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                <title>deprived - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>मुंबई में 'म्हाडा' के विजेता घर से वंचित... </title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">'म्हाडा' के मुंबई बिल्डिंग रिपेयर एंड रिकंस्ट्रक्शन (आरआर) बोर्ड ने बहुत धूमधाम से दिसंबर 2023 को 265 'मास्टर लिस्ट' निवासियों का पहला कम्प्यूटरीकृत ड्रा आयोजित किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पिछले 40 वर्षों से ट्रांजिट शिविरों में रहने वाले निवासियों को उन्हें उनका वाजिब आवास मिले.</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/32151/mhada-winners-in-mumbai-are-deprived-of-their-homes"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-07/dfttttt44444444.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई: </strong>'म्हाडा' के मुंबई बिल्डिंग रिपेयर एंड रिकंस्ट्रक्शन (आरआर) बोर्ड ने बहुत धूमधाम से दिसंबर 2023 को 265 'मास्टर लिस्ट' निवासियों का पहला कम्प्यूटरीकृत ड्रा आयोजित किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पिछले 40 वर्षों से ट्रांजिट शिविरों में रहने वाले निवासियों को उन्हें उनका वाजिब आवास मिले.</p>
<p style="text-align:justify;">उस समय 'म्हाडा' की ओर से दावा किया गया था कि इस ड्रा के कारण 'मास्टर लिस्ट' में घरों का वितरण पारदर्शी और गतिशील होगा. हालाँकि, 'म्हाडा' के उपाध्यक्ष संजीव जयसवाल को शिकायत मिली कि कुछ आवेदकों ने झूठे दस्तावेज़ जमा करके धोखाधड़ी की है, इसलिए उपाध्यक्ष ने 'आरआर' बोर्ड को लॉटरी में सभी विजेताओं की पात्रता को फिर से सत्यापित करने और घर देने का आदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पात्र निवासी. लेकिन पिछले छह माह से विजेताओं के दस्तावेज सत्यापन जारी रहने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि 'मास्टर लिस्ट' के विजेता अभी भी मकानों से वंचित हैं। 'आरआर' बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में अधिगृहीत इमारतों के कब्जेदारों को बेदखली का नोटिस देकर खाली करा लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">संकीर्ण भूखंड, आरक्षण सड़क के चौड़ीकरण आदि के कारण उनके मूल भवन का पुनर्विकास संभव नहीं है। इसके अलावा, उपयोग योग्य इमारतों का पुनर्निर्माण किया गया है। लेकिन कम मकान बनाये गये हैं, ऐसे वंचित मूल निवासियों को बोर्ड द्वारा पुनर्विकसित भवन में स्थायी घर नहीं दिया गया है, और उनके उत्तराधिकारी ट्रांजिट कैंप या अन्यत्र रह रहे हैं, ऐसे मूल निवासियों या उनके उत्तराधिकारियों के आवेदन पर 'फ्लैट दिया जाना चाहिए' मास्टर लिस्ट' आमंत्रित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका मतलब है 'मास्टर लिस्ट', लेकिन उपराष्ट्रपति जयसवाल के स्पष्ट आदेशों के बावजूद 'मास्टर लिस्ट' की धीमी कार्यप्रणाली के कारण अब मास्टर लिस्ट में शामिल निवासियों को कंप्यूटरीकृत लॉटरी जीतने पर भी उनके आवास से वंचित होने की नौबत आ गई है। आरआर' बोर्ड. 'आरआर' बोर्ड के सह-मुख्य कार्यकारी ने बताया कि जल्द ही दस्तावेज सत्यापन का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद विजेताओं को स्वीकृति पत्र भेज दिया जाएगा.</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 21:20:54 +0530</pubDate>
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                <title>खसरे के टीके से ११ लाख बच्चों का वंचित</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, </strong>पिछले साल खसरे के पहले और महत्वपूर्ण टीके से ११ लाख बच्चों का वंचित रहना है। इसका खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एक रिपोर्ट में हुआ है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/26226/11-lakh-children-deprived-of-measles-vaccine"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-11/khasrassqw.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली, </strong>पिछले साल खसरे के पहले और महत्वपूर्ण टीके से ११ लाख बच्चों का वंचित रहना है। इसका खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एक रिपोर्ट में हुआ है। उल्लेखनीय है कि खसरे के टीके की दो खुराक जीवनभर के लिए ९७ फीसदी सुरक्षा प्रदान करती हैं। एक खुराक से सुरक्षा कमजोर होने की संभावना है। इस बीमारी में अमूमन तेज बुखार, खांसी, नाक बहना और लाल चकत्ते होते हैं। हालांकि, गंभीर लक्षण जैसे दिमाग पर सूजन, निमोनिया और सांस लेने में समस्या और गंभीर दस्त जैसी जटिलताएं जानलेवा साबित हो सकती हैं। जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट में हिंदुस्थान को उन १० देशों में शामिल किया गया है, जहां ऐसे बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, जिन्हें पहला टीका नहीं मिला है। इतना ही नहीं भारत उन ३७ देशों में भी शामिल है, जहां इस बीमारी का बड़ा प्रकोप देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, साल २०२२ में देशभर में खसरे के ४०,९६७ मामले दर्ज हुए थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर कोविड महामारी के दौरान खसरा टीकाकरण २००८ के बाद से सबसे निचले स्तर पर गिर गया, जिससे २०२२ में मामलों में १८ फीसदी और मौतों में ४३ फीसदी की वृद्धि हुई।<br />रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर ३३ मिलियन बच्चे या तो दोनों खुराक या दूसरी खुराक लेने से चूक गए। मुख्य रूप से पांच राज्यों बिहार, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में खसरे के मामलों में वृद्धि हुई। साल २०२२ में महाराष्ट्र में खसरे से १३ मौतें हुई थीं।<br />केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए अनुमानित ११ लाख बच्चों के खसरे का पहला टीका लेने से चूकने की रिपोर्ट को गलत करार दिया है। ये रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और सच्ची तस्वीर नहीं दर्शाती। </p>]]>
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                <pubDate>Fri, 24 Nov 2023 10:43:07 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>आरक्षण के बाद भी इसके लाभ से वंचित ओबीसी...मार्च अंत तक केंद्र को अपनी रिपोर्ट दे सकता है रोहणी आयोग</title>
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                        <![CDATA[आरक्षण के बाद भी इसके लाभ से वंचित ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की डेढ़ हजार से ज्यादा जातियों को हालांकि उनका हक कब मिलेगा यह कहना अभी मुश्किल है, लेकिन इन जातियों की पड़ताल करने और उन्हें आरक्षण का समुचित लाभ दिलाने के लिए जस्टिस जी. रोहणी की अगुवाई में गठित आयोग जल्द ही अपनी रिपोर्ट दे सकता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/18182/obc-deprived-of-its-benefits-even-after-reservation----rohani-commission-can-give-its-report-to-the-center-by-the-end-of-march"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-02/download-(2)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली : </strong>आरक्षण के बाद भी इसके लाभ से वंचित ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की डेढ़ हजार से ज्यादा जातियों को हालांकि उनका हक कब मिलेगा यह कहना अभी मुश्किल है, लेकिन इन जातियों की पड़ताल करने और उन्हें आरक्षण का समुचित लाभ दिलाने के लिए जस्टिस जी. रोहणी की अगुवाई में गठित आयोग जल्द ही अपनी रिपोर्ट दे सकता है। जिस तरह आयोग अपने काम-काज को समेटने में जुटा हुआ है, उससे साफ संकेत मिल रहे है कि मार्च अंत तक वह इसे लेकर अपनी रिपोर्ट दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा समय में ओबीसी की केंद्रीय सूची में करीब 26 सौ जातियां शामिल है। खासबात यह है कि ओबीसी की पिछड़ी जातियों का पता लगाने के लिए केंद्र सरकार ने रोहणी आयोग का गठन वर्ष 2017 में किया था। जिसमें उसे कुछ हफ्तों में ही इस संबंध में अपनी रिपोर्ट देनी थी। हालांकि यह काम समय से पूरा नहीं हो पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके बाद से आयोग को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। अब तक करीब 14 बार उसे विस्तार मिल चुका है। वैसे तो नए विस्तार के बाद आयोग का कार्यकाल जुलाई 2023 तक के लिए बढ़ गया है, लेकिन अब वह अपना काम और खींचना नहीं चाहता है। आयोग से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य के मुताबिक आयोग ने अपना काम पूरा कर लिया है। अब सिर्फ रिपोर्ट को जांचने का काम चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ओबीसी की पिछड़ी जातियों को आरक्षण का पूरा लाभ दिलाने के लिए ओबीसी को मिलने वाले 27 फीसद आरक्षण को चार श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव किया गया है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में पहले से ही ओबीसी जातियों की चार श्रेणियां हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल केंद्रीय सूची के आधार पर ओबीसी आरक्षण के उप वर्गीकरण का जो प्रस्ताव किया गया है, उसमें इसकी चार श्रेणियां तैयार की गई है। इनमें बहुसंख्यक जातियों को ज्यादा हिस्सा भी दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक जो चार श्रेणियां प्रस्तावित की गई है, वह दो, छह, नौ और दस प्रतिशत तय की गई है। दावा है यह फार्मूला वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                <pubDate>Sat, 18 Feb 2023 21:31:10 +0530</pubDate>
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