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                <title>मुंबई:  एक्शन मोड में BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े, तीन घंटे चलीं पैदल, मुंबई में 320 KM फुटपाथ होगा साफ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में बतौर एफडीए कमिश्नर सरोगेट सरोगेट एडवरटाइजिंग पर बॉलीवुड के बड़े स्टार से लेकर मिलावटखोरों पर नकेल कस रहे आईएएस तुकाराम मुंढे सुर्खियों में हैं। उनकी सख्ती का असर मुंबई और दूसरे शहरों में दिख रहा है। इस सब के बीच बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की कमिश्नर अश्विनी भिड़े भी एक्शन में आ गई हैं।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51432/mumbai-bmc-commissioner-ashwini-bhide-in-action-mode-walked-for"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/ashwini-bhide-1-1786059314267_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र में बतौर एफडीए कमिश्नर सरोगेट सरोगेट एडवरटाइजिंग पर बॉलीवुड के बड़े स्टार से लेकर मिलावटखोरों पर नकेल कस रहे आईएएस तुकाराम मुंढे सुर्खियों में हैं। उनकी सख्ती का असर मुंबई और दूसरे शहरों में दिख रहा है। इस सब के बीच बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की कमिश्नर अश्विनी भिड़े भी एक्शन में आ गई हैं। सोमवार को उन्होंने तीन घंटे तक मुंबई के फुटपाथ को खुद देखा। भिड़े ने दक्षिण मुंबई के कई इलाकों में निरीक्षण किया। गौरतलब हो कि भिड़े मुंबई में पैदल चलने वालों को सहूलियत देने के लिए फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त बनाने के साथ उन्हें चलने योग्य बनाने के काम में जुटी हैं। उन्होंने एक निरीक्षण 8 अगस्त को भी किया था।</p>
<p> </p>
<p><strong>तीन घंटे तक पैदल चलीं अश्विनी भिड़े</strong><br />अश्विनी भिड़े ने डी वार्ड में आने वाले नाना चौक, ग्रांट रोड रेलवे स्टेशन, नौशीर भरूचा क्रॉस लेन, शंकरशेठ मार्ग (भाजी गली) और तारदेव रोड), ई वार्ड (डॉ. आनंद राव नायर रोड, BYL नायर अस्पताल इलाका, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर रोड, नाथ पाई मार्ग और संत सावता मार्ग) और बी वार्ड (लोकमान्य तिलक मार्ग, सिंदूर ब्रिज, ओल्ड बंगालीपुरा लेन, रघुनाथ महाराज स्ट्रीट और काजी सैयद स्ट्रीट), और C वार्ड (जगन्नाथ शंकरशेठ मार्ग, धोबीतलाव लेन, महर्षि कर्वे रोड, मरीन लाइन्स और चंदनवाड़ी) का निरीक्षण किया।</p>
<p><strong>बीएमसी का 'पेडस्ट्रियन फर्स्ट' अभियान क्या है</strong><br />बृहन्मुंबई नगर निगम ने मुंबई में 'पेडस्ट्रियन फर्स्ट' यानी 'पैदल यात्री पहले' अभियान लांच किया है।<br />बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े के खुद इस अभियान को सुपरवाइज कर रही हैं।</p>
<p>इस अभियान के पहले चरण में मुंबई के 320 किलोमीटर लंबे फुटपाथों से अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का लक्ष्य रखा गया है।<br />स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, बस डिपो और प्रमुख बाजारों के पास के फुटपाथों को प्राथमिकता के आधार पर साफ किया जा रहा है।<br />फुटपाथों पर लगे अवैध स्टॉल, अनधिकृत फेरीवाले, गलत तरीके से पार्क किए गए वाहन, मलबे और कचरे के ढेरों को हटाया जा रहा है।<br />कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने साफ किया है कि जिन फेरीवालों के पास वैध लाइसेंस है, वे व्यापार कर सकते हैं, लेकिन वे फुटपाथ ब्लॉक नहीं कर सकते और उन्हें केवल आवंटित सीमित जगह में ही काम करना होगा।</p>
<p>वॉर्ड स्तर के अधिकारियों को रोजाना निरीक्षण करने और कार्रवाई से पहले व बाद की तस्वीरें जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।<br />अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ फुटपाथों के ऊंचे-नीचे स्तर को ठीक करने, उनकी मरम्मत व सौंदर्यीकरण करने और रुकावट बन रही पेड़ों की टहनियों की वैज्ञानिक तरीके से छंटाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।<br />मुंबई के लगभग 50% लोग अपनी दैनिक यात्रा में पैदल चलते हैं, इसलिए इस ड्राइव को नागरिक सुरक्षा और सड़क हादसों को कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।यदि आप चाहें, तो मुझे बता सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 11:53:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: बीएमसी पर सख्त हाईकोर्ट; पूछा - इंदौर साफ हो सकता है तो मुंबई क्यों नहीं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की सफाई व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब इंदौर लगातार सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है तो मुंबई क्यों नहीं। अदालत ने बीएमसी को सड़कों से तुरंत कचरा हटाने, ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने और वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का सुझाव भी दिया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50774/mumbai-high-court-came-down-hard-on-bmc-and-asked"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/1200-675-27155933-1055-27155933-1784123579205.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की सफाई व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब इंदौर लगातार सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है तो मुंबई क्यों नहीं। अदालत ने बीएमसी को सड़कों से तुरंत कचरा हटाने, ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने और वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का सुझाव भी दिया। </p>
<p> </p>
<p><strong>क्या मुंबई में भी मोशी जैसा हादसा हो सकता है?</strong><br />अदालत ने पुणे जिले के मोशी में हाल ही में हुए कचरा संयंत्र भवन हादसे का भी जिक्र किया और कहा कि मुंबई में ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि मुंबई में भी कचरे के बड़े-बड़े ढेर मौजूद हैं, इसलिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।<br /><strong>किस मामले की सुनवाई के दौरान हुई यह टिप्पणी?</strong><br />न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ उपनगर कांजुरमार्ग स्थित डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में प्रदूषण, लगातार फैल रही दुर्गंध, गैस उत्सर्जन और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है।<br /><strong>मोशी हादसे में क्या हुआ था?</strong><br />अदालत ने 8 जुलाई को पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके में हुए हादसे का भी उल्लेख किया। भारी बारिश के बाद वर्षों से जमा अनुपचारित ठोस कचरे और औद्योगिक अपशिष्ट का विशाल ढेर अचानक खिसक गया और पास की दो मंजिला इमारत पर गिर पड़ा। इस दर्दनाक हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई थी।<br /><strong>हाईकोर्ट ने मुंबई को लेकर क्या चिंता जताई?</strong><br />खंडपीठ ने कहा कि मुंबई में भी कचरे के ऊंचे-ऊंचे ढेर हैं। यहां भी ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए। अदालत ने माना कि समस्या केवल नगर निगम की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी है। इच्छाशक्ति की कमी के कारण शहर की सड़कों पर कचरा फैला रहता है, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं।<br />नागरिकों को लेकर अदालत ने क्या कहा?<br />हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को भी जागरूक बनाने की जरूरत है ताकि वे सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकें और घरों से निकलने वाले कचरे का अलग-अलग वर्गों में पृथक्करण (सेग्रिगेशन) करें। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मुंबई में किसी भी नागरिक को सार्वजनिक सड़क पर कचरा फेंकने की छूट नहीं है। <br />थूकने की आदत पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी क्यों?<br />अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी कड़ी नाराजगी जताई। खंडपीठ ने टिप्पणी की, 'हमारे देश में थूकना मानो राष्ट्रीय शौक बन गया है।' कोर्ट ने कहा कि थूकने पर वर्तमान 200 रुपये का जुर्माना बेहद कम है और इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जाना चाहिए ताकि लोगों में डर पैदा हो और इस आदत पर रोक लग सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 12:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : झीलों पर बड़ा संकट, 10 सालों से साफ नहीं हुआ पानी; अब उठी साइंटिफिक सर्वे की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय अधिक तेज धूप पड़ने से कई नदियों और जलाशयों का पानी सूखने लगता है. ऐसे में शहर के लोगों तक पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए प्रशासन कई तरह के कदम उठाती है. मुंबई में भी गर्मी बढ़ने के साथ प्रशासन ने हर घरों तक पानी पहुंचाने वाली 7 झीलों के पानी के स्तर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग की है. बता दें कि मुंबई एक प्रायद्वीपीय द्वीप शहर ( Peninsular Island City) होने के चलते 3 तरफ से अरब सागर और खाड़ियों से घिरा है. इसके पास साफ पानी का कोई नेचुरल सोर्स नहीं है. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49101/big-crisis-on-mumbai-lakes-water-has-not-been-cleaned"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-10t114750.359.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय अधिक तेज धूप पड़ने से कई नदियों और जलाशयों का पानी सूखने लगता है. ऐसे में शहर के लोगों तक पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए प्रशासन कई तरह के कदम उठाती है. मुंबई में भी गर्मी बढ़ने के साथ प्रशासन ने हर घरों तक पानी पहुंचाने वाली 7 झीलों के पानी के स्तर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग की है. बता दें कि मुंबई एक प्रायद्वीपीय द्वीप शहर ( Peninsular Island City) होने के चलते 3 तरफ से अरब सागर और खाड़ियों से घिरा है. इसके पास साफ पानी का कोई नेचुरल सोर्स नहीं है. </p>
<p> </p>
<p><strong>झीलों में जमी गाद  </strong><br />मुंबई शहर को विहार, तुलसी, भाटसा, मोदक सागर, मध्य वैतरणा, तानसा और ऊपरी वैतरणा इन 7 अलग-अलग झीलों से रोज पानी सप्लाई मिलती है. कांग्रेस पार्षद आयशा वानू ने BMC के नगर निगम में एक याचिका दायर कर कहा कि मुंबई के बॉर्डर में वॉटर सप्लाई करने वाली झीलों में भारी मात्रा में गाद जमा हुआ है, जिसके चलते उनकी स्टोरेज कैपिसिटी घट रही है. इसके चलते गर्मी में पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है. उन्होंने कहा कि इससे BMC की ओर से नागरिकों को पानी की सप्लाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.   </p>
<p><strong>झीलों का साइंटिफिक सर्वे किया जाए</strong><br />आयशा वानू ने अपने नोटिस में कहा,' बढ़ते शहरीकरण, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित गार्बेज डिस्पोजल झीलों में गाद जमा होने के कुछ प्रमुख कारण हैं. इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम का दृढ़ मत है कि मुंबई शहर को पानी सप्लाई करने वाली सभी झीलों का साइंटिफिक सर्वे किया जाए और इन झीलों में जमा गाद को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए. इसके साथ ही इसके लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम भी तैयार किया जाए.'  नोटिस में नगर प्रशासन से इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश करने के लिए भी कहा गया.  </p>
<p><strong>2015 से नहीं हुई सफाई </strong><br />नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2015 से ही इन 7 झीलों से गाद निकालने की प्रक्रिया नहीं हुई है. इस प्रक्रिया में नदियों, झीलों या तालाब के तल में जमी मिट्टी या गाद को निकाला जाता है. इसका मकसद जलभराव को रोकना, फ्लड मैनेजमेंट करना और पानी की गुणवत्ता सुधारना होता है. रिकॉर्ड से यह भी पता चला है कि मुंबई की 7 झीलों में कुल वॉटर स्टोरेज 14.47 लाख लीटर कुल क्षमता के मुकाबले केवल 35 प्रतिशत यानी 5.20 लाख लीटर है. अधिकारियों का कहना है कि तापमान में वृद्धि के चलते इवैपोरेशन की स्पीड तेज हो गई है. पिछले साल मई 2025 के पहले हफ्ते तक जलस्तर 20 प्रतिशत से नीचरे गिर गया था. हालांकि, मानसून जल्दी होने के चलते समय से पहले ही जलाशय भर गए थे. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:48:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : एसी के साथ अब जनरल कोच की भी हर घंटे होगी सफाई, AI से निगरानी; गंदगी मिलने पर वेंडर पर होगा एक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div>रेल मंत्री ने रेलवे रिफॉर्म प्लान 2026 के तहत 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू करने की घोषणा की है। शनिवार को उन्होंने बताया पहले चरण में ट्रेनों की साफ-सफाई को प्राथमिकता दी जाएगी और इसके लिए सभी कोच में व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा। रेलमंत्री के मुताबिक, इस योजना की शुरुआती चरण में हर जोन की 4 से 5 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से लंबी दूरी की करीब 80 ट्रेनों के एसी कोचों के साथ साथ जनरल कोचों में भी सफाई व्यवस्था लागू की जाएगी। इस दौरान टॉयलेट, डस्टबिन और कोच की सफाई के साथ किसी भी तकनीकी या मैकेनिकल समस्या की भी जांच की जाएगी। </div>
<div> </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47731/new-delhi-along-with-ac-now-general-coach-will-also"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/images---2026-02-14t181327.159.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली : </strong>रेल मंत्री ने रेलवे रिफॉर्म प्लान 2026 के तहत 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू करने की घोषणा की है। शनिवार को उन्होंने बताया पहले चरण में ट्रेनों की साफ-सफाई को प्राथमिकता दी जाएगी और इसके लिए सभी कोच में व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा। रेलमंत्री के मुताबिक, इस योजना की शुरुआती चरण में हर जोन की 4 से 5 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से लंबी दूरी की करीब 80 ट्रेनों के एसी कोचों के साथ साथ जनरल कोचों में भी सफाई व्यवस्था लागू की जाएगी। इस दौरान टॉयलेट, डस्टबिन और कोच की सफाई के साथ किसी भी तकनीकी या मैकेनिकल समस्या की भी जांच की जाएगी। </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>पीक आवर में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाएगी। साथ ही सफाई की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल होगा। रेल मंत्री ने बताया कि एआई आधारित तस्वीरें कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। सफाई मानकों में कमी मिलने पर संबंधित वेंडर पर कार्रवाई की जाएगी, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले वेंडरों को ही आगे कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे।</div>
<div> </div>
<div>रेल मंत्री ने कहा कि,इस व्यवस्था के लागू होने से रेलवे पर अतिरिक्त खर्च आएगा, लेकिन यात्रियों के किराए में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। जरूरत के मुताबिक रेलवे अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी करेगा। लंबी दूरी गाड़ियों के सभी कोच में हर घंटे साफ सफाई होगी। इस अभियान के तहत एक इंटीग्रेटेड सिस्टम भी लगाया जाएगा। जिससे कोच की सफाई व्यवस्था को बेहतर तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा। अगर जनरल कोच कनेक्ट नहीं होगा तो स्टाफ उतरकर जनरल कोच की सफाई करेगा। इसके लिए रूट आधारित टीमें तैनात की जाएगी, जो तय रूट पर लगातार काम करेंगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 18:14:42 +0530</pubDate>
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