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                <title>Court - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई:शिवसेना के नाम और पहचान पर कानूनी जंग, सुप्रीम कोर्ट करेगा बड़े विवाद का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, शिवसेना की वास्तविक पहचान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत अब उन कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिनका संबंध चुनाव आयोग के उस फैसले से है, जिसमें पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर निर्णय दिया गया था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51166/mumbai-legal-battle-over-shiv-senas-name-and-identity-supreme"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/04_08_2022-shiv_sena_supreme_court_22952438_m.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, शिवसेना की वास्तविक पहचान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत अब उन कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिनका संबंध चुनाव आयोग के उस फैसले से है, जिसमें पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर निर्णय दिया गया था।</p>
<p> </p>
<p><strong>मामला क्या है? </strong><br />शिवसेना में राजनीतिक विभाजन के बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व एकनाथ शिंदे के हाथ में है। दोनों पक्षों ने स्वयं को मूल शिवसेना का प्रतिनिधि बताया। बाद में चुनाव आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और संगठनात्मक व विधायी समर्थन के आधार पर पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर फैसला दिया। इसी निर्णय को उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में किन मुद्दों पर होगी सुनवाई? </strong><br />सुनवाई के दौरान अदालत मुख्य रूप से इन पहलुओं पर विचार कर सकती है— चुनाव आयोग के फैसले की वैधानिकता। राजनीतिक दल की वास्तविक पहचान तय करने का आधार। संगठनात्मक बहुमत और विधायी बहुमत का महत्व। चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़े कानूनी प्रावधान। संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून की व्याख्या। उद्धव गुट की दलील उद्धव ठाकरे गुट का कहना है कि पार्टी की पहचान केवल निर्वाचित विधायकों की संख्या से तय नहीं की जा सकती। उनका तर्क है कि पार्टी का संविधान, संगठनात्मक ढांचा और मूल विचारधारा भी किसी राजनीतिक दल की पहचान तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। याचिकाओं में चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती देते हुए उसे कानूनी कसौटी पर परखने की मांग की गई है। </p>
<p><strong>दूसरे पक्ष का रुख </strong><br />दूसरी ओर, प्रतिपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने उपलब्ध रिकॉर्ड, कानूनी प्रावधानों और संबंधित तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय दिया था। उनका तर्क है कि आयोग ने स्थापित प्रक्रिया का पालन किया और उसका फैसला कानून के अनुरूप है। फैसले का व्यापक असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का प्रभाव केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल में विभाजन की स्थिति में पार्टी की पहचान, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर इस मामले पर पूरे देश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं। अदालत के अंतिम फैसले का असर महाराष्ट्र की राजनीति, दलों की आंतरिक संरचना और चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:34:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: 'सरकारी एजेंसी को भेदभावपूर्ण कार्रवाई का अधिकार नहीं', बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र एफडीए को लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बांबे हाईकोर्ट ने भेदभावपूर्ण और चुनिंदा कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की खिंचाई की है। कहा है कि एफडीए एक ओर राज्य सरकार के मंत्रालयों की कैंटीनों की खाद्य सामग्री और वहां की स्वच्छता में खामियां मिलने पर उन्हें मात्र व्यवस्था में सुधार का नोटिस देता है, वहीं दूसरी ओर वह प्राइवेट होटलों में मामूली खामियां मिलने पर लाइसेंस रद जैसी कार्रवाई करता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51068/mumbai-government-agency-has-no-right-to-take-discriminatory-action"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/fda.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बांबे हाईकोर्ट ने भेदभावपूर्ण और चुनिंदा कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की खिंचाई की है। कहा है कि एफडीए एक ओर राज्य सरकार के मंत्रालयों की कैंटीनों की खाद्य सामग्री और वहां की स्वच्छता में खामियां मिलने पर उन्हें मात्र व्यवस्था में सुधार का नोटिस देता है, वहीं दूसरी ओर वह प्राइवेट होटलों में मामूली खामियां मिलने पर लाइसेंस रद जैसी कार्रवाई करता है।</p>
<p> </p>
<p>हाईकोर्ट के नामित चार अधिवक्ताओं के पैनल के राज्य सरकार के तीन मंत्रालयों की कैंटीनों के निरीक्षण के बाद दी गई रिपोर्ट पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने एफडीए पर टिप्पणी करते हुए सुधार के निर्देश दिए हैं। पैनल की रिपोर्ट में बताया गया है कि तीनों ही कैंटीन स्वच्छ नहीं मिलीं। वहां पर नालियां खुली हुईं और बदबूदार थीं। कैंटीन की किचेन के फर्श पर तमाम मक्खियां और काकरोच (तिलचट्टे) पाए गए। जबकि एफडीए ने अपनी रिपोर्ट में इन कैंटीनों को 98 प्रतिशत तक नियमों के अनुरूप पाया है।</p>
<p>कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की पीठ ने कहा, प्राइवेट होटलों और सरकारी प्रतिष्ठानों की कैंटीनों के निरीक्षण और उन पर कार्रवाई का निर्णय लेने में एफडीए को निष्पक्ष, गैर भेदभावपूर्ण और एकरूप रहना चाहिए। मुंबई के पूर्णिमा रेस्टोरेंट का लाइसेंस रद करने के एफडीए के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई में पीठ ने कहा, एडमिनिस्ट्रेशन ऐसी ही कार्रवाई राज्य सरकार की कैंटीनों पर करे या फिर पूर्णिमा रेस्टोरेंट को राहत दे। किसी सरकारी संस्था को भेदभावपूर्ण कार्रवाई का अधिकार नहीं है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:34:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुंबई कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर दुबई की अदालत में पेश किया, यूएई के दो नागरिकों समेत छह पर केस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>फर्जीवाड़ा करने वालों के हौंसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में आरोपियों ने मुंबई कोर्ट का ही एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश कर दिया। आइए जानते हैं कि क्या है ये सनसनीखेज मामला और कैसे इसका भंडाफोड़ हुआ... </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50811/case-against-six-including-two-uae-nationals-presented-in-dubai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-18t113649.513.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>फर्जीवाड़ा करने वालों के हौंसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में आरोपियों ने मुंबई कोर्ट का ही एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश कर दिया। आइए जानते हैं कि क्या है ये सनसनीखेज मामला और कैसे इसका भंडाफोड़ हुआ... <br />करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति के विवाद में बढ़त हासिल करने और एक भारतीय कारोबारी को अपराधी साबित करने के लिए मुंबई की अदालत का फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर मुंबई की कुर्ला पुलिस ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो नागरिकों समेत छह लोगों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और अदालत की मुहर व दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया है।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />पुलिस के मुताबिक, खंडाला निवासी वाहिदा हुसैन शत्ताफ की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पति हुसैन मोहम्मद शत्ताफ की छवि खराब करने और संपत्ति विवाद में उनका दावा कमजोर करने के लिए आरोपियों ने मुंबई की अदालत का एक फर्जी आदेश तैयार किया। बाद में इसी दस्तावेज को दुबई की अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब शत्ताफ परिवार को दस्तावेज की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेज की जांच कराई गई। </p>
<p><strong>जांच में ऐसे हुआ खुलासा</strong><br />जांच के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अदालत के रिकॉर्ड की पड़ताल की और करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में पता चला कि जिस मुकदमे का उल्लेख फर्जी आदेश में किया गया था, वैसा कोई मामला कभी अदालत में चला ही नहीं था। दस्तावेज को असली दिखाने के लिए अदालत के डिजिटल हस्ताक्षर, सरकारी वकील और नोटरी की फर्जी मुहर तथा नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आदेश में हुसैन मोहम्मद शत्ताफ को 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी, पासपोर्ट जालसाजी और हवाला कारोबार में दोषी बताया गया था। </p>
<p>इतना ही नहीं, उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने का भी झूठा दावा किया गया। जबकि वास्तविकता यह थी कि उस समय अदालत में केवल उनके जब्त दोपहिया वाहन को छुड़ाने की अर्जी पर सुनवाई हुई थी। कुर्ला पुलिस ने इस मामले में हुमैद मोहम्मद शत्ताफ और हलीमा सुल्तान अल ओवैस, (दोनों यूएई निवासी) के अलावा मधुकर रविराज विल्सन, केन रिचर्ड विल्सन, रजी अहमद और नोटरी शिवाजी एन. ढांगे को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:38:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: मधु कोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला: मुंबई की संपत्तियों की नीलामी पर कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी विशेष अदालत ने ईडी को बड़ी अंतरिम राहत दी है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मुंबई स्थित उन संपत्तियों की प्रस्तावित ई-नीलामी पर रोक लगा दी है, जिन्हें ईडी ने वर्ष 2013 में कुर्क किया था। अदालत ने फीनिक्स एआरसी लिमिटेड और ई-आक्शन सेवा प्रदाता सी-1 इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वे पांच अगस्त 2026 को प्रस्तावित ई-नीलामी और उससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया फिलहाल नहीं करें।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50797/mumbai-madhu-koda-money-laundering-case-court-imposes-interim-stay"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-17t103328.315.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी विशेष अदालत ने ईडी को बड़ी अंतरिम राहत दी है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मुंबई स्थित उन संपत्तियों की प्रस्तावित ई-नीलामी पर रोक लगा दी है, जिन्हें ईडी ने वर्ष 2013 में कुर्क किया था। अदालत ने फीनिक्स एआरसी लिमिटेड और ई-आक्शन सेवा प्रदाता सी-1 इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वे पांच अगस्त 2026 को प्रस्तावित ई-नीलामी और उससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया फिलहाल नहीं करें।</p>
<p> </p>
<p>ईडी ने अदालत में दायर आवेदन में कहा था कि संबंधित संपत्तियां पहले से पीएमएलए एक्ट के तहत कुर्क हैं और उन पर पारित कुर्की आदेश की पुष्टि निर्णायक प्राधिकरण तथा अपीलीय अधिकरण दोनों कर चुका है। ऐसे में मुकदमे के अंतिम निर्णय से पहले ई-नीलामी होने पर तीसरे पक्ष के अधिकार उत्पन्न हो जाएंगे, जिससे संपत्ति की जब्ती अथवा वैध दावेदार को बहाल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीएमएलए एक्ट के तहत पुष्टि की गई कुर्क संपत्तियां न्यायालय की अभिरक्षा में हैं। जब तक विशेष अदालत संपत्तियों की जब्ती या बहाली पर अंतिम निर्णय नहीं दे देती, तब तक उनका हस्तांतरण या नीलामी नहीं की जा सकती। अदालत ने फीनिक्स एआरसी, संबंधित पक्षों और उधारकर्ताओं को नोटिस जारी करते हुए 28 जुलाई को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। तब तक ई-नीलामी पर अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 10:34:39 +0530</pubDate>
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