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                <title>dogs - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>dogs RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पुणे : आवारा कुत्तों का आतंक; नागरिक दहशत में, बच्चे पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ज़िले के ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, और नागरिक सचमुच दहशत में जी रहे हैं। चाकन में कुत्तों के हमले में एक महिला की मौत के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। आलंंदी, चाकन और राजगुरुनगर इलाकों की सड़कों पर चलना भी अब खतरनाक हो गया है। बुधवार (18) की सुबह, आलंंदी के मंडई इलाके में तीन से चार आवारा कुत्तों ने पाँच साल की परी ज्ञानेश्वर उडमाले पर हमला कर दिया और उसे तीन जगहों पर काट लिया। नागरिकों के चिल्लाने पर कुत्ते भाग गए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48586/pune-stray-dog-terror-attacks-child-as-citizens-panic"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-21t115943.886.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे - </strong>ज़िले के ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, और नागरिक सचमुच दहशत में जी रहे हैं। चाकन में कुत्तों के हमले में एक महिला की मौत के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। आलंंदी, चाकन और राजगुरुनगर इलाकों की सड़कों पर चलना भी अब खतरनाक हो गया है। बुधवार (18) की सुबह, आलंंदी के मंडई इलाके में तीन से चार आवारा कुत्तों ने पाँच साल की परी ज्ञानेश्वर उडमाले पर हमला कर दिया और उसे तीन जगहों पर काट लिया। नागरिकों के चिल्लाने पर कुत्ते भाग गए। घायल बच्ची का तुरंत आलंंदी ग्रामीण अस्पताल में इलाज किया गया।</p>
<p> </p>
<p>चाकन शहर में 5,000 से ज़्यादा आवारा कुत्ते हैं, और हर महीने 1,000 से ज़्यादा कुत्तों के काटने की घटनाएँ हो रही हैं। आलंंदी में 3,500 से ज़्यादा कुत्ते घूम रहे हैं, और हर महीने 200 से 220 नागरिकों पर हमला हो रहा है। पिछले तीन महीनों में, अकेले आलंंदी में 557 लोगों को कुत्तों ने काटा है। राजगुरुनगर में भी 4,500 से ज़्यादा कुत्तों की समस्या बढ़ गई है, और हर महीने 100 से ज़्यादा नागरिक घायल हो रहे हैं।</p>
<p>नागरिकों का सवाल: इसका समाधान कब निकलेगा? नागरिक इस बात से नाराज़ हैं कि हर साल कुत्तों के काटने की 10,000 से ज़्यादा घटनाएँ होने के बावजूद, कुत्तों के पेट के कीड़े मारने का अभियान  प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। "जब इंसानी जान का मामला इतना गंभीर है, तो प्रशासन आखिर कर क्या रहा है?" - यह सवाल उठाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:00:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली: आवारा कुत्तों से संबंधित मामले की सुनवाई 3 नवंबर को करेगा सुप्रीम कोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों से संबंधित मामले की सुनवाई 3 नवंबर को करेगा, जिसमें उसने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को अपने समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। 27 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को अपने समक्ष उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया था कि 22 अगस्त के आदेश के बावजूद अनुपालन हलफनामा क्यों नहीं दाखिल किया गया। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45155/new-delhi-supreme-court-will-hear-the-case-related-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-02t210908.248.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों से संबंधित मामले की सुनवाई 3 नवंबर को करेगा, जिसमें उसने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को अपने समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। 27 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को अपने समक्ष उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया था कि 22 अगस्त के आदेश के बावजूद अनुपालन हलफनामा क्यों नहीं दाखिल किया गया। </p>
<p> </p>
<p>शीर्ष अदालत ने 22 अगस्त को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियमों के अनुपालन के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछा था। यह मामला सोमवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की तीन-न्यायाधीशों की विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आएगा। 31 अक्टूबर को, शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को अपने समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि अदालत के आदेश का कोई सम्मान नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले का उल्लेख किया था और पीठ से आग्रह किया था कि मुख्य सचिवों को वर्चुअल माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होने की अनुमति दी जाए।</p>
<p>पीठ ने 22 अगस्त के अपने आदेश का पालन न करने पर नाराजगी व्यक्त की थी और कहा था कि 27 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को छोड़कर, किसी भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं किया था। पीठ ने स्पष्ट किया था कि मुख्य सचिवों को न्यायालय में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि उन्होंने अनुपालन हलफनामा क्यों दाखिल नहीं किया।</p>
<p>पीठ ने कहा था कि जब 27 अक्टूबर को मामले की सुनवाई हुई थी, तब केवल पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और एमसीडी ने ही अनुपालन हलफनामा दाखिल किया था। 27 अक्टूबर को, शीर्ष अदालत ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फटकार लगाई, जिन्होंने इस मामले में अपने अनुपालन हलफनामे दाखिल नहीं किए थे, और कहा कि लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं और विदेशों में देश को नीचे दिखाया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले आवारा कुत्तों के मामले का दायरा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमाओं से आगे बढ़ाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था। इसने नगर निगम अधिकारियों को एबीसी नियमों के अनुपालन के उद्देश्य से उपलब्ध डॉग पाउंड, पशु चिकित्सकों, कुत्तों को पकड़ने वाले कर्मचारियों और विशेष रूप से संशोधित वाहनों और पिंजरों जैसे संसाधनों के पूर्ण आँकड़ों के साथ अनुपालन का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। पीठ ने इस मामले में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी पक्षकार बनाया था और कहा था कि एबीसी नियमों का अनुप्रयोग पूरे भारत में एक समान है। सर्वोच्च न्यायालय एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है, जो 28 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में, रेबीज होने की एक मीडिया रिपोर्ट पर शुरू किया गया था।<br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/45155/new-delhi-supreme-court-will-hear-the-case-related-to</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Nov 2025 17:08:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कानपुर :  पाले जाने वाले कुत्ते और बिल्लियां छीन सकते हैं इंसानों की आंखों की रोशनी; नेत्र रोग विभाग की टीम ने एक ऐसी स्टडी की है, जिसने सभी को चौंका दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अगर आप अपने पालतू कुत्ते या बिल्ली को बहुत करीब से प्यार करते हैं, तो ऐसा न करें. कानपुर के एलएलआर अस्पताल (हैलट) की नेत्र रोग विभाग की टीम ने एक ऐसी स्टडी की है, जिसने सभी को चौंका दिया है. अध्ययन में पाया गया है कि घरों में पाले जाने वाले कुत्ते और बिल्लियां इंसानों की आंखों की रोशनी तक छीन सकते हैं.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44653/dogs-and-cats-kept-in-kanpur-can-take-away-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-13t181655.696.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कानपुर : </strong>अगर आप अपने पालतू कुत्ते या बिल्ली को बहुत करीब से प्यार करते हैं, तो ऐसा न करें. कानपुर के एलएलआर अस्पताल (हैलट) की नेत्र रोग विभाग की टीम ने एक ऐसी स्टडी की है, जिसने सभी को चौंका दिया है. अध्ययन में पाया गया है कि घरों में पाले जाने वाले कुत्ते और बिल्लियां इंसानों की आंखों की रोशनी तक छीन सकते हैं. कारण है उनके शरीर में मौजूद सूक्ष्म कीट, जो धीरे-धीरे इंसानों की आंखों के अंदर संक्रमण फैला देते हैं और देखने की क्षमता को खत्म कर देते हैं. एलएलआर अस्पताल की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ तीन साल तक लगातार ऐसे मरीजों का अध्ययन किया, जिनकी आंखों का “मैक्यूला” यानी देखने वाला मुख्य हिस्सा डैमेज हो गया था. जब इन मरीजों की पूरी हिस्ट्री निकाली गई, तो लगभग सभी के घरों में पालतू कुत्ते या बिल्ली मौजूद थे.</p>
<p> </p>
<p><strong>शुरुआती दिनों में सिर्फ हल्की खुजली</strong><br />डॉ. शालिनी ने बताया कि इन जानवरों के शरीर में मौजूद कीटों से टॉक्सोपारा और टॉक्सोप्लाज्मा नामक संक्रमण इंसानों में फैलता है. यह संक्रमण धीरे-धीरे आंखों के अंदर पहुंचकर वहां अपने अंडे और लार्वा छोड़ता है, जिससे आंखों के अंदर सूजन और क्षति शुरू होती है. शुरुआती दिनों में सिर्फ हल्की खुजली, जलन या धुंधलापन महसूस होता है, लेकिन बाद में यह संक्रमण आंखों की रोशनी पूरी तरह छीन लेता है. डॉ. शालिनी ने बताया कि पिछले तीन सालों में ऐसे 50 मरीज सामने आए जिनकी आंखों की रोशनी का नुकसान सीधे इस संक्रमण से जुड़ा पाया गया. इनमें से अधिकतर मरीजों ने बताया कि वे अपने पालतू कुत्ते या बिल्ली को बहुत प्यार करते थे, उन्हें गोद में उठाते थे या अपने बिस्तर पर सोने देते थे. कई मामलों में पालतू जानवर इंसानों की थाली या खाने के आसपास भी आते थे. डॉक्टरों के मुताबिक ऐसी लापरवाही इंसानों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है.</p>
<p><strong>प्यार करते हुए ऐसे करें खुद की सुरक्षा</strong><br />डॉ. शालिनी ने बताया कि इस संक्रमण से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहना जरूरी है. कुछ छोटी सावधानियां अपनाकर इस खतरे से बचा जा सकता है. अपने पालतू कुत्ते और बिल्लियों को हमेशा साफ-सुथरा रखें. अगर उनके शरीर पर कीड़े या संक्रमण नजर आएं तो तुरंत पशु चिकित्सक को दिखाएं. घर में रहते हुए पालतू जानवरों को थाली या बिस्तर के पास न आने दें. उनके मल-मूत्र के लिए अलग जगह तय करें, और घर में साफ-सफाई बनाए रखें. अगर आंखों में लालिमा, खुजली या सूजन महसूस हो तो बिना देरी डॉक्टर से संपर्क करें. विशेषज्ञों का कहना है कि पालतू जानवरों से लगाव बुरा नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा नजदीकी खतरनाक साबित हो सकती है. इंसानों की आंख बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए संक्रमण का असर जल्दी होता है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह संक्रमण आंखों की रोशनी स्थायी रूप से खत्म कर सकता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 18:17:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई:आवारा कुत्तों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों से जुड़े आदेश के खिलाफ आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन किया गया. यह विरोध सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के संदर्भ में था, जिसमें दिल्ली-एनसीआर से आठ हफ्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में भेजने के निर्देश दिए गए हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह फैसला अव्यवहारिक और अमानवीय है. इससे कुत्तों को कष्ट झेलना पड़ सकता है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43083/mumbai--protest-at-azad-maidan-against-supreme-court-order-on-stray-dogs"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download---2025-08-16t124225.908.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों से जुड़े आदेश के खिलाफ आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन किया गया. यह विरोध सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के संदर्भ में था, जिसमें दिल्ली-एनसीआर से आठ हफ्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में भेजने के निर्देश दिए गए हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह फैसला अव्यवहारिक और अमानवीय है. इससे कुत्तों को कष्ट झेलना पड़ सकता है. उनका मानना है कि सड़क के कुत्तों की समस्या का समाधान बड़े पैमाने पर नसबंदी, टीकाकरण और जन जागरूकता से होना चाहिए, न कि उन्हें जबरन हटाकर. उनके मुताबिक, आज़ादी का हक़ इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी मिलना चाहिए. </p>
<p> </p>
<p><strong>100 आवारा कुत्तों को उठाया गया</strong><br />बता दें कि दिल्ली नगर निगम (दिननि) ने आवारा कुत्तों को आश्रय स्थल स्थानांतरित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से अब तक 100 आवारा कुत्तों को उठाया है, और शहर के 20 पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) केंद्रों को आश्रय स्थलों में परिवर्तित किया है. शहर के महापौर राजा इकबाल सिंह ने यह जानकारी दी. सिंह ने बताया कि निगम ने बाहरी दिल्ली में आवारा पशुओं को रखने के लिए 85 एकड़ का एक भूखंड भी चिह्नित किया है. </p>
<p>सिंह ने कहा कि नगर निकाय ने और अधिक कुत्ता आश्रय स्थल बनाने के लिए भूमि की तलाश शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि वह न्यायालय के निर्देश को चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे, जिसकी शुरुआत आक्रामक और रेबीज से संक्रमित कुत्तों से होगी. महापौर ने बताया कि निगम द्वारका स्थित एबीसी केंद्र का विस्तार करेगा, जबकि तीसरे चरण में घोगा डेरी की 85 एकड़ भूमि में बड़े आश्रय स्थल स्थापित करने पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने के बाद दिल्लीवासियों को बड़ी राहत मिलेगी. </p>
<p><strong>क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश</strong><br />सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया था कि दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को आठ सप्ताह के भीतर सड़कों से उठाकर उपयुक्त प्राधिकारियों द्वारा बनाए जाने वाले आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जाए. न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा था कि आवारा कुत्तों के काटने विशेषकर बच्चों को काटने से रेबीज की समस्या की स्थिति उत्पन्न बहुत गंभीर है. महापौर ने कहा, ‘‘हमने लोगों को आश्वासन दिया था कि हम आदेश का 100 प्रतिशत पालन करेंगे. हमें निवासियों से लगातार फोन आ रहे हैं और अब तक 100 आवारा कुत्तों को पकड़ा जा चुका है. ''उन्होंने बताया कि पहले चरण में केवल उन कुत्तों को ही पकड़ा जाएगा जो आक्रामक, रेबीज से संक्रमित या बीमार हैं.</p>
<p>सिंह ने बताया कि वर्तमान में निगम के पास 20 एबीसी केंद्र हैं, जिन्हें पकड़े गए कुत्तों को रखने के लिए आश्रय स्थलों में परिवर्तित किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि कुत्तों को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े.'' महापौर के मुताबिक अगले चरण में नगर निकाय द्वारका में एबीसी केंद्र का विस्तार करने की योजना बना रहा है, जबकि तीसरे चरण में घोगा डेरी में बड़े आश्रय स्थल स्थापित करने पर विचार किया जाएगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 18:43:57 +0530</pubDate>
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