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                <title>Terror - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Terror RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गाजियाबाद  : आतंकी मॉड्यूल का सामने आया मुंबई कनेक्शन, आईएसआई एजेंट महिला ने बनाया स्लीपर सेल नेटवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[<p>छह जासूसों के पकड़े जाने के बाद उनका कनेक्शन खंगाल रही सुरक्षा एजेंसियों को अब आतंकी माड्यूल का मुंबई कनेक्शन मिला है। सूत्रों के मुताबिक मुंबई पुलिस के लिए मुखबिरी करने वाली एक महिला ने आइएसआइ एजेंट के संपर्क में आकर देश इंटरनेट मीडिया के माध्यम से स्लीपर सेल का पूरा नेटवर्क खड़ा किया। महिला के संपर्क में सबसे पहले मुख्य आरोपित सुहेल आया था। इसके बाद महिला ने पूरा नेटवर्क खड़ा किया। वहीं इस मामले में 14 अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। रिमांड पर लिए गए छह आरोपितों से रा सहित अन्य खुफिया एजेंसी ने पूछताछ की है। आरोपितों से कई अहम जानकारी हासिल हुई हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48557/mumbai-connection-of-ghaziabad-terrorist-module-exposed-isi-agent-woman"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-19t185512.650.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>गाजियाबाद : </strong>छह जासूसों के पकड़े जाने के बाद उनका कनेक्शन खंगाल रही सुरक्षा एजेंसियों को अब आतंकी माड्यूल का मुंबई कनेक्शन मिला है। सूत्रों के मुताबिक मुंबई पुलिस के लिए मुखबिरी करने वाली एक महिला ने आइएसआइ एजेंट के संपर्क में आकर देश इंटरनेट मीडिया के माध्यम से स्लीपर सेल का पूरा नेटवर्क खड़ा किया। महिला के संपर्क में सबसे पहले मुख्य आरोपित सुहेल आया था। इसके बाद महिला ने पूरा नेटवर्क खड़ा किया। वहीं इस मामले में 14 अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। रिमांड पर लिए गए छह आरोपितों से रा सहित अन्य खुफिया एजेंसी ने पूछताछ की है। आरोपितों से कई अहम जानकारी हासिल हुई हैं।</p>
<p> </p>
<p>सूत्रों ने बताया कि पूर्व में महिला मुंबई पुलिस के लिए मुखबिरी करती थी। उसे मुखबिरी के दांव पेच बखूबी आते हैं। बदले में उसे पैसा मिलता था। महिला की मुखबिरी से वहां की पुलिस ने कई बड़े गैंगों पर कार्रवाई की थी। महिला को कई गैंग के काम करने के बारे में अहम जानकारी थी। इस दौरान महिला आईएसआई के संपर्क में आ गई। </p>
<p>महिला को अधिक पैसे कमाने के लालच मुंबई पुलिस की मुखबिरी बंद कर दी। इसके बाद महिला ने आइएसआइ के लिए जासूसी शुरू कर दी। वह आइएसआइ के निर्देश पर काम करने लगी। इंटरनेट मीडिया पर युवाओं से संपर्क करना शुरू कर दिया। लोगों को बरगालकर नेटवर्क से जोड़ने लगी।</p>
<p><strong>यह वीडियो भी देखें</strong><br />उसी के इशारे पर 150 लोग वाट्सएप ग्रुप पर जोड़े गए थे। यह महिला एक शहर में नहीं ठहरती है। युवाओं को जोड़ने के लिए उसने विभिन्न शहरों में मीटिंग की। युवाओं को बरगलाया और उन्हें मोटा पैसा कमाने का लालच दिया।</p>
<p><strong>रॉ, आईबी और एटीएस कर रही पूछताछ</strong><br />पकड़े गए सभी आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। बुधवार को रा, आइबी और एटीएस ने पूछताछ की। सुरक्षा एजेंसियों अब यह पता लगाने में जुटीं हैं कि कैमरे की फुटेज को कहां-कहां देखा गया था। आइपी एड्रेस निकाला गया है। वहीं कैमरे बनाने वाली कंपनी से भी संपर्क किया गया है। जिससे कैमरे की विशेषता के बारे में गहनता से पता किया जा सके।</p>
<p><strong>हिरासत में लिए गए 14 संदिग्धों में दो कोरियर वाले शामिल</strong><br />पुलिस ने जिन 14 संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया हैं उनमें दो कोरियर वाले भी शामिल हैं। कोरियर वालों से भी खुफिया एजेंसियों ने पूछताछ की है। माना जा रहा है कि आरोपित कोरियर वालों से संदिग्ध सामान मंगवाया था। इन कोरियर वालों को कितना पैसा दिया गया था, इसकी जांच की जा रही है। पूर्व में ये कोरियर वालों ने क्या-क्या सामान उपलब्ध कराया था। वहीं एटीएस के उच्चाधिकारी भी बुधवार शाम को गाजियाबाद पहुंचे। उन्होंने भी आराेपितों से पूछताछ की।</p>
<p><strong>विदेश से डायरेक्ट नहीं आता था पैसा</strong><br />पाकिस्तानों हैंडलरों ने भारत में म्यूल बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों से आरोपितों के पास रकम आती थी। म्यूल खातों का प्रयोग चोरी, फ्राड या साइबर अपराध से मिले पैसे को इधर-उधर किया जाता है। खाता धारक को अक्सर इसकी पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे खातों का उपयोग मनी लान्ड्रिंग में होता है। आरोपितों के पास जासूसी करने के बदले में सीधा विदेश से पैसा नहीं आता था। यह पैसा म्यूल खातों से ट्रांसफर होता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:57:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगानिस्तान में जंग और जम्मू में मचाया आतंक... किश्तवाड़ एनकाउंटर में मारा गया जैश आतंकी आदिल था अफगान रिटर्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p>घने जंगलों में 4 फरवरी को भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में मारे गए जैश ए मोहम्मद के आतंकी स्वारुद्दीन ख़ान उर्फ आदिल को लेकर खुफिया एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख़्वाह के कोहाट जिले का रहने वाला आदिल भारत में घुसपैठ से पहले अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो की सेनाओं के खिलाफ हक्कानी नेटवर्क के साथ मिलकर जैश ए मोहम्मद की तरफ़ से लड़ा था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47583/war-in-afghanistan-and-terror-in-jammu-jaish-terrorist-adil"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-08t182715.077.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>किश्तवाड़ : </strong>घने जंगलों में 4 फरवरी को भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में मारे गए जैश ए मोहम्मद के आतंकी स्वारुद्दीन ख़ान उर्फ आदिल को लेकर खुफिया एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख़्वाह के कोहाट जिले का रहने वाला आदिल भारत में घुसपैठ से पहले अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो की सेनाओं के खिलाफ हक्कानी नेटवर्क के साथ मिलकर जैश ए मोहम्मद की तरफ़ से लड़ा था. जानकारी के मुताबिक साल 2016 में जैश ए मोहम्मद ने अपने बन्नू स्थित ट्रेनिंग कैम्प में आदिल को ट्रेन करके अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के साथ लड़ने के लिए भेजा था.</p>
<p> </p>
<p><strong>आदिल अफगान के कुनार में पोस्टेड था</strong></p>
<p>आदिल के अफगानिस्तान में पोस्टेड होने के दौरान की तीन तस्वीरें मौजूद हैं और जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में नाटो और अमेरिका के साथ लड़ाई के दौरान आतंकी स्वारुद्दीन खान उर्फ आदिल कुनार प्रांत में पोस्टेड था. जैश ए मोहम्मद के आतंकी स्वारुद्दीन उर्फ आदिल पर जम्मू कश्मीर पुलिस ने 5 लाख रुपये का इनाम भी रखा हुआ था और बीते 2 साल से आदिल और उसके साथी एनकाउंटर के दौरान सेना को चकमा देकर भागने में कामयाब हो रहे थे. हालांकि 4 फरवरी को त्राशी के जंगल में आखिरकर आतंकी स्वारुद्दीन उर्फ आदिल को मार गिराया गया. </p>
<p>आदिल के ग्रुप के अन्य तीन आतंकी सैफुल्लाह, फरमान और बाशा अभी भी किश्तवाड़ के जंगलों में छिपे हुए हैं और भारतीय सेना ने इनकी घेराबंदी की हुई है. इन तीनों पर भी 5-5 लाख का इनाम जम्मू कश्मीर पुलिस ने रखा है. आतंकी स्वारुद्दीन उर्फ आदिल बीते 10 महीने में भारतीय सेना के द्वारा जैश ए मोहम्मद का मारा गया चौथा आतंकी है, जो अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो सेना के खिलाफ भी लड़ चुका है. </p>
<p><strong>अफगानिस्तान में लड़कर लौटे थे पाकिस्तान</strong></p>
<p>इससे पहले भारतीय सेना ने पिछले साल 11 अप्रैल को किश्तवाड़ के छतरू इलाके में जैश के आतंकी असद उर्फ रहमान उर्फ बच्चा को मार गिराया था. ख़ैबर पख्तूनख़्वाह प्रांत से ताल्लुक़ रखने वाला असद उर्फ रहमान उर्फ बच्चा भी अफगानिस्तान में 2021 तक हक्कानियों के साथ मिलकर जैश ए मोहम्मद के लिए अमेरिका और नाटो सेनाओं के साथ लड़ रहा था. इसी तरह इसी एनकाउंटर में मारा गया फरमान उल्लाह उर्फ़ फ़रमान कंधार में तालिबान के साथ मिलकर अमेरिका और नाटो के साथ 2021 तक लड़ रहा था.</p>
<p>26 जून 2025 को मारा गया जैश ए मोहम्मद का एक और आतंकी रुक़सार अहमद उर्फ मौलवी को जैश ए मोहम्मद ने ट्रेन करके तालिबान के साथ मिलकर ग़ज़नी प्रांत में लड़ने के लिए भेजा था. इसी कड़ी में बीते 10 महीने में स्वारुद्दीन उर्फ आदिल चौथा ऐसा मारा गया आतंकी है, जो अफगानिस्तान में जंग के बाद भारत में घुसपैठ करके आतंकवाद फैलाने आया था और मारा गया.</p>
<p><strong>सोवियत संघ के जमाने से चल रहा जिहाद</strong></p>
<p>खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, अफगानिस्तान में आतंकवाद फैलाने वाले आतंकियों को भारत भेजने की मोडस ऑपरेंडी कोई नई नहीं है. 80 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ अफगान जिहाद के दौर में जब सोवियत संघ के सैनिक 1989 में अफगानिस्तान छोड़ कर वापस चले गए थे, तब भी अफगानिस्तान में सोवियत के खिलाफ तालिबान और अन्य संगठन के साथ मिलकर लड़ने वाले आतंकियों के पाकिस्तान वापस आने के बाद उन्हें कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए ISI ने भेजा था और यही से जम्मू कश्मीर में व्यवस्थित आतंकवाद की शुरुआत पाकिस्तान ने की थी. जो 1989 तक अफ़ग़ान मुजाहिद थे वो 1990 के बाद से सज्जाद अफगानी के नेतृत्व में हरकत उल मुजाहिद्दीन और हाफिज मुहम्मद सईद के नेतृत्व में लश्कर ए तैयबा के आतंकी बन गए. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47583/war-in-afghanistan-and-terror-in-jammu-jaish-terrorist-adil</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 18:28:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीजापुर  : 'लाल आतंक' ने फिर डाले हथियार: 34 नक्सलियों का सरेंडर...26 पर कुल 84 लाख का इनाम; 2 साल में 824 ने हिंसा छोड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में मंगलवार को 34 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें से 26 पर कुल 84 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें सात महिलाएं भी शामिल हैं। येकैडर दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी), तेलंगाना स्टेट कमेटी और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर डिवीजन में सक्रिय थे। मुख्य कैडरों में पांड्रू पुनेम (45), रुकनी हेमला (25), देवा उइका (22), रामलाल पोयम (27) और मोटू पुनेम (21) शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम था। आत्मसमर्पण वरिष्ठ पुलिस एवं सीआरपीएफ अधिकारियों के समक्ष 'पुना मार्गेम' (पुनर्वास से सामाजिक पुनर्स्थापन) पहल के तहत हुआ। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46245/bijapur-red-terror-laid-down-arms-again-34-naxalites-surrendered"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/untitled-sdfsdf.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बीजापुर  : </strong>छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में मंगलवार को 34 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें से 26 पर कुल 84 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें सात महिलाएं भी शामिल हैं। येकैडर दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी), तेलंगाना स्टेट कमेटी और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर डिवीजन में सक्रिय थे। मुख्य कैडरों में पांड्रू पुनेम (45), रुकनी हेमला (25), देवा उइका (22), रामलाल पोयम (27) और मोटू पुनेम (21) शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम था। आत्मसमर्पण वरिष्ठ पुलिस एवं सीआरपीएफ अधिकारियों के समक्ष 'पुना मार्गेम' (पुनर्वास से सामाजिक पुनर्स्थापन) पहल के तहत हुआ। </p>
<p> </p>
<p>बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव के अनुसार, राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक को तत्काल 50  हजार रुपये की सहायता के साथ कौशल विकास प्रशिक्षण एवं अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।सरकार की इस नीति से प्रभावित होकर पिछले दो वर्षों में दंतेवाड़ा जिले में 824 नक्सलियों ने हिंसा छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। आत्मसमर्पित कैडरों के परिवार भी उन्हें सामान्य जीवन जीने की प्रेरणा दे रहे हैं।</p>
<p>बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि ये कैडर दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, तेलंगाना राज्य कमेटी और माओवादियों के आंध्र ओडिशा बॉर्डर डिवीजन में सक्रिय थे। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को हिंसा छोड़ने के लिए आकर्षित कर रही है। </p>
<p>यादव ने कहा कि जिन लोगों ने सरेंडर किया है, उनके परिवार भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें। उन्होंने बताया कि सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर, पिछले दो साल में दंतेवाड़ा जिले में 824 माओवादियों ने हिंसा छोड़ दी है और सामाजिक मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/46245/bijapur-red-terror-laid-down-arms-again-34-naxalites-surrendered</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 18:51:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई :  26/11 आतंकी हमले के मामले में बरी हुए फहीम अंसारी को ऑटो रिक्शा ड्राइवर के तौर पर काम करने से रोक दिया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>26/11 आतंकी हमले के मामले में बरी हुए दो आरोपियों में से एक, फहीम अरशद मोहम्मद यूसुफ अंसारी कोई भी ऐसी नौकरी कर सकता है जिसके लिए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है, राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया। इस रुख के मुताबिक, वह इस साल फरवरी में कोर्ट में दायर अपनी याचिका के उलट, एक कमर्शियल ऑटो रिक्शा ड्राइवर के तौर पर काम करने से असल में रोक दिया गया है। अंसारी कोई भी ऐसी नौकरी कर सकता है जिसके लिए पुलिस क्लीयरेंस या पुलिस से कैरेक्टर सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट को बताया।51 साल के अंसारी, जिस प्रिंटिंग प्रेस में वह काम करते थे, वह Covid-19 महामारी के दौरान बंद हो गई थी, तब से वह बेरोज़गार हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45780/faheem-ansari-acquitted-in-mumbai-2611-terror-attack-case-barred"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-26t120336.984.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>26/11 आतंकी हमले के मामले में बरी हुए दो आरोपियों में से एक, फहीम अरशद मोहम्मद यूसुफ अंसारी कोई भी ऐसी नौकरी कर सकता है जिसके लिए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है, राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया। इस रुख के मुताबिक, वह इस साल फरवरी में कोर्ट में दायर अपनी याचिका के उलट, एक कमर्शियल ऑटो रिक्शा ड्राइवर के तौर पर काम करने से असल में रोक दिया गया है। अंसारी कोई भी ऐसी नौकरी कर सकता है जिसके लिए पुलिस क्लीयरेंस या पुलिस से कैरेक्टर सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट को बताया।51 साल के अंसारी, जिस प्रिंटिंग प्रेस में वह काम करते थे, वह Covid-19 महामारी के दौरान बंद हो गई थी, तब से वह बेरोज़गार हैं।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने पुलिस के उन्हें PCC देने से इनकार करने को चुनौती दी है, जिससे वह एक कमर्शियल ऑटो ड्राइवर के तौर पर काम कर पाते। उन्होंने अपनी पिटीशन में आरोप लगाया कि पाकिस्तानी टेररिस्ट ऑर्गनाइज़ेशन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ उनके कथित लिंक के आधार पर मना करना मनमाना, भेदभाव वाला और भेदभाव से भरा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें संविधान के तहत मिले रोज़ी-रोटी और जीवन के मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।मंगलवार को सुनवाई के दौरान, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमित पालकर ने जस्टिस एएस गडकरी और रंजीतसिंह राजा भोंसले की डिवीजन बेंच से मामले की सुनवाई इन-चेंबर करने की रिक्वेस्ट की, और कहा कि 51 साल के बरी हुए आरोपी पर अभी भी नज़र रखी जा रही है।</p>
<p>पालकर ने अंसारी के बैन टेरर ऑर्गनाइज़ेशन के साथ कथित कनेक्शन के बारे में एक कॉन्फिडेंशियल पुलिस रिपोर्ट जमा की, जिसके बाद बेंच इस हफ्ते के आखिर में मामले की इन-चेंबर सुनवाई के लिए मान गई।पालकर ने कोर्ट के सामने उन नौकरियों की एक लिस्ट भी जमा की जिनके लिए PCC ज़रूरी है, जैसे सभी सरकारी, सेमी-गवर्नमेंट और म्युनिसिपल बॉडी की नौकरियां, कमर्शियल गाड़ियां चलाने के लिए ज़रूरी परमिट और लाइसेंस, स्कूल, कॉलेज में और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरियां।</p>
<p>एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि अंसारी कोई भी ऐसी नौकरी कर सकता है जिसके लिए पुलिस क्लीयरेंस या पुलिस से कैरेक्टर सर्टिफिकेट की ज़रूरत न हो।अंसारी को 23 जनवरी, 2009 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हमला करने वाले 10 पाकिस्तानी LeT ऑपरेटिव्स को लोकल सपोर्ट दिया था, जिसमें 72 घंटों में 166 लोग मारे गए थे।3 मई, 2010 को, एक स्पेशल कोर्ट ने उन्हें और उनके को-एक्जीक्यूटिव सबाउद्दीन अहमद को उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया था।</p>
<p>21 फरवरी, 2011 को, बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।अपनी पिटीशन में, अंसारी ने कहा कि उन्होंने PCC के लिए अपने एप्लीकेशन की डिटेल्स मांगते हुए राइट टू इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत एक एप्लीकेशन फाइल की थी। 13 अगस्त, 2024 के राइट टू इन्फॉर्मेशन जवाब के अनुसार, वह PCC के लिए अयोग्य था क्योंकि उस पर आरोप था कि वह LeT का सदस्य था, जो कि अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत बैन है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 12:05:16 +0530</pubDate>
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