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                <title>seeks - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर केंद्र सख्त, बंगाल सरकार से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल नियमों के उल्लंघन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48279/new-delhi-center-demands-strict-response-from-bengal-government-on"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-08t172020.296.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल नियमों के उल्लंघन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है।</p>
<p> </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल, कार्यक्रम स्थल और मार्ग व्यवस्था से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन पर पश्चिम बंगाल सरकार से रविवार शाम 5 बजे तक जवाब तलब किया गया है।</p>
<p>द्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर "ब्लू बुक" में बताए गए नियमों के उल्लंघन पर जवाब मांगा है। "ब्लू बुक" राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा और प्रोटोकॉल से संबंधित नियमों का एक गोपनीय दस्तावेज है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 17:21:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : सपा के अबू आज़मी ने कर्मचारियों के लिए रमज़ान में काम से राहत मांगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>समाजवादी पार्टी के अबू आसिम आज़मी ने शनिवार को राज्य सरकार से रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान कर्मचारियों को छुट्टी देने की रिक्वेस्ट की। मुख्यमंत्री को एक फॉर्मल बातचीत में, आज़मी ने पड़ोसी राज्यों में हाल ही में लागू की गई पॉलिसी जैसी ही एक पॉलिसी का प्रस्ताव रखा, ताकि रोज़े के दौरान रोज़ेदारों को आसानी हो सके।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48078/mumbai-sps-abu-azmi-seeks-relief-from-work-in-ramzan"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-28t181836.954.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>समाजवादी पार्टी के अबू आसिम आज़मी ने शनिवार को राज्य सरकार से रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान कर्मचारियों को छुट्टी देने की रिक्वेस्ट की। मुख्यमंत्री को एक फॉर्मल बातचीत में, आज़मी ने पड़ोसी राज्यों में हाल ही में लागू की गई पॉलिसी जैसी ही एक पॉलिसी का प्रस्ताव रखा, ताकि रोज़े के दौरान रोज़ेदारों को आसानी हो सके। अबू आसिम आज़मी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैंने मुख्यमंत्री को एक लेटर लिखकर रमज़ान के दौरान कर्मचारियों को छुट्टी देने की रिक्वेस्ट की है, जैसा कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सरकारों ने अपने राज्यों में पहले ही किया है। </p>
<p> </p>
<p>हमें सरकार को यह रिक्वेस्ट भेजे हुए कुछ समय हो गया है, लेकिन हमें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।" इस हफ़्ते की शुरुआत में, तेलंगाना सरकार ने मंगलवार को एक ऑर्डर जारी किया, जिसमें राज्य के सभी मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों, टीचरों, कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग स्टाफ, बोर्ड/कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों और पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों को रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान शाम 4:00 बजे अपने ऑफिस और स्कूल छोड़ने की इजाज़त दी गई।<br /> जल्दी निकलने की यह सुविधा मुस्लिम कर्मचारियों को रमज़ान के महीने में धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने और अपना रोज़ा खोलने में मदद करने के लिए बनाई गई है, जिसमें सुबह से शाम तक रोज़ा रखना होता है। यह इजाज़त कई तरह के मुस्लिम कर्मचारियों पर लागू होती है, जिसमें टीचर, कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग स्टाफ, बोर्ड और कॉर्पोरेशन के कर्मचारी और तेलंगाना भर के पब्लिक सेक्टर के कर्मचारी शामिल हैं।</p>
<p>तेलंगाना सरकार ने पिछले सालों में भी इसी तरह के नियम दिए हैं, जो यह पक्का करने की लंबे समय से चली आ रही परंपरा को दिखाता है कि मुस्लिम कर्मचारी अपनी प्रोफेशनल ड्यूटी से समझौता किए बिना अपनी धार्मिक ज़िम्मेदारियों का पालन कर सकें। रमज़ान, जिसे रमज़ान भी कहा जाता है, इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना है जो हिजरी (इस्लामिक चंद्र कैलेंडर) के नौवें महीने में आता है। इस पवित्र समय के दौरान, मुसलमान सुबह से शाम तक रोज़ा रखते हैं, इस प्रथा को रोज़ा कहते हैं, जो इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है, जो भक्ति, आत्म-संयम और आध्यात्मिक सोच के मूल्यों को दिखाता है। इस साल रमज़ान का पवित्र महीना 18 फरवरी से शुरू हुआ है, और लगभग 29 से 30 दिनों तक चलेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 18:23:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज शेड की मांग पर राजनीति तेज, हाईकोर्ट ने एमएमआरडीए से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एयरपोर्ट पर नमाज के लिए अस्थायी शेड की मांग पर सियासी घमासान छिड़ गया है. इसको लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एमएमआरडीए से जवाब मांगा है, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में भी इस पर जमकर बहस हुई. एक पक्ष इसे मानवीय आधार पर रमजान के लिए आवश्यक मानता है, वहीं दूसरा सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों के विरोध में है. यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमाया हुआ है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48006/politics-intensifies-on-demand-for-namaz-shed-at-mumbai-airport"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-25t170530.285.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>एयरपोर्ट पर नमाज के लिए अस्थायी शेड की मांग पर सियासी घमासान छिड़ गया है. इसको लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एमएमआरडीए से जवाब मांगा है, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में भी इस पर जमकर बहस हुई. एक पक्ष इसे मानवीय आधार पर रमजान के लिए आवश्यक मानता है, वहीं दूसरा सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों के विरोध में है. यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमाया हुआ है. मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने की अनुमति को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा के दूसरे दिन विधान भवन कर बाहर जमकर राजनीतिक बहस हुई. इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी.</p>
<p> </p>
<p><strong>कोर्ट की तरफ से होगा आखिरी फैसला</strong><br />मुम्बई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ओला उबर टेक्सी और पेसेंजर के लिए रमजान के महीने में नमाज पढ़ने के लिए एक अस्थायी शेड बनाने की मांग काफी दिनों से उठ रही थी. इसी मांग को लेकर एक समूह ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.जिसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में एमएमआरडीए संस्था से इस मामले में उनका जवाब मांगा है.</p>
<p>इस पर आज हाइकोर्ट में एमएमआरडीए अपना जवाब फ़ाइल कर सकती है, जिसके बाद अदालत ये तय करेगी कि नमाज पढ़ने के लिए अस्थाई शेड 1 महीने के लिए बनाए देने का आदेश देना है या नही देना है. क्योंकि रमजान महीना शुरू हो चुका है. यही वजह है कि इस पर जल्द ही फैसला लेना होगा.</p>
<p><strong>हिंदू पक्ष कर रहा विरोध</strong><br />वहीं महाराष्ट्र का विधानसभा सत्र शुरू है. इस सत्र के दौरान ये मुद्दा सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. मुस्लिम पक्ष चाहता है कि कोर्ट से ये इजाजत मिले तो वही हिन्दू पक्ष इसके खिलाफ है. मालेगांव से एमआईएम विधायक मुफ़्ती इस्माइल ने कहा कि यदि कोई नमाज़ पढ़ना चाहता है तो प्रशासन को अनुमति देनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई हनुमान चालीसा या पूजा-अर्चना करना चाहता है तो उसे भी अनुमति मिलनी चाहिए. उनका कहना था कि किसी एक धर्म के हर मुद्दे का विरोध करना उचित नहीं है.</p>
<p><strong>इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए- सपा</strong><br />समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आज़मी ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यदि कोर्ट में यह मांग उठी है तो इसमें गलत क्या है. उन्होंने इसे अस्थायी और समयबद्ध मांग बताते हुए कहा कि नमाज़ का समय तय होता है. इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए.</p>
<p><strong>पूर्व मंत्री और विधायक ने जताया विरोध</strong><br />वहीं बीजेपी विधायक अतुल भातखलकर ने एयरपोर्ट पर नमाज की अनुमति का विरोध किया है, उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थल पर ऐसी अनुमति क्यों दी जाए.पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोर्ट अनुमति देता है तो क्या फिर हर सार्वजनिक स्थान पर इसी तरह धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी.</p>
<p><strong>मुंबई हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई</strong><br />इस बीच,इस मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है. अदालत ने मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण से पूछा है कि क्या मानवीय आधार पर छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास अस्थाई शेड में रमजान के दौरान नमाज़ की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है. डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल रमजान के पवित्र महीने के लिए अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जाए. कोर्ट ने एमएमआरडीए से इस पर स्पष्ट बयान देने को कहा है. मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज़ की अनुमति का मुद्दा अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48006/politics-intensifies-on-demand-for-namaz-shed-at-mumbai-airport</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 17:06:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की डेडलाइन एक सप्ताह बढ़ाई; बंगाल सरकार और DGP से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करा रहा है। मतदाता सूची से जुड़ा यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कोर्ट ने आज इस मामले में अहम दिशा-निर्देश दिए। चीफ जस्टिस ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने का भी निर्देश दिया। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की डेडलाइन एक सप्ताह और बढ़ाई जा रही है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47607/new-delhi-supreme-court-extended-the-deadline-of-sir-by"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/sir-in-wb-should-be-transparent-sc-to-ec_202601201215021494_h@@ight_720_w@@idth_1280.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करा रहा है। मतदाता सूची से जुड़ा यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कोर्ट ने आज इस मामले में अहम दिशा-निर्देश दिए। चीफ जस्टिस ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने का भी निर्देश दिया। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की डेडलाइन एक सप्ताह और बढ़ाई जा रही है।</p>
<p> </p>
<p><strong>डेडलाइन एक सप्ताह बढ़ाई गई</strong><br />सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निर्वाचन आयोग को पश्चिम बंगाल एसआईआर प्रक्रिया के बाद फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने के लिए और समय दिया जा रहा है। एसआईआर की डेडलाइन 14 फरवरी से एक हफ्ते आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p><strong>तीन जजों की पीठ ने बंगाल सरकार को दिए अहम आदेश</strong><br />तारीख बढ़ाने का आदेश पारित करने से पहले चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में लगे सभी अधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) को रिपोर्ट करेंगे। कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील को अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया। चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजरिया भी शामिल हैं।<br />महिला वकील की दलील पर नाराज हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत<br />दरअसल, ममता बनर्जी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा, बीते चार फरवरी को अदालत ने नोटिस जारी किया, जिसमें कई टिप्पणियां थीं। बीते हफ्ते में कई बदलाव हुए हैं। इसी बीच सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी के हस्तक्षेप पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि ये कोई बाजार नहीं है। कोर्ट में अनुशासन और गरिमा बनाए रखें।  मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मंदिरों की देखरेख करने वाले एक संगठन ने एक याचिका दायर की है। उनका इस मामले में क्या हित हो सकता है? उनकी इस दलील पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, बारी-बारी से सुनते हैं। अगर अनुशासन बनाए नहीं रखा गया तो आपको चीफ जस्टिस के का स्वभाव पता होना चाहिए। तल्ख लहजे में जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा- आप किसी बाजार में बैठे हैं या अदालत में हैं?</p>
<p><strong>बंगाल के डीजीपी को हलफनामा दायर करने का निर्देश</strong><br />सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि कुछ बदमाशों / असामाजिक तत्वों ने अपने नोटिस जला डाले। इस आरोप पर कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ और बातों पर भी जोर दिया। कोर्ट की टिप्पणियों पर बिंदुवार एक नजर:<br />किसी को भी पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर में रुकावट डालने की इजाजत नहीं दी जाएगी।</p>
<p>राज्य सरकार ने चुनाव आयोग को 8,505 ग्रुप B अधिकारियों की लिस्ट दी है। उन्हें ट्रेनिंग देकर SIR की प्रक्रिया में लगाया जा सकता है।<br />चुनाव आयोग के आरोपों पर पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक हलफनामा दाखिल करें। निर्वाचन आयोग ने फॉर्म 7 (आपत्ति फॉर्म) जलाने का आरोप लगाया है। डीजीपी इस संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब दें और बताएं कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए हैं।<br />बदमाशों के खिलाफ अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने का चुनाव आयोग का आरोप चिंताजनक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:38:35 +0530</pubDate>
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