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                <title>Scientists - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Scientists RSS Feed</description>
                
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                <title>नई दिल्ली : आईआईटी खड़गपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने एआई का इस्तेमाल करके 'रेल ट्रैक इंस्पेक्शन रोबोट' तैयार किया</title>
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                        <![CDATA[<p>रेल पटरियों में किसी भी तरह की गड़बड़ी का अब रोबोट के माध्यम से आसानी से पता लगाया जा सकेगा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) खड़गपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके 'रेल ट्रैक इंस्पेक्शन रोबोट' तैयार किया है। साल 2018 से इस रोबोट के संबंध में अनुसंधान किया जा रहा था।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38832/scientists-of-mechanical-engineering-department-of-new-delhi-iit-kharagpur"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/images---2025-03-11t193433.465.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>रेल पटरियों में किसी भी तरह की गड़बड़ी का अब रोबोट के माध्यम से आसानी से पता लगाया जा सकेगा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) खड़गपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके 'रेल ट्रैक इंस्पेक्शन रोबोट' तैयार किया है। साल 2018 से इस रोबोट के संबंध में अनुसंधान किया जा रहा था। मालूम हो कि वर्तमान में रेलकर्मी पटरियों की जांच करते हैं। साधारण अथवा यांत्रिक ट्राली से जांच की जाती है। पटरी में कहां दरारें पड़ी हैं, कहां 'फिशप्लेट' नहीं हैं और कहां 'क्लिप' खुल गई हैं। इसका निरीक्षण किया जाता है। </p>
<p>कई बार इसमें खामियां रह जाती हैं, जो दुर्घटनाओं को न्योता देती हैं। इस रोबोट को तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले आईआईटी खड़गपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर दिलीप कुमार प्रतिहार ने बताया कि पूरे देश में इस समय जिस पद्धति से रेल पटरियों की जांच की जाती है, वह स्वचालित नहीं है। जीपीएस से लैस हमारा रोबोट एआई के बल पर आसानी से यह पता लगाने में सक्षम होगा कि पटरी में कहां क्या समस्या है?</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश में ट्रेन हादसे जिस तरह से बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए पटरियों की त्रुटिहीन जांच बहुत जरुरी है। हमारा रोबोट दिखने में छोटी गाड़ी जैसा है। इसमें एक कैमरा लगा है, जो स्वचालित तरीके से पटरियों की तस्वीरें खींचेगा।</p>
<p><strong>25 हजार में तैयार किया गया रोबोट</strong><br />रोबोट में लगा प्रोसेसिंग यूनिट फोटो का बारीकी से विश्लेषण करके गड़बड़ी का पता करेगा। जांच के दौरान जहां भी गड़बड़ी दिखेगी, वाहन रूपी रोबोट वहां रुक जाएगा। इस रोबोट को तैयार करने में 25 हजार रुपये की लागत आई है। दक्षिण पूर्व रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि रोबोट के बारे में जानकारी मिली है। इसका निरीक्षण करने के बाद रेल बोर्ड को इसके बारे में सूचित किया जाएगा।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Mar 2025 19:35:21 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>हांगकांग के एक छोटे से तालाब में मौजूद है 24 आखों वाली ये भयानक मछली, वैज्ञान‍िक भी देखकर हैं हैरान</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जेलिफ़िश का पता लगाने के ल‍िए हाल ही में अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जर्नल जूलॉजिकल स्टडीज में नई प्रजातियों का वर्णन करने वाले एक पेपर में प्रकाशित किया गया था। शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने जेलीफ़िश के सैंपल जमा क‍िए, जिसमें 2020 से 2022 के गर्मियों के दौरान 'माई पो' नेचर रिजर्व में एक खारे झींगा तालाब से नई प्रजाति शामिल थी, जिसे स्थानीय रूप से "गीई वाई" कहा जाता है। हांगकांग बैप्टिस्ट यूनिवर्सिटी (एचकेबीयू) में जीव विज्ञान विभाग के एक प्रोफेसर किउ जियानवेन ने कहा, "हमने नई प्रजाति का नाम ट्रिपेडालिया माईपोएंसिस रखा है, ताकि इसके प्रकार के इलाके को प्रतिबिंबित किया जा सके, जहां नई प्रजाति पहली बार पाई गई थी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/20273/this-terrible-fish-with-24-eyes-is-present-in-a-small-pond-in-hong-kong--scientists-are-also-surprised-to-see"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-04/download-(18)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हांगकांग बैप्टिस्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने जेलीफि‍श प्रजाति की एक ऐसी मछली की खोज की है, जो न स‍िर्फ देखने में अनोखी बल्‍क‍ि बेहद खतरनाक भी है। इस मछली ने वैज्ञान‍िकों को भी हैरत में डाल द‍िया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मछली एक बेहद जहरीले जेलीफिश की नई प्रजाति का सदस्य है। जेलीफि‍श की यह प्रजाति हांगकांग के माई पो रिजर्व के एक छोटे से तालाब में म‍िली है। इसका आकार बेहद अनोखा है। मछली का शरीर एक इंच से भी कम लंबा और पारदर्शी है। शोधकर्ताओं के मुताब‍िक, इसकी तीन टांग हैं, जो फैलाने पर 10 सेमी तक बढ़ सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे खास और अहम बात ये है क‍ि इसकी 24 आंख हैं, जो चार-चार के छह ग्रुप में बंटी हैं। शोधकर्ताओं के मुताब‍िक, इसके लंबे और पतले पैरों में जहर होता है। ये जहर इतना खतरनाक होता है क‍ि कुछ ही म‍िनटों में इंसान को कार्ड‍ियक अरेस्‍ट या लकवा पड़ सकता है। यहां तक की मौत का कारण भी बन सकता है। इस जेलीफिश की करीबी प्रजाति ऑस्ट्रेलियाई बॉक्स जेलीफिश है, जो दुनिया के सबसे विषैले समुद्री जानवरों में से एक हैं। इसकी आंखें संवेदी अंग में छिपी होती है, जिन्हें रोपालियम कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जेलिफ़िश का पता लगाने के ल‍िए हाल ही में अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जर्नल जूलॉजिकल स्टडीज में नई प्रजातियों का वर्णन करने वाले एक पेपर में प्रकाशित किया गया था। शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने जेलीफ़िश के सैंपल जमा क‍िए, जिसमें 2020 से 2022 के गर्मियों के दौरान 'माई पो' नेचर रिजर्व में एक खारे झींगा तालाब से नई प्रजाति शामिल थी, जिसे स्थानीय रूप से "गीई वाई" कहा जाता है। हांगकांग बैप्टिस्ट यूनिवर्सिटी (एचकेबीयू) में जीव विज्ञान विभाग के एक प्रोफेसर किउ जियानवेन ने कहा, "हमने नई प्रजाति का नाम ट्रिपेडालिया माईपोएंसिस रखा है, ताकि इसके प्रकार के इलाके को प्रतिबिंबित किया जा सके, जहां नई प्रजाति पहली बार पाई गई थी।" शोधकर्ताओं की टीम ने यून‍िवर्स‍िटी ऑफ मैनचेस्‍टर, ओशि‍यन पार्क हांगकांग और डब्‍लूडब्‍लूएफ-हांगकांग के साथ म‍िलकर इसपर और शोध करना शुरू कर द‍िया है।</p>]]>
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                <pubDate>Wed, 26 Apr 2023 17:02:02 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>चीन के बायोलैब में क्या बन रहे महाविनाशक वायरस...  वैज्ञानिकों की चेतावनी ने सबको डराया, कोरोना से भी बड़ा खतरा</title>
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                        <![CDATA[चीन के वुहान में कोविड -19 का पता चले हुए तीन साल से ज्यादा हो चुके है. इसके बाद भी ये रहस्य कायम है कि आखिर ये पहली बार आया कहां से. वहीं इसको लेकर हाल ही में दावा किया गया कि कोरोना महामारी एक चीनी लैब से लीक हुई है. इस दौरान FBI के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने कहा कि कोविड-19  एक चीनी सरकार के अधीन लैब से लीक हुआ है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/19348/what-devastating-virus-is-being-made-in-china-s-biolab-----scientists--warning-scared-everyone--a-bigger-danger-than-corona"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-03/download-(7)11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चीन : </strong>चीनी शहर वुहान में कोविड -19 का पता चले हुए तीन साल से ज्यादा हो चुके है. इसके बाद भी ये रहस्य कायम है कि आखिर ये पहली बार आया कहां से. वहीं इसको लेकर हाल ही में दावा किया गया कि कोरोना महामारी एक चीनी लैब से लीक हुई है. इस दौरान FBI के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने कहा कि कोविड-19  एक चीनी सरकार के अधीन लैब से लीक हुआ है. हालांकि,  FBI के इस बात की पहली बार सार्वजनिक पुष्टि है कि महामारी वायरस कैसे फैला है. इसके बाद चीन ने अमेरिका पर राजनीतिक हेरफेर आरोप लगाया. वैज्ञानिकों को शक है कि कोरोना के वायरस मध्य चीन में स्थित शहर वुहान के एक लैब से फैला है.</p>
<p style="text-align:justify;">ये वही जगह है,जहां से पहली बार वायरस के फैलने का मामला दर्ज किया गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एक दशक से अधिक समय से चमगादड़ों में कोरोनावायरस का अध्ययन कर रहा है. ये संस्थान हुआनन वेट मार्केट से 40 मिनट की ड्राइव दूर है, जहां संक्रमण का पहला समूह उभरा था. इस तरह से ये शक को यकीन में बदलने के लिए काफी है कि, चीन के लैब से ही कोरोना वायरस लीक हुआ था, जो सरकार के देखरेख में काम करता था.<br /><br />एक रिपोर्निर्याट के मुताबिक लगभग 27 ऐसे देश हैं, जिसमें खतरनाक वायरस को केमिकल परीक्षण की मदद से लैब के अंदर तैयार किया जाता है. इसी पर डॉ फिलिपा, डॉ ग्रेगरी के रिपोर्ट में खतरनाक वायरस वाले लैब को लेकर चेतावनी दी है. रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में कुल 69 लैब हैं. इसमें से 51 लैब चल रही है,जबकि 15 में शुरू करने की तैयारी है. इस तरह के लैब को BSL-4 कहते हैं. इन लैबों में खतरनाक तरीके के वायरस को बना कर सुरक्षित रखा जाता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में सबसे ज्यादा लैब यूरोप में मौजूद हैं. यहां लगभग 26 लैब हैं. एशिया में 20 लैब हैं. अमेरिका में 15 अफ्रीका में तीन ऑस्ट्रेलिया में 4 और साउथ अमेरिका में 1 लैब हैं. वहीं एशिया में लगभग 11 लैब को बनाने की योजना चीन,भारत कजाकिस्तान, ताइवान, फिलीपींस, सऊदी अरब, सिंगापुर और जापान में है.</p>]]>
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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 16:26:02 +0530</pubDate>
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