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                <title>era - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>नई दिल्ली : आप नेता संजय ने केंद्र सरकार को घेरा: भारत की विदेश नीति पर उठाए सवाल, कहा- खामेनेई का जाना एक युग का अंत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को श्रद्धांजलि देते हुए भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने ईरान को भारत का पारंपरिक मित्र बताया और प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका व इजरायल के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48106/new-delhi-aap-leader-sanjay-surrounded-the-central-government-raised"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-01t174723.930.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को श्रद्धांजलि देते हुए भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने ईरान को भारत का पारंपरिक मित्र बताया और प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका व इजरायल के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।</p>
<p> </p>
<p>आप नेता संजय सिंह ने कहा कि 'खामेनेई का जाना एक युग का अंत है, भारत ने सच्चा दोस्त खोया। उन्होंने ईरान को भारत का पारंपरिक मित्र बताया, जिसने पाकिस्तान के खिलाफ हमेशा साथ दिया। ईरान ने कश्मीर पर भारत का पक्ष लिया, सस्ता तेल भी उपलब्ध कराया।</p>
<p>संजय सिंह ने कहा कि आज ईरान संकट में है, भारत को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने वैश्विक तानाशाह अमेरिका को रोकने की बात कही, वेनेजुएला के बाद ईरान का जिक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका और इजरायल की तानाशाही पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने मोदी को 'विश्वगुरु नहीं गुरुघंटाल' कहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 17:48:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>फिर लौटेगा मुंबई में ब्रिटिशकालीन प्याऊ कल्चर, BMC कर रही हेरिटेज टूरिज्म पर काम...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में बने ज्यादातर प्याऊ 19 वीं शताब्दी में बने हैं। मुंबई में कुल 28 ब्रिटिश कालीन प्याऊ हैं। इनमें से 10 को दोबारा विकसित किया जा चुका है। यह प्याऊ फव्वारे के रूप में बनाए गए हैं। उस दौरान इनमें से कुछ नागरिकों को पानी पीने के लिए, तो कुछ को जानवरों और घोड़ों को पानी पीने के लिए बनाया गया था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/28139/british-era-paiwan-culture-will-return-in-mumbai--bmc-is-working-on-heritage-tourism"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-01/download-(1)22.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> करीब एक सदी पहले मुंबई की पहचान रहे ब्रिटिशकालीन प्याऊ को बीएमसी ने पुनर्जीवित करने का फैसला किया है। इसके जरिए बीएमसी मुंबई में प्याऊ कल्चर को आबाद करने की कोशिश करेगी। बीएमसी ने मुंबई में 18 हेरिटेज प्याऊ की मरम्मत शुरू करने का फैसला किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी ने बंद पड़े और जर्जर प्याऊ की सुरक्षा दीवार बनाने, जो दीवार खराब है उसकी मरम्मत करने, टूटे भाग को दोबारा बनाने, साफ-सफाई, लाइट की व्यवस्था, सुरक्षा की व्यवस्था और पानी की उचित व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। बीएमसी मुंबई में इन प्याऊ को हेरिटेज टूरिज्म के रूप में विकसित कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई में बने ज्यादातर प्याऊ 19 वीं शताब्दी में बने हैं। मुंबई में कुल 28 ब्रिटिश कालीन प्याऊ हैं। इनमें से 10 को दोबारा विकसित किया जा चुका है। यह प्याऊ फव्वारे के रूप में बनाए गए हैं। उस दौरान इनमें से कुछ नागरिकों को पानी पीने के लिए, तो कुछ को जानवरों और घोड़ों को पानी पीने के लिए बनाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी हेरिटेज डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई में कुछ प्याऊ वर्ष 1800 के हैं। इनमें से रानीबाग में चार प्याऊ के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसका निर्माण वर्ष 1903 से 1933 के बीच हुआ था।<br /><br />अधिकारियों ने बताया कि इसमें सेठ सामलदास नरसीदास प्याऊ, अर्देशिर दादाभाई दादी सेठ प्याऊ, खीमजी मुलजी रांदेरिया प्याऊ शामिल हैं। इन चारों को कई सालों से रानीबाग में रखा गया था। अन्य 18 प्याऊ के पुनर्निर्माण का काम एक साथ करने की योजना है, इसका जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा। बीएमसी को मुंबई में करीब 22 ऐसे प्याऊ की जानकारी पुरातत्व के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था ने वर्ष 2018 में दी थी।<br /><br />हेरिटेज विशेषज्ञों के अनुसार मुंबई में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे करीब 100 प्याऊ परिदृश्य से गायब हो चुके हैं। इनमें से कुछ को मौखिक इतिहास की मदद से और पुरानी तस्वीरों को स्कैन करके पता लगाया गया है। बीएमसी को मुंबई में करीब 22 ऐसे प्याऊ की जानकारी पुरातत्व के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था ने वर्ष 2018 में दी थी। दो साल बाद बीएमसी ने 22 में से 4 प्याऊ को सेलेक्ट किया, जो भायखला स्थित वीरमाता जिजाबाई भोसले उद्यान में हैं।<br /><br />पिछले पांच वर्षों में बीएमसी ने मुंबई में मिंट रोड पर स्थित वासवानी प्याऊ, गोखले रोड पर आनंद विट्ठल कोली प्याऊ, मधु दास कोठारी प्याऊ मेट्रो जंक्शन के पास धोबी तालाब में और जीपीओ के सामने फोर्ट एरिया में कोठारी प्याऊ को पुनर्जीवित किया है। मुंबई में कई ऐसे प्याऊ हैं, जो वर्षों पुराने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें धोबी तालाब में बना सर कोवासजी जहांगीर फाउंटेन (1865), मस्जिद बंदर में केसोजी नायक प्याऊ (1876), दो टांकी प्याऊ कमाठीपुरा (1901), नवाब अली अयाज प्याऊ और सर कोवासजी जहांगीर फाउंटेन दोनों मझगांव में (1865) और सेठ देवराम केशवजी कॉन्ट्रैक्टर प्याऊ महेश्वरी उद्यान माटुंगा (1943) में बने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह मोहम्मद अली रोड पर, चार नल फाउंटेन, जी मनोकजी पटेल प्याऊ मजगांव, सर कावसजी जहांगीर फाउंटेन, मजगांव, एमवी पारुलकर फाउंटेन हिंदू कॉलोनी, सर कोवसजी जहांगीर फाउंटेन परेल, शाह चंपसे रेंस फाउंटेन लोअर परेल, इंदिरा भाई सहस्रबुद्धे प्याऊ, दादर, दो रामजी सेटिबा प्याऊ कोहिनूर जंक्शन और शिवाजी पार्क और जाफरभाई लुढा चाटु प्याऊ बांद्रा वेस्ट में हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 08:38:14 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई में महंगाई के दौर में अब आम आदमी का खाना हुआ खराब...</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबईकरों का सबसे सस्ता व सुलभ खाना समोसा-पाव भी अब महंगा होनेवाला है। इसका कारण है कि जिस मैदा से यह बनता है, असकी कीमतें बढ़ रही हैं। मैदा की कीमतें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि जिस गेहूं से मैदा बनता है, उस गेहूं के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक अगली गेहूं की फसल नहीं आ जाती तब तक भाव बढ़ाने में मुनाफाखोर जुटे रहेंगे। गेहूं की इस महंगाई से आम आदमी का खाना खराब हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/17269/in-the-era-of-inflation-in-mumbai--now-the-common-man-s-food-has-become-bad"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-01/sdasd1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>आम मुंबईकरों का सबसे सस्ता व सुलभ खाना समोसा-पाव भी अब महंगा होनेवाला है। इसका कारण है कि जिस मैदा से यह बनता है, असकी कीमतें बढ़ रही हैं। मैदा की कीमतें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि जिस गेहूं से मैदा बनता है, उस गेहूं के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक अगली गेहूं की फसल नहीं आ जाती तब तक भाव बढ़ाने में मुनाफाखोर जुटे रहेंगे। गेहूं की इस महंगाई से आम आदमी का खाना खराब हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि आनेवाले वक्त में यदि आपके पड़ोस की दुकान पर समोसा महंगा हो जाए तो घबराइएगा नहीं क्योंकि समोसा बनाने में काम आनेवाला मैदा महंगा होने जा रहा है। अब यदि आप यह सोच रहे हैं कि आप ब्रेड या रोटी खाकर काम निकाल लेंगे तो यहां भी आपका सामना महंगाई डायन से ही होगा। दरअसल, इस महंगाई के पीछे प्रमुख कारण है गेहूं की कीमतें। पिछले साल तक १,८०० से २,२०० रुपए क्विंटल मिलनेवाले गेहूं की कीमतें दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में ३,००० रुपए के पार निकल गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गेहूं की बढ़ती कीमतों के पीछे पिछले साल हुए कम उत्‍पादन को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं रूस-यूक्रेन के कारण वैश्विक स्तर पर आई गेहूं की कमी भी कीमतों को हवा दे रही है। पूरे देश में अब गेहूं न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से ऊपर बिक रहा है। बता दें कि २०२३ के लिए गेहूं की एमएसपी २,१२५ रुपए प्रति क्विंटल है। साल भर में गेहूं का रेट १६ फीसदी बढ़ चुका है और अब मुंबई सहित देश के कई राज्‍यों में भाव ३,००० रुपए क्विंटल को पार कर गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गेहूं की कीमतों का असर सीधे आटे की कीमतों पर पड़ रहा है। आटे की कीमत गेहूं से ज्यादा बढ़ी है। कारोबारियों के अनुसार आटे का भाव १९ से २० फीसदी चढ़ चुके हैं। साल भर पहले ३० से ३२ रुपए में मिलनेवाला आटा ३५ से ४० रुपए किलो मिल रहा है। हालांकि, सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम के संकेत दिए थे। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से स्थिति साफ न करने से भी गेहूं के दाम चढ़ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jan 2023 12:21:05 +0530</pubDate>
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