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                <title>menace - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>menace RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई : गंदगी और बढ़ते मच्छरों के प्रकोप के बीच क्षेत्र में डेंगू का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[<p>भांडुप-पश्चिम के अमृत सृष्टि एसआरए सीएचएस, जनता मार्केट और माटेश्वरी हॉल के आसपास पिछले कई दिनों से जमा कचरे ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। जगह-जगह फैली गंदगी और बढ़ते मच्छरों के प्रकोप के बीच क्षेत्र में डेंगू का खतरा मंडरा रहा है। निवासियों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद मनपा प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर प्रशासन कब गंभीर होगा?</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51650/danger-of-dengue-in-mumbai-area-amid-filth-and-increasing"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/imagesfgd.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>भांडुप-पश्चिम के अमृत सृष्टि एसआरए सीएचएस, जनता मार्केट और माटेश्वरी हॉल के आसपास पिछले कई दिनों से जमा कचरे ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। जगह-जगह फैली गंदगी और बढ़ते मच्छरों के प्रकोप के बीच क्षेत्र में डेंगू का खतरा मंडरा रहा है। निवासियों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद मनपा प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर प्रशासन कब गंभीर होगा?</p>
<p> </p>
<p>निवासियों के अनुसार, कचरे और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के बीच तीन बच्चों को डेंगू की पुष्टि हुई है। वहीं तीन अन्य बच्चे तेज बुखार से पीड़ित हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि लंबे समय से जमा कचरे और मच्छरों के कारण क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।</p>
<p>निवासियों ने मांग की है कि तत्काल कचरा साफ कराया जाए, एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव और फॉगिंग कराई जाए। इसके साथ ही डेंगू और मच्छरों के बढ़ते खतरे को देखते हुए क्षेत्र में युद्धस्तर पर सफाई अभियान चलाया जाए। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बीमारी का प्रकोप और बढ़ सकता है। इस संबंध में मनपा अधिकारियों अथवा संबंधित स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क नहीं हो सका।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 11:14:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर चिंता जाहिर की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण करने के बाद उन्हें तुरंत खास आश्रय स्थल में रखा जाए, खासकर स्कूलों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाके से हटाकर. मुंबई की बात करें तो इस राज्य में 90,000 से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं लेकिन इन सबके लिए महज 8 शेल्टर होम्स मौजूद हैं. बीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने के लिए और ज्यादा शेल्टर बनाने की जरूरत है. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45322/new-delhi-supreme-court-expressed-concern-over-the-increasing-problem"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-09t112846.354.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण करने के बाद उन्हें तुरंत खास आश्रय स्थल में रखा जाए, खासकर स्कूलों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाके से हटाकर. मुंबई की बात करें तो इस राज्य में 90,000 से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं लेकिन इन सबके लिए महज 8 शेल्टर होम्स मौजूद हैं. बीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने के लिए और ज्यादा शेल्टर बनाने की जरूरत है. </p>
<p> </p>
<p><strong>क्यों जरूरी है नसबंदी?</strong><br />अगर मुंबई सार्वजनिक जगहों से केवल 30 से 40% कुत्तों को भी हटाती है तो भी लगभग 40,000 कुत्तों के लिए आश्रय स्थल  चाहिए होंगे. एक कुत्ते का जोड़ा साल में तकरीबन 20 पिल्लों तक को जन्म देता है इसलिए इनकी संख्या को काबू में रखने के लिए नसबंदी बहुत जरूरी है जो काम बीएमसी 1984 से करती आ रही है. </p>
<p><strong>बड़े राज्यों की लापरवाही</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी कई बड़े राज्य इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है. राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या 8 लाख से ज्यादा है और शेल्टर होम एक भी नहीं. हरियाणा में 2.75 लाख कुत्तों पर 90 शेल्टर होम्स, झारखंड, उत्तराखंड और हिमाचल में एक भी नहीं. वहीं मध्य प्रदेश में कोई सरकारी आंकड़ा नहीं है लेकिन केवल भोपाल में 1.20 लाख आवाका कुत्तों के होने का अनुमान है.  </p>
<p><strong>पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता</strong><br />पशु कल्याण कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुत्तों को हटाना सिर्फ थोड़े समय का हल है. कुत्ते अपने इलाके को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं. अगर एक इलाके से कुत्ते हटाए जाएंगे तो दूसरे कुत्ते तुरंत आकर उस जगह पर कब्जा कर लेंगे. कार्यकर्ताओं का मानना है कि जो स्वस्थ आवारा कुत्ते हैं उन्हें छोटे आश्रय स्थलों में बंद रखने से उनका जीवन खराब हो सकता है. उनकी राय में इस समस्या का असली हल आवारा कुत्तों को हटाना नहीं बल्कि प्रभावी तरीके से नसबंदी कार्यक्रम चलाना है. </p>
<p><strong>कुत्तों के काटने की घटनाएं</strong><br />पिछले डेढ़ साल में उत्तराखंड में कुत्तों के काटने के 2.14 लाख मामले सामने आए हैं. हिमाचल प्रदेश में तो लगभग 76,000 आवारा कुत्ते हैं लेकिन उनके लिए कोई भी आश्रय गृह नहीं है. उत्तराखंड में भी किसी भी जिले में कुत्तों के लिए आश्रय स्थल नहीं है. हालांकि देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों में पशु जन्म नियंत्रण केंद्र हैं जहां कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी की जाती है. </p>
<p><strong>शेल्टर होम के नियम और चुनौतियां</strong><br />एक कुत्ते की औसत उम्र 12 से 15 साल होती है. बीएमसी के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि, कुत्तों को आश्रय घर भेजने से पहले उनकी नसबंदी जरूरी है, शेल्टर में कुत्तों की देखभाल के लिए विशेषज्ञ और पशु चितित्सक रखने होंगे और उनके लिए खाना-पानी का इंतजाम करना होगा. अधिकारी ने कहा कि मुंबई में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को सही से लागू करने के लिए कड़ी निगरानी और मेहनत की जरूरत होगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Nov 2025 11:31:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई मेंआवारा कुत्तों की दहशत...रोजाना लगभग १५० से अधिक मुंबईकर खूंखार कुत्तों का हो रहे शिकार </title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई में आवारा कुत्तों की दहशत इस कदर बढ़ गई है कि इनके आतंक से मुंबईकर खौफ में जी रहे हैं। मनपा आवारा कुत्तों के उपद्रव को रोकने के लिए कई उपाय कर रही है, बावजूद इसके कोई सफलता हाथ नहीं लग रही है। यही कारण है कि रोजाना लगभग १५० से अधिक मुंबईकर खूंखार कुत्तों का शिकार हो रहे हैं। पिछले दो वर्षों में १,१२,७६९ लोगों को कुत्तों ने काटा है। फिलहाल, मनपा के सामने आवारा कुत्तों के खतरे को खत्म करने की चुनौती पैदा हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/17524/the-menace-of-stray-dogs-in-mumbai----more-than-150-mumbaikars-are-falling-prey-to-ferocious-dogs-every-day"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-01/download-(2)20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में आवारा कुत्तों की दहशत इस कदर बढ़ गई है कि इनके आतंक से मुंबईकर खौफ में जी रहे हैं। मनपा आवारा कुत्तों के उपद्रव को रोकने के लिए कई उपाय कर रही है, बावजूद इसके कोई सफलता हाथ नहीं लग रही है। यही कारण है कि रोजाना लगभग १५० से अधिक मुंबईकर खूंखार कुत्तों का शिकार हो रहे हैं। पिछले दो वर्षों में १,१२,७६९ लोगों को कुत्तों ने काटा है। फिलहाल, मनपा के सामने आवारा कुत्तों के खतरे को खत्म करने की चुनौती पैदा हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आवारा कुत्तों के उपद्रव को रोकने के लिए मनपा द्वारा नसबंदी किए जाने के साथ ही रेबीज के इंजेक्शन लगाने जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बाद भी आवारा कुत्तों का आतंक कायम है। खासतौर पर रात के समय शांत मुद्रा में बैठे ये आवारा कुत्ते राहगीरों पर अचानक झपट्टा मारकर उन्हें काट लेते हैं। ऐसे में काम पर से देर रात घर लौटने वाले कर्मचारियों में काफी डर है।</p>
<p style="text-align:justify;">साल २०१४ में जब मनपा ने मुंबई में कुत्तों की गणना की थी तो यहां इनकी संख्या २,९६,२२१ थी। बताया गया है कि नसबंदी न होने पर मादा कम से कम चार बच्चों को जन्म देती है, इसलिए मुंबई में कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस पृष्ठभूमि में न्यायालय के निर्देशानुसार और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार मनपा द्वारा प्रति वर्ष ३० फीसदी कुत्तों की नसबंदी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई में आवारा कुत्तों के उपद्रव को रोकने के लिए साल २०१४ से दिसंबर २०२२ तक ३,८८,४२९ कुत्तों की नसबंदी की गई। आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए कुत्तों को पकड़ने के लिए मनपा ने चार ‘डॉग वैन’ खरीदी हैं। मॉनिटरिंग समिति द्वारा नसबंदी पर निगरानी रहती है। ये चार डॉग वैन मुलुंड, मालाड, महालक्ष्मी और बांद्रा में तैनात हैं। जख्मी कुत्तों को पकड़कर देवनार के पशु अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। अधिकारी ने बताया कि सात दिनों तक जांच के बाद अगर स्थिति स्थिर रहती है तो उन्हें वापस उस स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें लाया हुआ रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Jan 2023 11:20:45 +0530</pubDate>
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