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                <title>Shiv - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Shiv RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : महापौर पद को लेकर BJP-शिंदे सेना में खींचतान! शिवसेना BMC गुट के नेता ने पावर शेयरिंग को लेकर किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महानगरपालिका यानी BMC में महापौर पद को लेकर गठबंधन सहयोगी बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के दावे प्रतिदावे आमने-सामने आ रहे हैं। शिवसेना के बीएमसी गुट नेता अमेय घोले के दावे के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ में हुई महायुति की बैठक में महापौर पद को लेकर ढाई-सवा-सवा साल का पावर शेयरिंग फॉर्मूला तय हुआ था। जानें ये पूरा मामला क्या है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51595/bjp-shinde-sena-tussle-over-mumbai-mayors-post-shiv-sena-bmc"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/pti01_12_2026_000513b.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:</strong> महानगरपालिका यानी BMC में महापौर पद को लेकर गठबंधन सहयोगी बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के दावे प्रतिदावे आमने-सामने आ रहे हैं। शिवसेना के बीएमसी गुट नेता अमेय घोले के दावे के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ में हुई महायुति की बैठक में महापौर पद को लेकर ढाई-सवा-सवा साल का पावर शेयरिंग फॉर्मूला तय हुआ था। जानें ये पूरा मामला क्या है।  </p>
<p> </p>
<p><strong>सामने आई सवा साल शिवसेना के महापौर वाली बात</strong><br />इस फॉर्मूले के मुताबिक, शुरुआती ढाई साल बीजेपी का महापौर, उसके बाद सवा साल शिवसेना का महापौर और आखिरी सवा साल फिर बीजेपी का महापौर होगा। अमेय घोले का दावा है कि सभी समितियों का बंटवारा भी इसी फॉर्मूले के आधार पर किया गया था। ऐसे में शिवसेना अपने हिस्से के महापौर पद के लिए मजबूती से दावा करेगी।</p>
<p><strong>अमेय घोले के दावे को BJP ने किया खारिज</strong><br />वहीं, बीजेपी नेता और मंत्री आशीष शेलार ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि अनौपचारिक चर्चाओं का कोई महत्व नहीं है। अगर महापौर पद को लेकर कोई आधिकारिक सहमति बनी होती, तो उसकी घोषणा की जाती। सीएम फडणवीस और डिप्टी सीएम शिंदे में अगर कोई औपचारिक बात या प्रस्ताव पर चर्चा हुई होगी तो दोनों ही सच्चाई बताएंगे।</p>
<p><strong>BMC को लेकर ‘ऑपरेशन टाइगर’ की भी चर्चा</strong><br />इस बीच सूत्रों के मुताबिक, शिंदे सेना बीएमसी में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जरिए यूबीटी शिवसेना के करीब 45 पार्षदों को अपने साथ लाने की तैयारी कर रही है। शिंदे सेना का मकसद बीएमसी में अपना आंकड़ा बढ़ाकर महापौर पद पर अपना दावा मजबूत करना है।</p>
<p><strong>BMC में अभी क्या है स्थिति?</strong><br />फिलहाल, बीएमसी में बीजेपी के 89, शिंदे सेना के 29, समर्थन मिलाकर 33, यूबीटी शिवसेना के 65 और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 3 पार्षद हैं। यानी बीएमसी में महापौर पद को लेकर बीजेपी और शिंदे सेना के बीच खींचतान आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है। इससे पहले हाल ही में बृहन्मुंबई महानगरपालिका PR एजेंसी के लिए 25 लाख रुपये के ठेके को लेकर विवाद सामने आया था। तब विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि मुंबईकरों के टैक्स के पैसे की बर्बादी की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 09:10:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: शिवसेना विवाद में उद्धव गुट का चुनाव आयोग पर निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने से इनकार करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। उद्धव ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि विधायी विंग में विभाजन को अपने आप में राजनीतिक दल में विभाजन नहीं माना जा सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51305/uddhav-group-targets-election-commission-in-mumbai-shiv-sena-controversy"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/photo.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने से इनकार करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। उद्धव ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि विधायी विंग में विभाजन को अपने आप में राजनीतिक दल में विभाजन नहीं माना जा सकता है। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश के अनुच्छेद 15 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग तभी कर सकता है जब राजनीतिक दल में विभाजन के परिणामस्वरूप दो प्रतिद्वंद्वी गुट बन जाएं। चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के अनुच्छेद 15 के तहत चुनाव आयोग को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रतिद्वंद्वी समूहों या गुटों द्वारा दल के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा किए जाने पर विवादों का निपटारा करने का अधिकार दिया गया है। आयोग का निर्णय सभी प्रतिद्वंद्वी गुटों पर बाध्यकारी होगा।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि विधायी दल की एक अलग बैठक इस तरह के विभाजन का कारण नहीं बन सकती। "चुनाव आयोग का कहना है कि शिवसेना में फूट पड़ने का संकेत विधायक दल की अलग बैठक का आयोजन था। विधायक दल की अलग बैठक का आयोजन कभी भी पार्टी में फूट का कारण नहीं बन सकता," सिबल ने कहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ भारतीय चुनाव आयोग के शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता देने के फैसले को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर भी सुनवाई कर रही थी।उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश होते हुए सिबल ने तर्क दिया कि वैधानिक योजना एक राजनीतिक दल और उसके विधायी विंग के बीच अंतर करती है।लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए और चुनाव चिह्न आदेश का हवाला देते हुए, सिबल ने प्रस्तुत किया कि विभाजन की आवश्यकता मूल राजनीतिक दल के स्तर पर पूरी होनी चाहिए।</p>
<p>सिबल के अनुसार, ईसीआई अनुच्छेद 15 के तहत कार्यवाही का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए नहीं कर सकता था कि पार्टी का संविधान स्वयं लोकतांत्रिक था या नहीं।उन्होंने कहा, "ईसीआई केवल एक न्यायाधिकरण है। यह संविधान के लोकतांत्रिक या अलोकतांत्रिक स्वरूप का फैसला नहीं कर सकता।"सिबल ने तर्क दिया कि भले ही पार्टी के संविधान को अलोकतांत्रिक माना जाए, इसका परिणाम केवल पार्टी के पंजीकरण से संबंधित कार्रवाई हो सकता है, न कि उसके चुनावी चिन्ह को ऐसे गुट को हस्तांतरित करना जो स्वयं उसी संगठनात्मक संरचना का हिस्सा हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 10:21:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: डॉक्टर मारपीट केस में शिवसेना पार्षद को जमानत </title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाणे में तीन म्युनिसिपल डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट के मामले में शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे और अन्य लोगों को ज़मानत दे दी है। हालांकि, हाई कोर्ट ने एक कड़ी शर्त रखी है कि जब तक पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं करती और मामले में आरोप तय नहीं हो जाते, तब तक म्हात्रे और अन्य लोग महाराष्ट्र में प्रवेश नहीं करेंगे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51214/shiv-sena-councilor-granted-bail-in-mumbai-doctor-assault-case"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-08t110902.980.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाणे में तीन म्युनिसिपल डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट के मामले में शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे और अन्य लोगों को ज़मानत दे दी है। हालांकि, हाई कोर्ट ने एक कड़ी शर्त रखी है कि जब तक पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं करती और मामले में आरोप तय नहीं हो जाते, तब तक म्हात्रे और अन्य लोग महाराष्ट्र में प्रवेश नहीं करेंगे।</p>
<p> </p>
<p>यह मामला 6 जुलाई को कल्याण डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित डोंबिवली म्युनिसिपल शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों के साथ हुई कथित मारपीट से जुड़ा है, जिससे मेडिकल जगत में भारी आक्रोश फैल गया था। </p>
<p>म्हात्रे को डोंबिवली के विष्णु नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के सिलसिले में धारा 132 और 121(1) के तहत गिरफ्तार किया गया था। हाई कोर्ट ने डॉक्टरों के साथ मारपीट के मामले पर चिंता जताते हुए स्वतः संज्ञान लेते हुए 18 जुलाई को ट्रायल कोर्ट द्वारा 14 जुलाई को म्हात्रे को दी गई ज़मानत पर रोक लगा दी थी। म्हात्रे और अन्य लोगों ने 19 जुलाई को सरेंडर कर दिया और उन्हें कल्याण की आधारवाड़ी जेल में रखा गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51214/shiv-sena-councilor-granted-bail-in-mumbai-doctor-assault-case</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:09:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई:शिवसेना के नाम और पहचान पर कानूनी जंग, सुप्रीम कोर्ट करेगा बड़े विवाद का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, शिवसेना की वास्तविक पहचान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत अब उन कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिनका संबंध चुनाव आयोग के उस फैसले से है, जिसमें पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर निर्णय दिया गया था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51166/mumbai-legal-battle-over-shiv-senas-name-and-identity-supreme"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/04_08_2022-shiv_sena_supreme_court_22952438_m.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, शिवसेना की वास्तविक पहचान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर शीर्ष अदालत अब उन कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिनका संबंध चुनाव आयोग के उस फैसले से है, जिसमें पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर निर्णय दिया गया था।</p>
<p> </p>
<p><strong>मामला क्या है? </strong><br />शिवसेना में राजनीतिक विभाजन के बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व एकनाथ शिंदे के हाथ में है। दोनों पक्षों ने स्वयं को मूल शिवसेना का प्रतिनिधि बताया। बाद में चुनाव आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और संगठनात्मक व विधायी समर्थन के आधार पर पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर फैसला दिया। इसी निर्णय को उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में किन मुद्दों पर होगी सुनवाई? </strong><br />सुनवाई के दौरान अदालत मुख्य रूप से इन पहलुओं पर विचार कर सकती है— चुनाव आयोग के फैसले की वैधानिकता। राजनीतिक दल की वास्तविक पहचान तय करने का आधार। संगठनात्मक बहुमत और विधायी बहुमत का महत्व। चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़े कानूनी प्रावधान। संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून की व्याख्या। उद्धव गुट की दलील उद्धव ठाकरे गुट का कहना है कि पार्टी की पहचान केवल निर्वाचित विधायकों की संख्या से तय नहीं की जा सकती। उनका तर्क है कि पार्टी का संविधान, संगठनात्मक ढांचा और मूल विचारधारा भी किसी राजनीतिक दल की पहचान तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। याचिकाओं में चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती देते हुए उसे कानूनी कसौटी पर परखने की मांग की गई है। </p>
<p><strong>दूसरे पक्ष का रुख </strong><br />दूसरी ओर, प्रतिपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने उपलब्ध रिकॉर्ड, कानूनी प्रावधानों और संबंधित तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय दिया था। उनका तर्क है कि आयोग ने स्थापित प्रक्रिया का पालन किया और उसका फैसला कानून के अनुरूप है। फैसले का व्यापक असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का प्रभाव केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल में विभाजन की स्थिति में पार्टी की पहचान, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर इस मामले पर पूरे देश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं। अदालत के अंतिम फैसले का असर महाराष्ट्र की राजनीति, दलों की आंतरिक संरचना और चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:34:39 +0530</pubDate>
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