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                <title>Indian Army - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Indian Army RSS Feed</description>
                
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                <title>पहलगाम हमले का बदला : भारतीय सेना के पराक्रम पर पूरे देश को गर्व - शरद पवार</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">“भारत की संप्रभुता और उसके नागरिकों की सुरक्षा को बनाए रखने वाले और पहलगाम हमले का मुंहतोड़ जवाब देने वाले सभी भारतीय सैनिकों को हार्दिक बधाई! जय हिंद!” अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/40391/revenge-for-pahalgam-attack--the-whole-country-is-proud-of-the-valor-of-the-indian-army---sharad-pawar"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-05/download-(7)1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई: </strong>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ के जरिए पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का ‘करारा जवाब’ देने के लिए बुधवार को भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना की। शरद पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर भारतीय सशस्त्र बल का प्रोत्साहन बढ़ाया। पोस्ट में पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार ने कहा कि मंगलवार रात करीब डेढ़ बजे भारत ने नौ स्थानों पर सफल हवाई हमले किए और बदला लिया। उन्होंने कहा, ‘‘पहलगाम हमले का मुंहतोड़ जवाब देकर देश की संप्रभुता की रक्षा करने और अपने नागरिकों को सुरक्षित करने के लिए भारतीय सैनिकों को बधाई।”<br /><br />उन्होंने लिखा कि, “हर भारतीय को भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है, जो सीने पर गोलियां खाकर भारत की संप्रभुता की रक्षा करती है। आज उसी भरोसे को साबित करते हुए भारतीय वायुसेना ने रात करीब डेढ़ बजे नौ आतंकी ठिकानों पर सफल हवाई हमले करके पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लिया। इस ऑपरेशन में किसी भी पाकिस्तानी नागरिक या पाकिस्तानी सेना के ठिकाने को नुकसान पहुंचाए बिना नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक और योजनाबद्ध हमला किया गया। भारतीय सेना के इस पराक्रम पर पूरे देश को गर्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे लिखा, “भारत की संप्रभुता और उसके नागरिकों की सुरक्षा को बनाए रखने वाले और पहलगाम हमले का मुंहतोड़ जवाब देने वाले सभी भारतीय सैनिकों को हार्दिक बधाई! जय हिंद!” अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले नागपुर से कांग्रेस नेता विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ने इस हमले पर कहा, “हम विपक्ष सहित सभी पक्षों से मिले समर्थन का स्वागत करते हैं। राहुल गांधी और यहां तक ​​कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है और कहा है कि सरकार जो भी कदम उठाएगी, वे उसका पूरा समर्थन करेंगे। हमारी विपक्षी पार्टी और वास्तव में पूरे देश के लोग पहले ही इस बात पर सहमत हो चुके हैं कि पाकिस्तान को उसकी जगह दिखानी चाहिए।”</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 May 2025 11:41:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारतीय सेना चीन सीमा पर हर मौसम में तेजी से पहुंच सकेगी...  13 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी सेला सुरंग</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय सेना अब हर मौसम में तेजी से चीन सीमा तक पहुंच सकेगी। इससे तेजपुर से तवांग तक यात्रा के समय में एक घंटे से अधिक की कमी आएगी। पीएम ने अरुणाचल प्रदेश राज्य परिवहन की बस को हरी झंडी दिखाकर सेला सुरंग का उद्घाटन किया, जो इससे होकर गुजरी। सेला सुरंग 13 हजार फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी डबल-लेन सुरंग है। 825 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने किया है। चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के निकट होने के कारण यह सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29338/indian-army-will-be-able-to-reach-china-border-quickly-in-every-season----sela-tunnel-built-at-a-height-of-13-thousand-feet"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली : </strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश में 13 हजार फीट की ऊंचाई पर निर्मित सेला सुरंग का उद्घाटन किया। यह सामरिक रूप से महत्वपूर्ण तवांग तक पूरे साल संपर्क मुहैया कराएगी और इसके जरिये सीमावर्ती क्षेत्र में सैनिकों की सुगमता से आवाजाही सुनिश्चित होने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय सेना अब हर मौसम में तेजी से चीन सीमा तक पहुंच सकेगी। इससे तेजपुर से तवांग तक यात्रा के समय में एक घंटे से अधिक की कमी आएगी। पीएम ने अरुणाचल प्रदेश राज्य परिवहन की बस को हरी झंडी दिखाकर सेला सुरंग का उद्घाटन किया, जो इससे होकर गुजरी। सेला सुरंग 13 हजार फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी डबल-लेन सुरंग है। 825 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने किया है। चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के निकट होने के कारण यह सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;">तवांग क्षेत्र पर चीन लंबे समय से विवाद करता रहा है। ऐसे में इस सुरंग से भारतीय सेना की रणनीतिक और परिचालन क्षमताओं में वृद्धि होगी। बीआरओ के एक अधिकारी ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य एलएसी पर सेना की क्षमताओं को बढ़ाना है। नौ फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था। इस परियोजना से क्षेत्र के लोगों को भी तेज परिवहन की सुविधा मिलेगी। तवांग जिले को शेष अरुणाचल प्रदेश से जोड़ने वाली यह सुरंग हर मौसम में आवागमन के लिए उपलब्ध रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दो सुरंगें और एक लिंक रोड शामिल<br />इस परियोजना में दो सुरंगें और एक लिंक रोड शामिल हैं। सुरंग 1,980 मीटर लंबी सिंगल-ट्यूब होगी जबकि सुरंग-2, 1.5 किमी लंबी होगी।<br />इसमें यातायात और आपातकालीन सेवाओं के लिए एक बाईलेन ट्यूब होगी। दोनों सुरंगों के बीच 1,200 मीटर लंबी लिंक रोड होगी।<br />सुरंग-2 में एस्केप ट्यूब है। आपातकालीन स्थिति में एस्केप ट्यूब का उपयोग बचाव वाहनों की आवाजाही और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए किया जा सकता है।<br />सुरंग को 80 किमी/घंटा की अधिकतम गति के साथ प्रति दिन 3,000 कारों और 2,000 ट्रकों के यातायात के लिए डिजाइन किया गया है। इसका निर्माण न्यू आस्टि्रयन विधि का उपयोग करके किया गया है।<br />12 किमी होगी परियोजना की कुल लंबाई 13,800 फीट सेला दर्रे के नीचे की गई है इसकी खोदाई</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]>
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                <pubDate>Sun, 10 Mar 2024 11:39:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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            <item>
                <title>मणिपुर में भारतीय सेना के जूनियर कमीशन अधिकारी का अपहरण... जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">चारों जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के जवान के परिवार के सदस्य थे। पांचवें सदस्य (सैनिक के पिता) घायल हो गए थे और भागने में कामयाब रहे। बाद में सेना इलाज के लिए उन्हें दीमापुर ले गई। बाद में उन्हें असम के गुवाहाटी के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया। </p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29277/kidnapping-of-junior-commissioned-officer-of-indian-army-in-manipur----security-agencies-engaged-in-investigation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download-(1)9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मणिपुर : </strong>मणिपुर के थौबल जिले में भारतीय सेना के जूनियर कमीशन अधिकारी (जेसीओ) का शुक्रवार को असामाजिक तत्वों ने उनके घर से अपहरण कर लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।  <br /><br />उन्होंने बताया कि जेसीओ की पहचान चरंगपत ममांग लेईकाई निवासी कोंसम खेड़ा सिंह के रूप में हुई है। कोंसम खेड़ा सिंह शुक्रवार को छुट्टी पर थे। कुछ लोग सुबह नौ बजे उनके घर में घुस गए और उन्हें एक वाहन में ले गए। अधिकारियों ने बताया कि अपहरण क्यों किया गया है, इसकी वजह का पता नहीं चल पाया है। लेकिन पहली नजर में यह मामला जबरन वसूली का लग रहा है। सेना के अधिकारी के परिजनों पहले इस तरह की धमकियां मिल चुकीं थीं। <br /><br />सूचना मिलने पर सभी सुरक्षा एजेंसियों ने जेसीओ को बचाने के लिए साझा तलाशी अभियान शुरू किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-102 पर चलने वाले सभी वाहनों की जांच की जा रही है। अपहरण के कारणों का पता नहीं चल पाया है। मणिपुर में संघर्ष शुरू होने के बाद से यह चौथी घटना है, जब छुट्टी या ड्यूटी पर तैनात सैनिकों या उनके रिश्तेदारों को असामाजित तत्वों ने निशाना बनाया है। <br /><br />पिछले साल सितंबर में असम रेजिमेंट के एक पूर्व सैनिक सर्तो थांगथांग कोम का घाटी में एक सशस्त्र समूह ने अपहरण किया था और उनकी हत्या कर दी थी। वह मणिपर के लीमाखोंग में रक्षा सेवा कोर (डीएससी) में तैनात थे। दो महीने बाद एक हथियारबंद समूह ने चार लोगों का उस समय अपहरण कर लिया था, जब वे वाहन से पहाड़ी जिले चुराचांदपुर से लीमाखोंग जा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">चारों जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के जवान के परिवार के सदस्य थे। पांचवें सदस्य (सैनिक के पिता) घायल हो गए थे और भागने में कामयाब रहे। बाद में सेना इलाज के लिए उन्हें दीमापुर ले गई। बाद में उन्हें असम के गुवाहाटी के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया। <br /><br />इस साल 27 फरवरी को मणिपुर पुलिस के एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) पर इंफाल शहर में उनके घर पर हमला किया गया था। इस मामले में हमलावर समूह की पहचान अरमबाई टेंगोल (एटी) के रूप में की गई थी। इस घटना के बाद मणिपुर पुलिस के कमांडो ने इफाल और अन्य इलाकों में हथियार डाल दिए थे। </p>]]>
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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 15:53:07 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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            <item>
                <title>46-मीटर मॉड्यूलर ब्रिज भारतीय सेना में हुआ शामिल... अगले 4 सालों में कुल 41 सेट किए जाएंगे शामिल </title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">मॉड्यूलर ब्रिज एक मैकेनिकल रूप से लॉन्च किया गया सिंगल-स्पैन, पूरी तरह से डेक वाला 46-मीटर का असॉल्ट ब्रिज है। यह ब्रिज सेना को नहरों और खाइयों जैसी बाधाओं को आसानी से पार करने में सक्षम बनाता है। यह भारतीय सेना के इंजीनियरों की महत्वपूर्ण ब्रिजिंग क्षमता को बढ़ाएगा। ये पुल अत्यधिक मोबाइल, मजबूत हैं। यह त्वरित तैनाती और पुनर्प्राप्ति के लिए डिजाइन किए गए हैं, जो मशीनीकृत संचालन की तेज गति वाली प्रकृति के साथ संरेखित हैं।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/28999/46-meter-modular-bridge-inducted-into-indian-army----a-total-of-41-sets-will-be-inducted-in-the-next-4-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-02/download-(1)38.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय सेना में मॉड्यूलर ब्रिज को शामिल किया गया। मॉड्यूलर ब्रिज को शामिल किए जाने से सेना को किसी भी चुनौतीपूर्ण जगहों पर अपने टैंकों को तैनात करने में आसानी होगी। साथ ही सेना के इंजीनियरों की महत्वपूर्ण ब्रिजिंग क्षमता को बढ़ाएगा। नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित हुए कार्यक्रम भारतीय सेना ने मंगलवार को 46-मीटर मॉड्यूलर ब्रिज को शामिल करके अपनी ब्रिजिंग क्षमता को बढ़ाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मॉड्यूलर ब्रिज को डीआरडीओ ने लार्सन एंड टुब्रो के साथ मिलकर डिजाइन और विकसित किया है। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, सीडीएस जनरल अनिल चौहान, सेना, डीआरडीओ और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अगले 4 सालों में कुल 41 सेट धीरे-धीरे शामिल किए जाएंगे, जिनकी कीमत 2,585 करोड़ रुपये होगी। पहला सेट आज यानी मंगलवार को सेना में शामिल किया गया।<br /><br />मॉड्यूलर ब्रिज एक मैकेनिकल रूप से लॉन्च किया गया सिंगल-स्पैन, पूरी तरह से डेक वाला 46-मीटर का असॉल्ट ब्रिज है। यह ब्रिज सेना को नहरों और खाइयों जैसी बाधाओं को आसानी से पार करने में सक्षम बनाता है। यह भारतीय सेना के इंजीनियरों की महत्वपूर्ण ब्रिजिंग क्षमता को बढ़ाएगा। ये पुल अत्यधिक मोबाइल, मजबूत हैं। यह त्वरित तैनाती और पुनर्प्राप्ति के लिए डिजाइन किए गए हैं, जो मशीनीकृत संचालन की तेज गति वाली प्रकृति के साथ संरेखित हैं।<br /><br />सेना ने कहा कि मॉड्यूलर ब्रिज का शामिल होना भारत की उन्नत सैन्य उपकरणों को डिजाइन करने और विकसित करने में कौशल को भी उजागर करता है। यह आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए देश की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। बता दें कि मॉड्यूलर पुलों की खरीद के लिए फरवरी 2023 में एलएंडटी के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे।<br /><br />सेना के अनुसार, मॉड्यूलर ब्रिज के प्रत्येक सेट में 8x8 भारी गतिशीलता वाहनों पर आधारित सात वाहक वाहन और 10x10 भारी गतिशीलता वाहनों पर आधारित दो लॉन्चर वाहन शामिल हैं। इन पुलों को त्वरित लॉन्चिंग और पुनर्प्राप्ति क्षमताओं के साथ नहरों और खाइयों जैसी विभिन्न प्रकार की बाधाओं पर नियोजित किया जा सकता है। यह अत्यधिक मोबाइल, बहुमुखी, मजबूत है और पहिएदार और ट्रैक किए गए मशीनीकृत वाहनों के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम है।<br /><br />मॉड्यूलर पुल मैन्युअल रूप से लॉन्च किए गए मध्यम गर्डर पुलों (एमजीबी) की जगह लेंगे जो वर्तमान में सेना में उपयोग किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित मॉड्यूलर पुलों के एमजीबी की तुलना में कई फायदे होंगे, जैसे बढ़ी हुई अवधि, निर्माण के लिए कम समय और पुनर्प्राप्ति क्षमता के साथ यांत्रिक लॉन्चिंग। इन पुलों का अधिग्रहण न केवल सेना की परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाता है, बल्कि रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में भारत की बढ़ती प्रमुखता को भी दर्शाता है।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 27 Feb 2024 19:05:20 +0530</pubDate>
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