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                <title>नई दिल्ली : अब एआई जनरेटेड कंटेंट पर लगाना होगा वाटरमार्क, सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए जारी किया आदेश</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के के लिए आदेश जारी किया कि वे एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाएं, गैरकानूनी, यौन शोषण वाली या धोखाधड़ी वाली एआई सामग्री रोकने में मदद मिल सके। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि ये प्लेटफॉर्म एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल (वाटरमार्क) लगाएं। ऐसी सामग्री में पहचान के लिए संकेत जरूर होने चाहिए। सरकार ने कहा कि एक बार एआई लेबल या मेटा डाटा लगाने के बाद उसे हटाया या दबाया नहीं जा सकता।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47635/new-delhi-now-watermark-will-have-to-be-placed-on"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-10t175737.654.jpg" alt=""></a><br /><div> </div>
<div><strong>नई दिल्ली : </strong>सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के के लिए आदेश जारी किया कि वे एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाएं, गैरकानूनी, यौन शोषण वाली या धोखाधड़ी वाली एआई सामग्री रोकने में मदद मिल सके। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि ये प्लेटफॉर्म एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल (वाटरमार्क) लगाएं। ऐसी सामग्री में पहचान के लिए संकेत जरूर होने चाहिए। सरकार ने कहा कि एक बार एआई लेबल या मेटा डाटा लगाने के बाद उसे हटाया या दबाया नहीं जा सकता।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>सरकार ने कहा कि अब मानव निर्मित या कृत्रिम रूप से बनाई गई जानकारी को स्पष्ट रूप से पहचान योग्य लेबल (वाटरमार्क) के साथ दिखाना अनिवार्य होगा। इसमें ऑडियो, वीडियो, फोटो या ग्राफिक सहित किसी भी डिजिटल सामग्री को शामिल किया गया है, जिसे कंप्यूटर या किसी संसाधन से बनाया गया, संशोधित किया गया या बदला गया हो।  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी यूजर ऐसी सामग्री का गलत इस्तेमाल न करे। अगर कोई यूजर गैरकानूनी, अश्लील, धोखाधड़ी या बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बनाए या साझा करे, तो प्लेटफॉर्म्स उसे रोकने के लिए स्वचालित (ऑटोमेटेड) तकनीक का इस्तेमाल करेंगे।</div>
<div> </div>
<div>प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को कम से कम हर तीन महीने में चेतावनी देनी होगी कि नियमों का उल्लंघन करने पर दंड या सजा हो सकती है। यदि कोई नियम तोड़े, तो उसका खाता निलंबित किया जा सकता है या सामग्री को हटाया जा सकता है। सरकार ने समयसीमा भी घटा दी है। पहले 36 घंटे में कार्रवाई करनी थी, अब तीन घंटे में सूचना देना अनिवार्य है। उल्लंघन होने पर प्लेटफॉर्म्स को तुरंत उचित कार्रवाई करनी होगी। यह कदम डिजिटल मीडिया में सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इससे यूजर्स को यह पता चलेगा कि कौन-सी जानकारी वास्तविक है और कौन-सी कृत्रिम रूप से बनाई गई है।</div>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 17:58:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>बीएमसी बना रही खास योजना... कचरे से पैदा होगी 100 मेगावॉट बिजली</title>
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                        <![CDATA[<p>मुंबई का 90 पर्सेंट कचरा कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड में फेंका जाता है। देवनार पर कचरे का बोझ कम करने के लिए कांजुरमार्ग में बायोरिएक्टर पद्धति से कचरे को डिस्पोजल किया जाता है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/26083/bmc-is-making-a-special-plan----100-mw-electricity-will-be-generated-from-waste"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-11/download-(13)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> मुंबई में कचरे की बढ़ती समस्या और डंपिंग ग्राउंड की वजह से आसपास के क्षेत्रों में फैलती दुर्गंध से आने वाले समय में मुंबईकरों को छुटकारा मिल सकता है। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार की मदद से बीएमसी मुंबई में कचरे से 100 मेगावॉट बिजली उत्पादन की योजना बना रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुंबई में प्रतिदिन लगभग 7 हजार मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है, जो देवनार और कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड में फेंका जाता है। उस कचरे से करीब 100 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने बताया कि पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ विडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई बैठक में मुंबई में कचरे की समस्या से निपटने के लिए उससे बिजली उत्पादन करने पर सहमति बनी। उन्होंने बताया कि देवनार और कांजुरमार्ग में फेंके जाने वाले कचरे का वेस्ट कैरेक्टराइजेशन टेस्ट किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पता चलेगा कि कितना कचरा बिजली उत्पादन के योग्य है। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए एक समिति के गठन का प्रस्ताव है, जिसमें भारत सरकार के सेक्रेटरी, राज्य के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बीएमसी कमिश्नर और बीएमसी के अडिशनल कमिश्नर शामिल होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यह कमिटी मुंबई में मुलुंड, कांजुरमार्ग और देवनार में स्थित डंपिंग ग्राऊंड से हजारों टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से आधुनिक तकनीक के जरिए कैसे निपटाया जाए, इस पर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसी के तहत कचरे से बिजली उत्पादन बढ़ाने का विकल्प भी शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी अधिकारी के अनुसार देवनार डंपिंग ग्राउंड में इस प्लांट से पहले चरण में 600 मीट्रिक टन कचरे से बिजली का उत्पादन होगा। इससे प्रतिदिन 6 मेगावाट बिजली मिलेगी। बीएमसी को उम्मीद है कि वर्ष 2025-26 तक इस प्लांट से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भविष्य में प्रॉजेक्ट को 1800 मीट्रिक कचरे में तब्दील कर बिजली उत्पादन की योजना है, जिससे प्रतिदिन करीब 10 मेगावॉट तक बिजली उत्पादन किया जा सकेगा। कचरे से पैदा होने वाली बिजली का कुछ हिस्सा उसी प्लांट में इस्तेमाल होगा। देवनार में रोजाना 1550 मीट्रिक टन कचरा फेंका जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई का 90 पर्सेंट कचरा कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड में फेंका जाता है। देवनार पर कचरे का बोझ कम करने के लिए कांजुरमार्ग में बायोरिएक्टर पद्धति से कचरे को डिस्पोजल किया जाता है।<br /><br />देश के कई शहरों में कचरे से बिजली उत्पादन के प्लांट लगाए गए हैं। कुछ प्लांट में बिजली पैदा भी हो रही है, जबकि कुछ प्रोसेस में हैं। राजस्थान के जोधपुर में करीब 8 साल पहले कचरे से बिजली उत्पादन शुरू हुआ। इसी तरह कर्नाटक के बेंगलुरु में वर्ष 2021 में कचरे से बिजली उत्पादन का प्लांट शुरू हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">1 अगस्त, 2023 को पीएम नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड में 700 मीट्रिक टन कचरे से 14 मेगावॉट बिजली उत्पादन प्लांट का उद्‌घाटन किया था। एक अनुमान के मुताबिक देश में हर साल 6.5 करोड़ टन कचरे का उत्पादन होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका उपयोग कर सालों 65000 मेगावॉट बिजली पैदा की जा सकती है। मनपा क्षेत्र में 75-80 प्रतिशत कचरा एकत्र होता है, जिसमें 22-28 प्रतिशत कचरे का ही प्रोसेस होता है। एक किलो वॉट बिजली उत्पादन के लिए एक टन कचरा पर्याप्त माना गया है।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Nov 2023 10:22:20 +0530</pubDate>
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                <title>आर्थिक राजधानी मुंबई में अब कचरे से बनेगी बिजली... इस प्रॉजेक्ट पर 620 करोड़ रुपये खर्च होंगे</title>
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                        <![CDATA[देवनार डंपिंग ग्राउंड में कचरे से बिजली उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है। ग्राउंड में बिजली प्लांट का काम शुरू हो गया है, जो 2026 में पूरा होगा। यानी 3 साल बाद मुंबई में कचरे से बिजली उत्पादन शुरू हो सकता है। बीएमसी इस प्रॉजेक्ट के निर्माण पर 620 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, वहीं अगले 15 साल तक प्रॉजेक्ट के मेंटेनेंस पर 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बीएमसी घनकचरा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में इस प्लांट में 600 मीट्रिक टन कचरे से बिजली का उत्पादन होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/18329/electricity-will-now-be-generated-from-waste-in-the-financial-capital-mumbai--rs-620-crore-will-be-spent-on-this-project"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-02/8552.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई: </strong>देवनार डंपिंग ग्राउंड में कचरे से बिजली उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है। ग्राउंड में बिजली प्लांट का काम शुरू हो गया है, जो 2026 में पूरा होगा। यानी 3 साल बाद मुंबई में कचरे से बिजली उत्पादन शुरू हो सकता है। बीएमसी इस प्रॉजेक्ट के निर्माण पर 620 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, वहीं अगले 15 साल तक प्रॉजेक्ट के मेंटेनेंस पर 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बीएमसी घनकचरा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में इस प्लांट में 600 मीट्रिक टन कचरे से बिजली का उत्पादन होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे प्रतिदिन 6 मेगावाट बिजली मिलेगी। इस प्रॉजेक्ट पर 1020 करोड़ रुपये बीएमसी खर्च कर रही है। अधिकारी ने बताया कि प्रॉजेक्ट को गति देने के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया था। जिस पर 49 करोड़ रुपये बीएमसी ने खर्च किए गए। कंसल्टेंट की देखरेख में प्लांट निर्माण का शुरू हुआ है। देवनार डंपिंग ग्राउंड पर ही बीएमसी दूसरा प्रॉजेक्ट भी शुरू करेगी। दूसरे चरण में 1200 मीट्रिक टन कचरे से बिजली उत्पादन की योजना है। भविष्य में प्रॉजेक्ट को 1800 मीट्रिक कचरे में तब्दील कर बिजली उत्पादन होगा। इससे प्रतिदिन करीब 10 मेगावॉट तक बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। यह योजना करीब एक दशक से लटकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">2014 में भी पीपीपी मॉडल से परियोजना शुरू करने के लिए टेंडर मंगाया गया था, तब 6 कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाया थी। उसमें से 4 को फाइनल किया गया, लेकिन इन कंपनियों में अनुभव की कमी थी और कई शर्तों को पूरा करने में असमर्थ थीं। इसके कारण बीएमसी ने 2015 में इस प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। इसके बाद 2016 में एक कंपनी को सलाहकार नियुक्त किया गया, जिसके बाद टेंडर मंगाया गया, लेकिन अंतिम तारीख 7 नवंबर 2017 तक एक भी निविदा नहीं आई। उसके बाद बिजली उत्पादन के इस प्रॉजेक्ट की क्षमता 3 हजार से घटाकर 6 सौ मीट्रिक टन का कर दिया गया। फिर साल 2018 में नया टेंडर मंगाया गया। इसमें कुल 3 कंपनियों ने रुचि दिखाई। उसमें से चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्राइवेट लिमिटेड को इस परियोजना के लिए फाइनल किया गया।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Feb 2023 11:47:39 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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