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                <title>personnel - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>personnel RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : बांग्लादेशी के नाम पर लीगल फेरीवालों को परेशान करना बंद करें, बीएमसी और पुलिस कर्मियों को संजय निरुपम ने चेताया </title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिंदे सेना के नेता व पूर्व सांसद संजय निरुपम ने मुंबई पुलिस और बीएमसी कर्मियों को चेताया है कि वे बांग्लादेशी के नाम पर कानूनी फेरीवालों को परेशान करना बंद करें। अगर उन्हें सचमुच बांग्लादेशी को पकड़ना है तो वे लेदर और टेक्सटाइल फैक्ट्रियों, जरी (कढ़ाई) इंडस्ट्री और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन स्थल पर जाकर जांच पड़ताल करें। आज फेरीवालों के साथ जो हो रहा है उसकी संपूर्ण जानकारी जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को देंगे। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48749/sanjay-nirupam-warns-bmc-and-police-personnel-to-stop-harassing"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-27t132219.206.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>शिंदे सेना के नेता व पूर्व सांसद संजय निरुपम ने मुंबई पुलिस और बीएमसी कर्मियों को चेताया है कि वे बांग्लादेशी के नाम पर कानूनी फेरीवालों को परेशान करना बंद करें। अगर उन्हें सचमुच बांग्लादेशी को पकड़ना है तो वे लेदर और टेक्सटाइल फैक्ट्रियों, जरी (कढ़ाई) इंडस्ट्री और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन स्थल पर जाकर जांच पड़ताल करें। आज फेरीवालों के साथ जो हो रहा है उसकी संपूर्ण जानकारी जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को देंगे। </p>
<p> </p>
<p><strong>फेरीवालों के संबंध में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला अहम</strong><br />गुरुवार को मुंबई मराठी जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में निरुपम ने कहा कि मुंबई पुलिस और बीएमसी मिलकर पिछले 2 महीनों में मुंबई के फेरीवालों पर कार्रवाई कर रहे हैं। क्या वे बताएंगे कि अब तक कितने गैर-कानूनी बांग्लादेशी हॉकरों के खिलाफ कार्रवाई की है ? उन्हें इसकी जानकारी सबूत के साथ सार्वजनिक करनी चाहिए। फेरीवालों के संबंध में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला अहम और ऐतिहासिक है। </p>
<p><strong>स्ट्रीट वेंडर एक्ट अभी तक लागू क्यों नहीं</strong><br />बॉम्बे हाई कोर्ट का ऑर्डर देखने के बाद बीएमसी और मुंबई पुलिस को हॉकरों के बारे में उचित हल निकालना चाहिए। आखिर स्ट्रीट वेंडर एक्ट अभी तक लागू क्यों नहीं किया गया ? सन 2014 के एक्ट के मुताबिक, टाउन वेंडिंग कमेटी बनाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से बीएमसी की है। कोर्ट के आदेश के बावजूद बीएमसी ने इसे नजरअंदाज किया। आज 12 साल बाद भी कमेटी नहीं बनी है। </p>
<p><strong>संजय निरुपम ने लगाए आरोप</strong><br />शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि असल में बीएमसी और पुलिस चाहती हैं कि हॉकरों की समस्या ऐसे ही बनी रहे। फेरीवालों को टारगेट करना गलत है और ईमानदारी से बिजनेस करने वाले हजारों परिवारों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:23:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस: 982 कर्मियों को मिलेगा वीरता व सेवा पदक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गणतंत्र दिवस 2026 के उपलक्ष्य में पुलिस, अग्निशमन, होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस तथा ‘करेक्शनल सर्विसेज’ (सुधारात्मक सेवा) के कुल 982 कर्मियों को वीरता और सेवा पदकों से सम्मानित किया गया है. इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन सम्मानों में 125 वीरता पदक शामिल हैं. वीरता पुरस्कारों में से अधिकांश में 45 कर्मियों को जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से, 35 कर्मियों को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों से, पांच कर्मियों को पूर्वोत्तर से और 40 कर्मियों को अन्य क्षेत्रों से उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47251/new-delhi-republic-day-982-personnel-will-receive-gallantry-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-25t185126.990.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>गणतंत्र दिवस 2026 के उपलक्ष्य में पुलिस, अग्निशमन, होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस तथा ‘करेक्शनल सर्विसेज’ (सुधारात्मक सेवा) के कुल 982 कर्मियों को वीरता और सेवा पदकों से सम्मानित किया गया है. इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन सम्मानों में 125 वीरता पदक शामिल हैं. वीरता पुरस्कारों में से अधिकांश में 45 कर्मियों को जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से, 35 कर्मियों को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों से, पांच कर्मियों को पूर्वोत्तर से और 40 कर्मियों को अन्य क्षेत्रों से उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है.</p>
<p> </p>
<p>बयान के मुताबिक, वीरता पदक प्राप्त करने वालों में चार अग्निशमन सेवा के बचावकर्मी भी शामिल हैं. आधिकारिक विवरण के अनुसार, राज्यों में जम्मू कश्मीर पुलिस को सर्वाधिक 33 वीरता पदक मिले हैं. इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस को 31, उत्तर प्रदेश पुलिस को 18 और दिल्ली पुलिस को 14 वीरता पदक प्रदान किए गए हैं. वहीं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) एकमात्र ऐसा बल है, जिसे 12 वीरता पदक प्राप्त हुए हैं.</p>
<p>बयान के मुताबिक, विशिष्ट सेवा के लिए कुल 101 राष्ट्रपति पदक (पीएसएम) में से, 89 पुलिस सेवा को, पांच अग्निशमन सेवा को, तीन सिविल डिफेंस एवं होमगार्ड सेवा को और चार ‘करेक्शनल सर्विसेज’ को प्रदान किए गए हैं. इसमें कहा गया कि इसी प्रकार, सराहनीय सेवा के लिए कुल 756 पदक (एमएसएम) में से, 664 पुलिस सेवा को, 34 अग्निशमन सेवा को, 33 होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस सेवा को और 25 ‘करेक्शनल सर्विसेज’ को प्रदान किए गए हैं.</p>
<p>परिभाषा के अनुसार, वीरता पदक असाधारण बहादुरी और विशिष्ट वीरतापूर्ण कार्य के आधार पर जीवन और संपत्ति बचाने या अपराध को रोकने या अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए प्रदान किए जाते हैं. इसमें उठाए गए जोखिम का आकलन संबंधित अधिकारी के दायित्वों और कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है. बयान के अनुसार, विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम), सेवा में विशेष रूप से विशिष्ट रिकॉर्ड के लिए प्रदान किया जाता है और सराहनीय सेवा के लिए पदक (एमएसएम) कर्तव्य के प्रति निष्ठा की विशेषता वाली मूल्यवान सेवा के लिए प्रदान किया जाता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 18:52:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : महत्वपूर्ण इलाकों में सुरक्षा कर्मियों और चुनाव आयोग के अधिकारियों की विशेष तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) चुनाव 2026 के लिए प्रचार के साथ ही सभी राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। आगामी नगरपालिका चुनाव 15 जनवरी से शुरू होने वाले हैं। चुनाव के अंतिम दिन राजधानी और अन्य महत्वपूर्ण इलाकों में सुरक्षा कर्मियों और चुनाव आयोग के अधिकारियों की विशेष तैनाती देखी गई।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46976/special-deployment-of-security-personnel-and-election-commission-officials-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-14t124713.987.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) चुनाव 2026 के लिए प्रचार के साथ ही सभी राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। आगामी नगरपालिका चुनाव 15 जनवरी से शुरू होने वाले हैं। चुनाव के अंतिम दिन राजधानी और अन्य महत्वपूर्ण इलाकों में सुरक्षा कर्मियों और चुनाव आयोग के अधिकारियों की विशेष तैनाती देखी गई। अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में वाहनों और स्थल निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की, ताकि चुनाव के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता न हो। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव प्रचार की समाप्ति के बाद किसी भी प्रकार की रैली, मीटिंग या प्रचार सामग्री का वितरण न करें। इस दिशा में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p> </p>
<p>सुरक्षा बलों ने न केवल मुख्य मार्गों और चुनावी बूथों का निरीक्षण किया, बल्कि चुनाव सामग्री और प्रत्याशियों के वाहनों की जांच भी की। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। मुंबई में बीएमसी चुनाव हमेशा से ही महत्वपूर्ण माना जाता रहा है, क्योंकि यह शहर की नगरपालिका प्रशासन और विकास योजनाओं को सीधे प्रभावित करता है। इस बार के चुनाव में कई प्रमुख राजनीतिक दल और स्थानीय नेता भाग ले रहे हैं। उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जनता से समर्थन मांगा, लेकिन अब आखिरी दिन के बाद कोई भी प्रचार गतिविधि नहीं होगी।</p>
<p>चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्धारित तारीख 15 जनवरी को मतदान जरूर करें। सभी मतदाता अपने अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर मतदान कर सकते हैं। इसके साथ ही आयोग ने मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस बार के चुनाव में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए निगरानी कैमरों और मोबाइल पेट्रोलिंग टीमों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, चुनाव आयोग ने सभी मतदाताओं को याद दिलाया कि मतदान के दौरान कोविड-19 या अन्य स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। <br />विशेषज्ञों का मानना है कि बीएमसी चुनाव मुंबई के राजनीतिक परिदृश्य और नगर निगम प्रशासन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। चुनाव परिणाम न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि शहर के विकास और परियोजनाओं पर भी सीधा असर डालते हैं। इस प्रकार, मुंबई में बीएमसी चुनाव 2026 के लिए प्रचार का अंतिम दिन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया है और अब शहर में सुरक्षा और मतदान की तैयारियां पूरी तरह चरम पर हैं।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 12:47:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : आयुध कारखानों के 59000 रक्षा कर्मियों पर लटकी तलवार, कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आयुध कारखानों के सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच, यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑर्डनेंस एम्प्लॉइज (यूएफओई) ने कैबिनेट सचिव और प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों से औपचारिक रूप से संपर्क करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है। यूएफओई, जो नवगठित डीपीएसयू में अनिवार्य समायोजन का विरोध कर रहा है, ने मांग की है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की प्रस्तावित समिति एक सरकारी अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करे। इसमें कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति तक प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाए। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46442/the-sword-hanging-over-59000-defense-personnel-of-new-delhi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-24t183545.595.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>आयुध कारखानों के सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच, यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑर्डनेंस एम्प्लॉइज (यूएफओई) ने कैबिनेट सचिव और प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों से औपचारिक रूप से संपर्क करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है। यूएफओई, जो नवगठित डीपीएसयू में अनिवार्य समायोजन का विरोध कर रहा है, ने मांग की है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की प्रस्तावित समिति एक सरकारी अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करे। इसमें कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति तक प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाए। </p>
<p> </p>
<p>सात डीपीएसयू के सीएमडी द्वारा आयोजित अवशोषण पैकेज पर बैठकों का संयुक्त मंच द्वारा सामूहिक बहिष्कार करने के फैसले से हितधारक परामर्श प्रक्रिया कथित तौर पर बाधित हो गई। यूएफओई के अनुसार, आईओएफएस अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संघों सहित सभी संघों द्वारा पूर्ण बहिष्कार के कारण रक्षा मंत्रालय को शेष तीन परामर्श बैठकें रद्द करनी पड़ीं। यूएफओई का कहना है कि यह अस्वीकृति डीपीएसयू में अवशोषण के खिलाफ कर्मचारियों के स्पष्ट जनादेश को दर्शाती है। कैबिनेट सचिव और संबंधित सचिवों को लिखे अपने पत्र में यूएफओई ने चार प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला है। </p>
<p>रक्षा नागरिक कर्मचारियों से संबंधित सेवा मामलों पर कैबिनेट का निर्णय। उच्च न्यायालय के समक्ष रक्षा मंत्रालय द्वारा लिखित प्रतिबद्धता, जिसमें कहा गया है कि कर्मचारी चाहें तो सेवानिवृत्ति तक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में प्रतिनियुक्ति पर बने रह सकते हैं। यह प्रतिबद्धता न्यायालय के निर्णय में दर्ज है। सेवानिवृत्ति तक केंद्रीय सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों द्वारा अग्रिम विकल्पों का प्रयोग। सामूहिक रूप से विलय बैठकों का बहिष्कार, जो कर्मचारियों द्वारा डीपीएसयू विलय की अस्वीकृति को दर्शाता है। </p>
<p>क्या कैबिनेट सचिव से संपर्क करना जल्दबाजी थी, जबकि सचिवों की समिति का औपचारिक गठन अभी बाकी है। उसके कार्यक्षेत्र की अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है, एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस सवाल के जवाब में कहा, यह जल्दबाजी नहीं, बल्कि समय पर उठाया गया कदम है। हितधारकों से परामर्श विफल होने और कर्मचारियों द्वारा सरकारी सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने के बाद, यह मामला अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) के पास जाएगा। इससे पहले, यह आवश्यक है कि सभी संबंधित सचिवों को कर्मचारियों की स्थिति से पूरी तरह अवगत कराया जाए।</p>
<p>उन्होंने कहा, यूएफओई को आशंका है कि रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) सचिवों की समिति के समक्ष बहिष्कार का औचित्य या उच्च न्यायालय के समक्ष सरकार द्वारा किए गए वादे ठीक से प्रस्तुत नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि हमने 22 दिसंबर, 2025 को अपना पत्र अग्रिम रूप से प्रस्तुत किया था। उसमें संवैधानिक सुरक्षा उपायों का हवाला दिया गया। यूएफओई ने तर्क दिया है कि रक्षा क्षेत्र के नागरिक कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत संरक्षण प्राप्त है, जो उन्हें केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के रूप में सेवानिवृत्त होने का अधिकार देता है।</p>
<p>मंच ने सवाल उठाया है कि इन सुरक्षा उपायों से अवगत होने के बावजूद सरकार इस मामले को 'अनावश्यक रूप से लंबा और जटिल' क्यों बना रही है। श्रीकुमार ने कहा, 'हमें विश्वास है कि सचिवों की समिति, हमारी याचिका की जांच करने के बाद सकारात्मक रुख अपनाएगी। ईजीओएम को सभी 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के केंद्रीय सरकार के दर्जे को बरकरार रखने वाली अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करेगी। इससे पहले सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह प्रतिबद्धता जताई थी। अब यह मामला कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के औपचारिक गठन और उसकी विचार-विमर्श प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन सबसे बड़े संगठित नागरिक कार्यबलों में से एक के भविष्य की सेवा शर्तों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/46442/the-sword-hanging-over-59000-defense-personnel-of-new-delhi</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 18:36:28 +0530</pubDate>
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