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                <title>acquits - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>acquits RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : कोर्ट ने मूल अपराध के बंद होने के बाद MSCB मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोहित पवार और 16 अन्य को बरी कर दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की एक स्पेशल PMLA कोर्ट ने बुधवार को NCP (SP) विधायक रोहित पवार और 16 अन्य को महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक शुगर मिल्स घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बरी कर दिया, जिससे इस मामले की कार्यवाही प्रभावी रूप से समाप्त हो गई। यह मामला 2019 में प्रवर्तन निदेशालय  द्वारा दर्ज की गई एक ECIR से शुरू हुआ था। यह ECIR, बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों पर मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई एक FIR के बाद दर्ज की गई थी। आरोप 2005 और 2010 के बीच MSCB द्वारा सहकारी चीनी मिलों को दिए गए लोन से संबंधित थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49427/mumbai-court-acquits-rohit-pawar-and-16-others-in-mscb"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-23t194909.035.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई की एक स्पेशल PMLA कोर्ट ने बुधवार को NCP (SP) विधायक रोहित पवार और 16 अन्य को महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक शुगर मिल्स घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बरी कर दिया, जिससे इस मामले की कार्यवाही प्रभावी रूप से समाप्त हो गई। यह मामला 2019 में प्रवर्तन निदेशालय  द्वारा दर्ज की गई एक ECIR से शुरू हुआ था। यह ECIR, बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों पर मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई एक FIR के बाद दर्ज की गई थी। आरोप 2005 और 2010 के बीच MSCB द्वारा सहकारी चीनी मिलों को दिए गए लोन से संबंधित थे। आरोप था कि इन मिलों को उनकी असल कीमत से कम दाम पर बेच दिया गया, जिससे बैंक को 5,000 करोड़ रुपये से लेकर 25,000 करोड़ रुपये तक का भारी नुकसान हुआ।</p>
<p> </p>
<p> 2023 और 2025 के बीच ED द्वारा दायर चार्जशीट में जिन लोगों के नाम शामिल थे, उनमें रोहित पवार, कुछ कृषि और चीनी कंपनियाँ, और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियाँ शामिल थीं। एजेंसी ने दावा किया था कि आरोपी चीनी मिलों को उनकी असल कीमत से कम दाम पर खरीदने में शामिल थे, और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज किए गए बयानों से उनकी संलिप्तता और इरादे का पता चलता है। हालाँकि, मामला तब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया, जब इसका मूल अपराध  ही खत्म हो गया। 27 फरवरी, 2026 को मुंबई की एक कोर्ट ने EOW द्वारा (2020 और 2024 में) दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही FIR प्रभावी रूप से बंद हो गई और जाँच के दायरे में आए सभी लोगों को राहत मिल गई, जिनमें अजित पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार से जुड़ी कंपनियाँ भी शामिल थीं।</p>
<p>इस घटनाक्रम के आधार पर, रोहित पवार और अन्य सह-आरोपियों ने खुद को बरी करने की माँग की। उन्होंने तर्क दिया कि जब मूल अपराध ही मौजूद नहीं है, तो PMLA के तहत कार्यवाही जारी नहीं रह सकती। ED ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि कोर्ट अभी भी मामले की जाँच उसके गुण-दोष के आधार पर कर सकती है। ED ने यह भी तर्क दिया कि रोहित पवार, जिनका नाम EOW की FIR में आरोपी के तौर पर शामिल नहीं था, उन्हें FIR बंद होने का सीधा लाभ नहीं मिलना चाहिए। ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:50:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने मालेगांव ब्लास्ट केस में चार आरोपियों को बरी किया, आरोप खारिज किए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2006 के मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी चार लोगों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और एक स्पेशल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49400/mumbai-bombay-high-court-acquitted-four-accused-in-malegaon-blast"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t184922.015.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2006 के मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी चार लोगों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और एक स्पेशल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया। </p>
<p> </p>
<p>कोर्ट का यह फैसला एक ऐसे केस में एक बड़ा कानूनी डेवलपमेंट है जिसने अपनी जटिलता और इसमें शामिल लोगों की संख्या के कारण काफी ध्यान खींचा है।</p>
<p>चार लोगों—राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवारिया, और लोकेश शर्मा—पर इंडियन पीनल कोड और अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत मालेगांव बम धमाकों में कथित तौर पर शामिल होने के लिए आरोप लगाए गए थे। ये बम धमाके 8 सितंबर, 2006 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव शहर में हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:50:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : गर्भावस्था में बहू को नौकरी छोड़ने की सलाह देना क्रूरता नहीं, मुंबई की कोर्ट ने सास को किया बरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने माना है कि गर्भावस्था में बहू को नौकरी छोड़ने की सास की सलाह को क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने पांच आरोपियों को क्रूरता के आरोप से बरी कर यह फैसला सुनाया है। बहू ने सास पर क्रूरता का आरोप लगाया था। मुलुंड कोर्ट के जुडिशियल मैजिस्ट्रेट एनजी व्यास ने कहा कि सास ने बहू से कहा था कि वह गर्भावस्था के दौरान यात्रा न करे,इस लिए उसे नौकरी छोड़ देनी चाहिए। इसमें जबरजस्ती और दबाव का भाव नहीं था। सास ने बहू को सिर्फ़ नौकरी छोड़ने की सलाह दी थी। एफआईआर से यह प्रतीत नहीं होता है कि बच्ची के जन्म के बाद बहू को नौकरी के लिए बाध्य किया गया हो।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48721/advising-daughter-in-law-to-leave-her-job-during-pregnancy-is-not"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-26t124336.794.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने माना है कि गर्भावस्था में बहू को नौकरी छोड़ने की सास की सलाह को क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने पांच आरोपियों को क्रूरता के आरोप से बरी कर यह फैसला सुनाया है। बहू ने सास पर क्रूरता का आरोप लगाया था। मुलुंड कोर्ट के जुडिशियल मैजिस्ट्रेट एनजी व्यास ने कहा कि सास ने बहू से कहा था कि वह गर्भावस्था के दौरान यात्रा न करे,इस लिए उसे नौकरी छोड़ देनी चाहिए। इसमें जबरजस्ती और दबाव का भाव नहीं था। सास ने बहू को सिर्फ़ नौकरी छोड़ने की सलाह दी थी। एफआईआर से यह प्रतीत नहीं होता है कि बच्ची के जन्म के बाद बहू को नौकरी के लिए बाध्य किया गया हो।</p>
<p> </p>
<p>मैजिस्ट्रेट ने कहा कि अकसर समझ की कमी के कारण सही बात को गलत ढंग से समझा जाता है। परिवार में मामूली कारणों से झगड़ा हो सकता है। कई बार गलतफहमी, भ्रम और बातचीत की कमी के कारण भी झगड़े होते हैं। झगड़े और विवाद किसी भी पक्ष से हो सकते हैं।</p>
<p><strong>बेटी के जन्म के बाद से क्रूरता करने का आरोप</strong><br />बहू के मुताबिक, बेटी को जन्म देने के बाद उससे बुरा बर्ताव किया गया था। महिला ने पति पर मारपीट और अपशब्द कहने का आरोप लगाया था। उसके रिश्तेदारों पर झगड़े के लिए उकसाने का आरोप था। इसके कारण उसे ससुराल से मायके जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।</p>
<p><strong>दस साल पहले दर्ज हुआ था केस</strong><br />केस से जुड़े दंपती का मई 2010 में विवाह हुआ था। लंबे समय से जारी झगड़े और बदसलूकी से तंग आकर महिला ने साल 2015 में पुलिस में पति, सास और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने केस को लेकर आईपीसी की धारा 34 और 498ए (क्रूरता) के तहत मामला दर्ज किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48721/advising-daughter-in-law-to-leave-her-job-during-pregnancy-is-not</link>
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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 12:44:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई स्पेशल कोर्ट ने ईडी के महाराष्ट्र सदन घोटाले मामले में पूर्व राज्य पीडब्ल्यूडी मंत्री छगन भुजबल को बरी किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट  के तहत मामलों की सुनवाई के लिए बनी स्पेशल कोर्ट ने एनसीपी के सीनियर नेता छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज और भतीजे समीर को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ दर्ज महाराष्ट्र सदन घोटाले मामले में बरी कर दिया। मामले की अध्यक्षता कर रहे स्पेशल जज सत्यनारायण नवंदर ने भुजबल परिवार को बरी करने का आदेश सुनाया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47207/mumbai-special-court-acquits-former-state-pwd-minister-chhagan-bhujbal"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-24t125438.825.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट  के तहत मामलों की सुनवाई के लिए बनी स्पेशल कोर्ट ने एनसीपी के सीनियर नेता छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज और भतीजे समीर को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ दर्ज महाराष्ट्र सदन घोटाले मामले में बरी कर दिया। मामले की अध्यक्षता कर रहे स्पेशल जज सत्यनारायण नवंदर ने भुजबल परिवार को बरी करने का आदेश सुनाया। </p>
<p> </p>
<p>"हां, मेरे क्लाइंट्स को ईडी मामले में बरी कर दिया गया। आदेश आने के बाद कारण पता चलेंगे। लेकिन मुख्य रूप से यह तर्क कि जब उन्हें एसीबी मामले में बरी कर दिया गया तो यह मामला भी खत्म होना चाहिए, कोर्ट ने इस पर विचार किया।" गौरतलब है कि भुजबल अभी येओला विधानसभा से मौजूदा विधायक और राज्य के खाद्य मंत्री हैं। उसको 14 मार्च, 2016 को पीएमएलए की धारा 3 के साथ धारा 4 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के बाद गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>उनकी गिरफ्तारी महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान दिल्ली में महाराष्ट्र सदन और मुंबई यूनिवर्सिटी में कलिना लाइब्रेरी के निर्माण के लिए ठेके देने में कथित अनियमितताओं से जुड़ी थी। 2014 में आम आदमी पार्टी द्वारा दायर जनहित याचिका के कारण एक विशेष जांच दल का गठन हुआ था। भुजबल पर आईपीसी की धारा 420, 471, 120बी के साथ 34 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए), 13(1)(डी), 13(2) के तहत दो एफआईआर दर्ज की गई और आईपीसी की धारा 420, 120B, 109, 465, 468, 471 के साथ 34 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(सी), 13(1)(डी) और 13(1) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया।</p>
<p>एंटी-करप्शन ब्यूरो ने एक चार्जशीट दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि भुजबल और उनके परिवार ने लगभग 900 करोड़ रुपये का मनी लॉन्ड्रिंग किया। इसी मामले के आधार पर उनके खिलाफ PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया। सितंबर, 2021 में एक स्पेशल कोर्ट ने एसीबी द्वारा जांच किए गए महाराष्ट्र सदन घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में भुजबल, उनके बेटे और अन्य लोगों को बरी कर दिया। कोर्ट को भुजबल से जुड़ी किसी साजिश या अवैध पैसों के लेन-देन का कोई शुरुआती सबूत नहीं मिला। भुजबल ने तर्क दिया कि कॉन्ट्रैक्ट देने के फैसले सामूहिक रूप से लिए गए और रिश्वत के आरोप सबूतों से साबित नहीं होते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 16:49:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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