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                <title>sector - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>sector RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महाराष्ट्र : नासिक में म्हाडा कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र की रफ्तार धीमी...  प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए इंतजार कर रहे बिल्डर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नासिक में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ आवास, व्यावसायिक स्थान और नए आवासीय प्रोजेक्ट की मांग भी बढ़ी है। इसके चलते मनपा के नगररचना विभाग के पास लगातार नए प्रस्ताव आते रहे हैं। लेकिन म्हाडा प्रकरण में कथित फर्जी दस्तावेज, भूखंड विभाजन और 20 प्रतिशत समावेशी आवास योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51918/maharashtra-after-mhada-action-in-nashik-construction-sector-slows-down"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/8998.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नासिक : </strong>म्हाडा आवास प्रकरण में हुई कार्रवाई के बाद नासिक के निर्माण व्यवसायियों में अब भी आशंका का माहौल बना हुआ है। इसका असर शहर के पूरे निर्माण क्षेत्र पर पड़ता दिखाई दे रहा है। इस प्रकरण के बाद निर्माण व्यवसायियों द्वारा नए प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए मनपा के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रमाण तेजी से घटा है। नई परियोजनाओं में निवेश को लेकर भी व्यवसायियों ने सावधानी बरतना शुरू कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई शुरू होने के बाद अब तक मंजूरी के लिए दाखिल हुए नए प्रोजेक्ट की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक ही होने की जानकारी सामने आ रही है। परिणामस्वरूप निर्माण क्षेत्र में करोड़ों रुपये की आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने के साथ ही मनपा के राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका है।<br /><br />नासिक में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ आवास, व्यावसायिक स्थान और नए आवासीय प्रोजेक्ट की मांग भी बढ़ी है। इसके चलते मनपा के नगररचना विभाग के पास लगातार नए प्रस्ताव आते रहे हैं। लेकिन म्हाडा प्रकरण में कथित फर्जी दस्तावेज, भूखंड विभाजन और 20 प्रतिशत समावेशी आवास योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना है।<br /><br />नए प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने से लेकर वास्तुरचना, विभिन्न मंजूरियां, विकास शुल्क, टीडीआर-एफएसआई, निर्माण लागत औ०र वित्तीय व्यवस्था तक बड़ी राशि निवेश करनी पड़ती है। ऐसे में आज मंजूर किया गया प्रोजेक्ट कल किसी जांच के दायरे में आएगा या नहीं, दस्तावेजों की दोबारा जांच होगी या नहीं और प्रशासनिक नियमों में फिर कोई बदलाव होगा या नहीं, ऐसे सवाल निर्माण व्यवसायियों के सामने खड़े हैं।<br />म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई का दायरा बढ़ने से यह आशंका और गहरी हुई है। मनपा के नगररचना विभाग ने 49 मामलों से संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद लेआउट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद भी इस प्रकरण में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।<br /><br />निर्माण क्षेत्र में मंदी का असर केवल बिल्डर या विकासक तक सीमित नहीं रहेगा। नए प्रोजेक्ट कम होने पर मनपा को मिलने वाला विकास शुल्क, निर्माण अनुमति शुल्क, प्रीमियम, टीडीआर-एफएसआई से संबंधित शुल्क तथा अन्य राजस्व भी घट सकता है। एक ओर शहर के विकास कार्यों के लिए अधिक निधि की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत निर्माण क्षेत्र की गति धीमी होने की स्थिति बन गई है। इसका असर वास्तुविशारद, इंजीनियर, ठेकेदार, निर्माण श्रमिक, स्टील-सिमेंट विक्रेता, हार्डवेयर व्यवसायी, रियल एस्टेट एजेंट तथा निर्माण क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों पर भी पड़ सकता है।<br /><br />आर्किटेक्ट विजय सानप ने कहा कि पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा नासिक म्हाडा से संबंधित नियमों में किए गए बदलावों के कारण भी निर्माण व्यवसायियों में असमंजस की स्थिति है। नए नियमों को लागू करने की प्रक्रिया और उस पर प्राप्त सुझाव एवं आपत्तियों के निपटारे तक कुछ प्रोजेक्ट की मंजूरी प्रक्रिया प्रभावित होने की बात निर्माण क्षेत्र से जुड़े सूत्रों द्वारा कही जा रही है। इसके साथ ही टीडीआर के नियमों में 50:50 की नई व्यवस्था आने से छोटे प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। छोटे प्रोजेक्ट कम होने पर इसका असर निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ महापालिका को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ सकता है।<br />नगररचना के उपसंचालक रितेश चव्हाण का कहना है कि म्हाडा प्रकरण के बाद मनपा के पास बड़े प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए बहुत कम आए थे। हालांकि, अब धीरे-धीरे नए प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए आने लगे हैं और इनकी संख्या भी बढ़ रही है। कुछ समय के लिए अंतर जरूर पड़ा था, लेकिन अब नियमित रूप से काम शुरू है।<br /><br />म्हाडा प्रकरण में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। लेकिन इसका असर पूरे निर्माण क्षेत्र पर न पड़े, इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की भी है। नासिक मनपा को नियमों और मंजूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाने के साथ ही निर्माण व्यवसायियों की शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रभावी संवाद शुरू करना चाहिए। नासिक का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में नए आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट पर लंबे समय तक ब्रेक लगना चिंता की बात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:00:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> मुंबई : कंस्ट्रक्शन सेक्टर को राहत, खुदाई रॉयल्टी माफ और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन ऑनलाइन ₹ 83.7 6 </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए, महाराष्ट्र के रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने खुदाई की रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को डिजिटाइज़ करने जैसे बड़े सुधारों का ऐलान किया है। ये फैसले मंत्रालय में क्रेडाई के रिप्रेजेंटेटिव के साथ हुई मीटिंग में लिए गए। नई पॉलिसी के अनुसार, अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान खोदे गए माइनर मिनरल्स को उसी प्रोजेक्ट साइट पर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो डेवलपर्स से कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। इस कदम से प्रोजेक्ट की कुल लागत में कमी आने की उम्मीद है और डेवलपर्स पर फाइनेंशियल दबाव कम होगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49087/relief-to-mumbai-construction-sector-excavation-royalty-waiver-and-non-agricultural"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-09t175612.026.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए, महाराष्ट्र के रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने खुदाई की रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को डिजिटाइज़ करने जैसे बड़े सुधारों का ऐलान किया है। ये फैसले मंत्रालय में क्रेडाई के रिप्रेजेंटेटिव के साथ हुई मीटिंग में लिए गए। नई पॉलिसी के अनुसार, अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान खोदे गए माइनर मिनरल्स को उसी प्रोजेक्ट साइट पर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो डेवलपर्स से कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। इस कदम से प्रोजेक्ट की कुल लागत में कमी आने की उम्मीद है और डेवलपर्स पर फाइनेंशियल दबाव कम होगा। रॉयल्टी पेमेंट सिस्टम को भी आसान बनाया जाएगा और यह छह महीने के लिए लागू रहेगा। </p>
<p> </p>
<p>इसके अलावा, राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि अगले 10 दिनों के अंदर पूरी नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इससे डेवलपर्स को डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के पास जाने की जरूरत खत्म हो जाएगी और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण होने वाली देरी में भी कमी आएगी। मीटिंग में पूरे राज्य में डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के ‘पुणे पैटर्न’ को अपनाने पर भी चर्चा हुई। इस मॉडल ने ट्रांसपेरेंसी और प्रोजेक्ट प्रोसेसिंग की गति बढ़ाने में असरदार साबित किया है। नए सिस्टम में, डॉक्यूमेंट्स के रजिस्ट्रेशन के बाद प्रॉपर्टी कार्ड को तुरंत अपडेट करने की सुविधा भी शामिल होगी। मंत्री ने प्रिंसिपली इस मांग को मान लिया।</p>
<p>क्रेडाई के प्रतिनिधियों ने इस सुधार को कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए अहम और सकारात्मक कदम बताया। उनके अनुसार, रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल  परमिशन ऑनलाइन करने से नए प्रोजेक्ट्स को तेजी से शुरू करने में मदद मिलेगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। मंत्री बावनकुले ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में प्रक्रियाओं को सरल, तेज़ और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि ऑनलाइन सिस्टम के जरिए हर प्रोजेक्ट की ट्रैकिंग संभव होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता को तुरंत पकड़ने में मदद मिलेगी।</p>
<p>विशेष रूप से यह सुधार माइनर मिनरल्स के उपयोग को अधिक प्रभावी और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाएगा। पहले खोदे गए मिनरल्स के लिए रॉयल्टी देना डेवलपर्स के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बन जाता था, जिसे अब खत्म किया गया है। इसके अलावा, नॉन-एग्रीकल्चरल  परमिशन ऑनलाइन करने से प्रोजेक्ट की योजना बनाने और मंजूरी लेने की प्रक्रिया भी तेज़ और आसान होगी। इस पहल से महाराष्ट्र में कंस्ट्रक्शन सेक्टर को तत्काल और दीर्घकालीन लाभ मिलने की उम्मीद है। अधिकारीयों का कहना है कि ऑनलाइन प्रोसेसिंग और डिजिटल ट्रैकिंग से भ्रष्टाचार कम होगा और निवेशकों और डेवलपर्स के लिए एक भरोसेमंद माहौल तैयार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49087/relief-to-mumbai-construction-sector-excavation-royalty-waiver-and-non-agricultural</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:57:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कोऑपरेटिव सेक्टर में बड़ा बदलाव, नई नीति जल्द</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य के सहकारिता क्षेत्र को सक्रिय, पारदर्शी व सशक्त बनाने के लिए जल्द ही एक नई कोऑपरेटिव पॉलिसी लागू की जाएगी। यह घोषणा मंगलवार को विधान परिषद में बाबासाहेब पाटिल ने की। भाजपा के प्रवीण दरेकर व अन्य सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मंत्री पाटिल ने कहा कि इस नई पॉलिसी के लिए 15 सदस्यों की कमेटी बनाई गई है और इसमें एक्सपर्ट्स, एक्टिविस्ट्स और राज्य के अलग-अलग हिस्सों की युवा पीढ़ी के सुझावों को शामिल किया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48703/big-change-in-mumbai-cooperative-sector-new-policy-soon"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-25t115403.138.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>राज्य के सहकारिता क्षेत्र को सक्रिय, पारदर्शी व सशक्त बनाने के लिए जल्द ही एक नई कोऑपरेटिव पॉलिसी लागू की जाएगी। यह घोषणा मंगलवार को विधान परिषद में बाबासाहेब पाटिल ने की। भाजपा के प्रवीण दरेकर व अन्य सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मंत्री पाटिल ने कहा कि इस नई पॉलिसी के लिए 15 सदस्यों की कमेटी बनाई गई है और इसमें एक्सपर्ट्स, एक्टिविस्ट्स और राज्य के अलग-अलग हिस्सों की युवा पीढ़ी के सुझावों को शामिल किया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p>इस पॉलिसी में पारदर्शिता, कार्यक्षमता और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य में अभी 2.33 लाख कोऑपरेटिव सोसाइटी चल रही हैं। इसमें 1.21 लाख हाउसिंग सोसाइटी, 21,284 एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी और 422 अर्बन कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं। कोऑपरेटिव बैंकों में डिपॉजिट 3.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया है और इस सेक्टर से करीब 4.30 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं।</p>
<p>इस बीच दरेकर ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों की समस्याओं पर चिंता जताते हुए अर्जेंट मीटिंग बुलाने की मांग की। इस पर मंत्री पाटिल ने मुश्किल में फंसे बैंकों को आर्थिक मदद देने और फैसले लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने का भरोसा दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:54:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कल्याण-ठाणे-परेल सेक्टर पर 7वीं और 8वीं रेल लाइन बिछाने के लिए चल रही है स्टडी </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>10.8 किलोमीटर लंबा ठाणे-कल्याण रेलवे के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। इस स्ट्रेच से हर दिन लगभग 1,000 ट्रेनें गुजरती हैं, जबकि ठाणे, दिवा और कल्याण जैसे स्टेशन भी बड़ी संख्या में रोज़ाना सफ़र करने वाले यात्रियों के लिए इंटरचेंज पॉइंट का काम करते हैं। सेंट्रल रेलवे के अधिकारी अब ट्रेन संचालन को सुचारू बनाने और यात्रियों की परेशानियों को कम करने के लिए एक योजना पर काम कर रहे हैं - कल्याण-ठाणे-परेल सेक्टर पर 7वीं और 8वीं रेल लाइन बिछाने के लिए स्टडी चल रही है, जिसमें डोंबिवली में अंडरग्राउंड जाने की संभावना भी शामिल है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46242/study-is-going-on-to-lay-7th-and-8th-railway"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-16t153054.874.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>10.8 किलोमीटर लंबा ठाणे-कल्याण रेलवे के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। इस स्ट्रेच से हर दिन लगभग 1,000 ट्रेनें गुजरती हैं, जबकि ठाणे, दिवा और कल्याण जैसे स्टेशन भी बड़ी संख्या में रोज़ाना सफ़र करने वाले यात्रियों के लिए इंटरचेंज पॉइंट का काम करते हैं। सेंट्रल रेलवे के अधिकारी अब ट्रेन संचालन को सुचारू बनाने और यात्रियों की परेशानियों को कम करने के लिए एक योजना पर काम कर रहे हैं - कल्याण-ठाणे-परेल सेक्टर पर 7वीं और 8वीं रेल लाइन बिछाने के लिए स्टडी चल रही है, जिसमें डोंबिवली में अंडरग्राउंड जाने की संभावना भी शामिल है।फिलहाल, दिवा CR सबअर्बन नेटवर्क के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक है, जहाँ रोज़ाना चलने वाली 894 लोकल ट्रेनों में से लगभग 70% से 75% रुकती हैं। CR अधिकारियों ने फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) के लिए एक थर्ड-पार्टी एजेंसी को नियुक्त किया है। यह एक विस्तृत सर्वे है जो ट्रैक की सटीक लोकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कामों के लिए विस्तृत प्लान और ड्राइंग स्थापित करके नई लाइन के लिए फाइनल अलाइनमेंट तय करता है।</p>
<p> </p>
<p>एक वरिष्ठ CR अधिकारी ने कहा, "FLS स्टडी शुरू हुए कुछ हफ़्ते हो गए हैं।" "हम पहले चरण में हैं, कल्याण-ठाणे कॉरिडोर पर आने वाली नई रेल लाइनों को देख रहे हैं जो बहुत ज़्यादा भीड़भाड़ वाला है।"ठाणे, दिवा और कल्याण स्टेशन महत्वपूर्ण नोड हैं जहाँ रेल कॉरिडोर ट्रांस-हार्बर कॉरिडोर से मिलते हैं, जबकि मेन लाइन दो हिस्सों में बँट जाती है, एक हिस्सा कसारा की ओर और दूसरा कर्जत/खोपोली की ओर जाता है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के विस्तार के साथ, ठाणे-कल्याण रूट पर अलग-अलग स्टेशनों से रोज़ाना 1.2 से 1.5 मिलियन से कम यात्री यात्रा नहीं करते हैं।2022 की शुरुआत में, रेल अधिकारियों ने ठाणे-दिवा सेक्शन पर 5वीं और 6वीं लाइन पर काम पूरा किया, जो अब तक के सबसे लंबे समय तक चलने वाले रेल प्रोजेक्ट में से एक था। एक अन्य वरिष्ठ CR अधिकारी ने कहा, "ठाणे-कल्याण रूट पर कुछ जगहों पर क्षैतिज रूप से विस्तार करने के लिए जगह उपलब्ध है। </p>
<p>इससे नेशनल रेल ट्रैफिक को सबअर्बन ट्रेन ऑपरेशन से अलग किया जा सकेगा। रेल अधिकारियों ने कहा कि कल्याण और ठाणे और फिर परेल तक आउटस्टेशन ट्रेन ऑपरेशन को बढ़ाने के लिए एक साफ रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा।मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर पी सी सहगल ने कहा, "यह अच्छी बात है कि 7वीं और 8वीं लाइनों के साथ मौजूदा नेटवर्क के विस्तार के लिए स्टडी की जा रही है।" "LTT एक बड़ा टर्मिनस बन गया है और 7वीं और 8वीं लाइनें भविष्य में सबअर्बन और लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए चार-चार लाइनें बनाएंगी। हालांकि, सच्चाई यह है कि इनमें काफी लंबा समय लगता है।</p>
<p>उदाहरण के लिए, MUTP-1 की स्टडी 1980 के दशक में की गई थी, लेकिन काम 2008 में शुरू हुआ। यहाँ तक कि 15-कार वाली ट्रेनों को भी लागू होने में सालों लग रहे हैं।"CR अधिकारी आने वाले महीनों में LTT में कम से कम चार और प्लेटफॉर्म जोड़ने पर काम कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने जगह पहचान ली है।<br /> इनके जुड़ने से वे LTT में ज़्यादा लंबी दूरी की ट्रेनों को जगह दे पाएंगे।आर्किटेक्ट और ट्रांसपोर्ट एनालिस्ट जगदीप देसाई ने बताया कि नई लाइनें जोड़ना तो ठीक है, लेकिन देरी को कम करने के लिए रेलवे को सबअर्बन और लंबी दूरी की ट्रेनों की शेड्यूलिंग और मार्शलिंग के लिए तुरंत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए कि ये लाइनें बनाने के बावजूद, जिन सेक्शन में ट्रैक कम हैं, वहां ट्रेनें फंस जाएं।"परेल को एक नए रेल टर्मिनस के तौर पर डेवलप किया जा रहा है। यह कुर्ला और परेल के बीच नई 5वीं और 6वीं लाइनों के साथ सिंक होगा, जिनका इस्तेमाल सिर्फ मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें करेंगी। मुंबई के बीच में यह टर्मिनस CSMT और दादर जैसे मौजूदा स्टेशनों पर से कुछ बोझ कम करेगा।फिलहाल, CR कुर्ला और CSMT के बीच 5वीं और 6वीं लाइनों को पूरा करने में संघर्ष कर रहा है - यह 34 किलोमीटर का स्ट्रेच दो हिस्सों में बंटा हुआ है। पहला 10.1 किलोमीटर का कुर्ला-परेल सेगमेंट है जहां प्रस्तावित आउटस्टेशन टर्मिनस होगा। दूसरा परेल से CSMT तक फैला हुआ है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 15:31:49 +0530</pubDate>
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