<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.rokthoklekhani.com/tag/13189/battle" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Rokthok Lekhani News  RSS Feed Generator</generator>
                <title>battle - Rokthok Lekhani News </title>
                <link>https://www.rokthoklekhani.com/tag/13189/rss</link>
                <description>battle RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई:शिवसेना के नाम और पहचान पर कानूनी जंग, सुप्रीम कोर्ट करेगा बड़े विवाद का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, शिवसेना की वास्तविक पहचान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत अब उन कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिनका संबंध चुनाव आयोग के उस फैसले से है, जिसमें पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर निर्णय दिया गया था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51166/mumbai-legal-battle-over-shiv-senas-name-and-identity-supreme"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/04_08_2022-shiv_sena_supreme_court_22952438_m.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, शिवसेना की वास्तविक पहचान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत अब उन कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिनका संबंध चुनाव आयोग के उस फैसले से है, जिसमें पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर निर्णय दिया गया था।</p>
<p> </p>
<p><strong>मामला क्या है? </strong><br />शिवसेना में राजनीतिक विभाजन के बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व एकनाथ शिंदे के हाथ में है। दोनों पक्षों ने स्वयं को मूल शिवसेना का प्रतिनिधि बताया। बाद में चुनाव आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और संगठनात्मक व विधायी समर्थन के आधार पर पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर फैसला दिया। इसी निर्णय को उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में किन मुद्दों पर होगी सुनवाई? </strong><br />सुनवाई के दौरान अदालत मुख्य रूप से इन पहलुओं पर विचार कर सकती है— चुनाव आयोग के फैसले की वैधानिकता। राजनीतिक दल की वास्तविक पहचान तय करने का आधार। संगठनात्मक बहुमत और विधायी बहुमत का महत्व। चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़े कानूनी प्रावधान। संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून की व्याख्या। उद्धव गुट की दलील उद्धव ठाकरे गुट का कहना है कि पार्टी की पहचान केवल निर्वाचित विधायकों की संख्या से तय नहीं की जा सकती। उनका तर्क है कि पार्टी का संविधान, संगठनात्मक ढांचा और मूल विचारधारा भी किसी राजनीतिक दल की पहचान तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। याचिकाओं में चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती देते हुए उसे कानूनी कसौटी पर परखने की मांग की गई है। </p>
<p><strong>दूसरे पक्ष का रुख </strong><br />दूसरी ओर, प्रतिपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने उपलब्ध रिकॉर्ड, कानूनी प्रावधानों और संबंधित तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय दिया था। उनका तर्क है कि आयोग ने स्थापित प्रक्रिया का पालन किया और उसका फैसला कानून के अनुरूप है। फैसले का व्यापक असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का प्रभाव केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल में विभाजन की स्थिति में पार्टी की पहचान, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर इस मामले पर पूरे देश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं। अदालत के अंतिम फैसले का असर महाराष्ट्र की राजनीति, दलों की आंतरिक संरचना और चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51166/mumbai-legal-battle-over-shiv-senas-name-and-identity-supreme</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/51166/mumbai-legal-battle-over-shiv-senas-name-and-identity-supreme</guid>
                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:34:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-08/04_08_2022-shiv_sena_supreme_court_22952438_m.jpg"                         length="25378"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: एमपीएससी के पेपर लीक मामले पर सियासी संग्राम, हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ केस दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के कथित पेपर लीक मामले पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विवाद बढ़ गया। औसा विधायक अभिमन्यु पवार की शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया है। विधायक अभिमन्यु पवार का आरोप है कि पेपर लीक मामले से उनका कोई संबंध नहीं होने के बावजूद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन पर संदेह पैदा करने और उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई। इसी शिकायत के आधार पर औसा पुलिस ने हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले से प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51051/case-registered-against-political-leader-harshvardhan-sapkal-on-mumbai-mpsc"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/sapkal-77777_v_jpg--442x260-4g.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:  </strong>महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के कथित पेपर लीक मामले पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विवाद बढ़ गया। औसा विधायक अभिमन्यु पवार की शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया है। विधायक अभिमन्यु पवार का आरोप है कि पेपर लीक मामले से उनका कोई संबंध नहीं होने के बावजूद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन पर संदेह पैदा करने और उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई। इसी शिकायत के आधार पर औसा पुलिस ने हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले से प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।</p>
<p> </p>
<p>कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा था, "क्या एमपीएससी पेपर लीक केस के मास्टरमाइंड देवेंद्र फडणवीस हैं? सूत्रों का कहना है कि एमपीएससी (फूड एंड ड्रग इंस्पेक्टर रिक्रूटमेंट) पेपर लीक के तार अब पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफिस तक पहुंच गए हैं। खास तौर पर, चर्चा है कि इस मामले में शक मुख्यमंत्री के पूर्व पीए और अब भाजपा विधायक अभिमन्यु पवार की ओर जा रहा है।"</p>
<p>हर्षवर्धन सपकाल ने 'एक्स' पर किए पोस्ट में आगे लिखा था, "फडणवीस के मुख्यमंत्री रहने के दौरान, 2017-18 के मेगा रिक्रूटमेंट पोर्टल स्कैम के साथ-साथ तलाठी रिक्रूटमेंट - 2023; एमएचएडीए; पुलिस रिक्रूटमेंट; फॉरेस्ट डिपार्टमेंट रिक्रूटमेंट; सॉइल एंड वॉटर कंजर्वेशन डिपार्टमेंट रिक्रूटमेंट और उनके नेतृत्व में हुए मौजूदा फूड एंड ड्रग इंस्पेक्टर रिक्रूटमेंट स्कैम केस की निष्पक्ष जांच की तुरंत जरूरत है। कांग्रेस पार्टी तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक राज्य में लाखों छात्रों और उनके परिवारों के सपनों को राख में मिलाने वालों और उनके भविष्य के साथ क्रूर खेल खेलने वालों का पर्दाफाश नहीं हो जाता।"</p>
<p>सोशल मीडिया पर एक और पोस्ट में हर्षवर्धन सपकाल ने लिखा था, "भाजपा सरकार ने शिक्षा क्षेत्र का व्यवसायीकरण किया, औद्योगिक क्षेत्र को बर्बाद किया और युवाओं के सपनों को राख में मिला दिया। उन्होंने लिखा था, "भाजपा सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक का ग्रहण लग गया है। नीट, टीईटी और अब एमपीएससी, जो सरकार बार-बार छात्रों की मेहनत पर पानी फेरती है, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।" हर्षवर्धन सपकाल ने 'एक्स' पर एक और पोस्ट में लिखा था, "पेपर लीक, भर्ती घोटाले, ग्रेडिंग में गड़बड़ी और सबूत सामने आने के बाद भी सरकार चुप है। यह चुप्पी शक को और भी गहरा करती है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51051/case-registered-against-political-leader-harshvardhan-sapkal-on-mumbai-mpsc</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/51051/case-registered-against-political-leader-harshvardhan-sapkal-on-mumbai-mpsc</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:14:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-07/sapkal-77777_v_jpg--442x260-4g.webp"                         length="23110"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: एल एंड टी से छिना मुंबई के पाली हिल्स का आलीशान हाई ट्रीज बंगला, सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की 25 साल पुरानी लड़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने एलएंडटी की एक स्पेशल लीव पिटीशन खारिज कर दी है। इसके साथ ही बांद्रा के पाली हिल रोड पर एक प्राइम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है। इस प्रॉपर्टी में कंपनी के पूर्व चेयरमैन और मौजूदा चेयरमैन एमेरिटस एएम नाइक पिछले 20 साल से ज़्यादा समय से रह रहे हैं। कंपनी ने दावा किया था कि वह इस प्रॉपर्टी की करीब 30% मालिक है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49595/mumbais-luxurious-high-trees-bungalow-in-pali-hills-snatched-from"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-30t113154.763.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>सुप्रीम कोर्ट ने एलएंडटी की एक स्पेशल लीव पिटीशन खारिज कर दी है। इसके साथ ही बांद्रा के पाली हिल रोड पर एक प्राइम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है। इस प्रॉपर्टी में कंपनी के पूर्व चेयरमैन और मौजूदा चेयरमैन एमेरिटस एएम नाइक पिछले 20 साल से ज़्यादा समय से रह रहे हैं। कंपनी ने दावा किया था कि वह इस प्रॉपर्टी की करीब 30% मालिक है। अब उसे 'हाई ट्रीज़' नाम का बंगला खाली करके उसका शांतिपूर्ण कब्ज़ा सौंपना होगा।  यह बंगला पाली हिल के पॉश रेजिडेंशियल इलाके में बची हुई कुछ हेरिटेज प्रॉपर्टीज़ में से एक है। इस पिटीशन के खारिज होने से बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले दिए गए बेदखली के आदेश की पुष्टि हो गई है।</p>
<p> </p>
<p><strong>1970 में खत्म हो गया था प्रॉपर्टी का पट्टा</strong><br />यह विवाद 1961 में शुरू हुई एक किरायेदारी से जुड़ा है। इस प्रॉपर्टी का औपचारिक पट्टा 1970 में खत्म हो गया था। मकान मालिकों के ग्रुप में केसी कोठारी परिवार के सदस्य और अन्य सह-मालिक शामिल थे। किरायेदारी खत्म होने के बाद, उन्होंने 2001 में बांद्रा की स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट में बेदखली की कार्यवाही शुरू की थी। <br />प्रॉपर्टी का 7 पर्सेंट एल एंड टी ने खरीदा था<br />बांद्रा के पाली हिल रोड पर एक प्राइम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद को खत्म करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एल एंड टी द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन को खारिज कर दिया। मुकदमे के दौरान 2001 में एलएंडटी ने प्रॉपर्टी में 7% अविभाजित हिस्सा अमर मुनोट (जो अब दिवंगत हैं) से खरीदा था। अमर मुनोट प्रॉपर्टी के सह-मालिकों में से एक थे।<br />बाद में, कंपनी की हिस्सेदारी बढ़कर 29.5% हो गई। इसी आधार पर, 2017 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ('मंगल बिल्डर्स') का हवाला देते हुए, कंपनी ने तर्क दिया कि वह अब प्रॉपर्टी की सह-मालिक बन गई है और इसलिए उसके खिलाफ बेदखली की कार्यवाही जारी नहीं रह सकती। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि एलएंडटी सहित सभी सह-मालिकों के बीच प्रॉपर्टी के बंटवारे  का एक मुकदमा अभी भी लंबित है। </p>
<p><strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा</strong><br />27 मार्च, 2026 को दिए अपने फैसले में, बॉम्बे हाई कोर्ट के जज एम.एम. सथाये ने इस तर्क को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बेदखली का मुकदमा चलने के दौरान, एक सह-मालिक द्वारा एल एंड टी को 7% हिस्सा बेचने पर की गई आपत्तियां किसी अन्य मकसद से प्रेरित लगती हैं और इसलिए वे मुकदमे की वैधता पर कोई बुरा असर नहीं डाल सकतीं।</p>
<p>हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 2010 में स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट की अपीलीय बेंच द्वारा एल एंड टी को बेदखल करने का जो आदेश दिया गया था, उसमें कोई गलती नहीं है। इसमें यह माना गया कि किसी एक सह-मालिक का विरोध, खास तौर पर तब, जब उसका मकसद किसी किरायेदार को फ़ायदा पहुंचाना हो, बाकी सह-मालिकों के बेदखली के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकता।</p>
<p>हाई कोर्ट ने कहा कि उसके सामने सवाल यह था कि क्या कोई सह-मालिक किसी किरायेदार को बेदखल करने के लिए मुक़दमा दायर कर सकता है, अगर कोई दूसरा सह-मालिक इस पर आपत्ति जताता है, और वह आपत्ति इसलिए है क्योंकि प्रॉपर्टी के शेयर किरायेदार के पक्ष में बेच दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49595/mumbais-luxurious-high-trees-bungalow-in-pali-hills-snatched-from</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/49595/mumbais-luxurious-high-trees-bungalow-in-pali-hills-snatched-from</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:27:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-04/download---2026-04-30t113154.763.jpg"                         length="12860"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : रेड सिग्नल तोड़ा और कुचल दिया... 8 साल चली कानूनी जंग, अब हिट-एंड-रन के मुजरिम भरेंगे 1 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सड़क पर एक पल की लापरवाही किसी की पूरी जिंदगी छीन सकती है. मुंबई में 2018 का एक ऐसा ही हिट-एंड-रन मामला अब 8 साल बाद अपने अंजाम तक पहुंचा है, जहां एक डेंटल इंटर्न की मौत ने न्याय व्यवस्था की लंबी प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने के सवाल को फिर से सामने ला दिया है. रेड सिग्नल तोड़कर तेज रफ्तार में आई कार ने न सिर्फ एक 25 साल की युवती के सपनों को खत्म किया, बल्कि उसके परिवार को भी गहरे सदमे</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48789/mumbai-red-signal-broken-and-crushed-legal-battle-lasted-for"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images-(4)sdfs.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>सड़क पर एक पल की लापरवाही किसी की पूरी जिंदगी छीन सकती है. मुंबई में 2018 का एक ऐसा ही हिट-एंड-रन मामला अब 8 साल बाद अपने अंजाम तक पहुंचा है, जहां एक डेंटल इंटर्न की मौत ने न्याय व्यवस्था की लंबी प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने के सवाल को फिर से सामने ला दिया है. रेड सिग्नल तोड़कर तेज रफ्तार में आई कार ने न सिर्फ एक 25 साल की युवती के सपनों को खत्म किया, बल्कि उसके परिवार को भी गहरे सदमे में डाल दिया. अब कोर्ट का फैसला इस बात का संकेत है कि कानून देर से सही लेकिन जवाबदेही तय करता है और लापरवाही की कीमत चुकानी ही पड़ती है.</p>
<p> </p>
<p>यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार ड्राइविंग की गंभीर चेतावनी भी है. अकसर हादसों में पीड़ित पर ही सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन इस केस में ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया कि गलती पूरी तरह ड्राइवर की थी.   रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल फोन का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश भी कोर्ट में टिक नहीं पाई. 8 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्याय का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है.<br />मुंबई के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी ड्राइवर, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को मिलकर करीब 98.5 लाख रुपए (ब्याज सहित लगभग 1 करोड़ रुपए) का मुआवजा देने का आदेश दिया है.</p>
<p>डिपाली लहामटे जो नायर हॉस्पिटल डेंटल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रही थीं, 24 मार्च 2018 को अपने भाई के कॉन्वोकेशन में जा रही थीं, तभी एक तेज रफ्तार होंडा सिटी कार ने उन्हें टक्कर मार दी. इस हादसे में उन्हें गंभीर सिर की चोट आई और छह दिन बाद उनकी मौत हो गई. यह घटना हिट-एंड-रन के रूप में सामने आई थी, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया था.</p>
<p>मामले की सुनवाई के दौरान ड्राइवर और बीमा कंपनी ने यह दलील दी कि पीड़िता मोबाइल फोन में व्यस्त थी और अचानक सड़क पर आ गई. लेकिन ट्रिब्यूनल ने गवाह के बयान को आधार मानते हुए इस दलील को खारिज कर दिया. गवाह ने बताया कि कार ने रेड सिग्नल पार किया और तेज रफ्तार में आकर युवती को टक्कर मारी. कोर्ट ने साफ कहा कि यह पूरी तरह ड्राइवर की लापरवाही थी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48789/mumbai-red-signal-broken-and-crushed-legal-battle-lasted-for</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/48789/mumbai-red-signal-broken-and-crushed-legal-battle-lasted-for</guid>
                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:32:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-03/images-%284%29sdfs.jpg"                         length="8156"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        