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                <title>trouble! - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई मेयर पद पर फंसा पेंच! शिंदे का प्लान B तैयार, दो नगर निगमों में नहीं खिल पाएगा भाजपा का कमल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की राजनीति में महानगरपालिका चुनावों के नतीजों के बाद अब मेयर की कुर्सी को लेकर घमासान शुरू हो गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और भाजपा के बीच 'शह-मात' का खेल जारी है। एमएमआर क्षेत्र में मुंबई की एइएम्सि सहित आठ महानगरपालिकाएं हैं। महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47271/there-is-a-problem-in-the-post-of-mumbai-mayor"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-27t110206.602.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र की राजनीति में महानगरपालिका चुनावों के नतीजों के बाद अब मेयर की कुर्सी को लेकर घमासान शुरू हो गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और भाजपा के बीच 'शह-मात' का खेल जारी है। एमएमआर क्षेत्र में मुंबई की एइएम्सि सहित आठ महानगरपालिकाएं हैं। महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। विशेष रूप से मुंबई में मेयर पद को लेकर भाजपा और शिंदे सेना के बीच जबरदस्त रस्साकशी चल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि मुंबई में शिंदे गुट की बात नहीं बनी, तो एकनाथ शिंदे कल्याण-डोंबिवली  महानगरपालिका और उल्हासनगर महानगरपालिका में अपना मेयर बनाने की तैयारी में हैं। ठाणे और कल्याण-डोंबिवली को छोड़ दें तो एमएमआर क्षेत्र की ज्यादातर महानगरपालिकाओं में भाजपा ने शिंदे गुट की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। </p>
<p> </p>
<p>कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में कुल 122 नगरसेवक हैं। इनमें शिंदे गुट के 53 और भाजपा के 50 नगरसेवक (पार्षद) चुने गए हैं। चुनाव दोनों दलों ने गठबंधन में लड़ा था, लेकिन सीटों का अंतर बेहद कम होने के कारण भाजपा यहां सत्ता में बराबर हिस्सेदारी की मांग कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट भाजपा के लिए मेयर पद और अन्य अहम पद छोड़ने के मूड में नहीं है। </p>
<p>यही वजह है कि एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना की सत्ता अकेले स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके तहत अन्य दलों के नगरसेवकों से संपर्क साधा जा रहा है। मनसे के पांच नगरसेवकों व कुछ शिवसेना ठाकरे गुट के नगरसेवकों ने शिंदे को समर्थन देने का ऐलान किया है। 122 सीटों वाली कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में बहुमत के लिए 62 सीटों की आवश्यकता है। शिवसेना (53) और मनसे (5) के साथ आने से यह आंकड़ा 58 पर पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि उद्धव गुट (यूबीटी) के कुछ नगरसेवक भी शिंदे गुट के संपर्क में हैं, जिससे बहुमत का आंकड़ा पार होने की उम्मीद है। </p>
<p>15 जनवरी को हुए केडीएमसी चुनाव में शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। जबकि भाजपा को 50 सीटें मिली हैं। इसके अलावा शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को 11, मनसे को 5, कांग्रेस को 2 और एनसीपी (एसपी) को एक सीट पर संतोष करना पड़ा। उल्हासनगर महानगरपालिका में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। यहां भाजपा के 37 जबकि शिंदे गुट के 36 नगरसेवक निर्वाचित हुए हैं। उल्हासनगर में भी शिंदे गुट ने भाजपा को चौंका दिया है। उल्हासनगर नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से वह महज 3 कदम दूर रह गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:03:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईटीआर फाइलिंग में कम आय दिखाई या गलत जानकारी दी तो टूट सकती है आफत! मिल सकता है नोटिस, जानिए पूरी डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना हर टैक्सपेयर की जिम्मेदारी है. लेकिन कई बार लापरवाही या जानकारी की कमी की वजह से लोग अपनी आय कम दिखा देते हैं या फिर गलत जानकारी भर देते हैं  ऐसा करना टैक्स चोरी के दायरे में आ सकता है और इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सिर्फ़ कानूनी मसला नहीं बल्कि आपकी आर्थिक और सामाजिक साख पर भी असर डाल सकता है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43894/if-you-file-itr-with-less-information-or-wrong-information--you-may-get-into-trouble--you-have-received-a-notice--know-the-complete-details"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-14t191341.511.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली :</strong> इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना हर टैक्सपेयर की जिम्मेदारी है. लेकिन कई बार लापरवाही या जानकारी की कमी की वजह से लोग अपनी आय कम दिखा देते हैं या फिर गलत जानकारी भर देते हैं  ऐसा करना टैक्स चोरी के दायरे में आ सकता है और इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सिर्फ़ कानूनी मसला नहीं बल्कि आपकी आर्थिक और सामाजिक साख पर भी असर डाल सकता है.</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>अंडर रिपोर्टिंग और मिस रिपोर्टिंग क्या है?</strong></div>
<div>अंडर रिपोर्टिंग का मतलब है असल आय से कम आय दिखाना. यानी आपकी टैक्स योग्य आय का कुछ हिस्सा रिटर्न में शामिल ही नहीं किया गया. दूसरी ओर, मिस रिपोर्टिंग का मतलब है आय के स्रोत, प्रकार या आंकड़ों के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देना. इसमें फर्जी इनवॉइस दिखाना, गलत कैटेगरी में इनकम दिखाना या ऐसी छूट का दावा करना शामिल है, जिसका आपको हक नहीं है.</div>
<div> </div>
<div><strong>कानून और पेनाल्टी</strong></div>
<div>इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270ए में इसके लिए साफ प्रावधान दिए गए हैं. अगर असेसिंग ऑफिसर पाता है कि आपकी आय कम दिखाई गई है, तो उस पर टैक्स का 50% जुर्माना लगेगा. वहीं, जानबूझकर गलत जानकारी देने या फर्जीवाड़े के मामलों में यह पेनाल्टी टैक्स की 200% तक हो सकती है. इसके अलावा, धारा 234ए, 234बी और 234सी के तहत टैक्स और पेनाल्टी पर ब्याज भी लगता है. इतना ही नहीं, अगर आपके रिटर्न और बैंक डिटेल्स या फॉर्म 26 एएस में गलतफहमी पाई जाती है, तो टैक्स विभाग नोटिस भेज सकता है और जांच भी शुरू कर सकता है.</div>
<div> </div>
<div><strong>अंडर रिपोर्टिंग और मिस रिपोर्टिंग क्या है?</strong></div>
<div>अंडर रिपोर्टिंग का मतलब है असल आय से कम आय दिखाना. यानी आपकी टैक्स योग्य आय का कुछ हिस्सा रिटर्न में शामिल ही नहीं किया गया. दूसरी ओर, मिस रिपोर्टिंग का मतलब है आय के स्रोत, प्रकार या आंकड़ों के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देना. इसमें फर्जी इनवॉइस दिखाना, गलत कैटेगरी में इनकम दिखाना या ऐसी छूट का दावा करना शामिल है, जिसका आपको हक नहीं है.</div>
<div> </div>
<div><strong>भारी नुकसान और सजा का खतरा</strong></div>
<div>विशेषज्ञों का कहना है कि गलत रिपोर्टिंग से आपको मिलने वाले वैध टैक्स छूट और एक्सेम्पशन भी रद्द हो सकते हैं. गंभीर मामलों में यह टैक्स चोरी की श्रेणी में आता है, जिससे न सिर्फ भारी जुर्माना बल्कि जेल तक हो सकती है. यही वजह है कि आईटीआर दाखिल करते समय पारदर्शिता और सटीकता ज़रूरी है. सही समय पर, सही जानकारी देने से आप कानूनी परेशानियों, आर्थिक नुकसान और बदनाम होने से बच सकते हैं.</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Sep 2025 19:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अस्पतालों की सेवाएं डगमगाई, मरीजों पर शामत आई!</title>
                                    <description><![CDATA[पुरानी पेंशन योजना फिर से लागू करने की मांग को लेकर राज्य में बीते पांच दिनों से सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल के चलते सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जानेवाली सेवाएं डगमगा गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/19099/services-of-hospitals-wavered-on-patients"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-03/image.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई, </strong>पुरानी पेंशन योजना फिर से लागू करने की मांग को लेकर राज्य में बीते पांच दिनों से सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल के चलते सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जानेवाली सेवाएं डगमगा गई हैं। एक तरफ जहां राज्य सरकार द्वारा संचालित मुंबई के चार प्रमुख अस्पतालों में होनेवाली सर्जरी पर असर पड़ा है, वहीं अब ओपीडी में भी इलाज के लिए आनेवाले मरीज कम हो गए हैं। एक तरफ जहां मरीज सुविधाओं की मार झेल रहे हैं, वहीं सरकार हड़तालियों के सामने झुकने को तैयार नहीं दिख रही है।<br />उल्लेखनीय है कि हड़ताल के पहले दिन से ही अस्पताल सेवाएं प्रभावित हैं। पांचवे दिन शनिवार को इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर दिखाई दिया। ओपीडी में कई सेवाओं के ठप होने से इलाज कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों ने खुद ही अस्पतालों से मुंह मोड़ लिया। जेजे अस्पताल के ओपीडी में प्रतिदिन ४ हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं लेकिन शनिवार को एक चौथाई के करीब मरीज पहुंचे। इसी तरह जीटी, कामा और सेंट जॉर्ज अस्पताल की ओपीडी में भी सामान्य से कम मरीज पहुंचे। जेजे अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी सापले ने कहा कि हड़ताल के कारण नर्सिंग छात्राओं को ओवरटाइम करना पड़ रहा है। नतीजतन, अस्पताल में करीब २५० नर्सिंग छात्राओं को तीन शिफ्टों में काम करना पड़ रहा है। इसके चलते उन पर काम का बोझ दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।<br />जेजे अस्पताल के कर्मचारियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अस्पताल के डॉक्टर पोस्टमार्टम की सलाह नहीं दे रहे हैं। यहां तक ​​कि किसी मामले में शव का पोस्टमार्टम किया जाना जरूरी है तो उसे इस प्रक्रिया के लिए केईएम अस्पताल में भेजा जा रहा है। दूसरी तरफ पहले एक दिन में २५ या उससे अधिक एमआरआई की जाती थी लेकिन प्रशिक्षित तकनीशियनों के हड़ताल पर जाने से अब दिन में एक भी एमआरआई नहीं हो पा रही है। हालांकि, मरीजों के सीटी स्कैन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है। जेजे अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी सापले ने कहा कि हड़ताल के कारण बाधित हुई सेवाओं को सुचारू करने के लिए जेजे अस्पताल समेत मुंबई के जीटी, सेंट जॉर्ज और कामा अस्पताल में दिहाड़ी मजदूरों और अस्थाई संविदा कर्मचारियों की तत्काल भर्ती करने का निर्णय लिया गया है। इसकी मदद से मरीजों को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इसे लेकर राज्य सरकार ने मंजूरी भी दे दी है।<br />मुंबई के सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन ही दाई और वॉर्ड बॉय का काम कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि मरीजों की मदद करने के लिए वे व्हील चेयर खींचने के साथ ही अन्य काम कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि कई मर्तबा अस्पताल परिसर में कर्मचारी उपस्थित रहते हैं लेकिन हड़ताल में शामिल होने के चलते मरीजों की समस्याओं को नजरंदाज करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Mar 2023 11:05:55 +0530</pubDate>
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