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49623/draft-add-your-title</link>
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:33:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते सड़क हादसे चिंता का विषय; आखिर कब थमेगा मौत और हादसों का सिलसिला?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>देश की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते सड़क हादसे चिंता का विषय बने गए हैं। तय सीमा से अधिक रफ्तार, कमजोर निगरानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे तमाम कारणों से इस एक्सप्रेस-वे पर आए-दिन एक्सीडेंट हो रहे है। इसी वजह से लोग अब इसे एक्सप्रेस-वे की जगह 'डेथ-वे' यानि मौत का रास्ता तक कहने लगे हैं। हर हादसे के बाद रोकथाम के दावे किए गए, लेकिन ये दावे सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकले।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49621/increasing-road-accidents-on-delhi-mumbai-expressway-is-a-matter-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/images-(67).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>देश की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बढ़ते सड़क हादसे चिंता का विषय बने गए हैं। तय सीमा से अधिक रफ्तार, कमजोर निगरानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे तमाम कारणों से इस एक्सप्रेस-वे पर आए-दिन एक्सीडेंट हो रहे है। इसी वजह से लोग अब इसे एक्सप्रेस-वे की जगह 'डेथ-वे' यानि मौत का रास्ता तक कहने लगे हैं। हर हादसे के बाद रोकथाम के दावे किए गए, लेकिन ये दावे सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकले।</p>
<p> </p>
<p>हाल यह है कि रोक के बावजूद इस पर दुपहिया वाहन दौड़ते हैं। आवारा पशु तक एक्सप्रेस-वे पर आ जाते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी और कम समय में लंबी दूरी तय करने के दावे के साथ शुरू किया गया यह एक्सप्रेस-वे सुरक्षा के मोर्चे पर सवालों के घेरे में है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे ने जहां यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाया है, वहीं सुरक्षा मानकों की अनदेखी इसे आम लोगों के लिए खतरनाक भी बना रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हादसों का यह सिलसिला और अधिक भयावह हो सकता है।<br />विशेषज्ञों के अनुसार इन हादसों के लिए तय गति सीमा से अधिक रफ्तार, लेन डिसिप्लेन का पालन न होना और तकनीकी निगरानी की विफलता इसके प्रमुख कारण है। यह परियोजना इस दावे के साथ शुरू की गई थी कि इससे यात्रा का समय घटेगा, व्यापार को गति मिलेगी और सड़क परिवहन सुरक्षित होगा। जिस एक्सप्रेस-वे को सुविधा और रफ्तार का प्रतीक होना था, वह अब लगातार हो रहे हादसों का प्रतीक बनती जा रही है। यह एक्सप्रेस-वे देश के आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक माना जाता है। बीते कुछ दिनों में इस एक्सप्रेस-वे पर हुई दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं है, बल्कि व्यवस्था की असफलता का आईना है।<br />चालकों को सतर्क रहने की सलाह<br />एएसपी प्रियंका रघुवंशी ने ऐसे हादसों से बचाव के लिए वाहन चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में सीएनजी वाहनों की समय-समय पर फिटनेस और लीकेज जांच कराना बेहद जरूरी है। लंबी यात्रा के दौरान गाड़ी को लगातार चलाने से इंजन और गैस सिस्टम पर दबाव बढ़ता है, जिससे हादसे की आशंका रहती है। बीच-बीच में वाहन रोककर इंजन को ठंडा होने देना चाहिए। साथ ही किसी भी तरह की गैस की गंध, ओवर हीटिंग या तकनीकी खराबी महसूस होने पर तुरंत गाड़ी रोककर जांच कराएं।<br />आखिर कब थमेगा मौत और हादसों का यह सिलसिला?<br />-29 अप्रेल की रात अलवर के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कार में आग लगने से इसमें सवार दंपती, उनकी 6 साल की बेटी, सास और सास की बहन जिंदा जल गए। चालक जान बचाने के लिए कार से कूदा, लेकिन वह मौत को नहीं हरा सका। उसे पहले अलवर और फिर जयपुर रेफर किया गया। जयपुर में उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।<br />-14 अप्रेल को अलवर जिले के पिनान इंटरचेंज की पुलिया नंबर 128 को पार करते समय मध्यप्रदेश के उज्जैन से दिल्ली जा रही स्लीपर कोच बस आगे चल रहे ट्रक से टकराने के बाद मिडवे जोन के एंगल से जा टकराई थी। इस हादसे में बस चालक उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद निवासी मोनू यादव (32), उसकी पत्नी रीना (31) व बेटी शक्ति उर्फ डोली (8) की मौत हो गई थी। इस हादसे में 31 यात्री घायल हो गए थे। इनमें से दो घायलों ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 14:02:59 +0530</pubDate>
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