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                <title>legal - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>legal RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता के खिलाफ अभद्र पोस्ट पर कानूनी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन के नाम से सोशल मीडिया पर झूठी, भ्रामक और मानहानिकारक पोस्ट प्रसारित किए जाने के संदर्भ में शनिवार को महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने 14 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला किया है। साइबर पुलिस की टीम ने संबंधित अकाउंटधारकों की पहचान करने, डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने तथा पोस्ट के स्रोत का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50850/legal-action-taken-against-state-chief-spokesperson-of-mumbai-bjp"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-20t133113.268.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन के नाम से सोशल मीडिया पर झूठी, भ्रामक और मानहानिकारक पोस्ट प्रसारित किए जाने के संदर्भ में शनिवार को महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने 14 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला किया है। साइबर पुलिस की टीम ने संबंधित अकाउंटधारकों की पहचान करने, डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने तथा पोस्ट के स्रोत का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।</p>
<p> </p>
<p>भाजपा के प्रदेश सोशल मीडिया सह-संयोजक निखिल भामरे ने पत्रकारों को बताया कि कि मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन का नाम, फोटो तथा भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता की फर्जी पहचान का उपयोग करते हुए फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक पोस्ट प्रसारित की गई थीं।<br />शिकायत में कहा गया है कि इन फर्जी पोस्टों के माध्यम से नवनाथ बन की छवि धूमिल करने, समाज में उनके प्रति गलतफहमी पैदा करने तथा सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया।</p>
<p>एफआईआर में 14 अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट्स का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जिनके माध्यम से संबंधित पोस्ट प्रसारित होने की बात सामने आई है। उनकी शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 319(2), 356(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान यदि अन्य तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50850/legal-action-taken-against-state-chief-spokesperson-of-mumbai-bjp</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 13:32:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : रेड सिग्नल तोड़ा और कुचल दिया... 8 साल चली कानूनी जंग, अब हिट-एंड-रन के मुजरिम भरेंगे 1 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सड़क पर एक पल की लापरवाही किसी की पूरी जिंदगी छीन सकती है. मुंबई में 2018 का एक ऐसा ही हिट-एंड-रन मामला अब 8 साल बाद अपने अंजाम तक पहुंचा है, जहां एक डेंटल इंटर्न की मौत ने न्याय व्यवस्था की लंबी प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने के सवाल को फिर से सामने ला दिया है. रेड सिग्नल तोड़कर तेज रफ्तार में आई कार ने न सिर्फ एक 25 साल की युवती के सपनों को खत्म किया, बल्कि उसके परिवार को भी गहरे सदमे</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48789/mumbai-red-signal-broken-and-crushed-legal-battle-lasted-for"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images-(4)sdfs.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>सड़क पर एक पल की लापरवाही किसी की पूरी जिंदगी छीन सकती है. मुंबई में 2018 का एक ऐसा ही हिट-एंड-रन मामला अब 8 साल बाद अपने अंजाम तक पहुंचा है, जहां एक डेंटल इंटर्न की मौत ने न्याय व्यवस्था की लंबी प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने के सवाल को फिर से सामने ला दिया है. रेड सिग्नल तोड़कर तेज रफ्तार में आई कार ने न सिर्फ एक 25 साल की युवती के सपनों को खत्म किया, बल्कि उसके परिवार को भी गहरे सदमे में डाल दिया. अब कोर्ट का फैसला इस बात का संकेत है कि कानून देर से सही लेकिन जवाबदेही तय करता है और लापरवाही की कीमत चुकानी ही पड़ती है.</p>
<p> </p>
<p>यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार ड्राइविंग की गंभीर चेतावनी भी है. अकसर हादसों में पीड़ित पर ही सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन इस केस में ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया कि गलती पूरी तरह ड्राइवर की थी.   रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल फोन का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश भी कोर्ट में टिक नहीं पाई. 8 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्याय का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है.<br />मुंबई के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी ड्राइवर, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को मिलकर करीब 98.5 लाख रुपए (ब्याज सहित लगभग 1 करोड़ रुपए) का मुआवजा देने का आदेश दिया है.</p>
<p>डिपाली लहामटे जो नायर हॉस्पिटल डेंटल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रही थीं, 24 मार्च 2018 को अपने भाई के कॉन्वोकेशन में जा रही थीं, तभी एक तेज रफ्तार होंडा सिटी कार ने उन्हें टक्कर मार दी. इस हादसे में उन्हें गंभीर सिर की चोट आई और छह दिन बाद उनकी मौत हो गई. यह घटना हिट-एंड-रन के रूप में सामने आई थी, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया था.</p>
<p>मामले की सुनवाई के दौरान ड्राइवर और बीमा कंपनी ने यह दलील दी कि पीड़िता मोबाइल फोन में व्यस्त थी और अचानक सड़क पर आ गई. लेकिन ट्रिब्यूनल ने गवाह के बयान को आधार मानते हुए इस दलील को खारिज कर दिया. गवाह ने बताया कि कार ने रेड सिग्नल पार किया और तेज रफ्तार में आकर युवती को टक्कर मारी. कोर्ट ने साफ कहा कि यह पूरी तरह ड्राइवर की लापरवाही थी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:32:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : बांग्लादेशी के नाम पर लीगल फेरीवालों को परेशान करना बंद करें, बीएमसी और पुलिस कर्मियों को संजय निरुपम ने चेताया </title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिंदे सेना के नेता व पूर्व सांसद संजय निरुपम ने मुंबई पुलिस और बीएमसी कर्मियों को चेताया है कि वे बांग्लादेशी के नाम पर कानूनी फेरीवालों को परेशान करना बंद करें। अगर उन्हें सचमुच बांग्लादेशी को पकड़ना है तो वे लेदर और टेक्सटाइल फैक्ट्रियों, जरी (कढ़ाई) इंडस्ट्री और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन स्थल पर जाकर जांच पड़ताल करें। आज फेरीवालों के साथ जो हो रहा है उसकी संपूर्ण जानकारी जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को देंगे। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48749/sanjay-nirupam-warns-bmc-and-police-personnel-to-stop-harassing"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-27t132219.206.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>शिंदे सेना के नेता व पूर्व सांसद संजय निरुपम ने मुंबई पुलिस और बीएमसी कर्मियों को चेताया है कि वे बांग्लादेशी के नाम पर कानूनी फेरीवालों को परेशान करना बंद करें। अगर उन्हें सचमुच बांग्लादेशी को पकड़ना है तो वे लेदर और टेक्सटाइल फैक्ट्रियों, जरी (कढ़ाई) इंडस्ट्री और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन स्थल पर जाकर जांच पड़ताल करें। आज फेरीवालों के साथ जो हो रहा है उसकी संपूर्ण जानकारी जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को देंगे। </p>
<p> </p>
<p><strong>फेरीवालों के संबंध में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला अहम</strong><br />गुरुवार को मुंबई मराठी जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में निरुपम ने कहा कि मुंबई पुलिस और बीएमसी मिलकर पिछले 2 महीनों में मुंबई के फेरीवालों पर कार्रवाई कर रहे हैं। क्या वे बताएंगे कि अब तक कितने गैर-कानूनी बांग्लादेशी हॉकरों के खिलाफ कार्रवाई की है ? उन्हें इसकी जानकारी सबूत के साथ सार्वजनिक करनी चाहिए। फेरीवालों के संबंध में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला अहम और ऐतिहासिक है। </p>
<p><strong>स्ट्रीट वेंडर एक्ट अभी तक लागू क्यों नहीं</strong><br />बॉम्बे हाई कोर्ट का ऑर्डर देखने के बाद बीएमसी और मुंबई पुलिस को हॉकरों के बारे में उचित हल निकालना चाहिए। आखिर स्ट्रीट वेंडर एक्ट अभी तक लागू क्यों नहीं किया गया ? सन 2014 के एक्ट के मुताबिक, टाउन वेंडिंग कमेटी बनाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से बीएमसी की है। कोर्ट के आदेश के बावजूद बीएमसी ने इसे नजरअंदाज किया। आज 12 साल बाद भी कमेटी नहीं बनी है। </p>
<p><strong>संजय निरुपम ने लगाए आरोप</strong><br />शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि असल में बीएमसी और पुलिस चाहती हैं कि हॉकरों की समस्या ऐसे ही बनी रहे। फेरीवालों को टारगेट करना गलत है और ईमानदारी से बिजनेस करने वाले हजारों परिवारों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:23:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कानूनी अधिकार के अभाव के बावजूद अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में सरकारी हस्तक्षेप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोई कानूनी अधिकार न होने के बावजूद, राज्य के शिक्षा अधिकारी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति में दखल दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते नागपुर हाई कोर्ट की बेंच ने शिक्षा अधिकारियों के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48588/mumbai-government-interference-in-minority-educational-institutions-despite-lack-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-21t120136.883.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>कोई कानूनी अधिकार न होने के बावजूद, राज्य के शिक्षा अधिकारी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति में दखल दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते नागपुर हाई कोर्ट की बेंच ने शिक्षा अधिकारियों के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है।</p>
<p> </p>
<p>कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस फैसले की एक प्रति विदर्भ के सभी शिक्षा अधिकारियों को भेजी जाए, ताकि उनमें जागरूकता पैदा हो सके। यह प्रति सरकारी वकील के कार्यालय को सौंप दी गई है।</p>
<p>अकोला ज़िले के पातूर स्थित 'शाहबाबू उर्दू शिक्षण संस्थान' को 17 जून, 2005 को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 30 (1) के अनुसार, सभी धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उनका प्रबंधन करने का अधिकार है। इसी बीच, शिक्षा अधिकारियों ने शाहबाबू उर्दू शिक्षण संस्थान में तीन जूनियर क्लर्कों की नियुक्ति को मंज़ूरी देने और उन्हें 'शालार्थ आईडी' जारी करने से इनकार कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:02:41 +0530</pubDate>
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