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                <title>MNS - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>MNS RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई में ठाकरे भाइयों के 'तिरंगा मोर्चा' पर गुणरत्न सदावर्ते की टिप्पणी; अदालत का दरवाजा खटखटाने की दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">एडवोकेट गुणरत्न सदावर्ते ने मुंबई में ठाकरे भाइयों के संयुक्त 'तिरंगा मोर्चा' को राजनीतिक स्टंट बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ अदालत जाने की चेतावनी दी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50963/gunaratna-sadavartes-comment-on-thackeray-brothers-tiranga-morcha-in-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/0316be0add56533b98a20315ec15ae671752397854479923_original.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और नई दिल्ली में हुए छात्र आंदोलनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद मुंबई में उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT), राज ठाकरे (MNS) और आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में आयोजित संयुक्त 'तिरंगा मोर्चा' (विजयी सभा) ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया और अत्यधिक संवेदनशील अध्याय खोल दिया है। लंबे समय से राजनीतिक रूप से अलग-अलग राहों पर चल रहे ठाकरे भाइयों का इस सार्वजनिक मंच पर एक साथ आना केवल छात्रों के प्रति समर्थन प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मुंबई और महाराष्ट्र की आगामी राजनीतिक बिसात पर एक बड़े ध्रुवीकरण के रूप में देखा जा रहा है। इस मोर्चे के जरिए जहां एक तरफ विपक्ष ने युवा मतदाताओं और जन-आक्रोश को अपने पक्ष में लामबंद करने का प्रयास किया है, वहीं दूसरी तरफ इस आयोजन की कानूनी वैधता पर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं।</p>
<p dir="ltr">​इसी राजनीतिक हलचल के बीच, वरिष्ठ अधिवक्ता गुणरत्न सदावर्ते द्वारा इस मोर्चे के खिलाफ लिया गया सख्त रुख इस पूरे मामले को एक नया संवैधानिक और प्रशासनिक मोड़ देता है। सदावर्ते ने इस आयोजन को महज एक "राजनीतिक स्टंट" करार देते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए शहर की कानून-व्यवस्था को ताक पर रखा गया, आम नागरिकों की आवाजाही को बाधित किया गया और बिना उचित प्रशासनिक अनुमतियों के सार्वजनिक स्थानों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। सदावर्ते द्वारा मुंबई पुलिस और गृह विभाग की भूमिका पर सवाल उठाना तथा आयोजकों के खिलाफ अदालत में याचिका दायर करने की चेतावनी देना यह स्पष्ट करता है कि यह विवाद अब केवल चुनावी या राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष एक तीखी कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है।</p>
<h6 dir="ltr">​<strong>मुख्य बिंदु (Key Highlights):</strong></h6>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>राजनीतिक निहितार्थ:</strong> NEET-UG मुद्दे के बहाने ठाकरे भाइयों (उद्धव और राज ठाकरे) का एक साथ आना महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए समीकरण और शक्ति-प्रदर्शन का संकेत देता है।</li>
<li dir="ltr">​<strong>प्रशासनिक व कानूनी चुनौती:</strong> एडवोकेट गुणरत्न सदावर्ते ने सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा और कानून-व्यवस्था के उल्लंघन का हवाला देते हुए आयोजकों पर आपराधिक मामला दर्ज करने और अदालत में चुनौती देने की बात कही है।</li>
<li dir="ltr">​<strong>जन-आक्रोश और चुनाव:</strong> यह पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कैसे छात्र आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक पुनरुत्थान और चुनावी गोलबंदी के लिए केंद्र बिंदु बनाया जा रहा है।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 22:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने बिना नाम लिए अमित शाह पर बोला हमला, पांच पॉइंट में समझिए मुद्दे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक शुरू युवाओं के आंदोलन के जरिए विपक्षी पार्टियां सरकार को निशाना बना रही हैं। महाराष्ट्र निर्माण सेना ( मनसे ) अध्यक्ष राज ठाकरे ने दिल्ली में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाबदेही लेने को कहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50937/mumbai-mns-president-raj-thackeray-attacks-amit-shah-without-taking"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/20250228151l.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक शुरू युवाओं के आंदोलन के जरिए विपक्षी पार्टियां सरकार को निशाना बना रही हैं। महाराष्ट्र निर्माण सेना ( मनसे ) अध्यक्ष राज ठाकरे ने दिल्ली में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाबदेही लेने को कहा है।</p>
<p> </p>
<p><strong>1- सोशल मीडिया के जरिए सवाल:</strong><br />राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यदि विद्यार्थियों को पीटने वाले शिक्षक दंडित हो सकते हैं तो प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर लाठी चलाने वाले पुलिसकर्मियों और इसका आदेश देने वालों की जवाबदेही क्यों नहीं तय होती ? मुंबई में भी बड़े पैमाने पर युवा प्रदर्शन कर रहे हैं, इसमें राज ठाकरे से लेकर अमित और आदित्य ठाकरे भाग ले रहे हैं। </p>
<p><strong>2 - संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के देशों का हवाला:</strong><br />राज ठाकरे ने अपने पोस्ट में कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिन्हें एमनेस्टी इंटरनेशनल भी मान्यता देता है, स्पष्ट कहते हैं कि जब भी बल प्रयोग किया जाए वह संविधान और कानून के दायरे में आवश्यक तथा परिस्थितियों के अनुपात में होना चाहिए। साथ ही उसके लिए जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। नॉर्वे, जर्मनी, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और न्यूजीलैंड जैसे देशों में पुलिस द्वारा बल प्रयोग की हर घटना की गंभीर जांच होती है। जांच केवल बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों की नहीं, बल्कि आदेश देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी होती है। भारत में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।</p>
<p><strong>3 - किसके आदेश पर हुई लाठीचार्ज :</strong><br />राज ठाकरे ने कहा कि दिल्ली में पुलिस ने छात्रों पर अंधाधुंध लाठीचार्ज किया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कुछ परिस्थितियों में सीमित बल प्रयोग को समझा जा सकता है, लेकिन यहां जिस तरह की हिंसा दिखाई दे रही है, वह प्रतिशोध जैसी प्रतीत हुई। सामने आए वीडियो में केवल प्रदर्शनकारी छात्र ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद आम लोग भी बेरहमी से पीटे जाते और रौंदे जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ऐसी कार्रवाई बिना ऊपर से मिले स्पष्ट आदेश के नहीं कर सकती।</p>
<p><strong>4 - क्या आदेश देने वाले संविधान से ऊपर:</strong><br />ऐसे में सवाल उठता है कि उन्हें पीटने का औचित्य क्या था? और पुलिस को ऐसा करने का अधिकार किसने दिया? जिस तरह शिक्षकों को छात्रों को पीटने की अनुमति नहीं है, उसी तरह पुलिस को भी नहीं होनी चाहिए। फिर ऐसा क्यों हुआ ? चाहे महाराष्ट्र पुलिस हो या देश की कोई अन्य पुलिस, कई बार पुलिसकर्मियों के पास आदेशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। इसलिए पूरी जिम्मेदारी केवल उन पर नहीं डाली जा सकती। असली सवाल यह है कि इतनी बेरहमी से छात्रों को पीटने के आदेश देने का अधिकार किसने दिया? क्या आदेश देने वाले खुद को संविधान से ऊपर मानते हैं?</p>
<p><strong>5 -सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल :</strong><br />अब सवाल यह है कि यह सुनिश्चित कौन करेगा? एक ओर देश के मुख्य न्यायाधीश कथित रूप से इन युवाओं को "कॉकरोच" कहकर संबोधित करते हैं, वहीं दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय यह कहता है कि उसके पास पिटाई के वीडियो देखने का समय नहीं है। यदि ऐसा है, तो फिर उसके पास समय किस बात के लिए है? आज नौजवान इसलिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें मौजूदा सरकार से कोई उम्मीद नहीं बची है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 12:39:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने पर अमित ठाकरे का तीखा हमला</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">सोनम वांगचुक को 21 दिनों की भूख हड़ताल के बाद गिरते स्वास्थ्य के कारण दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है। इस कार्रवाई की राजनीतिक गलियारों में कड़ी आलोचना हो रही है, जिसमें एमएनएस नेता अमित ठाकरे ने इसे "लोकतंत्र का काला दिन" बताते हुए केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। वांगचुक नीट परीक्षा विवाद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50821/amit-thackerays-sharp-attack-on-environmentalist-sonam-wangchuks-hospitalization"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/nanobot-1-2026-07-18t141607.706.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई:</strong> जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से जबरन हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। वांगचुक पिछले 21 दिनों से NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे।</p>
<h5 dir="ltr">​अमित ठाकरे की कड़ी प्रतिक्रिया</h5>
<p dir="ltr">​अमित ठाकरे ने इस घटना को "भारतीय राजनीति के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक" करार दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, "एक महान शिक्षाविद, वैज्ञानिक, जिन्होंने किसानों, छात्रों और हमारी सेना के लिए काम किया है, वे 20 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर थे, और सरकार ने उनकी आवाज़ सुनने के बजाय उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती कराया।" उन्होंने सरकार के इस रवैये को युवाओं की चिंताओं के प्रति संवेदनहीनता का प्रमाण बताया है।</p>
<h5 dir="ltr">​घटनाक्रम का विवरण</h5>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>अस्पताल में भर्ती:</strong> 18 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों और गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।</li>
</ul>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>विरोध और तनाव:</strong> पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच मामूली झड़प भी हुई। पुलिस ने बताया कि वांगचुक के स्वास्थ्य में गिरावट और निर्जलीकरण (dehydration) के संकेतों को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय देखरेख की आवश्यकता थी।</li>
</ul>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>परिवार की अपील:</strong> वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंग्मो ने अस्पताल प्रशासन से आग्रह किया है कि उनकी अनुमति और पारिवारिक चिकित्सकों के परामर्श के बिना उन्हें कोई भी उपचार न दिया जाए।</li>
<li dir="ltr">​<strong>आंदोलन जारी:</strong> वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है और 20 जुलाई को संसद मार्च की अपनी योजना पर कायम रहने का संकल्प लिया है।</li>
</ul>
<p dir="ltr"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50821/amit-thackerays-sharp-attack-on-environmentalist-sonam-wangchuks-hospitalization</link>
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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 16:29:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संजय राउत और राज ठाकरे के बीच गुप्त मुलाकात, 'ऑपरेशन टाइगर' के बीच महाराष्ट्र की सियासत में हलचल तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत और एमएनएस (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के बीच हाल ही में एक अहम और गुप्त बैठक (गुफ्तगू) हुई है। महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे 'ऑपरेशन टाइगर' (Operation Tiger) की पृष्ठभूमि में दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में हुई इस चर्चा ने नए राजनीतिक समीकरणों और अटकलों को जन्म दे दिया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50359/secret-meeting-between-sanjay-raut-and-raj-thackeray-stir-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/10_04_2024-sanjay_raut_23693862.jpeg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' (Operation Tiger) की अटकलों के बीच एक नई और चौंकाने वाली राजनीतिक गतिविधि सामने आई है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) तथा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे/MNS) के प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) के बीच हाल ही में एक गुप्त मुलाकात (गुफ्तगू) हुई है। इस बंद कमरे की बैठक ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं और तर्क-वितर्क (Arguments &amp; Speculations) का बाजार गर्म कर दिया है।</p>
<h3 dir="ltr">​20 मिनट तक चली बंद कमरे में चर्चा</h3>
<p dir="ltr">​स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, संजय राउत और राज ठाकरे के बीच यह मुलाकात बेहद गोपनीय रखी गई थी और दोनों नेताओं के बीच लगभग 20 मिनट तक गहन चर्चा हुई। हालांकि इस बैठक का आधिकारिक एजेंडा क्या था और दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, यह अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल से जोड़कर देख रहे हैं।</p>
<h3 dir="ltr">​'ऑपरेशन टाइगर' की पृष्ठभूमि और बढ़ता संकट</h3>
<p dir="ltr">​यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र की राजनीति 'ऑपरेशन टाइगर' की खबरों से गरमाई हुई है। इस कथित ऑपरेशन के तहत उद्धव ठाकरे गुट के 6 लोकसभा सांसदों के बागी होने और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। बागी सांसदों द्वारा पार्टी व्हिप का उल्लंघन किए जाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है।</p>
<p dir="ltr">​अपनी ही पार्टी के भीतर पैदा हुए इस बड़े संकट के समय में राउत का राज ठाकरे से मिलना कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<h3 dir="ltr">​क्या बन रहे हैं नए राजनीतिक समीकरण?</h3>
<p dir="ltr">​हाल के दिनों में ऐसे भी कयास लगाए जाते रहे हैं कि क्या उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (ठाकरे बंधु) भविष्य के चुनावों में एक साथ आ सकते हैं। संजय राउत ने भी हाल ही में एक बयान में कहा था कि "अगर ठाकरे बंधु एक साथ आते हैं, तो कांग्रेस या महाविकास अघाड़ी (MVA) को कोई आपत्ति नहीं होगी।"</p>
<p dir="ltr">​इस गुप्त बैठक के बाद सियासी हलकों में कई सवाल खड़े हो गए हैं:</p>
<ul>
<li dir="ltr">​क्या शिवसेना (यूबीटी) अपने सांसदों की संभावित टूट को रोकने या उसका जवाब देने के लिए राज ठाकरे से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है?</li>
<li dir="ltr">​क्या 'ऑपरेशन टाइगर' के जवाब में कोई नई संयुक्त रणनीतिक बिसात बिछाई जा रही है?</li>
</ul>
<p dir="ltr">​फिलहाल दोनों ही पार्टियों (शिवसेना-यूबीटी और मनसे) की ओर से इस बैठक के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन इस 20 मिनट की चर्चा ने महाराष्ट्र की सियासत में नए गठबंधनों की सुगबुगाहट जरूर तेज कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:48:36 +0530</pubDate>
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