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                <title>Mumbai - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Mumbai RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: मराठी साइनबोर्ड न लगाने वाले 1,124 दुकानदारों पर BMC का एक्शन, कार्रवाई का अभियान हुआ तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">मुंबई में बीएमसी (BMC) ने मराठी साइनबोर्ड (मराठी पाट्या) न लगाने वाले 1,124 दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पिछले एक महीने के भीतर महानगर पालिका का यह अभियान काफी तेज हो गया है। बीएमसी ने स्पष्ट कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकार के आदेशों के तहत सभी दुकानों पर देवनागरी लिपि में बड़े अक्षरों में मराठी बोर्ड लगाना अनिवार्य है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50295/mumbai-bmcs-action-against-1124-shopkeepers-who-did-not-put"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/new-project-2026-05-29t102725.825.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई: </strong>मुंबई में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर देवनागरी लिपि में मराठी साइनबोर्ड (मराठी पाट्या) लगाने के नियम को सख्ती से लागू करने के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने अपना अभियान और तेज कर दिया है। पिछले एक महीने के भीतर बीएमसी ने नियमों की अनदेखी करने वाले 1,124 दुकानदारों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>सुप्रीम कोर्ट और सरकार के आदेश का उल्लंघन</strong></p>
<p dir="ltr">राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, शहर के कई दुकानदारों ने अपने साइनबोर्ड नहीं बदले थे। इन निर्देशों के तहत हर छोटी-बड़ी दुकान के बाहर देवनागरी लिपि (मराठी भाषा) में नाम का बोर्ड होना अनिवार्य है, और मराठी अक्षरों का आकार किसी भी अन्य भाषा के अक्षरों से छोटा नहीं होना चाहिए। इस नियम का पालन न होने पर बीएमसी ने वार्ड स्तर पर विशेष निरीक्षण दल गठित कर कार्रवाई शुरू की है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>1,124 दुकानों पर गिरी गाज</strong></p>
<p dir="ltr">बीएमसी के अधिकारियों ने पिछले एक महीने में शहर के विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर निरीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि 1,124 प्रतिष्ठानों ने या तो मराठी में साइनबोर्ड लगाए ही नहीं थे, या उनके बोर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे। इन सभी दुकानदारों के खिलाफ महाराष्ट्र दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>जुर्माना और कानूनी नोटिस</strong></p>
<p dir="ltr">बीएमसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उल्लंघन करने वाले दुकानदारों को कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं और उनसे नियमानुसार जुर्माना वसूला जा रहा है। प्रति कर्मचारी के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान तय किया गया है, जिससे दुकानदारों पर भारी आर्थिक दंड लग सकता है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>आगे भी जारी रहेगा अभियान</strong></p>
<p dir="ltr">महानगर पालिका ने कड़ी चेतावनी दी है कि यह अभियान यही नहीं रुकेगा। जो दुकानदार अभी भी सोच रहे हैं कि वे बिना मराठी बोर्ड के बच जाएंगे, उनके खिलाफ आने वाले दिनों में और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। बीएमसी ने सभी व्यापारियों से अपील की है कि वे किसी भी कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माने से बचने के लिए जल्द से जल्द अपने साइनबोर्ड को निर्धारित नियमों के अनुसार बदल लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 21:48:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एल नीनो के कारण मुंबई में मानसून लेट, 10% पानी कटौती के बाद BMC का एक और बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">एल नीनो (El Nino) के कारण मानसून में हो रही देरी और मुंबई को पानी सप्लाई करने वाली झीलों का जलस्तर तेजी से गिरने के बाद बीएमसी (BMC) ने एक और बड़ा फैसला लिया है। शहर में लागू 10 प्रतिशत की पानी कटौती के साथ-साथ अब कंस्ट्रक्शन साइट्स और स्विमिंग पूल की पानी सप्लाई पूरी तरह से रोक दी गई है, जबकि व्यावसायिक व औद्योगिक इस्तेमाल के लिए 20% की अतिरिक्त कटौती की गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50291/another-big-decision-of-bmc-after-monsoon-delay-in-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/images---2026-06-16t214005.501.jpeg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई: </strong>एल नीनो (El Nino) के प्रभाव के कारण मुंबई और आसपास के इलाकों में इस साल मानसून के पहुंचने में काफी देरी हो रही है, जिसने शहर के सामने एक गंभीर जल संकट खड़ा कर दिया है। मुंबई को पीने का पानी सप्लाई करने वाली सात प्रमुख झीलों का कुल जलस्तर गिरकर मात्र 10 से 12 प्रतिशत के बीच रह गया है। 15 मई से ही शहर में 10 प्रतिशत पानी कटौती झेल रहे मुंबईकरों के लिए बृहनमुंबई महानगर पालिका (BMC) ने जल संरक्षण के मद्देनजर एक और कड़ा और बड़ा फैसला लिया है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>कंस्ट्रक्शन साइट्स और स्विमिंग पूल का पानी रोका गया</strong></p>
<p dir="ltr">झीलों के सूखते जलस्तर को बचाने और पीने के पानी को प्राथमिकता देने के लिए बीएमसी ने फैसला किया है कि शहर में चल रहे सभी नए और मौजूदा निर्माण (Construction) स्थलों की पानी सप्लाई तुरंत प्रभाव से काट दी जाएगी। इसके साथ ही, स्विमिंग पूल को दी जाने वाली पानी की आपूर्ति भी पूरी तरह से निलंबित कर दी गई है। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि जब तक अच्छी बारिश नहीं होती और झीलों का जलस्तर नहीं सुधरता, तब तक किसी भी नए कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को पानी का कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।</p>
<p dir="ltr">​<strong>कमर्शियल और औद्योगिक सप्लाई में 20% की कटौती</strong></p>
<p dir="ltr">बीएमसी ने औद्योगिक (Industrial) और व्यावसायिक (Commercial) प्रतिष्ठानों, जिनमें स्पोर्ट्स क्लब और मॉल आदि शामिल हैं, की पानी आपूर्ति में 20 प्रतिशत की कटौती लागू की है। इसके अतिरिक्त, बोतलबंद पानी और बेवरेज बनाने वाली कंपनियों को भी अब केवल वहां काम करने वाले कर्मचारियों के पीने की जरूरत जितना ही पानी सप्लाई किया जाएगा।</p>
<p dir="ltr">​<strong>बीएमसी की नागरिकों और बड़े संस्थानों से अपील</strong></p>
<p dir="ltr">महानगर पालिका ने रेलवे, इंडियन नेवी, बीपीसीएल (BPCL) और मुंबई पोर्ट जैसे बड़े सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे गैर-पीने योग्य कार्यों (जैसे साफ-सफाई और गाड़ियां धोने) के लिए ट्रीटेड (Treated) सीवेज पानी या बोरवेल के पानी का ही इस्तेमाल करें।</p>
<p dir="ltr">​बीएमसी ने मुंबई के नागरिकों से भी घबराने की बजाय समझदारी दिखाने की अपील की है। प्रशासन ने अनुरोध किया है कि लोग पानी का संयम से इस्तेमाल करें, नलों को खुला न छोड़ें और गाड़ियां धोने के लिए पाइप की जगह गीले कपड़े का उपयोग करें। यदि कोई व्यक्ति या संस्था पीने के पानी की बर्बादी करते हुए पाई गई, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 21:43:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुर्ला बेस्ट डिपो में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, इलेक्ट्रिक बसों में लगातार आ रही तकनीकी खामियों का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">मुंबई के कुर्ला बेस्ट (BEST) डिपो में समिति के हालिया निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी और इलेक्ट्रिक बसों में लगातार आने वाली तकनीकी खराबियों का बड़ा खुलासा हुआ है। खराब रखरखाव, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्राइवरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में बसें डिपो में ही खड़ी रहती हैं, जिससे शहर की परिवहन सेवा प्रभावित हो रही है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50285/lack-of-basic-facilities-in-kurla-best-depot-constant-technical"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/untitled-design-2026-06-16t211040.912.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई: </strong>बेस्ट (BEST) समिति के सदस्यों द्वारा कुर्ला बेस्ट डिपो में किए गए एक निरीक्षण के दौरान गंभीर परिचालन और ढांचागत खामियां सामने आई हैं। समिति के सदस्य संतोष मेढेकर, संजय वाकोड़े और अजय सिंह की टीम ने डिपो का दौरा कर ड्राइवरों और कंडक्टरों से बातचीत की। इस दौरान कर्मचारियों ने बुनियादी सुविधाओं की दयनीय स्थिति और इलेक्ट्रिक बसों में बार-बार आ रही तकनीकी खराबियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसके बाद तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे कर्मचारी</strong></p>
<p dir="ltr">निरीक्षण के दौरान, डिपो कर्मचारियों ने विश्राम कक्ष (रेस्ट रूम), कैंटीन सेवा और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया। कर्मचारियों ने बताया कि ये समस्याएं काफी लंबे समय से लंबित हैं और इसका सीधा असर उनके काम करने की स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>बसों में खराबी और रखरखाव की कमी</strong></p>
<p dir="ltr">जांच में यह बात सामने आई कि कई ओलेक्ट्रा (Olectra) इलेक्ट्रिक बसें पिछले कई महीनों से 'एयर प्रेशर लीक' की समस्या से जूझ रही हैं। कर्मचारियों के अनुसार बस नंबर 1024, 8611, 8545, 8605 समेत कई बसें नियमित रूप से खराब रहती हैं।</p>
<p dir="ltr">​कर्मचारियों ने निरीक्षण टीम को बताया, "लगातार शिकायतों के बावजूद समय पर रखरखाव और मरम्मत का काम नहीं किया जा रहा है।" इसका नतीजा यह है कि कई बसें रोजाना सेवा के लिए बाहर तो भेजी जाती हैं, लेकिन रास्ते में खराब होने के कारण उन्हें वापस डिपो लाना पड़ता है। इसके अलावा कई बसों के एयर कंडीशनर (AC) लंबे समय से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे चिलचिलाती गर्मी में यात्रियों और ऑपरेटिंग स्टाफ दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>चार्जिंग पॉइंट और ड्राइवरों की भारी कमी</strong></p>
<p dir="ltr">इस निरीक्षण ने डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल भी खोल दी। डिपो में लगभग 75 ओलेक्ट्रा बसें खड़ी हैं, लेकिन उन्हें चार्ज करने के लिए मात्र 14 चार्जिंग पॉइंट ही उपलब्ध हैं। इसके चलते बसों की चार्जिंग में काफी देरी होती है और सड़कों पर कम बसें उतर पाती हैं। वहीं, एक अन्य कंपनी की करीब 20 इलेक्ट्रिक बसों के लिए केवल 2 चार्जिंग गन काम कर रही हैं।</p>
<p dir="ltr">​इसके साथ ही जनशक्ति (Manpower) की कमी का मुद्दा भी सामने आया। कर्मचारियों का दावा है कि ड्राइवरों की भारी कमी के कारण लगभग आधी बसें डिपो में ही धूल फांक रही हैं।</p>
<p dir="ltr">​समिति के सदस्य अजय सिंह ने संबंधित अधिकारियों और बस निर्माता कंपनियों से इन समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुंबई के यात्रियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए बसों का उचित रखरखाव और कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं देना अत्यंत आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 21:35:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई मेट्रो लाइन-2बी के निर्माण स्थल पर लगी आग, किसी के हताहत होने की खबर नहीं, जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के बांद्रा में सोमवार रात निर्माणाधीन मेट्रो लाइन-2बी (Metro Line-2B) साइट पर आग लग गई। गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और मेट्रो के ढांचे को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा। एमएमआरडीए (MMRDA) ने सुरक्षा में चूक को लेकर विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50283/fire-broke-out-at-the-construction-site-of-mumbai-metro"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/fire_metro_1781589144341.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई: बांद्रा में सोमवार रात निर्माणाधीन मुंबई मेट्रो लाइन-2बी (Metro Line-2B) के निर्माण स्थल पर अचानक आग लग गई। यह आग पिलर P-400 (पाइलॉन 4) के पास चौथे स्तर पर लकड़ी की शटरिंग में लगी। जलता हुआ मलबा और चिंगारियां नीचे चल रहे ट्रैफिक पर गिरने से इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।</p>
<p><br />​राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, आग रात करीब 10:52 बजे लगी थी। घटना की सूचना मिलते ही साइट की आपातकालीन टीम और मुंबई फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गई। रात 11:30 बजे तक आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया।</p>
<p><br />​यातायात हुआ बुरी तरह प्रभावित<br />आग और सड़क पर गिर रहे मलबे के कारण मौके पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया, जो मंगलवार तड़के तक जारी रहा। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें साइट पर लकड़ी की शटरिंग से लपटें उठती और सड़क पर चिंगारियां गिरती हुई दिखाई दे रही हैं। खतरे को देखते हुए कर्मचारियों ने उस रास्ते से गुजरने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट किया।<br />​MMRDA ने दिए विस्तृत जांच के आदेश</p>
<p><br />आग लगने के स्पष्ट कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। एमएमआरडीए के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आग सिर्फ लकड़ी के शटरिंग सामग्री तक सीमित थी और मेट्रो के मूल ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।<br />​स्थानीय निवासियों ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यह एक बड़ा सार्वजनिक सुरक्षा जोखिम था, क्योंकि इस रूट से रोजाना हजारों यात्री गुजरते हैं। फिलहाल एमएमआरडीए यह जांच कर रहा है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल में कहां चूक हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 21:33:26 +0530</pubDate>
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