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                <title>Sadhu - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>मुंबई : बाबुलनाथ मंदिर के एक हिस्से रह रहा ‘साधु’ चार साल में जगह खाली करे : न्यायालय</title>
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                        <![CDATA[<p>उच्चतम न्यायालय ने मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर के एक हिस्से में रह रहे ‘साधु’ को चार साल के भीतर उस जगह को खाली करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने इसी के साथ मुंबई उच्च न्यायालय के बेदखली के आदेश को बरकरार रखा है। उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी स्थान या परिसर को खाली करने के लिए इतनी लंबी अवधि देना दुर्लभ है, लेकिन सांसारिक जीवन का त्याग कर धार्मिक और आध्यात्म के रास्ते पर अग्रसर 75 वर्षीय साधु की उम्र को देखते हुए शीर्ष अदालत ने यह निर्णय लिया। यह विवाद मुंबई के गामदेवी में स्थित सदियों पुराने बाबुलनाथ मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों के एक चबूतरे पर स्थित एक छोटे से क्षेत्र को लेकर है। </p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47775/sadhu-living-in-a-part-of-mumbai-babulnath-temple-court"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-16t132634.670.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>उच्चतम न्यायालय ने मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर के एक हिस्से में रह रहे ‘साधु’ को चार साल के भीतर उस जगह को खाली करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने इसी के साथ मुंबई उच्च न्यायालय के बेदखली के आदेश को बरकरार रखा है। उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी स्थान या परिसर को खाली करने के लिए इतनी लंबी अवधि देना दुर्लभ है, लेकिन सांसारिक जीवन का त्याग कर धार्मिक और आध्यात्म के रास्ते पर अग्रसर 75 वर्षीय साधु की उम्र को देखते हुए शीर्ष अदालत ने यह निर्णय लिया। यह विवाद मुंबई के गामदेवी में स्थित सदियों पुराने बाबुलनाथ मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों के एक चबूतरे पर स्थित एक छोटे से क्षेत्र को लेकर है। </p>
<p> </p>
<p>न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ जगन्नाथ गिरि की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसने कहा कि अदालत के समक्ष ऐसा कुछ भी नहीं लाया गया है जो लघु वाद न्यायालय और अपीलीय पीठ द्वारा तथ्यों और कानून के सुविचारित और सर्वसम्मत निष्कर्ष में हस्तक्षेप को उचित ठहराये और न ही संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में। </p>
<p>इसने पिछले साल छह नवंबर को उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ गिरि द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। <br />अदालत ने यह आदेश इस तथ्य के बावजूद दिया कि मंदिर के उस हिस्से पर लगभग 1968 से लगातार कब्जा है और किराया भी चुकाया जा रहा है, लेकिन उसने इस बात पर भी गौर किया कि याचिकाकर्ता अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर है और धार्मिक एवं आध्यात्मिक जीवन व्यतीत कर रहा है। <br />पीठ ने कहा, ‘‘…हम याचिकाकर्ता को मंदिर के उक्त परिसर का कब्जा प्रतिवादी/वादी मंदिर ट्रस्ट को सौंपने के लिए चार साल की अवधि देने के इच्छुक हैं, ताकि याचिकाकर्ता वैकल्पिक आवास तलाश सके।’’ <br />उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जब तक साधु मंदिर परिसर में रहेंगे, वह शांतिपूर्वक रहेंगे और मंदिर परिसर के विकास में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं करेंगे। <br />इसने यह भी निर्देश दिया गया कि मंदिर अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि याचिकाकर्ता द्वारा उपयोग किए जा रहे स्थान पर किसी तीसरे पक्ष को कब्जा करने की अनुमति न दी जाये और न ही उन्हें किसी प्रकार से परेशान किया जाये। <br />हाल में उच्चतम न्यायालय द्वारा अपलोड किए गए आदेश के अनुसार, गिरि मूल प्रतिवादी बाबा ब्रह्मानंदजी महाराज के कानूनी उत्तराधिकारी और प्रतिनिधि हैं, जिन्हें बाबुलनाथ मंदिर की मुख्य सीढ़ी के तल पर स्थित एक हिस्से का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी, और कहा जाता है कि उनका उक्त स्थान पर कब्जा 1968 से है। <br />यह परिसर 1927 में बाबा रामगिरि महाराज को किराये पर दिया गया था।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 13:27:31 +0530</pubDate>
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                <title>फडणवीस का पालघर साधु हत्याकांड को लेकर बड़ा बयान, जल्द ही षड्यंत्र रचने वालों का होगा पर्दाफाश...</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">पालघर मॉब लिंचिंग मामला 16 अप्रैल, 2020 को महाराष्ट्र के पालघर जिले के गडचिंचले गांव में हुई थी. कुछ लोगों ने दो साधुओं और उनके ड्राइवर पर हमला किया और उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. यह घटना कोरोनोवायरस लॉकडाउन के दौरान इलाके में चोरों के सक्रिय होने की व्हाट्सएप अफवाहों से फैली थी. कुछ लोगों ने इन तीन यात्रियों को चोर समझ लिया और पत्थरों, कुल्हाड़ियों और लाठियों से उनकी हत्या कर दी. बीच-बचाव करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया, जिसके परिणामस्वरूप चार पुलिसकर्मी और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घायल हो गए थे.</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29192/fadnavis--big-statement-regarding-palghar-sadhu-massacre--conspirators-will-soon-be-exposed"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download-(3)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पालघर : </strong>पालघर साधु हत्याकांड को लेकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा, जल्द ही षड्यंत्र रचने वालों का पर्दाफाश होगा. एक सभा के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं के साथ जो बर्बरता हुई इस प्रकार की घटना मैंने पहले कभी नहीं देखी. हम ये सोचते हैं कि मनुष्यो में इतनी बर्बरता आ कैसे सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे तो इसमें जांच की गई, गिरफ्तारियां भी हुई लेकिन हमारी सत्ता आने के बाद हमने इस मामले में हुए षड्यंत्र के पीछे की जांच करने के लिए केस सीबीआई (CBI) को सौंप दिया है. पालघर मॉब लिंचिंग मामला 16 अप्रैल, 2020 को महाराष्ट्र के पालघर जिले के गडचिंचले गांव में हुई थी. कुछ लोगों ने दो साधुओं और उनके ड्राइवर पर हमला किया और उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटना कोरोनोवायरस लॉकडाउन के दौरान इलाके में चोरों के सक्रिय होने की व्हाट्सएप अफवाहों से फैली थी. कुछ लोगों ने इन तीन यात्रियों को चोर समझ लिया और पत्थरों, कुल्हाड़ियों और लाठियों से उनकी हत्या कर दी. बीच-बचाव करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया, जिसके परिणामस्वरूप चार पुलिसकर्मी और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घायल हो गए थे.</p>
<p style="text-align:justify;">यहां बता दें, भारत में व्हाट्सएप पर अफवाहों के कारण हमले और लिंचिंग की घटनाएं देखी गई हैं, जिनमें अक्सर बच्चों का अपहरण या घूमने वाले डाकू शामिल होते हैं. पालघर में अफवाह फैल गई कि रात में इलाके में अंग निकालने वाले गिरोह और अपहरणकर्ताओं की सक्रियता हो सकती है.</p>
<p style="text-align:justify;">इन अफवाहों के आधार पर ग्रामीणों ने एक निगरानी समूह का गठन किया. पीड़ितों में जूना अखाड़े के साधु चिकने महाराज कल्पवृक्षगिरि (70 वर्ष) और सुशीलगिरि महाराज (35 वर्ष) और उनका 30 वर्षीय ड्राइवर नीलेश तेलगड़े शामिल थे. वे सूरत में अपने गुरु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा कर रहे थे. इस दौरान पीड़ितों को गलती से बच्चा चोर और अंग काटने वाले समझ लिया गया.</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 15:41:30 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>पालघर साधु हत्या कांड की जांच CBI को ट्रांसफर करने की दी इजाजत...</title>
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                        <![CDATA[पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले की सीबीआई (CBI) जांच का रास्ता साफ हो गया है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कहते हुए कहा कि उसे इस जांच पर कोई आपत्ति नहीं है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/19401/permission-granted-to-transfer-investigation-of-palghar-sadhu-murder-case"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-03/download-(10)6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पालघर : </strong>साल 2020 में महाराष्ट्र राज्य के पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले की सीबीआई (CBI) जांच का रास्ता साफ हो गया है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कहते हुए कहा कि उसे इस जांच पर कोई आपत्ति नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने 14 अप्रैल को अगली सुनवाई से पहले महाराष्ट्र ( सरकार से इस मामले पर एक हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वह हलफनामा दाखिल करे कि मामले को सीबीआई जांच के लिए भेजा जा रहा है मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सीबीआई से पूछा कि क्या एजेंसी कथित लिंचिंग मामले की जांच के लिए तैयार है, जिस पर जांच एजेंसी ने सकारात्मक जवाब दिया।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 21:12:22 +0530</pubDate>
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