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                <title>words - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>नई दिल्ली : अब जीना मुश्किल है, पत्नी की इस बात को सहन नहीं कर सके जज अमन कुमार शर्मा, उठा लिया खौफनाक कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के जज आलोक कुमार शर्मा आत्महत्या मामले में पत्नी को ही मुख्य आरोपी माना जा रहा है। परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पत्नी के टॉर्चर की वजह से आलोक शर्मा मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। वहीं, अमन के पिता प्रेम शर्मा के पुलिस को दिए गए कथित बयान का हवाला देते हुए परिवार के एक सदस्य ने बताया कि अमन ने घटना वाली रात करीब 10 बजे अपने पिता को फोन किया और अपनी परेशानी बताई।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49677/new-delhi-now-it-is-difficult-to-live-judge-aman"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-03t192249.716.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के जज आलोक कुमार शर्मा आत्महत्या मामले में पत्नी को ही मुख्य आरोपी माना जा रहा है। परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पत्नी के टॉर्चर की वजह से आलोक शर्मा मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। वहीं, अमन के पिता प्रेम शर्मा के पुलिस को दिए गए कथित बयान का हवाला देते हुए परिवार के एक सदस्य ने बताया कि अमन ने घटना वाली रात करीब 10 बजे अपने पिता को फोन किया और अपनी परेशानी बताई।</p>
<p> </p>
<p><strong>अब जीना मुश्किल हो गया है, जज के आखिरी शब्द</strong><br />अमन ने अपने पिता से बात करते हुए कहा कि मैं बहुत परेशान हूं और मेरे लिए जीना मुश्किल हो गया है। मुझे दो महीने से प्रताड़ित किया जा रहा है। अमन के बहनोई के ससुर राजेश के मुताबिक अमन का अपनी पत्नी से विवाद हुआ था, जो स्वयं एक न्यायिक अधिकारी हैं। अमन की पत्नी की बहन (निधि मलिक) एक आईएएस अधिकारी हैं और जम्मू में तैनात हैं। अमन के अनुसार, निधि मलिक उसके जीवन में दखल दे रही थी और उसके घर को कंट्रोल कर रही थी।</p>
<p><strong>पत्नी ने पिता का किया अपमान तो उठाया खौफनाक कदम</strong><br />अमन के पिता ने कहा कि उनकी बहू ने उनसे कहा कि अगर आप यहां से नहीं जाते हैं, तो वह पुलिस को बुला लेगी। अगली सुबह, अमन के पिता ने अपनी बहू के माता-पिता से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनका फोन ब्लॉक कर दिया था। तभी घर में झगड़ा शुरू हो गया। झगड़ा के बाद अमन के पिता दूसरे कमरे में चले गए।</p>
<p><strong>अमन की पत्नी चिल्ला रही थी और अमन रो रहा था</strong><br />अमन के पिता के अनुसार, स्वाति बहुत गुस्से में चिल्ला रही थी, जबकि अमन रो रहा था। थोड़ी देर बाद शोर बंद हो गया। उन्होंने सोचा कि झगड़ा सुलझ गया होगा और कुछ देर इंतजार किया। कुछ देर बाद जब वे उन्हें देखने गए, तो उन्होंने स्वाति से अमन के बारे में पूछा, जिस पर उसने कहा कि उसे नहीं पता।<br />जब उन्होंने अमन के मोबाइल पर कॉल किया, तो उन्हें बाथरूम के अंदर घंटी बजने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक दी और उसे दरवाजा खोलने के लिए कहा। इसी दौरान युद्धवीर (स्वाति के चाचा) और निधि मलिक आ गए। उन्होंने बहुत कोशिश की, दरवाजे पर फर्नीचर पटका, लेकिन दरवाजा नहीं खुला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:23:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : उद्धव और राज ठाकरे के एक साथ आने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि दोनों सिर्फ बोल-बचन तक ही सीमित;  बालासाहेब के असली वारिस सिर्फ शिंदे -  संजय निरुपम </title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिवसेना उपनेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने ठाकरे बंधुओं पर बड़ा हमला बोला है। अंधेरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे के एक साथ आने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि दोनों सिर्फ बोल-बचन तक ही सीमित हैं। निरुपम ने दावा किया कि बाला साहेब ठाकरे के ‘ब्रांड’ का असली वारिस केवल डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे हैं। यह बयान दि बेस्ट एम्प्लॉइज को-ऑप क्रेडिट सोसायटी के चुनाव नतीजों के बाद आया। इस चुनाव को ठाकरे बंधुओं के गठबंधन का पहला प्रयोग माना जा रहा था, लेकिन परिणाम में उनका यह प्रयोग नाकाम रहा। चुनाव में एक तरफ मनसे और शिवसेना (यूबीटी) साथ थीं, तो दूसरी तरफ बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43305/mumbai--uddhav-and-raj-thackeray-coming-together-makes-no-difference-as-both-are-limited-to-mere-words--shinde-is-the-only-real-heir-of-balasaheb---sanjay-nirupam"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download---2025-08-23t130442.933.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>शिवसेना उपनेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने ठाकरे बंधुओं पर बड़ा हमला बोला है। अंधेरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे के एक साथ आने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि दोनों सिर्फ बोल-बचन तक ही सीमित हैं। निरुपम ने दावा किया कि बाला साहेब ठाकरे के ‘ब्रांड’ का असली वारिस केवल डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे हैं। यह बयान दि बेस्ट एम्प्लॉइज को-ऑप क्रेडिट सोसायटी के चुनाव नतीजों के बाद आया। इस चुनाव को ठाकरे बंधुओं के गठबंधन का पहला प्रयोग माना जा रहा था, लेकिन परिणाम में उनका यह प्रयोग नाकाम रहा। चुनाव में एक तरफ मनसे और शिवसेना (यूबीटी) साथ थीं, तो दूसरी तरफ बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना।</p>
<p> </p>
<p><strong>शिंदे ने यूबीटी की पिटाई की</strong><br />करीब 15 हजार वोटर्स में से लगभग 12,500 ने मतदान किया। इन वोटर्स में अधिकतर मराठी और भूमिपुत्र समुदाय से थे। चुनाव परिणामों में मनसे-यूबीटी को वोटरों ने पूरी तरह नकार दिया और बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को बढ़त दी। निरुपम ने कहा कि यदि आज शिवसेना (यूबीटी) किसी तरह टिक पाई है, तो केवल मुस्लिम वोटर्स के सहारे। अगर यह वोट बैंक भी खिसक गया तो यूबीटी को एक भी सीट नसीब नहीं होगी। निरुपम ने स्पष्ट किया कि इस चुनाव भले ही छोटा था, लेकिन इसका महत्व मुंबई की राजनीति के लिहाज से काफी बड़ा है। नतीजों ने साफ कर दिया कि मराठी वोट बैंक ठाकरे बंधुओं से हटकर शिंदे गुट और बीजेपी के पक्ष में खड़ा हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 13:06:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : छगन भुजबल को महायुति मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में फिर से शामिल करने पर शिवसेना के दो गुटों के बीच जुबानी जंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एनसीपी नेता छगन भुजबल को महायुति मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में फिर से शामिल करने पर शिवसेना के दो गुटों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के माध्यम से एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा, यह सवाल उठाते हुए कि वे उस व्यक्ति के बगल में कैसे बैठ सकते हैं जिसने पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे को गिरफ्तार करवाया था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/40763/mumbai--war-of-words-between-two-factions-of-shiv-sena-over-re-inclusion-of-chhagan-bhujbal-as-minister-in-mahayuti-cabinet"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-05/download---2025-05-22t145239.975.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>एनसीपी नेता छगन भुजबल को महायुति मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में फिर से शामिल करने पर शिवसेना के दो गुटों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के माध्यम से एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा, यह सवाल उठाते हुए कि वे उस व्यक्ति के बगल में कैसे बैठ सकते हैं जिसने पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे को गिरफ्तार करवाया था. शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने पलटवार करते हुए कहा कि भुजबल उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भी मंत्री थे. आइए, जानते हैं ढाई दशक पुराने उस घटनाक्रम को नजर डालें जिसकी महाराष्ट्र के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में चर्चा हो रही है. </p>
<p> </p>
<p><strong>बाल ठाकरे और छगन भुजबल का रिश्ता</strong><br />बाल ठाकरे और छगन भुजबल के बीच गुरु और चेले का रिश्ता था जो आगे चलकर दुश्मनी में तब्दील हो गया. ठाकरे और भुजबल के बीच दुश्मनी 1991 में शुरू हुई जब भुजबल ने शिवसेना के भीतर पहली बगावत की. भुजबल, ठाकरे के मनोहर जोशी को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त करने के फैसले से नाराज थे. इसके अलावा, ठाकरे की मंडल आयोग के खिलाफ टिप्पणियों ने ओबीसी नेता भुजबल को नाराज़ कर दिया. भुजबल एक कद्दावर ओबीसी नेता थे.</p>
<p>शरद पवार, जो भुजबल की बेचैनी को करीब से देख रहे थे, ने उनके शिवसेना से कांग्रेस के कई विधायकों के साथ शामिल होने की राह आसान की. यह ठाकरे की छवि के लिए बड़ा झटका था. इस विद्रोह के कारण शिवसेना को विपक्ष के नेता का पद बीजेपी को देना पड़ा, जो तब विधानसभा में सबसे अधिक विधायकों वाली पार्टी बन गई.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/40763/mumbai--war-of-words-between-two-factions-of-shiv-sena-over-re-inclusion-of-chhagan-bhujbal-as-minister-in-mahayuti-cabinet</link>
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                <pubDate>Thu, 22 May 2025 14:53:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र सरकार को बच्चू कडु की चेतावनी, मराठा आरक्षण को लेकर जुबान पर कायम रहे अन्यथा...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बच्चू कडू ने यह भी मांग की है कि शिंदे समिति ने अब तक क्या किया है, इस पर सरकार को मनोज जारांगे को एक रिपोर्ट देनी चाहिए। बच्चू कडु ने अंतरवाली सराती में लाठीचार्ज के दौरान मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग है। उन्होंने कहा कि मैंने जारांगे को अपनी जुबान दी है, इसलिए मैं अपनी बात पर कायम हूं, अन्यथा मैं जारांगे के आंदोलन में में भाग लूंगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/26885/bachchu-kadu-s-warning-to-maharashtra-government--keep-your-words-regarding-maratha-reservation-otherwise----%E2%80%8B"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-12/download-(3)12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर :</strong> मराठा आरक्षण को लेकर विधायक बच्चू कडु आक्रामक हो गए है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर राज्य सरकार ने अपनी बात नहीं रखी तो मैं मनोज जारांगे पाटिल के साथ आंदोलन में खड़ा रहूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि मनोज जारांगे द्वारा दी गई 24 तारीख नजदीक आ रही है, 17 तारीख को जारांगे नए आंदोलन की घोषणा करने जा रहे हैं।  </p>
<p style="text-align:justify;">बच्चू कडू ने यह भी मांग की है कि शिंदे समिति ने अब तक क्या किया है, इस पर सरकार को मनोज जारांगे को एक रिपोर्ट देनी चाहिए। बच्चू कडु ने अंतरवाली सराती में लाठीचार्ज के दौरान मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग है। उन्होंने कहा कि मैंने जारांगे को अपनी जुबान दी है, इसलिए मैं अपनी बात पर कायम हूं, अन्यथा मैं जारांगे के आंदोलन में में भाग लूंगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मनोज जारांगे के आंदोलन के दौरान विधायक बच्चू कडू ने राज्य सरकार और जारांगे के बीच हस्तक्षेप कर उनका आंदोलन रुकवाया था। इसके बाद जारांगे ने मराठा आरक्षण के लिए राज्य सरकार को 24 दिसंबर तक का समय दिया था और मांग की है कि मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र दिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मराठा आरक्षण कर्ता की मांग का विधायक बच्चू कडू ने भी समर्थन किया है। इससे पहले मराठा आरक्षण पर बोलते हुए विधायक बच्चू कडू ने कहा था कि, हम चुनिंदा मराठों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। फिर भी ओबीसी को आरक्षण कम दिया जाता है। यह आरक्षण 52 प्रतिशत तक जाता है। इसलिए ओबीसी का आरक्षण बढ़ाएं या उन्हें ए, बी, सी, डी में विभाजित करें। क्या मराठा ओबीसी नहीं हैं? मराठा कौन है? क्या मराठा पाकिस्तान या अमेरिका से हैं? उन्हें आरक्षण का अधिकार क्यों नहीं है?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Dec 2023 04:45:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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