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                <title>laundering - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>laundering RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा खुलासा, साइबर ठगी के पैसों की हेराफेरी करने वाले नेटवर्क पर शिकंजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच मुंबई क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की कार्यप्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी राज तिलक रोशन ने बताया कि साइबर अपराध आमतौर पर दो चरणों में संचालित होते हैं और पुलिस ने ऐसे नेटवर्क की पहचान की है जो ठगी की रकम को अलग-अलग खातों के जरिए आगे भेजने का काम करता है। डीसीपी राज तिलक रोशन ने बताया कि पहला समूह उन लोगों का होता है जो सीधे साइबर ठगी को अंजाम देते हैं। इनमें डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड, आईपीके से जुड़े धोखाधड़ी के मामले और अन्य ऑनलाइन ठगी शामिल हैं। दूसरा समूह उन लोगों का होता है जो ठगी के बाद प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों या अन्य माध्यमों से स्थानांतरित कर उसकी असली पहचान छिपाने का प्रयास करते हैं।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51194/6a7597328255b"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-07t140259.641.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच मुंबई क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की कार्यप्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी राज तिलक रोशन ने बताया कि साइबर अपराध आमतौर पर दो चरणों में संचालित होते हैं और पुलिस ने ऐसे नेटवर्क की पहचान की है जो ठगी की रकम को अलग-अलग खातों के जरिए आगे भेजने का काम करता है। डीसीपी राज तिलक रोशन ने बताया कि पहला समूह उन लोगों का होता है जो सीधे साइबर ठगी को अंजाम देते हैं। इनमें डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड, आईपीके से जुड़े धोखाधड़ी के मामले और अन्य ऑनलाइन ठगी शामिल हैं। दूसरा समूह उन लोगों का होता है जो ठगी के बाद प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों या अन्य माध्यमों से स्थानांतरित कर उसकी असली पहचान छिपाने का प्रयास करते हैं।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह दूसरा नेटवर्क साइबर अपराधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण कड़ी होता है। इसका काम ठगी से हासिल रकम को कई खातों में घुमाकर या अलग-अलग स्थानों पर भेजकर उसकी ट्रैकिंग को मुश्किल बनाना होता है। इस प्रक्रिया को आमतौर पर 'लेयरिंग' कहा जाता है, जिसका उद्देश्य अवैध धन के स्रोत को छिपाना होता है। मुंबई क्राइम ब्रांच के अनुसार, जांच में सामने आया है कि इस तरह के नेटवर्क कई प्रकार के साइबर अपराधों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब इन नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।</p>
<p>अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से साइबर अपराधों के बड़े गिरोह तक पहुंचने में मदद मिलेगी। पुलिस ने नागरिकों से भी सतर्क रहने की अपील की है। किसी अनजान कॉल, ओटीपी साझा करने, फर्जी निवेश योजनाओं या डिजिटल अरेस्ट जैसे दावों पर भरोसा न करने की सलाह दी गई है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए जनजागरूकता और त्वरित शिकायत दोनों बेहद जरूरी हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 14:04:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: मधु कोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला: मुंबई की संपत्तियों की नीलामी पर कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी विशेष अदालत ने ईडी को बड़ी अंतरिम राहत दी है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मुंबई स्थित उन संपत्तियों की प्रस्तावित ई-नीलामी पर रोक लगा दी है, जिन्हें ईडी ने वर्ष 2013 में कुर्क किया था। अदालत ने फीनिक्स एआरसी लिमिटेड और ई-आक्शन सेवा प्रदाता सी-1 इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वे पांच अगस्त 2026 को प्रस्तावित ई-नीलामी और उससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया फिलहाल नहीं करें।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50797/mumbai-madhu-koda-money-laundering-case-court-imposes-interim-stay"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-17t103328.315.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी विशेष अदालत ने ईडी को बड़ी अंतरिम राहत दी है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मुंबई स्थित उन संपत्तियों की प्रस्तावित ई-नीलामी पर रोक लगा दी है, जिन्हें ईडी ने वर्ष 2013 में कुर्क किया था। अदालत ने फीनिक्स एआरसी लिमिटेड और ई-आक्शन सेवा प्रदाता सी-1 इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वे पांच अगस्त 2026 को प्रस्तावित ई-नीलामी और उससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया फिलहाल नहीं करें।</p>
<p> </p>
<p>ईडी ने अदालत में दायर आवेदन में कहा था कि संबंधित संपत्तियां पहले से पीएमएलए एक्ट के तहत कुर्क हैं और उन पर पारित कुर्की आदेश की पुष्टि निर्णायक प्राधिकरण तथा अपीलीय अधिकरण दोनों कर चुका है। ऐसे में मुकदमे के अंतिम निर्णय से पहले ई-नीलामी होने पर तीसरे पक्ष के अधिकार उत्पन्न हो जाएंगे, जिससे संपत्ति की जब्ती अथवा वैध दावेदार को बहाल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीएमएलए एक्ट के तहत पुष्टि की गई कुर्क संपत्तियां न्यायालय की अभिरक्षा में हैं। जब तक विशेष अदालत संपत्तियों की जब्ती या बहाली पर अंतिम निर्णय नहीं दे देती, तब तक उनका हस्तांतरण या नीलामी नहीं की जा सकती। अदालत ने फीनिक्स एआरसी, संबंधित पक्षों और उधारकर्ताओं को नोटिस जारी करते हुए 28 जुलाई को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। तब तक ई-नीलामी पर अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50797/mumbai-madhu-koda-money-laundering-case-court-imposes-interim-stay</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 10:34:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई  : अशोक खरात मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>प्रवर्तन निदेशालय  ने स्वयंभू बाबा और ज्योतिषी अशोक खरात के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। एजेंसी ने मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में अर्जी दाखिल कर खरात के खिलाफ ‘प्रोडक्शन वारंट’ जारी करने की मांग की है। फिलहाल वह नासिक जिले में पुलिस हिरासत में बंद है। प्रवर्तन निदेशालय ने यह मामला 6 अप्रैल को पीएमएलए  के तहत दर्ज किया था, जो नासिक पुलिस की FIR के आधार पर शुरू हुआ था।  एफआईआर में खरात पर जबरन वसूली, धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और कई महिलाओं को नशीला पदार्थ देकर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में उसके खिलाफ कई अन्य  एफआईआर भी दर्ज हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49635/mumbai-enforcement-directorate-steps-up-action-in-ashok-kharat-money"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t132258.346.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई  : </strong>प्रवर्तन निदेशालय  ने स्वयंभू बाबा और ज्योतिषी अशोक खरात के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। एजेंसी ने मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में अर्जी दाखिल कर खरात के खिलाफ ‘प्रोडक्शन वारंट’ जारी करने की मांग की है। फिलहाल वह नासिक जिले में पुलिस हिरासत में बंद है। प्रवर्तन निदेशालय ने यह मामला 6 अप्रैल को पीएमएलए  के तहत दर्ज किया था, जो नासिक पुलिस की FIR के आधार पर शुरू हुआ था।  एफआईआर में खरात पर जबरन वसूली, धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और कई महिलाओं को नशीला पदार्थ देकर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में उसके खिलाफ कई अन्य  एफआईआर भी दर्ज हैं।</p>
<p> </p>
<p>जानकारी के अनुसार, खरात को 18 मार्च को नासिक पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जब एक विवाहित महिला ने उस पर तीन साल से लगातार बलात्कार का आरोप लगाया था। इसके बाद अदालत ने उसे 4 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।  ईडी का आरोप है कि खरात ने एक संगठित जबरन वसूली नेटवर्क चलाया और ‘बेनामी’ बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की। एजेंसी का कहना है कि यह पैसा विभिन्न तरीकों से जमा किया गया और फिर इसे अलग-अलग खातों में घुमाया गया।</p>
<p>जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर पीड़ितों के दस्तावेजों का उपयोग कर एक ही दिन में 60 बैंक खाते खोले गए और उनके जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन किया गया। ईडी को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी हो सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि खरात से हिरासत में पूछताछ बेहद जरूरी है, ताकि इस कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों और अंतिम लाभार्थियों की पहचान की जा सके तथा पूरे पैसे के लेन-देन का पता लगाया जा सके।  ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी ने जबरन वसूली से प्राप्त धन और ‘पवित्र’ वस्तुओं की बिक्री से मिले पैसे का उपयोग अपने और अपने परिवार के नाम पर चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया। इस मामले की सुनवाई शनिवार (2 मई) को मुंबई की विशेष PMLA अदालत में होगी, जहां  ईडी  की याचिका पर फैसला लिया जा सकता है।<br /> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:24:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कोर्ट ने मूल अपराध के बंद होने के बाद MSCB मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोहित पवार और 16 अन्य को बरी कर दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की एक स्पेशल PMLA कोर्ट ने बुधवार को NCP (SP) विधायक रोहित पवार और 16 अन्य को महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक शुगर मिल्स घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बरी कर दिया, जिससे इस मामले की कार्यवाही प्रभावी रूप से समाप्त हो गई। यह मामला 2019 में प्रवर्तन निदेशालय  द्वारा दर्ज की गई एक ECIR से शुरू हुआ था। यह ECIR, बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों पर मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई एक FIR के बाद दर्ज की गई थी। आरोप 2005 और 2010 के बीच MSCB द्वारा सहकारी चीनी मिलों को दिए गए लोन से संबंधित थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49427/mumbai-court-acquits-rohit-pawar-and-16-others-in-mscb"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-23t194909.035.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई की एक स्पेशल PMLA कोर्ट ने बुधवार को NCP (SP) विधायक रोहित पवार और 16 अन्य को महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक शुगर मिल्स घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बरी कर दिया, जिससे इस मामले की कार्यवाही प्रभावी रूप से समाप्त हो गई। यह मामला 2019 में प्रवर्तन निदेशालय  द्वारा दर्ज की गई एक ECIR से शुरू हुआ था। यह ECIR, बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों पर मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई एक FIR के बाद दर्ज की गई थी। आरोप 2005 और 2010 के बीच MSCB द्वारा सहकारी चीनी मिलों को दिए गए लोन से संबंधित थे। आरोप था कि इन मिलों को उनकी असल कीमत से कम दाम पर बेच दिया गया, जिससे बैंक को 5,000 करोड़ रुपये से लेकर 25,000 करोड़ रुपये तक का भारी नुकसान हुआ।</p>
<p> </p>
<p> 2023 और 2025 के बीच ED द्वारा दायर चार्जशीट में जिन लोगों के नाम शामिल थे, उनमें रोहित पवार, कुछ कृषि और चीनी कंपनियाँ, और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियाँ शामिल थीं। एजेंसी ने दावा किया था कि आरोपी चीनी मिलों को उनकी असल कीमत से कम दाम पर खरीदने में शामिल थे, और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज किए गए बयानों से उनकी संलिप्तता और इरादे का पता चलता है। हालाँकि, मामला तब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया, जब इसका मूल अपराध  ही खत्म हो गया। 27 फरवरी, 2026 को मुंबई की एक कोर्ट ने EOW द्वारा (2020 और 2024 में) दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही FIR प्रभावी रूप से बंद हो गई और जाँच के दायरे में आए सभी लोगों को राहत मिल गई, जिनमें अजित पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार से जुड़ी कंपनियाँ भी शामिल थीं।</p>
<p>इस घटनाक्रम के आधार पर, रोहित पवार और अन्य सह-आरोपियों ने खुद को बरी करने की माँग की। उन्होंने तर्क दिया कि जब मूल अपराध ही मौजूद नहीं है, तो PMLA के तहत कार्यवाही जारी नहीं रह सकती। ED ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि कोर्ट अभी भी मामले की जाँच उसके गुण-दोष के आधार पर कर सकती है। ED ने यह भी तर्क दिया कि रोहित पवार, जिनका नाम EOW की FIR में आरोपी के तौर पर शामिल नहीं था, उन्हें FIR बंद होने का सीधा लाभ नहीं मिलना चाहिए। ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:50:47 +0530</pubDate>
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